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डोर धड़कन से बंधी | भाग 62 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 62 | Hindi Romantic Story

मैं सब कुछ छोड़ के जा रहा हूं। सब कुछ तुम्हारे हवाले करके। तुम शायद सही कह रहे हो… मुझे सब कुछ बना बनाया मिला था। तो अब मैं खुद को परखने जा रहा हूं।  लेकिन… जैसे ही मैं खुद को परख लूंगा, मैं वापस आ जाऊंगा।  चलो श्लोका…शिवाय कहते ही श्लोका का हाथ पकड़ते हैं। लेकिन…श्लोका शिवाय का हाथ हटा देती है। शिवाय हैरानी से श्लोका को देखते हैं, और खामोशी से तन्हा आगे बढ़ जाते हैं। आप कहां अकड़ कर जा रहे हैं शिवाय सर…पूरा बैंक तो आपकी पाकेट में है। काजल एक और तीर चलाती है। शिवाय पलट कर प्रेम को एक नज़र देखते हैं जो खामोश खड़ा था। और फिर अपनी पैंट की पाकेट से अपना वालेट निकाल कर वहीं सोफे पर रख देते हैं। और फिर अपना फोन भी वहीं पर रख देते हैं। और आगे बढ़ते हैं। कुछ सोच कर दो मिनट रूकते हैं। और अपना कोट उतार कर वहीं पास रखे सोफे पर रख देते हैं। अब इस की भी ज़रूरत नहीं है… शायद.... कहते ही शिवाय बाहर की तरफ तेज़ी से बढ़ते हैं। क्योंकि अगर वह थोड़ा भी ठहरते तो शायद वह अपने फैसले पर कायम ना रह पाते। क्योंकि पीछे उनकी श्लोका खड़ी थी।  श्लोका मुझे लगा था कि तुम मेरा साथ दोगी…लेकिन यहां पर मैं...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 61 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 61 | Hindi Romantic Story

डैड आप मेरे हिस्से का सब कुछ काजल के नाम कर दें।  प्रेम उनकी नज़रों को अपने चेहरे पर महसूस करते हुए जल्दी से कहता है। क्या? शिवाय हैरान रह जाते हैं।  श्लोका हैरान नज़रों से अपने बेटे को देखती है। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह बात उसका बेटा कह रहा है। जी डैड आप सब कुछ काजल के नाम कर दें। लेकिन क्यों? शिवाय खुद को सम्भाल चुके थे। क्योंकि इस की यही शर्त है कि यह मुझ से तभी शादी करेगी, जब मैं अपना सब कुछ इस के नाम कर दूंगा। और डैड मैं इस से बहुत प्यार करता हूं… मैं इस के बिना नहीं रह सकता।  मुझे इस से शादी करनी है। प्रेम जल्दी-जल्दी बोलता है। प्यार में सौदा नहीं होता मेरे बेटे…और जहां सौदा हो वहां प्यार नहीं होता। शिवाय बहुत ही सुकून से कहते हैं। डैड यह सब बातें कहानियों में ही अच्छी लगती हैं। असल जिंदगी उससे अलग होती है।  प्रेम काजल को देख कर कहता है। जो दूर खड़ी तमाशा देख रही थी। जिस को तुम प्यार कह रहे हो, हकीकत में वह प्यार नहीं मेरे बेटे…श्लोका आगे आकर प्रेम का हाथ थाम कर समझाने की कोशिश करती है। मैं जिस दिन से आया हूं मैं देख रहा हूं कि आप लोग काजल से खुश नहीं हैं ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 60 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 60 | Hindi Romantic Story

