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Showing posts with the label Emotional Love Story

रूबरू | Part 18 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

रात बीतती जा रही थी। अब मायरा को भी नींद आ रही थी लेकिन वह दादी को छोड़कर नहीं जा सकती थी। यह उसकी ड्यूटी थी। जिसे उसे निभाना था। सुबह... तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई दादी के बिस्तर पर सोने की?... ताबिश की तेज़ आवाज़ के साथ मायरा हड़बड़ा कर उठ जाती है। दादी भी आंख खोलकर माहौल को समझने की कोशिश करती हैं। मैंने तुमसे दादी का ख्याल रखने को कहा था और तुम आराम से सो गई। ताबिश उसके करीब आ गया। मैं जाग ही रही थी...पता नहीं कब आंख लग गई। उसे अपनी सफाई देते हुए बहुत बुरा लगा। मैं सब समझता हूं। तुम लोगों को बस मौका मिलना चाहिए।  मेरी एक बात कान खोलकर सुन लो। अपनी हैसियत मत भूलना। केयरटेकर हो... केयरटेकर बनकर रहो।  ताबिश उसे वार्निंग देता है। मायरा की जी चाहा कि वह अभी वहां से भाग जाए। लेकिन वह मजबूर थी। इस तरह से वह डांट कहां सुनती थी।  वह तो लाड़ प्यार में पली थी। कभी किसी ने उससे ऊंची आवाज़ में बात भी नहीं की थी। और कहां इतनी बेइज़्ज़ती... मायरा मेरे नाश्ते का देखो क्या बन रहा है। दादी लेटे-लेटे ही बोली। जी दादी... कहते ही वह बाहर निकल गई। तुमको क्या हो गया? क्यों उस पर इतना गुस्सा क...

रूबरू | Part 17 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

अच्छा, तो फिर तुम्हारा ध्यान कहां हैं?...वह अचानक से उठ कर दादी वाली खाली चेयर पर बैठ कर उसकी तरफ झुक गया। मायरा का लगा जैसे उसकी धड़कनें उसकी खामोशी को तोड़ देंगी। ताबिश अब उससे एक सीट दूर नहीं... बल्कि बिल्कुल पास था। उसने अपने हाथों में पकड़ा मग और कस लिया। मेरा ध्यान... कहीं नहीं है। उसने धीरे से कहा, लेकिन उसकी आवाज़ उसका साथ नहीं दे रही थी। झूठ। ताबिश की आवाज़ धीमी थी...मगर सीधे उसके अंदर उतर गई। अगर ध्यान नहीं है...तो डर क्यों है? वह थोड़ा और झुका। मैंने कहा न कि मुझे डर नहीं लग रहा। इस बार मायरा ने खुद को संभालते हुए कहा। अच्छा फिर यह बताओ ऐलन हीरा चुराने में कामयाब हो जाएगी? ताबिश की नज़र उसके चेहरे पर टिक गई। उसने अचानक से टॉपिक बदल दिया। और फिल्म की बात करने लगा। जिसकी हीरोइन ऐलन हीरों को चुराने की कोशिश में लगी थी। मायरा की नज़र स्क्रीन पर ठहर गई। इरादे नेक हों तो मंज़िल मिल ही जाती है। मायरा की आंखों में अचानक सख्ती उतर आई। अच्छा...फिर चाहे वह चोरी ही क्यों न हो? ताबिश के होंठों पर बेसाख्ता मुस्कान छा गई। आपका ध्यान शायद फिल्म में नहीं था...वरना आप देख पाते कि हकीकत में वह...

