रूबरू | Part 1 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
दरवाज़े की घंटी लगातार बजती जा रही थी। कुछ पल बाद वह आवाज़ अचानक थम गई।
तुम्हें तो बस इन हीरों में आंखें गड़ाए रखना है। चाची जान को दरवाज़ा खोलना पड़ा।
अंदर आते ही मारिया शिकायत भरे लहजे में कहती है। साथ में ज़ोया भी थी।
बहुत ज़रूरी रिसर्च कर रही थी... इसलिए उठ नहीं सकी, अशमारा ने आराम से जवाब दिया। मगर उसकी नज़र अभी भी लैपटॉप पर जमी थी।
कौन-सा तीर मार लोगी इतनी जानकारी इकट्ठा करके? आखिर करना तो घरदारी ही है।
ज़ोया आराम से उसके बिस्तर पर फैलती हुई कहती है।
यह बताओ तुम लोग आई क्यों हो?
अशमारा अपना लैपटॉप किनारे रखकर पूछती है। उसकी बात को नज़रंदाज़ करके।
तुमसे मिलने का मन किया, और हम आ गए। जवाब देते हुए मारिया की नज़र फोन पर थी।
मुझसे मिलने आई हो तो फिर फोन में क्या कर रही हो? अशमारा उसका फोन लेते हुए कहती है।
मेरा फोन दो, पिज़्ज़ा आर्डर कर रही थी। मारिया ने अपना फोन वापस लिया।
अंदर आ सकता हूं?
सबकी नज़र दरवाज़े पर उठती है।
आकिल तुम कैसे? तुम्हें अपने बॉस से फुर्सत कैसे मिल गई? अशमारा हैरान हुई।
कभी-कभी बॉस से छुट्टी ले लेता हूं। जब कोई बहुत ज़रूरी काम हो तो…आकिल की नज़र उसके चेहरे पर ठहर गई।
अच्छा और वह ज़रूरी काम क्या है? अशमारा ने हैरानी से पलकें झपकाईं।
तुम्हें देखने से ज़्यादा ज़रूरी कोई काम हो सकता है क्या... आकिल मन ही मन सोचता है। मगर कह नहीं पाता।
ऐसा क्यों होता है कि मैं तुम से बहुत कुछ कहना चाहता हूं, मगर तुम्हारी आंखों में खुद को खोकर अपने ही शब्द भूल जाता हूं। आकिल के सोचों का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा था। जबकि अशमारा की निगाहें फोन में जम चुकी थीं।
आकिल इधर आओ मेरे पास … यह देखो और बताओ मैंने सही लिखा है। अशमारा आकिल का हाथ खींच कर अपने पास बैठा लेती है। और उसको फोन दिखा कर पूछती है।
मिल गये अब हीरों के दिवाने दो…ज़ोया ने मुंह बनाया।
लेकिन अशमारा और आकिल अपने काम में बिज़ी रहे।
बिल्कुल सही लिखा है।
पढ़ाई के साथ-साथ तुमने इतना रिसर्च कर लिया है हीरों के बारे में कि तुम को आसानी से एक अच्छी जॉब मिल जायेगी।
खुशी आकिल के हर अल्फाज़ में छलक रही थी।
इसे जॉब ढूंढ़ने की क्या ज़रूरत है? तुम अपने बॉस से कहकर अपने आफिस में ही इसे जॉब दिला देना। फिर तुम्हें यहां आने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी, इस से मिलने के लिए।
मारिया आंख पिंच करते हुए कहती है। जिसे आकिल तो देख लेता है। लेकिन अशमारा नहीं देख पाती। क्योंकि वह अपना फोन देखने लगी थी।
आकिल मारिया को खामोश रहने का इशारा करता है। मारिया मुस्कुरा दी।
वह जानती थी कि आकिल अशमारा को पसंद करता है। लेकिन अशमारा इस बात से अंजान थी।
गज़ल बाहर जाती है और पिज़्ज़ा का बॉक्स लेकर अंदर आती है।
यह तुमने अच्छा काम किया है। अशमारा उस के हाथ से पिज़्ज़ा बॉक्स लेती है।
हमने तुम्हारे लिए आर्डर नहीं किया है।
ज़ोया उसके हाथ से बॉक्स लेकर एक पीस लेती है। और बॉक्स आकिल को देती है।
अशमारा नाराज़गी से आकिल को देखती है। आकिल बॉक्स अशमारा की तरफ बढ़ा देता है।
वाह रे मुहब्बत…मारिया की ज़ुबान एक बार फिर फिसलती है। और इस बार भी आकिल आंखों से उसे खामोश करा देता है।
चलो अब जाओ सब लोग, मुझे काम है।
अशमारा अपनी बेडशीट झाड़ते हुए कहती है। जिस पर बैठ कर पिज़्ज़ा खाने की वजह से गंदी हो गई थी।