सोफे पर बैठे दोनों के बीच की दूरी अब पूरी तरह मिट चुकी थी। कमरे की हल्की रौशनी में उनका नया सफर जैसे शुरू हो चुका था। ♥️ पगफेरे की रस्म तो दुल्हन को करनी होती है, लेकिन तुम तो उसके पूरे ससुराल वालों को बुला लाए। आदर्श हंसते हुए कहते हैं। हां, क्योंकि तुम्हारे पग बहुत शुभ हैं। शिवाय भी हंसते हुए कहते हैं। आज सारा परिवार साथ है बहुत अच्छा लग रहा है। सुधीर जी मुस्कुरा कर कहते हैं। डिनर के बाद सारे लोग साथ बैठे बातें करते रहे। अंकल आप ने यह अच्छा फैसला किया कि दोनों बच्चों को उनकी ज़िम्मेदारी बांट दी। आदर्श खुशी से कहते हैं। मां-बाप अगर वक्त रहते सही फैसला कर लें तो घर बना रहता है। वरना फिर बाद में बुराइयां और लड़ाई लगी रहती है। मैंने ओबेरॉय मेंशन को शिवाय और अमोल को आधा-आधा दे दिया। और बाकी जायदाद को तीनों बच्चों में बराबर बांट दिया। आज अमोल और शिवाय का अपना अलग बिज़नेस है। जिस को यह दोनों बहुत अच्छे से संभाल  रहे हैं। मैं और ममता कभी शिवाय के तरफ तो कभी अमोल की तरफ रहते हैं। हमारा रुम दोनों तरफ है। सुधीर जी खुशी से कहते हैं। मैं भी ऐसा ही करुंगा। बच्चों की शादियां करके उनको उन की ज़ि...

डोर धड़कन से बंधी भाग 59 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 59 | Hindi Romantic Story

पूजा बड़े ध्यान से आरव की बातें सुन रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह सब कोई सपना है या हकीकत। इसका मतलब तुम ने मुझ से यह शादी पा के कहने पर की? नहीं…आरव कहते ही उसे देखने लगा। पा से बात करने के बाद तुम हर वक्त मेरे मन में रहने लगी। पा के अल्फाज़ हर वक्त मेरे कानों में गूंजते रहते। कालेज में जब कोई लड़की मेरे सामने आती तो मेरी आंखों में तुम्हारा चेहरा आ जाता। उस के बाद पा ने मुझ से तुम्हारे बारे में कोई बात नहीं की। जब भी मैं तुम्हारे घर आता चुपके-चुपके तुम को देखता रहता। हम साथ बैठते बातें करते। लेकिन तुम कभी यह नहीं जान पाई कि मैं तुम में अपना प्रेम ढूंढ रहा हूं। और इसी तरह तुम्हें सोचते-सोचते मुझे महसूस हुआ कि मैं सचमुच तुम से प्यार करने लगा हूं। मैंने कभी तुम से प्यार की बातें नहीं की, कभी तुम्हारे आगे पीछे-पीछे नहीं घूमा। कभी तुम से कोई वादा नहीं किया। लेकिन दिल में तुम्हारी मुहब्बत छा गई थी। मैं खामोशी से तुम्हे चाहने लगा। पूजा बहुत प्यार से आरव को देखते हुए उसकी बातें सुन रही थी। आरव का वह प्रेम जो कभी वह महसूस ही नहीं कर पाई। वह आज बारिश की नन्ही बूंदों की तरह उस पर बरस रहा थ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 51 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 51 | Hindi Romantic Story