धड़कन | भाग 45 | Dhadkan Part 45 | Heart Touching Hindi Love Story

श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा। शिवाय आंख बन्द किये पीछे सिर रखें हुए थे। श्लोका ने शिवाय के हाथ पर अपना हाथ रख दिया।   श्लोका के ऐसा करते ही शिवाय का जी चाहा कि वह उसके कंधे पर सिर रख कर खूब ज़ोर-ज़ोर से रोए। मगर वह ऐसा ना कर सके। सिर्फ श्लोका के हाथ रखने भर से ही शिवाय के दिल में सुकून उतर आया था। ड्राइवर के सामने वह खामोश रह गये। लेकिन श्लोका का हाथ सारे रास्ते शिवाय के हाथ में था।  एयरपोर्ट पहुंचने तक शिवाय नार्मल हो चुके थे। एयरपोर्ट पर शिवाय के टीम मेंबर्स पहले से ही वहां मौजूद थे। सारे लोग साथ में जहाज पर चढ़ गये। सिंगापुर पहुंच कर शिवाय और श्लोका एक गाड़ी से और बाकी लोग दूसरी गाड़ी से होटल के लिए निकल गये। थोड़ी देर कोई भी मुझे डिस्टर्ब नहीं करेगा। श्लोका तुम भी आराम करो। फिर मिलते हैं  होटल पहुंच कर शिवाय रूम में जाते हुए सब से कहते हैं। सब लोग अपने-अपने रूम में चले जाते हैं। श्लोका और शिवाय का रूम पास-पास ही था। शिवाय जैसे ही रूम में गये श्लोका भी पीछे-पीछे चली गई। क्या हुआ थोड़ी देर आराम कर लो। फिर मिलते हैं। शिवाय उसे देख कर हैरान हुए। आप ठीक हैं? श्लोका ने श...

धड़कन | भाग 44 | Dhadkan Part 44 | Heart Touching Hindi Love Story

श्लोका के ऐसा करते ही शिवाय बेसाख्ता रोने लगते हैं। लेकिन श्लोका खामोश रहती है। वह चाहती थी आज शिवाय के दुख दूर हो जायें। बरसों से उस के दिल में जो दर्द हैं वह आंसूओं के रूप में बाहर आ जायें। शिवाय अपना सर श्लोका के गोद में रख लेते हैं। श्लोका  कुछ सोच कर उठते लगती है। कहां जा रही हो? यहीं पर रहो थोड़ी देर प्लीज़। शिवाय की आवाज़ के साथ आंखों में भी रिक्वेस्ट थी।  श्लोका ड्रेसिंग टेबल से हेयर आयल लेकर आती है और शिवाय के बालों में लगाकर मालिश करने लगती है। श्लोका तुम ने बताया नहीं मैंने जो किया गलत किया? मैं अब तब खामोश था। कभी कोई शिकवा नहीं किया। कभी भी किसी पर गुस्सा नहीं हुआ। लेकिन अब मैं आगे की ज़िंदगी सुकून से जीना चाहता हूं। इस लिए मैंने आज सख्त फैसला ले लिया। शिवाय के एक-एक लफ्ज़ में दुख छिपा हुआ था। और श्लोका सोच रही थी कौन है वह खुशनसीब जिस के लिए शिवाय अपने परिवार से लड़ पड़े? लेकिन शिवाय से पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। लेकिन आज शिवाय की बातों के बाद उसे डर लगने लगा था कि कहीं वह शिवाय को खो ना दे। शिवाय ने आज तक उस से अपनी मुहब्बत का इज़हार नहीं किया है। और ना ही क...