ठीक है जा रहे हैं। वैसे भी हम लोग शॉपिंग के लिए जा रहे हैं। और तुमको ले जाने का कोई इरादा नहीं है।
हीरों की सौदागर…मारिया मुंह बनाती है। और बाय बोल कर बाहर निकल जाती है।
कभी इन हीरों से हट कर भी देख लिया करो।
आकिल उसके चेहरे को प्यार से देखते हुए कहता है। जो एक बार फिर हीरों की जानकारी वाला वीडियो खोल चुकी थी।
आगे क्या इरादा है? मास्टर्स तो तुम्हारा कम्पलीट हो गया। आकिल उस के हाथ से फोन लेता है।
जॉब करूंगी। अशमारा आराम से बेड के क्राउन से टेक लगाकर कहती है।
और जॉब के साथ? आकिल ने जानना चाहा। निगाहें उसकी हर हरकत पर जमीं थीं।
सिर्फ जॉब…पैसा कमाकर अम्मी अब्बू को दूंगी। आखिर मैं उनकी इकलौती औलाद हूं।
अब मैं अम्मी अब्बू का सहारा बनूंगी। अशमारा की आंखों में एक अलग ही जुनून था।
यह तो अच्छी बात है। आकिल पता नहीं क्या जानना चाहता था।
तभी उसका फोन बज जाता है। और वह बात करने लगता है।
अभी मैं चलता हूं, फिर मिलते हैं, कुछ ज़रूरी काम आ गया है।
आकिल एक भरपूर नज़र उस पर डालता है। और कहते ही उसके पास से उठ जाता है।
क्योंकि उसे अभी तुरंत उसके बॉस ने अपने घर पर बुला लिया था।
ठीक है मैं इंतेज़ार करूंगी। अशमारा मुस्कुरा दी।
उसकी मुस्कुराहट आकिल को हौसला दे गई। मगर यह वक्त अपनी बात कहने के लिए सही नहीं था। इसलिए बाय बोलते ही वह बाहर निकल गया।
...
ब्लैक हाउस के खूबसूरत ड्राइंग रूम में...
एक को हीरों से फुर्सत नहीं मिलती, और दूसरे को रंगों से फुर्सत नहीं मिलती।
मैं सारा दिन इनकी राह तकती रहूं। वहीदा सरफराज़ नाराज़गी से दानिश और ताबिश को देखते हुए कहती हैं। जो अपने-अपने लैपटॉप पर नज़रें जमाए हुए थे।
बस अभी आया दादी पांच मिनट दे दीजिए।
दानिश लैपटॉप पर काम करते हुए कहता है।
क्या बात है दादी…आज इतनी मुहब्बत क्यों लुटा रही हैं?
ताबिश अपना लैपटॉप रख कर दादी के पास बैठ कर मुस्कुराते हुए पूछता है।
अभी एक बात बोलूंगी और तुम्हारी यह बत्तीसी अन्दर हो जायेगी। दादी उसे प्यार से देखते हुए बोलीं।
तो आप ऐसी बात बोलती ही क्यों हैं?
दानिश भी आकर दादी के दूसरी तरफ बैठ कर मुस्कुराते हुए कहता है।
मैं तुम दोनों की शादी करना चाहती हूं। यह बात तुम दोनों अच्छे से जानते हो, उसके बाद भी यह टाल-मटोल मेरी समझ में नहीं आ रही है। दादी की नाराज़गी उन दोनों को दिख रही थी।
अगर कोई लड़की है तो बता दो, वरना मुझे देखने दो। ताबिश के लिए तो आलिया है ही, तुम अपना बताओ।
दादी दोनों की ओर देखती हैं।
क्या आलिया? ताबिश का चेहरा देखने लायक था।
हां क्यों? दादी हैरान हुईं।
वह सिर्फ मेरी दोस्त है, उससे ज़्यादा कुछ नहीं। ताबिश ने हकीकत बताई।
लेकिन वह तो…दादी बात अधूरी छोड़ देती हैं। क्योंकि उन्हें लगता था कि वह दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं।
वह जितना भी मुझे पसंद करे, उसके पसंद करने से मैं उस से शादी नहीं कर लूंगा।
ताबिश दादी का इशारा समझ कर जल्दी से बात क्लियर करता है।
मुझे लगा था सिर्फ दानिश के लिए लड़की देखनी पड़ेगी। लेकिन अब तो तुम दोनों के लिए लड़की देखनी पड़ेगी।
दादी परेशानी से कहती हैं।
आप परेशान ना हों दादी आप आराम से लड़की देखें… जब अच्छी लड़की मिल जायेगी हम शादी कर लेंगे। तब तक हमें सुकून से रहने दें।
ताबिश दानिश को हाई-फाई देते हुए कहता है।
दादी की गुस्से भरी नज़र उन पर ठहर गई।
आदाब…
तभी आकिल अंदर आता है।
उन सबकी नज़र आकिल पर उठ जाती है।
लो भई... एक इन्हीं की कमी थी, दादी नाराज़ होते हुए कहती हैं।
क्या हुआ दादी यह नाराज़गी किस लिए?