शिवाय के अंदर तक सुकून उतर आया था। बरसों से उसका तरसा हुआ दिल आज हर खुशी पा गया था।  मैं भी निकलूं फिर? मुग्धा को कुछ शापिंग करनी थी। उस के साथ जाना है। आदर्श शिवाय के करीब आए। हां ठीक है जाओ। शिवाय उठ खड़े हुए। तुम भी आराम करो। कल तुम्हारी शादी है। आदर्श श्लोका को देखकर शिवाय से कहते हैं। हूं, शिवाय मुस्कुराए। शादी के बाद हम इंडिया चले जायेंगे। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं। ठीक है फिर मैं भी वहीं शिफ्ट हो जाता हूं। आदर्श ने नार्मली कहा। तुम क्यों चलोगे? तुम यहां रहो। शिवाय हैरान हुए। क्योंकि मैं चाहता हू कि मेरा बच्चा अपने देश में जन्म ले। आदर्श अपनी मुस्कान छुपा कर कहते हैं। क्या सच में……शिवाय उसकी बात सुन कर खुश हुए, लेकिन इंडिया जाने की बात हैरान किए हुए थे। हां, मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकता शिवाय, मुझे तुम्हारी आदत हो गई है।  मुग्धा भी यही चाहती है। आदर्श खुशी से कहते हैं। शिवाय हैरानी से आदर्श को देखते हैं। और फिर उसे गले लगा लेते हैं। कितनी ही देर दोनों गले लगे रहे। श्लोका अपनी बेड पर बैठी दोनों दोस्तों की मुहब्बत को देख रही थी। आता हूं फिर……आदर्श शिवाय से अलग ह...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 50 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 50 | Hindi Romantic Story

उसी दोस्ती के नाते शिवाय हमें छोड़ दें। पुलिस के हवाले ना करें। वरना हम कभी जेल से वापस नहीं आ पायेंगे। सुमन एक बार फिर गिड़गिड़ाती है। लेकिन शिवाय जवाब देने के बजाए आगे बढ़ते हैं। और अनु का हाथ पकड़ कर बाहर निकल जाते हैं। …… शिवाय अब तुम घर जाकर आराम करो। मैं श्लोका के पास रहूंगा।  शिवाय के हास्पिटल पहुंचते ही सुधीर जी कहते हैं। नहीं डैड आप घर जाएं। मैं यहीं रहूंगा। शिवाय वहीं चेयर पर बैठते हुए कहते हैं।  शिवाय तुम थक चुके हो। कई रातों के जगे हो तुम। प्लीज़ यार तुम चले जाओ। आदर्श शिवाय से रिक्वेस्ट करते हैं। तुम भी जाओ आराम करो। तुम भी थक गए हो। शिवाय आदर्श की बात को अनसुनी करते हुए अपनी बात कहते हैं। और तुम जो थके हुए हो? बीमार हो गए तो? आदर्श उस के करीब जाकर कंधे पर हाथ रख कर नाराज़गी से पूछते हैं। मेरा ध्यान रखने वाली आ गई है। शिवाय मुस्कुराए। आदर्श उसे देखते रह गए। मुहब्बत भी क्या चीज़ है। इंसान में नई जान डाल देता है। श्लोका को कल सुबह रुम में शिफ्ट करेंगे। आदर्श बताते हैं। श्लोका के पास रुम में नहीं जाओगे? आदर्श शिवाय से पूछते हैं। जाऊंगा। पहले तुम लोगों को यहां से भेज ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 49

तो फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ। शिवाय एक झटके से खड़े होकर कोट से पिस्तौल निकाल कर उस पर तान देते हैं। शिवाय आप यह क्या कर रहे हैं? वह डर कर कहती है। वही जो तुमने कहा था...  नहीं शिवाय पहले बैठें। हम इतनें दिनों बाद मिले हैं। मौत के मुंह से मैं वापस आई हूं और आप.... वह इमोशनल होती है। अगर मुझ से सच्चा प्यार करती हो तो... तुम को मरना होगा। शिवाय बहुत आराम से कहते हैं। हठें, मैं जा रही हूं...जब आपका दिमाग ठिकाने आ जाए तो बता देना। श्लोका गुस्से से कहकर बाहर की ओर जाने लगती है। कहां चलीं मैडम.... शिवाय से इतना प्रेम करती हैं। लेकिन उसके लिए मर नहीं सकती यह कैसा प्रेम है। प्रेम तो कुर्बानी मांगता है। आदर्श उसे अंदर की तरफ ढकेलते हुए कहते हैं। आप लोग क्या बातें कर रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा। अब वह सचमुच डर गई थी। यह श्लोका वाला खेल खेलने की वजह? आदर्श सीधे मुद्दे पर आ जाते हैं। यह कोई खेल नहीं हकीकत है। मैं श्लोका ही हूं। और अगर शिवाय को अब मैं पसंद नहीं तो मुझे भी कोई शौक नहीं है इससे शादी करने का। मैं जा रही हूं। कहते ही एक बार फिर वह बाहर की तरफ बढ़ी। अपनी आंटी का एड्रेस बताओ। ज़र...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 48 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 48 | Hindi Romantic Story

