उम्मीद (मिलने की राहें) | Love Poem | Hindi Poetry
उम्मीद (मिलने की राहें)... एक खत मैं लिखूं ऐसा हो जिस में मुहब्बत सब जिसको वह समझ भी लें और फिर वह बने मेरा सोचूं मैं यही अक्सर लेकिन फिर मैं सोचूं यह मेरी उस मुहब्बत को कैसे वह समझ लेगा यह सच है मुहब्बत मैं करती हूं बहुत उससे लेकिन वह बहुत अंजान बनता है वह मेरे से करता है मुहब्बत वह कैसे यह मैं जानूं फिर लिखती हूं मैं खत उसको जो होगा सो होगा फिर उम्मीद है यह मुझको मिलने की वह राहें फिर निकले या न निकले उम्मीद पे दुनिया है उम्मीद अभी बाकी टूटेगा सितारा फिर होगी फिर दुआ पूरी -Little_Star