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Showing posts with the label Hindi Romantic Novel

रूबरू | Part 20 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

आप जिस ज्वैलरी की कीमत करोड़ों दे रहे हैं उस ज्वैलरी की कीमत कुछ हज़ार रूपए से ज़्यादा नहीं है। मायरा धमाका करती है। मायरा की बात सुनते ही जैसे ताबिश के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। क्या मतलब?... ताबिश हैरान और परेशान होकर उसकी तरफ देखने लगा। वह ज्वैलरी नकली है... यह बात तुम इतने यकीन से कैसे कह सकती है?  ताबिश ने उसका बाज़ू ज़ोर से पकड़ लिया और उसकी आंखों में देखते हुए कहा, अगर तुम्हारी बात गलत हुई तो तुम जानती हो कि तुम्हारा क्या हश्र होगा?  मुझे जो कहना था मैंने वह कह दिया। अब आगे क्या करना है यह आपकी मर्ज़ी।  मायरा ने बिना डरे उसकी आंखों में देखा। आप ज़्यादा से ज़्यादा क्या करेंगे मेरी जान ले लेंगे। उससे ज़्यादा आप और क्या ही कर सकते हैं... अपनी बात कहकर मायरा एक नफरत भरी नज़र ताबिश पर डालकर अपना हाथ छुड़ा कर वहां से निकल कर सीधे अपने कमरे में गई और दरवाज़ा बंद कर लिया। उसके जाते ही ताबिश वहीं सोफे पर बैठ गया। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी... ज्वैलरी नकली हो सकती है। ऐसा ख्याल तो उसके सपने में भी नहीं आया था। उसने तुरंत मैनेजर को फोन किया, जो इस समय शहर से बाह...

रूबरू | Part 19 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

उसकी हरकत पर जहां दादी के होंठों पर मुस्कान थी तो वहीं मायरा कल एक बड़ा फैसला लेने का सोचकर संतुष्ट हो गई थी। सुबह दादी के नाश्ते और दवाई देने के बाद मायरा अपने कमरे में जाकर आराम करने लगी। रात उसे ठीक से नींद नहीं आई थी।  दादी की भी तबियत अब ठीक थी। इसलिए अब वह थोड़ा आराम करना चाहती थी। दोपहर को मायरा जैसे ही किचन से दादी के लिए सूप बनाने के बाद अपने कमरे में जाने लगी तभी उसे ड्राइंग रूम से गुज़रते हुए ताबिश और कुछ कुछ लोगों की आवाज़ें सुनाई दीं। वहां पर हीरों के बारे में बात हो रही थी। ताबिश डिनर के बाद उनको सौ करोड़ का चेक एडवांस देने वाले थे। मायरा जब तक कुछ सोचती तभी ताबिश क्लाइंट से डिनर करने के लिए कहता है। मायरा तेज़ी से वापस किचन में चली जाती है। उनके ड्राइंग रूम से निकलते ही मायरा ड्राइंग रूम में चली जाती है। वहां जाकर वह हैरान रह जाती है क्योंकि वहां पर बहुत सारे हीरों के नेकलेस रखे हुए थे। वह एक-एक कर उन्हें उठाकर देखने लगती है। एक बार देखने के बाद वह दोबारा देखने लगती है। वह उन नेकलेस को देखकर हैरान थी।  सारे ही बहुत ही खूबसूरत थे। उनकी चमक ऐसी थी कि कोई भी उसे पस...

धड़कन | भाग 45 | Dhadkan Part 45 | Heart Touching Hindi Love Story

श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा। शिवाय आंख बन्द किये पीछे सिर रखें हुए थे। श्लोका ने शिवाय के हाथ पर अपना हाथ रख दिया।   श्लोका के ऐसा करते ही शिवाय का जी चाहा कि वह उसके कंधे पर सिर रख कर खूब ज़ोर-ज़ोर से रोए। मगर वह ऐसा ना कर सके। सिर्फ श्लोका के हाथ रखने भर से ही शिवाय के दिल में सुकून उतर आया था। ड्राइवर के सामने वह खामोश रह गये। लेकिन श्लोका का हाथ सारे रास्ते शिवाय के हाथ में था।  एयरपोर्ट पहुंचने तक शिवाय नार्मल हो चुके थे। एयरपोर्ट पर शिवाय के टीम मेंबर्स पहले से ही वहां मौजूद थे। सारे लोग साथ में जहाज पर चढ़ गये। सिंगापुर पहुंच कर शिवाय और श्लोका एक गाड़ी से और बाकी लोग दूसरी गाड़ी से होटल के लिए निकल गये। थोड़ी देर कोई भी मुझे डिस्टर्ब नहीं करेगा। श्लोका तुम भी आराम करो। फिर मिलते हैं  होटल पहुंच कर शिवाय रूम में जाते हुए सब से कहते हैं। सब लोग अपने-अपने रूम में चले जाते हैं। श्लोका और शिवाय का रूम पास-पास ही था। शिवाय जैसे ही रूम में गये श्लोका भी पीछे-पीछे चली गई। क्या हुआ थोड़ी देर आराम कर लो। फिर मिलते हैं। शिवाय उसे देख कर हैरान हुए। आप ठीक हैं? श्लोका ने श...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 16 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 16 | Hindi Romantic Story

शिवन्या शिवाय को उठा कर थोड़ा सा नाश्ता करा के दवा दे देती है। दवा खाते ही शिवाय लेट जाते हैं।  शिवन्या चुपचाप बैठ कर शिवाय को देखती जाती है। इन दिनों में पहली बार वह शिवाय को इतना ध्यान से देख रही थी। वह एक टिक शिवाय को देखती रही। उसकी नज़रें शिवाय पर थी। और दिमाग कहीं और था। लेकिन दिल शिवाय से मुहब्बत की गवाही दे रहा था। ना जाने क्यों शिवन्या की आंख नम हो गई। बेसाख्ता वह शिवाय के माथे पर अपना हाथ रख देती है। शिवाय आंख खोल देते हैं। एक नज़र शिवन्या को देखते हैं और फिर आंख बन्द कर लेते हैं। शिवन्या उठ कर बाहर चली जाती है।  उसके जाते ही शिवाय आंख खोल कर देखते हैं। और फिर आंख बन्द कर लेते हैं। शिवाय बहुत कुछ महसूस कर रहे थे। लेकिन वह समझ नहीं पा रहे थे कि वह करें तो क्या करें। अपने ही एहसासों में शिवाय उलझे हुए थे। दोपहर में शिवन्या शिवाय को उठा कर खाना खिलाती है। और फिर दवा दे देती है। दवा खाते ही शिवाय बेड से उतर कर आगे बढ़ते हैं। शिवन्या जल्दी से शिवाय को कमर में हाथ देकर थाम लेती है। शिवाय खामोशी से आगे बढ़ जाते हैं। अपने रूम में जाते ही शिवाय तुरंत लेट जाते हैं। शिवन्या वही...