कुछ रिश्ते वक्त के इंतेज़ार में होते हैं... और जब वह लौटते हैं, तो मुकम्मल हो जाते हैं। उसने मन ही मन कहा। .... आदर्श तैयारी हो गई? शिवाय फोन पर मैसेज टाइप करते-करते पूछते हैं। हां, हो गई। आदर्श ने अंगूठा दिखाया। गुड, अभी रवि, हेमंत और अशोक भी आ रहे हैं। फिर हम निकलते हैं। शिवाय के मन में बहुत कुछ चल रहा था। उसी वक्त उस के दोस्त आ जाते हैं। और आते ही तीनों एक साथ शिवाय के गले लग जाते हैं। आदर्श दूर खड़े यह मंज़र देख कर मुस्कुरा देते हैं। सच में सच्चे दोस्त बहुत बड़ी दौलत हैं। अचानक शिवाय की नज़र आदर्श पर पड़ती है। जो दूर खड़ा उन को देख रहा था। आदर्श.... आदर्श भी मुस्कुरा कर उन सब के साथ गले लग गए। तभी.... कुछ प्यार मेरे लिए भी बचा है? पीछे से आवाज़ आती है। सब पलट कर देखते हैं। सुधीर जी बाहें फैलाए खड़े थे। डैड.... शिवाय तेज़ी से उनके पास जाकर उन की बाहों में लिपट जाते हैं। दोनों की आंखें नम थीं, लेकिन  दोनों ही मुस्कुरा भी रहे  थे। डैड आप यहीं रूकें। हम आते हैं। शिवाय घड़ी देख कर कहते हैं। हां ठीक है, तुम लोग जाओ। मैं यहीं हूं। श्लोका के पास।तुम्हारी मौम, अराध्या और अमोल घर पर...

डोर धड़कन से बंधी भाग | 47 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 47 | Hindi Romantic Story

उसके कानों में आग की सिसकारियां और किसी पुराने, दर्दनाक लम्हे की टूटी हुई तस्वीरें गूंज रही थीं। शेफ अपना काम कर रहे थे। आग एक बार फिर तेज़ हुई।  शिवाय..... शिवन्या की चींख पूरे हॉल में गुंज गई। शिवाय और आदर्श उठ कर उसकी तरफ जाते हैं। वह बेहोश हो चुकी थी। शिवन्या, शिवन्या... आंखें खोलो.... शिवाय उसे आवाज़ देता जा रहा था। आदर्श गाड़ी निकालो। शिवाय को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि यह अचानक से बेहोश क्यों हो गई। होटल के मैनेजर भी आ गये।  शिवाय शिवन्या को गोद में उठा कर बाहर की ओर निकले। गाड़ी में उस को लिटाकर वह सब जल्दी-जल्दी बैठ जाते हैं। आदर्श तेज़ चलाओ। शिवाय पीछे बैठ कर शिवन्या का सिर अपनी गोद में रखे उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहते हैं। लेकिन आदर्श जवाब देने के बजाए पूरा ध्यान ड्राइव पर देते हैं। वैसे भी शिवन्या के बेहोश होने पर उसे टेंशन हो गई थी। आज डॉक्टर खन्ना भी आ रहे हैं। और आज ही शिवन्या की यह हालत... आदर्श को कुछ समझ नहीं आ रहा था। हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टर ने देखा। और देखते ही उसे आई सी यू में लेकर चले गए। आदर्श यह ठीक हो जायेगी ना?  शिवाय रोते हुए कहते हैं। कब...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 46 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 46 | Hindi Romantic Story

