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उम्मीद (मिलने की राहें) | Love Poem | Hindi Poetry

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उम्मीद (मिलने की राहें)... एक खत मैं लिखूं ऐसा हो जिस में मुहब्बत सब जिसको वह समझ भी लें  और फिर वह बने मेरा सोचूं मैं यही अक्सर  लेकिन फिर मैं सोचूं यह मेरी उस मुहब्बत को कैसे वह समझ लेगा यह सच है मुहब्बत मैं  करती हूं बहुत उससे  लेकिन वह बहुत अंजान  बनता है वह मेरे से करता है मुहब्बत वह कैसे यह मैं जानूं फिर  लिखती हूं मैं खत उसको जो होगा सो होगा फिर  उम्मीद है यह मुझको मिलने की वह राहें फिर  निकले या न निकले उम्मीद पे दुनिया है उम्मीद अभी बाकी टूटेगा सितारा फिर  होगी फिर दुआ पूरी -Little_Star

डोर धड़कन से बंधी | भाग 32 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 32 | Hindi Romantic Story

कुछ समझने की कोशिश मत करो। जो हो रहा है होने दो। शिवाय एक बार फिर खोने लगे। मुहब्बत का यह सफर आसान नहीं था। खाना खाते ही दोनों बाहर निकल गये। ड्राइविंग शिवाय ने सम्हाल ली। अब यहां? शिवाय के गाड़ी रोकने पर शिवन्या पूछती है। आओ तो... शिवाय उतर गये। शिवन्या भी उतर गई। तुम्हारे लिए आइसक्रीम और चाकलेट लेना है। शॉप की तरफ बढ़ते हुए शिवाय कहते हैं। और शिवन्या हैरानी से शिवाय को देखती है। लेकिन वह तो अपनी ही धुन में मग्न थे। ना जाने कितनी ही चाकलेट और आइसक्रीम शिवाय रखते गये। वह मना करती रह गई। लेकिन वहां सुनने वाला कौन था। इतनी सारी चाकलेट और आइसक्रीम का मैं क्या करूंगी? घर पहुंचकर शिवन्या हैरानी से पूछती है। खाओगी और क्या करोगी। शिवाय लापरवाही से कहते हैं।  और मेरे दांत खराब हो गये तो?  कुछ नहीं होगा। कहते हुए शिवाय रूम में चले गए। और चेंज करने लगे। चेंज करते ही शिवाय लेट गए। और स्क्रीन आन कर दी। और उसमें खो से गये। स्क्रीन पर शिवाय और श्लोका डांस कर रहे थे। एक यही फोटो और वीडियो था जो उसके पास श्लोका की निशानी थी। जिसे रवि ने उसे भेजा था। जो उस ने अपनी शादी पर बनवाई थी। रवि ने जब उ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 20 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 20 | Hindi Romantic Story

मुहब्बत के यह किस्से भी अजीब होते हैं। कभी यह ज़िंदगी बना देती है। तो कभी ऐसे रास्ते पर ले आती है। जहां से आगे जाना मुश्किल हो जाता है। शिवाय भी आज उसी दौर से गुज़र रहे हैं। जहां पाने की चाह और खोने का डर  दोनों साफ दिखाई दे रहा था।  खाना खायेंगे? नहीं मुझे नहीं खाना है। आपको मेडिसिन भी लेना है। मुझे कुछ नहीं खाना है। और तुम को ज़्यादा परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। कहते ही शिवाय वहीं सोफे पर लेट कर आंख बन्द कर लेते हैं। जैसे अब वह कोई बात नहीं करना चाहते हैं। शिवन्या एक नज़र शिवाय को देखती है। और चुपचाप अपने रूम में चली जाती है। सुबह शिवाय उठ कर सीधे रूम में जाते हैं। रूम पूरी तरह साफ हो चुका था। शिवाय तैयार हो कर बाहर आते हैं तो देखते हैं ब्रेकफास्ट टेबल पर लगा हुआ था। शिवन्या भी तैयार थी ऐसा लग रहा था वह कहीं जा रही है।  शिवाय खामोशी से बैठ कर नाश्ता करने लगते हैं। शिवन्या भी नाश्ता करते ही उठ कर रूम में जाकर अपना बैग लेकर वापस आती है। मैं कुछ काम से जा रही हूं। आज लंच नहीं बनेगा। आप देख लेना। रूको, मैं भी कुछ काम से जा रहा हूं। तुम को छोड़ दूंगा। शिवाय ने जल्दी से कहा...