धड़कन | भाग 42 | Dhadkan Part 42 | Heart Touching Hindi Love Story

शिवाय ने उसको साइड से पकड़ कर लिटा दिया। लेकिन  कुछ मिनट भी नहीं हुए वह उठने लगी। लेकिन शिवाय ने उसे वापस लिटा दिया। श्लोका ने आंख बन्द कर ली। वह सच में बहुत थक गई थी। गाड़ी रुकते ही शिवाय के हाथ उसके बालों पर होते। क्या हर दो मिनट पर उठ रही हो? श्लोका फिर उठने लगी तो शिवाय ने उसे वापस लिटाते हुए कहा। नहीं, श्लोका ने रिक्वेस्ट की। लेकिन शिवाय ने कुछ कहने के बजाय उसे लिटाये रखा। और उसे देखने लगे।  श्लोका कोई तुम को टच करें तो तुम को गुस्सा आ जाता है। लेकिन तुम ने यह हक मुझे दिया।  शिवाय सोचने लगे। शिवाय के दिल की खुशी चेहरे पर साफ दिख रही थी।  और फिर शिवाय श्लोका के चेहरे पर झुक जाते हैं। बहुत ही बेसाख्ता की गई शिवाय की हरकत पर श्लोका का चेहरा लाल हो जाता है। उस की धड़कन तेज़ हो गई। वह उठने लगी। शिवाय ने वापस लिटाने की कोशिश की। मगर वह सीधी होकर बैठ गई। दोनों ही खामोश रहे। खामोशी की ज़ुबान जो श्लोका और शिवाय अच्छे से समझते थे। और जो खामोशी की ज़ुबान समझ ले उन्हें अल्फाज़ों की ज़रूरत नहीं पड़ती है। शिवाय ने गाना लगा दिया। और श्लोका को देखने लगे। श्लोका ने सामने देखा। स...

धड़कन | भाग 41| Dhadkan Part 41 | Heart Touching Hindi Love Story

बाहर का मामला सुनकर सब परेशान हो गये। कैटरिंग वाले सारा सामान लेकर आ गये थे। लेकिन कुक नहीं आये थे। उन का आते टाइम एक्सीडेंट हो गया। वह हास्पिटल गये हुए थे। अब वह नहीं आ सकते थे। अब क्या होगा। यह लोग बना नहीं सकते यह सब तो हेल्पर हैं। सुधीर जी ने परेशानी से कहा। बाहर से खाना आर्डर करना पड़ेगा। किसी ने कहा।  क्यों ना हम सब मिल कर बनायें खाना। श्लोका खड़ी सब तमाशा देख रही थी। जब उससे नहीं रह गया तो बोल पड़ी। नहीं हम नहीं कर सकते। हर तरफ से आवाज़ आई।  ठीक है मैं बना लूंगी। आप लोग मेरी मदद कर देंगें ना। श्लोका ने हेल्पर से पूछा। हां, हम सिर्फ मदद करेंगें खाना नहीं बनाएंगे। उन्होंने जल्दी से कहा। ठीक है। कहते ही श्लोका सब सामान देखने लगी। और फिर फटाफट हेल्पर को काम बताने लगी। शिवाय दूर खड़े सब देख रहे थे। आइये आज हम लोग खाना बनाते हैं। सुधीर जी ने जब देखा कि श्लोका अकेले कर रही है। तो आगे उस के पास आ गये। उन के साथ और भी अंकल लोग आ गये।  श्लोका सब को काम बताने लगी। थोड़ी देर बाद वहां का माहौल बदल चुका था। हर कोई कुछ ना कुछ कर रहा था। साथ ही साथ वहां पर हंसी मज़ाक भी चल रहा था।...