दोनों की आंखें भीग चुकी थीं, लेकिन उस भीगने में दर्द से ज़्यादा सुकून था। जैसे दोनों ने अपने हिस्से की सारी तकलीफें एक दूसरे के हाथों में रख दिया हों। और उस रात.... बारिश देर तक होती रही,  मानो आसमान भी उनके इश्क का गवाह बन कर उन्हें आशिर्वाद दे रहा हो। ❤️ शिवाय के आफिस आते ही आदर्श उनके केबिन में आ जाते हैं। आज शाम हम सब बाहर चलेंगे। घूमने के बाद डिनर भी बाहर ही करेंगे। आदर्श शिवाय को बताते हैं। ठीक है बॉस, कुछ और? शिवाय मुस्कुराए। नहीं, डॉक्टर खन्ना की रात की फ्लाइट है। डिनर के बाद मैं और शिवन्या एयरपोर्ट चले जायेंगे। वहां से शिवन्या अपने घर चली जायेगी। और मैं वापस अपने घर.... वैसे आज चेहरे पर चमक पिछले दिनों के मुकाबले ज़्यादा है। कोई खास वजह? आदर्श ने जानना चाहा। उदास रहूं तो बुरा, खुश रहूं तो बुरा। शिवाय ने नाराज़गी जताई। मेरी नज़र तुम्हारे खुफिया कैमरे से भी तेज़ है। आदर्श भी हंसे। कल मैंने वह लम्हें पा लिए जिस की बदौलत मैं सारी ज़िन्दगी गुज़ार दूंगा। शिवाय खो गए उन लम्हों में जब वह शिवन्या के साथ थे। अब ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं। वह खोए हुए ही बोले। ज़रा सोचो अगर वही लम्हे स...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 44 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 44 | Hindi Romantic Story

फैसला हो चुका है। और शिवाय सिंह ओबेरॉय अपना फैसला नहीं बदलते। जब तक कि कोई ठोस वजह ना हो। कहते ही शिवाय लैपटॉप पर नज़र जमा लेते हैं। जिसे आदर्श देखते रह जाते हैं। क्या फायदा ऐसी शादी का जिसमें खुशी ही ना हो। उससे अच्छा तो तुम ऐसे ही ठीक हो। शिवाय को एक नज़र देख कर कहते हुए आदर्श केबिन से बाहर निकल जाते हैं। शिवाय का जवाब सुने बिना। .... कभी-कभी दिन कितना जल्दी बीत जाता है। एक वक्त ऐसा था कि मेरा वक्त नहीं कट रहा था। और अब देखो.... मैं सोच रहा हूं कि वक्त धीरे चले। मगर वह सरपट भाग रहा है। डिनर के बाद कॉफी पीते हुए शिवाय शिवन्या से कहते हैं। शिवन्या खामोशी से शिवाय को देखती है। शायद कहने के लिए उस के पास इस वक्त कुछ नहीं था। देखते ही देखते शादी का दिन भी आ गया।  कल तुम्हारे अंकल आ रहे हैं। कल तुम भी चली जाओगी।  परसों मेरी फैमिली और दोस्त आ रहे हैं।  हर कोई खुश है। तुम को अंकल से मिलने की खुशी है। मेरी फैमिली और दोस्तों को मेरी शादी की खुशी है। और एक मैं हूं....पता नहीं किन उलझनों में उलझा हुआ हूं। बोलते-बोलते शिवाय की आवाज़ भारी हो जाती है। वह जल्दी से अपने आंख की नमी को सा...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 43 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 43 | Hindi Romantic Story

