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साथी | Saathi – A Heartfelt Story of Love, Choices, and Life

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  साथी... रौशनी स्टाफ रूम में बैठी कॉपी चेक कर रही थी। जब उसे लगा कि किसी की नज़र उस पर है। वह नज़र उठा कर देखती है।  उसने जिसे सोचा वही था। दानिश रहमान.... ऐसे क्या देख रहे हैं? वही जो आज तक नहीं देख पाया। दानिश खोए हुए अंदाज़ में कहते हैं। ऐसा क्या? रौशनी एक नज़र उस पर डाल कर दोबारा  कॉपी पर नज़र जमा देती है। कोई अपने आप को कैसे इतना छुपा सकता है? दानिश अपनी चेयर से उठ कर उस के पास वाली चेयर को थोड़ा दूर करके बैठते हुए पूछते हैं। किस की बात कर रहे हैं सर? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। वैसे भी आप मैथ्स के टीचर है। आप मुझ से ज़्यादा समझ सकते हैं। आप के सब्जेक्ट में तो बहुत कुछ छुपा होता है। रौशनी कहते हुए मुस्कुरा उठी। वैसे किस की बात कर रहे हैं?  दानिश को सीरियस देख कर रौशनी भी सीरियस हो गई। तुम्हारी... दानिश उसे ध्यान से देखते हैं। वह देखना चाहते थे कि इस एक लफ्ज़ का उस पर क्या असर पढ़ता है। रौशनी के चेहरे का रंग एक पल के लिए बदल गया। लेकिन वह तुरंत संभल गई। और अपना चेहरा कॉपी पर झुका लेती है। इधर देखें मेरी तरफ.... दानिश की सख्त आवाज़ उस को हिला गई। मेरी क्लास का टाइम ...

धड़कन | भाग 1| Dhadkan Part 1 | Heart Touching Hindi Love Story

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  हॉर्न के साथ गाड़ी एक बड़े से गेट में दाखिल होती है। गाड़ी रूकते ही दोनों तरफ का गेट खुलता है।  एक तरफ से श्लोका सुमन सिंह और दूसरी तरफ से मिस्टर सुधीर सिंह ओबेरॉय निकलते हैं।  श्लोका सुमन एक नज़र घर पर डालती है। काफी बड़ा और खूबसूरत विला था। दोनों आगे बढ़ते हैं। वादा याद रखना अंकल.... श्लोका सुमन मिस्टर सुधीर सिंह के साथ चलते हुई कहती है।   बहुत बड़ा वादा ले लिया है तुमने सुमन, एक बार सोच लो। और मेरी बात मान लो। मिस्टर सुधीर ने श्लोका सुमन को एक बार फिर समझाया। नहीं, हमारे बीच जो बात हो चुकी है वही फाइनल है। अब उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। श्लोका सुमन ने फैसला सुनाया। ठीक है बेटा, जैसी तुम्हारी इच्छा। सुधीर जी ने हार मानते हुए कहा। बातें करते-करते दोनों अन्दर पहुंच चुके थे।  बड़े से हॉल में पहुंच कर श्लोका सुमन ने एक नज़र चारों तरफ देखा। बीच हॉल में सोफे लगे हुए थे। दो तरफ से सीढ़ियां ऊपर की तरफ जा रही थी। बड़े-बड़े झाड़ फानूस लगे हुए थे। खूबसूरत पेंटिंग्स से वॉल सजी हुई थी।   आओ बेटा, सुधीर जी ने एक तरफ बढ़ते हुए श्लोका सुमन को इशारा करके बुलाया। श्ल...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 17 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 17 | Hindi Romantic Story

आदर्श शिवाय को देखने लगे। उनकी दो साल की दोस्ती है। लेकिन यूं लगता है बरसों पुरानी दोस्ती है। शिवाय के दिल की हर बात आदर्श को पता थी। और आदर्श किसी खज़ाने की तरह हर बात को अपने दिल में छुपाए हुए थे। क्योंकि उन पर शिवाय का विश्वास था। जो उन्हें बाकी रखना था। मैं चलता हूं शिवाय। तुम आराम करो। आदर्श उठ गये।  शिवाय ने आंख खोले बिना हाथ आगे कर दिया। जिसे आदर्श ने थाम लिया।  सब ठीक हो जाएगा दोस्त तुम फिक्र मत करो। आदर्श बहुत यकीन से कहते हैं। शिवाय आंख खोल कर उसे देखते हैं।  कुछ मत सोचो। जो हो रहा है होने दो। मत रोको अपने दिल को। करने दो उसे मनमानी। कहते हुए आदर्श शिवाय का हाथ छोड़ देते हैं। कोई काम हुआ तो फोन करना। अब रात में नहीं आऊंगा। कल सुबह मिलते हैं।  ओ के बाय.... शिवाय ने हाथ हिला दिया। आदर्श बाहर निकल गये। शिवन्या बाहर नहीं थी। आदर्श चुपचाप चले गये। वह  चाहते थे कि अपने सवालों के जवाब वह खुद ढूंढें। शिवन्या खाना लेकर शिवाय के रूम में आती है। आहट पाकर शिवाय आंख खोल देते हैं। शिवन्या प्लेट में निकालने लगती है।  शिवाय खामोशी से उसे देखते हैं।  खाना निक...