धड़कन | भाग 39 | Dhadkan Part 39 | Heart Touching Hindi Love Story

  तुम को मुझ पर भरोसा नहीं है। क्यों तुम ऐसा करती हो। मैंने हमेशा देखा है तुम मुझ से बहुत कुछ छुपा जाती है। वैसे एक बात बता दूं मुझे तुम्हारी जासूसी करने का कोई शौक नहीं है। मुझे तुम्हारा पासपोर्ट बनवाना था इस लिए पूछा। कहते ही शिवाय गुस्से से बाहर निकल जाते हैं। श्लोका शिवाय को जाता देखती है। वह खामोश वहीं खड़ी रह जाती है। और फिर तुरंत फैसला कर लेती है और अलमारी से अपना पासपोर्ट निकाल कर सीधे शिवाय के रुम में जाती है। शिवाय वहीं सोफे पर सिर पर हाथ रखे बैठे हुए थे। शिवाय को खुद पर गुस्सा आ रहा था कि उस ने कैसे श्लोका से इस तरह बात की। श्लोका शिवाय के सामने टेबल पर अपना पासपोर्ट और पेपर रख कर वापस अपने रूम में आ जाती है और रुम लॉक कर लेती है। और बेड पर बैठ जाती है उसकी आंख में आंसू थे। वह समझ नहीं पा रही थी कि इन सब बातों का क्या हल है। वह शिवाय के सामने अपनी सच्चाई क्यों नहीं ला रही। मैं मानती हूं शिवाय की आप मुझ से प्यार करते हैं। लेकिन सिर्फ मानने से नहीं होता है। आप एक बार कह दें कि आप मुझ से प्यार करते हैं फिर मैं सब कुछ आप से बोल दूंगी। कुछ भी नहीं छुपाउंगी।  श्लोका की आं...

इश्क जान | भाग 12 | Ishq Jaan Part 12 | Heartfelt Romance & Wedding Story

शजल की नज़र भी परमजीत की ओर उठ जाती है। लेकिन उसकी मुस्कान गायब हो चुकी थी। परमजीत ने भी उसे देखा। दोनों की आंखें मिली। एक पल... सिर्फ एक पल के लिए... लेकिन उस एक पल में जैसे पिछले सारे साल लौट आए। वो मुहब्बत... वो इन्तेज़ार... वो जुदाई... और वह अधूरी कहानी... शजल ने जल्दी से अपनी नज़रें फेर लीं। लेकिन उसके दिल में एक सवाल जन्म ले चुका था। क्या "शानवी" सिर्फ एक नाम था? या... परमजीत ने आज भी अपने दिल में "शजल" को कहीं ज़िदा रखा था? दोनों की निगाहें मिलते ही दोनों के दिल में एक तरंग बज जाती है। उनके दिल की वह तरंग जिसे वह दोनों कोई नाम नहीं देना चाहते थे। वह बेनकम सी तरंग उनके दिल की वह आवाज़ थी। जिसे वह अब सुनना नहीं चाहते थे। मगर वह तरंग उन्हें बहुत कुछ याद दिला रही थी। परमजीत आप इसे लें। मैं इसका दूसरा ड्रेस लेकर आती हूं। लगता है इसे इस कपड़े से परेशानी है। अमृत शानवी को रोता देख उसे परमजीत को देकर चली जाती है। अपनी ज़िंदगी से खुश हो? अमृत के जाते ही परमजीत शजल से पूछता है। हां। बहुत खुश हूं। लेकिन तुमने यह क्यों पूछा। शजल को उसका सवाल थोड़ा अजीब लगा। तुम्हारी यह झ...

इश्क जान | भाग 9 | Ishq Jaan Part 9 | Heartfelt Romance & Wedding Story

काश वह मां को मना लेता। पछतावा उस के दिल में घिर कर गया। वह सामने से नज़र हटा कर मेहमानों से बातें करने लगा।  शादी मुबारक हो परमजीत.... परमजीत के कानों में एक मीठी सी खनकती आवाज़ आई।  उस ने आवाज़ की तरफ देखा। और देखते ही उसके चेहरे का रंग बदल गया। उसका मुस्कुराता चेहरा कहीं बहुत पीछे चला गया। वह थैंक्स भी ना कह सका।  शजल की आंखों से कुछ भी न छिप सका। दुल्हन किसी और से बातों में बिज़ी थी। परमजीत को मौका मिल गया। खुद को नार्मल करने का। सुनो...शजल मुड़ी तो परमजीत ने आवाज़ दे दी। वह ठहर गई, लेकिन मुड़ी नहीं। क्योंकि इस वक्त वह इस पोज़ीशन में नहीं थी कि परमजीत से नज़र मिला सके वरना उसका वह राज़ जो उस के दिल में था खुल जाता। वह अपनी मुहब्बत को रूसवा नहीं करना चाहती थी। बड़ी मुश्किल से वह खुद को स्टेज तक लाई थी। तुम को भी एडवांस में शादी की मुबारकबाद... परमजीत मुस्कुराया। एक खोखली मुस्कान...जिस के पीछे ना जाने कितने अरमान दम तोड़ गए। मैं आई ना... आप को भी आना है। एक झटके से वह मुड़ी। और अपनी बात कह कर वापस घूम कर स्टेज से उतर गई। उसका जवाब सुने बिना। और परमजीत अपने अंदर के टीसों...