मैं नेक्स्ट वीक श्लोका से शादी कर रहा हूं। आदर्श जैसे ही शिवाय के केबिन में आकर बैठते हैं। शिवाय धमाका करते हैं। क्या? आदर्श हैरानी से देखते हैं। सही सुना तुमने... शिवाय ने यकीन दिलाया। यह अचानक शादी का फैसला? आदर्श की हैरानी कम नहीं हो रही थी। फैसला तो लेना ही था، मैंने ले लिया। श्लोका को भी बोल दिया है।  क्या? आदर्श अपनी जगह से उठ गए। असली शॉक तो अब लगा था। तुम्हारा दिमाग तो ठीक है। उससे भी बोल दिया। आदर्श ने अपना सिर पकड़ लिया। यह चमत्कार किस खुशी में? जब से वह आई है तुम ने उससे ठीक से बात तो की नहीं। और अचानक यह शादी? आदर्श को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे। यही श्लोका है आदर्श....जब मैंने यह जान लिया तो मुझे अच्छा नहीं लगा कि मैं उसे ना अपनाऊं। मैं श्लोका से प्यार करता था। और वह भी करती थी। जो खुशी और सुकून मुझे श्लोका से मिला था। वह मुझे आज तक किसी से नहीं मिला।  और आज जब वह बहुत कुछ सह कर खुद को मिटा कर दोबारा ज़िंदगी पाकर मेरे पास आई तो मैं उसे छोड़ दूं। वह भी इस लिए कि मेरा दिल अब उसे देख कर नहीं धड़कता। उसका चेहरा बदल जाने से मैं उसे ना अपनाऊं। यह तो गलत है आदर्श.....

डोर धड़कन से बंधी | भाग 42 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 42 | Hindi Romantic Story

मैं शिवाय से ज़्यादा मिलूंगी ही नहीं कि उसे मुझ पर शक हो। मैं कल ही अपना सबसे मज़बूत वार कर देती हूं। जिससे उसे मुझ पर शक करने की कोई गुंजाइश ही ना रहे। क्या करेंगी आप? अनु को फिक्र हुई। तुम चिंता मत करो। तुम्हारी प्यारी श्लोका के प्यारे शिवाय को मैं अपना बना कर रहूंगी। श्लोका ज़ोर से हंसती है। अनु अपनी मजबूरी पर तड़प उठती है।  ❤️ मैं जा तो रहा हूं श्लोका के साथ बाहर, लेकिन मेरा दिल खुश क्यों है? शिवाय तैयार होते हुए सोच रहे थे। लेकिन जाना भी ज़रूरी है। क्योंकि आदर्श का यह हुक्म है कि मैं उस के साथ ज़्यादा से ज़्यादा वक्त बिताऊं। शिवाय तैयार हो कर कमरे से बाहर आए। शिवन्या वहीं पर बैठी हुई थी। मैं डिनर बाहर करुंगा। ना जाने क्यों शिवाय को कहते हुए अच्छा नहीं लगा। उसे लगा जैसे वह चोरी कर रहे हों। लेकिन बताना भी ज़रूरी था। कहते ही वह बाहर निकल गये। और शिवन्या अपनी जगह बैठी रह गई। उसे लगा उस का बहुत कीमती कुछ आज उससे दूर हो गया हो। ..... आप कुछ कम बोलने लगे हैं? मॉल में साथ टहलते हुए श्लोका शिवाय से कहती है। इंसान हमेशा एक सा नहीं रहता। वक्त इंसान को बदल देता है। शिवाय उदासी से कहते हैं...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 35 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 35 | Hindi Romantic Story

