इश्क जान | भाग 5 | Ishq Jaan Part 5 | Heartfelt Romance & Wedding Story
यह कैसी कशमकश है। जो उसे बेचैन कर रही है। यह कैसी उलझन है। जो सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। दिलों के इस बाज़ार में यह कैसी सौदागिरी है। उसका मन बहुत सारे सवालों से घिरा हुआ था। मगर वहां पर जवाब देने वाला कोई भी नहीं था। शजल ने यूं ही नज़र इधर उधर धुमाई। शायद उसकी नज़र किसी को ढूंढ रही थी। और फिर वह उसे नज़र आ गया। रज़ील....उसने मन ही मन दोहराया। वह किसी से बातें कर रहा था। शजल एक टिक उसको देखे जा रही थी। शायद शजल के नज़रों की गर्मी थी। या फिर रज़ील के बैचैन दिल की बैचेनी थी कि उसने नज़र उठाई तो देखा शजल उसे देख रही थी। रज़ील का मन मुस्कुरा उठा। उसके अंदर की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। एक बार फिर दोनों की निगाहें मिली। मगर इस बार शजल ने अपनी निगाहें झुका ली। शजल का दिल ज़ोर से धड़का। उसने अपने हथेलियों को एक दूसरे से जकड़ लिया। और अपने अंदर के तूफान को अपने चेहरे पर ज़ाहिर नहीं होने दिया। शजल उठ कर अंदर चली गई। फंक्शन खत्म होने के बाद भी वह लोग बहुत देर तक रूके हुए थे। क्योंकि मम्मी लोग कुछ ज़रूरी बात कर रही थी। और वह ज़रूरी बात ...