धड़कन | भाग 13 | Dhadkan Part 13 | Heart Touching Hindi Love Story

लेकिन शिवाय सिर्फ उसे देखता रहा। मेरे अंदर कोई फीलिंग कोई जज़्बात नहीं है मैं प्यार को नहीं समझता। मैं सारी ज़िन्दगी प्यार के लिए तरसता रहा। और तुम ने इतनी आसानी से कह दिया कि मेरा दिल पत्थर है। शिवाय की नज़र श्लोका पर थी। और दिमाग अमोल की बातों की ओर था। श्लोका ने गाड़ी स्टार्ट कर दी।  तुम कहीं जा रही थी? हूं.... कहां? है एक जगह.... मुझे नहीं बताओगी? अभी नहीं.... भरोसा नहीं मुझ पर? है.... तब फिर क्यों नहीं? बस यूं ही.... डैड से पूछ लूं? आप की मर्ज़ी.... वह मुझे बताएंगे? नहीं पता..... तुम बता दो प्लीज़। नहीं.... ओ के। दोनों की नज़र एक दूसरे पर थे। दोनों ही एक दूसरे के करीब थे। मगर फिर भी बहुत दूर। गाड़ी एक टी स्टॉल पर रूक गई। दो चाय देना। और साथ में मलाई टोस्ट। श्लोका ने आवाज़ देकर कहा। यहां की चाय पियोगी? शिवाय ने हैरानी से पूछा। उस ने आज तक इस तरह की टी स्टॉल से चाय नहीं पी थी। हां, हम दोनों। श्लोका ने अपने और शिवाय की तरफ इशारा किया। लेकिन.... चलो कहीं बैठ कर पीते हैं। किसी कैफे चलो। शिवाय ने रिक्वेस्ट की। नहीं आज हम यहीं पियेंगे। श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा। उसी वक्त मलाई टोस...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 62 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 62 | Hindi Romantic Story

मैं सब कुछ छोड़ के जा रहा हूं। सब कुछ तुम्हारे हवाले करके। तुम शायद सही कह रहे हो… मुझे सब कुछ बना बनाया मिला था। तो अब मैं खुद को परखने जा रहा हूं।  लेकिन… जैसे ही मैं खुद को परख लूंगा, मैं वापस आ जाऊंगा।  चलो श्लोका…शिवाय कहते ही श्लोका का हाथ पकड़ते हैं। लेकिन…श्लोका शिवाय का हाथ हटा देती है। शिवाय हैरानी से श्लोका को देखते हैं, और खामोशी से तन्हा आगे बढ़ जाते हैं। आप कहां अकड़ कर जा रहे हैं शिवाय सर…पूरा बैंक तो आपकी पाकेट में है। काजल एक और तीर चलाती है। शिवाय पलट कर प्रेम को एक नज़र देखते हैं जो खामोश खड़ा था। और फिर अपनी पैंट की पाकेट से अपना वालेट निकाल कर वहीं सोफे पर रख देते हैं। और फिर अपना फोन भी वहीं पर रख देते हैं। और आगे बढ़ते हैं। कुछ सोच कर दो मिनट रूकते हैं। और अपना कोट उतार कर वहीं पास रखे सोफे पर रख देते हैं। अब इस की भी ज़रूरत नहीं है… शायद.... कहते ही शिवाय बाहर की तरफ तेज़ी से बढ़ते हैं। क्योंकि अगर वह थोड़ा भी ठहरते तो शायद वह अपने फैसले पर कायम ना रह पाते। क्योंकि पीछे उनकी श्लोका खड़ी थी।  श्लोका मुझे लगा था कि तुम मेरा साथ दोगी…लेकिन यहां पर मैं...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 29 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 29 | Hindi Romantic Story