वाह मिस्टर ओबेरॉय, आपके जवाब ने तो सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। रिश्तों की परिभाषा इतनी खुबसूरती से शायद ही किसी ने समझाई हो। फाइनल राउंड से पहले, एक सवाल मिस शिवन्या से। अगर कभी आपके दोस्त की एक ऐसी सच्चाई सामने आए, जो आपको दुखी कर दे...तो क्या आप उस दोस्ती को निभाएंगी या छोड़ देंगी? होस्ट के साथ-साथ हर नज़र शिवन्या पर थी। शिवन्या के चेहरे पर पल भर को भाव बदल गए। वह थोड़ा सा झुकी। जैसे अतीत का कुछ याद करने की कोशिश कर रही हो। फिर उस ने ठहर कर कहा... अगर वह सच्चाई इन्होंने खुद बताई हो, तो वह दोस्ती छोड़ने लायक नहीं...निभाने लायक होगी। क्योंकि सच्चाई छुपाई जाए तो धोखा बनती है, और बताई जाए तो भरोसा। स्टेज के कोने में खड़ी एक महिला की आंखें नम हो गई। शायद वह अपने किसी रिश्ते में यही जवाब तलाश रही थी शिवाय ने गौर से शिवन्या को देखा....वह अब सिर्फ एक दोस्त नहीं रही थी। बहुत ही खूबसूरत जवाब.... और अब....आता है वह पल जिसका सबको इंतेज़ार है...फाइनल राउंड! मेरे सवाल करते ही जो पहले हाथ उठाइएगा। वही जवाब देगा। और वही फाइनल जवाब होगा।  शिवाय और शिवन्या दोनों एक दूसरे को देखते हैं। और फिर...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 34 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 34 | Hindi Romantic Story

कभी-कभी दूसरों की खुशी में अपनी भी खुशी शामिल होती है।  शिवाय शिवन्या का हाथ पकड़ कर कहते हैं। अब वह शिवन्या को क्या बताते कि उस के साथ के लिए वह यहां तक आ गये।  गेम शुरू हो गया था। जिस में पहले शिवन्या और फिर शिवाय आउट हो गये। आदर्श और मुग्धा दूर से गेम देख रहे थे। दूसरे गेम का एनाउंस हो चुका था। जिसे शिवन्या नहीं खेलना चाहती थी। लेकिन शिवाय उसे मनाने में लगे थे। देखो तुम्हारे कहने पर मैं यह गेम खेलने आया था। लेकिन अब तुम ही भाग रही हो। यह नहीं हो सकता तुम को यह गेम भी खेलना पड़ेगा। शिवाय शिवन्या को राज़ी करने की एक और कोशिश करते हैं। मिस्टर ओबेरॉय यह गेम उनके लिए है जो एक दूसरे के बारे में जानते हों। लेकिन हम एक दूसरे को ज़्यादा दिनों से नहीं जानते। हम यह गेम खेलते ही आउट हो जाएंगे। कोई बात नहीं। आउट भले हो जाएं। लेकिन यह खेलना है बस फाइनल हुआ।  शिवाय ने फैसला सुनाया। और दूर खड़े आदर्श की तरफ देखा। जो उसको अंगूठा दिखा कर खेलने के लिए कह रहे थे। शिवाय ने अपना और शिवन्या का नाम लिख कर होस्ट को दे दिया। और रिश्ते में दोस्ती लिख दिया था। वहां पर बहुत सारे पार्टनर थे। कोई बे...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 33 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 33 | Hindi Romantic Story

  वह मुहब्बत जिसे शिवाय दो साल पहले जी रहे थे। वही मुहब्बत वह दोबारा जीने लगे थे।  खुशी उन के हर अंदाज़ में झलकती थी। ❤️ सब तैयारी हो गई? मैं क्या करुंगी जाकर? आप की मीटिंग है आप जाएं। शिवाय कल से उसे मना रहे थे। लेकिन वह जाने के लिए तैयार ही नहीं हो रही थी। जो मैं करूंगा वही करना। तैयारी कर लो। इस बारे में अब कोई बात नहीं होगी। शिवाय फाइनल फैसला देते हैं। जिसे सुनकर शिवन्या नाराज़गी से अंदर जाने लगती है। शिवाय उठ कर बहुत तेज़ी से उस के सामने जाते हैं। और उसे देखने लगते हैं। नाराज़ हो? नहीं.... तो फिर? पता नहीं क्यों दिल नहीं मान रहा जाने का। वरना आप के साथ कहीं जाने पर मुझे खुशी होती है। आप भी मत जाएं। किसी और को भेज दें। शिवन्या उदासी से कहती है। तुम बेकार की बातें मत सोचो। बस अब तैयारी कर लो। शिवाय उसको खुद से लगा कर साइड हग करते हैं। और बहुत प्यार से उसको प्यार करते हैं। शिवाय के होंठों की छुअन और नज़दीकी। दोनों की ही धड़कन बहुत तेज़ हो गई थी। यूं जैसे उनके सांसों की डोर धड़कन से बंधी हो। शिवाय के दिल ने मान लिया था कि वह शिवन्या से मुहब्बत करते हैं। उनकी धड़कन तो शिवन्या ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 32 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 32 | Hindi Romantic Story