आकिल मासूमियत से पूछता है जबकि वजह वह जानता था।
जब आफिस टाइम खत्म हो गया तो फिर क्यों?
दादी नाराज़गी से पूछती हैं।
कुछ काम था दादी इस लिए बुलाया है। दानिश जल्दी से बोला।
आफिस टाइम के बाद यह बुलाए तो आना मत। दादी ने आकिल को इशारा किया।
दादी…दानिश हंसते हुए दादी को गले लगा लेता है।
वैसे आज दादी इतना मेहरबान क्यों हैं आप दोनों पर?
आकिल मुस्कुरा कर पूछता है।
इन दोनों की शादी करनी है। दादी बड़े आराम से कहती हैं।
तो इस में दिक्कत क्या है? आकिल हैरान हुआ।
लड़की…दादी का चेहरा देखने लायक था।
उसमें क्या परेशानी है? बॉस के लिए मिस ताहिरा हैं ना? आकिल एक नज़र दानिश को देख कर कहता है।
आकिल… दानिश आकिल को आंख दिखाता है।
बॉस तो छुपे रूस्तम निकले।
ताबिश खुशी से कहता है। और झुककर दानिश की ओर देखता है।
ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम समझ रहे हो। दानिश बौखलाया।
काम शुरू करें बॉस… आकिल मुस्कुरा दिया।
हां, चलो... आग तो लगा ही चुके हो।
दानिश उठ खड़ा होता है, और नाराज़गी से आकिल की ओर देखकर कहता है।
तुम कल मुझ से मिलो। दादी कुछ सोच कर ज़ोर से बाहर निकलते आकिल से कहती हैं।
और दादी की बात पर सब हंस पड़ते हैं।
हेलो…
तभी आलिया अंदर आते हुए कहती है।
आ गई तुम्हारी दीवानी। दादी धीरे से ताबिश की तरफ झुक कर कहती हैं।
कैसी हैं दादी? आलिया दादी के पास बैठते हुए कहती है।
मैं ठीक हूं, तुम बताओ कैसे आना हुआ? दादी एक गहरी नज़र आलिया पर डालती हैं... खूबसूरत तो है फिर ताबिश को पसंद क्यों नहीं आई? जवाब देते हुए दादी की नज़र उसी पर टिकी रही।
बाहर डिनर का सोच रही थी इस लिए…ताबिश बाहर डिनर के लिए चलें? आलिया दादी से बोल कर ताबिश की तरफ झुक कर पूछती है।
डिनर ही करना है ना? यहीं घर पर ही कर लेते हैं। ताबिश लापरवाही से बोला।
कितने दिन से हम बाहर नहीं गए हैं, इस लिए मेरा मन हुआ। अगर तुम्हारा मन नहीं है तो कोई बात नहीं। आलिया उदास हुई। वरना आज उसका मन ताबिश के साथ बाहर जाने का था।
कॉफी पियोगी? ताबिश उसकी उदासी को नज़रंदाज़ करते हुए उठते हुए पूछता है।
तुम कहां जा रहे हो? वह जवाब देने के बजाए सवाल करती है।
मेरी एक ज़रूरी कॉल आने वाली है। मैं रूम में जा रहा हूं, तुम दादी से बात करो। मैं कॉफी का बोल देता हूं।
कहते ही वह आगे बढ़ता है। उसका जवाब सुने बिना।
नहीं मैं भी निकलूंगी। मुझे भी कुछ काम था। वह भी उठते हुए कहती है। मैं जितना तुम्हारे करीब आने की कोशिश कर रही हूं तुम उतना ही दूर हो रहे हो...ऐसा क्यों ताबिश? सोचते हुए उसे देखती है।
ताबिश के रवैए से उसे दुख होता है। लेकिन वह खामोशी से बाहर निकल जाती है।
उसके जाते ही ताबिश दोबारा दादी के पास बैठ जाता है।
दादी हैरानी से उसे देखती हैं।
मेरी कोई कॉल नहीं आ रही थी। दादी को हैरान देखकर कहते हुए आराम से उनकी गोद में सिर रखकर आंख बन्द कर लेता है।
तुमको सच में आलिया पसंद नहीं है? दादी उसके सिर पर हाथ फेरती हैं।
नहीं दादी, वह मुझे बीवी के रूप में पसंद नहीं, ताबिश वैसे ही आंख बन्द किए हुए ही कहता है।
तुम किसी को पसंद करते हो? दादी ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछा।
हूं... ताबिश वैसे ही आंख बंद किए हुए जवाब देता है।
किसे? दादी की हैरानी बढ़ती जा रही थी। वह हैरान थीं कि ताबिश किसी को पसंद करता है और उनको खबर नहीं।
जारी है...

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