शिवाय हाथ बढ़ाकर उसके बालों से क्लैचर निकाल देते हैं।बिना कुछ बोले।  शिवन्या के कदम ठहर जाते हैं। सुबह की बात के लिए सॉरी... लेकिन शिवन्या कोई जवाब दिये बिना आगे बढ़ जाती है।  रूको एक मिनट प्लीज़.... शिवन्या रूकती है लेकिन शिवाय की तरफ देखे बिना खडी़ रहती है। मेरी तरफ देखो। शिवाय के होंठों पर मुस्कान आ गई। उसकी नाराज़गी देख कर। शिवन्या शिवाय की तरफ मुड़ती है। मेरी बेबसी देख कर खुशी हो रही है। कहते ही शिवन्या जाने के लिए मुड़ जाती है। यह मुस्कान तुम्हारी नाराज़गी दूर करने के लिए है। तुम्हारी बेबसी पर मुझे खुशी होगी? इतना ही जान पाई मुझे। कहते ही शिवाय कॉफी का मग उठा कर उससे पहले आगे बढ़ जाते हैं। और वह वहीं खामोश खड़ी देखती रह जाती है। सुबह शिवाय उठते हैं तो देखते हैं न शिवन्या थी और ना ही सनी था। उनका नाश्ता टेबल पर रखा हुआ था।  नाश्ता करते ही शिवाय आफिस चले गए। ❤️ अब तुम भी मुझे छोड़ रहे हो। लंच टाइम शिवाय आदर्श को देख कर कहते हैं। किसने कहा? आदर्श हैरान हुए। मैं देख रहा हूं। अच्छा.... आदर्श हंसे। आओ लंच करते हैं। आदर्श प्लेट में खाना निकालने लगते हैं। शिवाय भी खामोशी से...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 28 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 28 | Hindi Romantic Story

आदर्श की कोई मीटिंग नहीं थी। वह बैठे आगे की बातों पर गौर करने लगे। क्योंकि उसे पता था कि शिवाय एक बार फिर उसी के सामने अपनी उलझन ले कर आयेंगे। और वह चाहता था कि वह उसे सही राय दे सकें। जो शिवाय के लिए बेहतर हो। ❤️ शिवाय एक नज़र घड़ी पर डालते हैं। और उठ खड़े होते हैं। बहुत देर हो गई अब घर जाना चाहिए। इतनी देर हो गई। आदर्श ने भी घर जाना याद नहीं कराया। लगता है वह भी काम में बिज़ी है। यही सब सोचते हुए शिवाय आदर्श के केबिन में जाते हैं। लेकिन वहां जाकर उन्हें और हैरानी होती है। क्योंकि आदर्श वहां नहीं थे। आदर्श तुम मुझे अकेला नहीं छोड़ सकते। इतना तो मैं जानता हूं। लेकिन आज तुम मुझ से बिना मिले चले गये।यह बात समझ नहीं आ रही है। शिवाय बाहर जाकर लिफ्ट की तरफ जाते हुए सोचते हैं। घर जाकर शिवाय को घर का माहौल कुछ बदला हुआ लगा। कोई आया था क्या? यही सोचते हुए शिवाय अपने रूम में चले जाते हैं। चेंज करके तुरंत बाहर जाते हैं। इधर-उधर देखते हैं। शिवन्या चिकन में कुछ कर रही थी। शिवाय उसी के पास जाकर खड़े हो गए। कोई आया था क्या? एक नज़र शिवन्या पर डाल कर पूछते हैं। सनी आया है। शिवन्या तेज़ी से अंडे को फे...

