दिल दोस्ती और प्यार | Heartstrings of Love, Friendship, and Trust




दिल दोस्ती और प्यार....

आप लोगों को किस बात से दिक्कत है। मेरे दिल से या मेरी दोस्ती से जो मेरी करन से है। या फिर प्यार से जो मैं रधुवीर से करती हूं। 

सरोजनी गुस्से से चींखते हुए पूछती है। जिसकी बात का शायद किसी के पास जवाब नहीं था।

रघुवीर जिन के कदम हॉल में पड़े ही थे कि उनके कानों में यह तेज़ आवाज़ पहुंचती है। और उसके कदम वहीं ठहर जाते हैं।

आप लोगों को शांत पानी में कंकड़ फेंक कर मज़ा लेने का बहुत शौक होता है। करन से दोस्ती पर मेरे पति रधुवीर को कोई परेशानी नहीं है। लेकिन ना जाने क्यों आप लोगों को बहुत है। पति-पत्नी के बीच शक का बीज आप समाज के लोग ही बोते हैं। और फिर उस बीज को तनावर दरख़्त भी आप लोग ही बनाते हैं। और फिर एक वक्त के बाद आप लोगों के द्वारा बोये हुए उस तनावर दरख़्त को पति-पत्नी अपनी छांव बना लेते हैं। एक ऐसी छांव जो एक वक्त के बाद उस के सर नहीं होती। और ना ही वह पति-पत्नी एक साथ होते हैं।

तब आप लोग एक तनावर दरख़्त को कटने का पूरा दोष  पति-पत्नी पर डाल कर कहीं और कोई दूसरा बीज बोने चल पड़ती हैं।

सरोजनी कहते-कहते रुक कर हर किसी का चेहरा देखती है। और फिर बोलना शुरू करती है।

क्यों आप लोग ऐसा करते हैं। क्यों दूसरों की ज़िंदगी में झांक कर प्यार और अपनेपन के नाम पर शक का बीज बोते हैं? सरोजनी बहुत दुख से हर किसी को देखते हुए पूछती है।

वहां पर मुकम्मल खामोशी थी। शायद किसी के पास उसकी बातों का जवाब नहीं था।

आप लोग डिनर करें। आगे आते हुए रधुवीर सब को देख कर कहते हैं। और सरोजनी का हाथ पकड़ कर ऊपर की तरफ बढ़ जाते हैं।

उन सब की तरफ से सॉरी... रघुवीर सरोजनी को सोफे पर  बैठा कर खुद भी बैठते हुए कहता है।

सरोजनी खामोशी से उसे देखती है।

तुम बेफिक्र रहे। कोई कितना भी शक का बीज बोने की कोशिश करें। मैं उनकी बातों में नहीं आऊंगा। मैं तुम से प्यार करता हूं। और यही मेरे लिए काफी है। रघुवीर इत्मीनान से कहते हैं।

हम दोस्त नहीं बन सकते? आप मेरे दोस्त बन जाए। ताकि मुझे किसी करन की ज़रूरत ही ना पड़े। सरोजनी रधुवीर को देख कर कहती है।

सरोजनी की आंख में आंसू थे। 

क्या मतलब? रघुवीर बेचैन हुए।

रघुवीर इंसान का दिल भी बड़ा अजीब होता है। यह कब किस चीज़ की चाहत कर दे। कोई नहीं जानता। और फिर यह चाहत हमारी ज़रूरत बन जाती है। आप मेरे पति हैं। मुझ से प्यार करते हैं। मेरी हर ज़रुरतों का ख्याल रखते हैं। लेकिन आप मेरे दोस्त नहीं बन पाये।

मेरा दिल चाहता है हम साथ बैठें। और खूब बातें करें। ऐसी बातें जिन का कोई सर पैर ना हो। वह बातें जो एक कालेज स्टूडेंट करते हैं। बेफिक्र, मौज-मस्ती वाली। बेबात की हंसी, ऊंचे कहकहे, जिन बातों का हमारी ज़िन्दगी से कोई लेना-देना ना हो।

अक्सर हम अपनों को सब कुछ देने की कोशिश तो करते हैं। लेकिन हम वही चीज़ नहीं दे पाते। जिसकी उसे सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। और वह है वक्त....

आप ने मुझे सब कुछ दिया। लेकिन वक्त नहीं दे सके। और मैंने वह वक्त करन से ले लिया।

हमारा यह नादान दिल दोस्ती और प्यार सब चाहता है। और जब इस दिल को दोस्ती और प्यार सब एक जगह मिल जाए तो फिर किसी करन की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

सरोजनी अपनी बात कहते ही हाथ आगे करती है। जिसे थामने में रधुवीर एक मिनट की भी देरी नहीं करते हैं।

चलो डिनर करते हैं। रघुवीर उठ खड़े हुए। सरोजनी भी उठ गई।

यहां पर आने की क्या ज़रूरत थी? डिनर करते हुए सरोजनी पूछती है।

क्योंकि मेरा दिल कह रहा था कि आज मैं अपने दोस्त के साथ बाहर डिनर करूं। और उससे खूब बातें करुं। रधुवीर सूप का सिप लेकर मुस्कुराते हुए कहते हैं।

अच्छा और क्या कहता है आप का दिल? सरोजनी भी मुस्कुरा कर पूछती है।

मेरा दिल कह रहा है कि अपनी इस दोस्त की बेकार की बातों को सुनने के लिए हिम्मत जुटा लो। रधुवीर शरारत से कहते हैं। 

अच्छा मैं बेकार की बातें करती हूं? सरोजनी नाराज़ हुई।

नहीं, तुम बहुत गहरी बात करती हो। आज मैंने यह जाना। और जो गहरी बात करते हैं वह दिल के और रिश्तों के बहुत सच्चे होते हैं। और आज मुझे तुम्हारी दोस्ती कुबूल करके खुशी हो रही है। रधुवीर उठ खड़े होते हैं। और सरोजनी की तरफ हाथ बढ़ा देते हैं। जिसे थामने में सरोजनी देरी नहीं करती है। 

क्योंकि आज उसका दिल दोस्ती और प्यार सब उस के साथ था।TheEnd.....

इसे पढ़कर किस का चेहरा आंखों के सामने आया? 






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