कुछ समझने की कोशिश मत करो। जो हो रहा है होने दो। शिवाय एक बार फिर खोने लगे। मुहब्बत का यह सफर आसान नहीं था। खाना खाते ही दोनों बाहर निकल गये। ड्राइविंग शिवाय ने सम्हाल ली। अब यहां? शिवाय के गाड़ी रोकने पर शिवन्या पूछती है। आओ तो... शिवाय उतर गये। शिवन्या भी उतर गई। तुम्हारे लिए आइसक्रीम और चाकलेट लेना है। शॉप की तरफ बढ़ते हुए शिवाय कहते हैं। और शिवन्या हैरानी से शिवाय को देखती है। लेकिन वह तो अपनी ही धुन में मग्न थे। ना जाने कितनी ही चाकलेट और आइसक्रीम शिवाय रखते गये। वह मना करती रह गई। लेकिन वहां सुनने वाला कौन था। इतनी सारी चाकलेट और आइसक्रीम का मैं क्या करूंगी? घर पहुंचकर शिवन्या हैरानी से पूछती है। खाओगी और क्या करोगी। शिवाय लापरवाही से कहते हैं।  और मेरे दांत खराब हो गये तो?  कुछ नहीं होगा। कहते हुए शिवाय रूम में चले गए। और चेंज करने लगे। चेंज करते ही शिवाय लेट गए। और स्क्रीन आन कर दी। और उसमें खो से गये। स्क्रीन पर शिवाय और श्लोका डांस कर रहे थे। एक यही फोटो और वीडियो था जो उसके पास श्लोका की निशानी थी। जिसे रवि ने उसे भेजा था। जो उस ने अपनी शादी पर बनवाई थी। रवि ने जब उ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 21 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 21 | Hindi Romantic Story

स्क्रीन पर नज़र जमाये शिवाय के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।  मैंने आज ही तुम को अपनी ज़िंदगी से निकालने का फैसला लिया था। और तुम आज ही मेरी ज़िन्दगी में वापस आ गई।  शिवन्या को काम दे दिया जाता है। आफिस के लैपटॉप  पर आर्डर के अनुसार वह डिज़ाइन बनाना शुरू कर देती है। शिवाय की नज़र हर काम के बाद उसी पर पड़ती थी। जो बहुत ध्यान से डिज़ाइन बना रही थी। कॉफी और सैंडविच शिवाय के कहने पर उसके पास भेज दिया गया था।  शाम हो चुकी थी। शिवन्या की डिज़ाइन रेडी हो चुकी थी। उसको अब मैनेजर को दिखाना था। शिवन्या आधा घंटे से उनका इंतेज़ार कर रही थी। शिवाय अपना काम करते हुए कुछ फैसला लेते हैं और आदर्श को फोन करते हैं। सुबह मैंने जो बात कही थी। मैं वह बात वापस ले रहा हूं। तुम भूल जाओ कि मैंने कुछ कहा था। कहते ही शिवाय फोन रख देते हैं। आप....जैसे ही मिस्टर रावत केबिन में आते हैं शिवन्या उन को देख कर गुस्से से उठ खड़ी होती है। बैठ जाएं मिस शिवन्या और अपना वर्क दिखाएं। मिस्टर रावत कड़कदार आवाज़ में कहते हैं। और बैठ जाते हैं। उनके हाथ में हीटिंग पट्टी बंधी हुई थी। जहां पर आप जैसे लोग हों। मैं वह...