डोर धड़कन से बंधी | Part 68 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 68 | Hindi Romantic Story

कोई बात नहीं आओ बैठो। शिवाय ने कुर्सी की तरफ इशारा किया। और सुकून से कॉफी पीने लगे।  वह चुपचाप बैठा उन की कॉफी खत्म होने का इंतेज़ार करने लगा कि कब उन की कॉफी खत्म हो, और वह बात शुरू करें। लेकिन शिवाय बहुत सुकून से कॉफी पी रहे थे, वह देखना चाहते थे कि उसमें कितना सब्र है। सब्र वाले बंदे हो…कॉफी का मग रखते हुए शिवाय सोचते हैं, और मुस्कुरा कर उसे देखते हैं। एक महीने बाद अगर चप्पल की दुकान ही करनी है, तो फिर क्यों ना इस एक महीने का फायदा उठाओ। जो नौकरी एक साल में नहीं मिली, वह एक महीने में मिलने से रही।  और अगर मिल भी गई तो कौन सा तुम राजा हो जाओगे। शिवाय उसे हर तरह से परख रहे थे। वह कुछ नहीं बोला, चुपचाप शिवाय के आगे बोलने का इंतेज़ार करता रहा। मुझे अपना वर्क दिखाओ…शिवाय ने फैसला ले लिया। वह उठा और चुपचाप बाहर चला गया। और तुरंत लैपटॉप लेकर वापस आ गया। और उसमे कुछ देखने लगा, और फिर लैपटॉप शिवाय के सामने कर देता है। शिवाय और श्लोका दोनों उस के वर्क को देखकर हैरान रह जाते हैं। बहुत खूबसूरत वर्क था। तुम अपनी एक कम्पनी बनाओ…उसका अच्छा सा नाम रखो, बैंक में एकाउंट खोलो, आठ दस लेडिस शर्...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 66 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 66 | Hindi Romantic Story

तभी बाहर से हाजी साहेब के तेज़-तेज़ बोलने की आवाज़ें आने लगती हैं। शायद वह लोग बाहर ही थे। कमरा इतना पास था कि बाहर की आवाज़ आसानी से अंदर आ रही थी। एक तो मियां तुम कुछ करोगे नहीं, ऊपर से तुम्हारी अम्मा दरियादिली दिखाते हुए चूड़ियां भी वापस कर आई हैं। सोचा था एडवांस के पैसों से दुकान किराए पर लेकर तुम को उस दुकान पर लगा दूंगा। लेकिन तुम्हारी अम्मा ने सब चौपट कर दिया। मैंने दुकान के लिए बात कर लिया है। पैसों का इन्तेज़ाम हो जाए तो दुकान पर लग जाओ। बहुत सुन ली मैंने तुम्हारी बात, अब और नहीं। हाजी साहेब गुस्से में बोलते जा रहे थे। नानू मुझे थोड़ा सा और वक्त दे दीजिए, मैं कोशिश कर रहा हूं, जल्द ही कोई अच्छी जॉब मिल जायेगी। मैं यह चप्पल की दुकान नहीं चला सकता। राहिल नाराज़गी से कहता है। तुम्हारे कहने पर कब से इंतेज़ार कर रहा हूं, अब और नहीं। तुम अपनी डिग्रियों और शौक को लपेट कर गंगा में फेंक आओ। और चुपचाप से दुकान सम्भालो।  हाजी साहेब एक बार फिर नाराज़ हुए। अम्मा…राहिल असमा की तरफ मदद के लिए देखता है। बहुत सुन लिया तुम्हारी, और तुम्हारे अम्मा की बात, अब और नहीं।  हाजी साहेब आज बहुत...