कुछ अनकही (कालेज वाला प्यार) कालेज की एल्यूमिनी मीट में हर तरफ एक शोर था। एक दूसरे के गले लगना, ऊंचे-ऊंचे कहकहे, खुशी के आंसू, कहीं हंसी के झरने तो कहीं मुस्कुराते चेहरे यूं कहें हर तरफ सिर्फ खुशियां ही खुशियां थी। पुरानी यादें, साथ उठना बैठना खाना पीना हर लम्हे आंखों में थे। एक दूसरे से मिलने की खुशी। सब बहुत ही खूबसूरत था। दिल धड़का भी तो किस पर... पढ़ें एक प्यारा सा प्यार... दानिया, वर्षा, उर्वशी और निकिता भी एक दूसरे से मिल कर बहुत खुश थे। कितनी ही देर वह एक दूसरे के गले लगी हुई थीं। ज़िंदगी कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से आगे से नहीं बढ़ रही है? ऐसा लगता है जैसे ज़िंदगी हमारे ग्रेजुएशन के इंतेज़ार में थी। जैसे ही हम ग्रेजुएट हुए और ज़िम्मेदारी हमारे सर पर आ पड़ी। वर्षा ने अपने बैग से सब के लिए गिफ्ट निकालते हुए कहा। सही कह रही हो। पढ़ाई पूरी होते ही शादी के बाद ज़िंदगी बदल गई। कुछ भी पहले जैसा नहीं रहा। जिन ज़िम्मेदारियों को हम बचपन से अपनी मां को अदा करते देख रहे थे। वही सब अब हम कर रहे हैं। उर्वशी ने सोचते हुए कहा। लेकिन हमें खुशी है कि हम अपनी...
दिल दोस्ती और प्यार.... आप लोगों को किस बात से दिक्कत है। मेरे दिल से या मेरी दोस्ती से जो मेरी करन से है। या फिर प्यार से जो मैं रधुवीर से करती हूं। सरोजनी गुस्से से चींखते हुए पूछती है। जिसकी बात का शायद किसी के पास जवाब नहीं था। रघुवीर जिन के कदम हॉल में पड़े ही थे कि उनके कानों में यह तेज़ आवाज़ पहुंचती है। और उसके कदम वहीं ठहर जाते हैं। आप लोगों को शांत पानी में कंकड़ फेंक कर मज़ा लेने का बहुत शौक होता है। करन से दोस्ती पर मेरे पति रधुवीर को कोई परेशानी नहीं है। लेकिन ना जाने क्यों आप लोगों को बहुत है। पति-पत्नी के बीच शक का बीज आप समाज के लोग ही बोते हैं। और फिर उस बीज को तनावर दरख़्त भी आप लोग ही बनाते हैं। और फिर एक वक्त के बाद आप लोगों के द्वारा बोये हुए उस तनावर दरख़्त को पति-पत्नी अपनी छांव बना लेते हैं। एक ऐसी छांव जो एक वक्त के बाद उस के सर नहीं होती। और ना ही वह पति-पत्नी एक साथ होते हैं। तब आप लोग एक तनावर दरख़्त को कटने का पूरा दोष पति-पत्नी पर डाल कर कहीं और कोई दूसरा बीज बोने चल पड़ती हैं। सरोजनी कहते-कहते रुक कर हर किसी का चेहरा देखती है। और फिर बोलना...
दरवाज़े की घंटी लगातार बजती जा रही थी। कुछ पल बाद वह आवाज़ अचानक थम गई। तुम्हें तो बस इन हीरों में आंखें गड़ाए रखना है। चाची जान को दरवाज़ा खोलना पड़ा। अंदर आते ही मारिया शिकायत भरे लहजे में कहती है। साथ में ज़ोया भी थी। बहुत ज़रूरी रिसर्च कर रही थी... इसलिए उठ नहीं सकी, अशमारा ने आराम से जवाब दिया। मगर उसकी नज़र अभी भी लैपटॉप पर जमी थी। कौन-सा तीर मार लोगी इतनी जानकारी इकट्ठा करके? आखिर करना तो घरदारी ही है। ज़ोया आराम से उसके बिस्तर पर फैलती हुई कहती है। यह बताओ तुम लोग आई क्यों हो? अशमारा अपना लैपटॉप किनारे रखकर पूछती है। उसकी बात को नज़रंदाज़ करके। तुमसे मिलने का मन किया, और हम आ गए। जवाब देते हुए मारिया की नज़र फोन पर थी। मुझसे मिलने आई हो तो फिर फोन में क्या कर रही हो? अशमारा उसका फोन लेते हुए कहती है। मेरा फोन दो, पिज़्ज़ा आर्डर कर रही थी। मारिया ने अपना फोन वापस लिया। अंदर आ सकता हूं? सबकी नज़र दरवाज़े पर उठती है। आकिल तुम कैसे? तुम्हें अपने बॉस से फुर्सत कैसे मिल गई? अशमारा हैरान हुई। कभी-कभी बॉस से छुट्टी ले लेता हूं। जब कोई बहुत ज़रूरी काम हो तो…आकिल की नज़र...
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