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डोर धड़कन से बंधी | Series | Door Dhadkan Se Bandhi | Complete Novel Series

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डोर धड़कन से बंधी एक 101 भागों का रोमांटिक नॉवेल है और यह ‘ धड़कन ’ का सीज़न 2 है। प्यार, रिश्तों, भावनाओं, इंतज़ार और जिंदगी के उतार-चढ़ाव से जुड़ी यह कहानी आपको एक नए सफर पर ले जाएगी। इस पेज पर डोर धड़कन से बंधी के सभी 101 भागों के लिंक एक ही जगह दिए गए हैं, ताकि आप नॉवेल को आसानी से भाग 1 से अंत तक पढ़ सकें। अगर आपने ‘ धड़कन ’ नहीं पढ़ी है, तो इसे पढ़ने के साथ शिवाय और श्लोका की खूबसूरत प्रेम कहानी ‘धड़कन’ भी ज़रूर पढ़ें, क्योंकि ‘डोर धड़कन से बंधी’ उसी कहानी का सीज़न 2 है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपना पसंदीदा भाग पढ़ें और कहानी के इस खूबसूरत सफर से जुड़ जाएँ। डोर धड़कन से बंधी भाग 1 डोर धड़कन से बंधी भाग 2 डोर धड़कन से बंधी भाग 3 डोर धड़कन से बंधी भाग 4 डोर धड़कन से बंधी भाग 5 डोर धड़कन से बंधी भाग 6 डोर धड़कन से बंधी भाग 7 डोर धड़कन से बंधी भाग 8 डोर धड़कन से बंधी भाग 9 डोर धड़कन से बंधी भाग 10 डोर धड़कन से बंधी भाग 11 डोर धड़कन से बंधी भाग 12 डोर धड़कन से बंधी भाग 13 डोर धड़कन से बंधी भाग 14 डोर धड़कन से बंधी भाग 15 डोर धड़कन से बंधी भाग 16 डोर धड़कन से बंधी भाग 17 डोर...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 93 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 93 | Hindi Romantic Story

गाड़ी चलाते हुए उसका मन बिल्कुल शांत था। लेकिन अचानक उसकी आंखों के सामने कई सारे मंज़र आ गए। जिसे वह नज़रंदाज़ करना चाहता था। लेकिन वह लम्हें उस की आंखों में गर्दिश कर रहे थे। अचानक उसकी आंखों में बहुत सारा पानी आ गया। और उसकी आंखें धुंधला गई। वह जल्दी से आंख में आए आंसुओं को साफ करता है। और सामने देखने लगता है।  काश! तुम मेरी ज़िन्दगी में ना आई होती काजल… तो आज मेरी यह हालत ना होती। तुम ने मुझ से मेरी हर खुशी छीन ली।  गाड़ी चलाते हुए प्रेम का मन भटका हुआ था। वह चाह रहा था कि वह काजल को भूल जाए मगर ऐसा हो नहीं रहा था।  काजल की बेवफाई उसे तोड़ गई थी। वह सीधा आफिस चला गया। वहां जाकर अपनी जगह पर बैठते हुए वह नताशा के चेयर की ओर देखता है। और आंख बन्द कर लेता है।  ♥️ शाम को श्लोका और काजल गांव से आ गई थीं। और बाहर खड़ी शिवाय का इंतेज़ार कर रही थीं। उसी वक्त प्रेम की गाड़ी रूकती है जो डैड को लेने एयरपोर्ट गया है। शिवाय गाड़ी से निकल कर सीधे श्लोका की तरफ जाते हैं। श्लोका के गले लगकर मिलने के बाद वह पूजा से मिलते हैं और सब अंदर चले जाते हैं। थोड़ी देर सब से बात करने के बाद ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 86 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 86 | Hindi Romantic Story

आज की रात बहुत मुश्किल भरी रात थी। हर कोई परेशान था। हर कोई जाग रहा था। अगली सुबह का सूरज एक नई उम्मीद एक नई रौशनी के साथ रौशन होगा। इसी उम्मीद के साथ हर कोई सुबह होने का इंतेज़ार कर रहा था। लेकिन शायद आज की रात बहुत लम्बी थी।  ♥️ श्लोका हाउस के गेट पर जैसे ही गाड़ी रूकती है। श्लोका शिवाय के बाहर निकलते ही प्रेम दौड़ कर श्लोका के गले लग जाता है। और पूजा शिवाय का हाथ थाम लेती है। सब अंदर जाते हैं। अंदर जाकर प्रेम शिवाय के गले लग जाता है। मुझे माफ कर दें प्लीज़…मैंने बहुत बड़ी गलती की है। प्रेम रो देता है। मेरा बच्चा…श्लोका भी दूसरी तरफ से प्रेम को थाम लेती है। कोई बात नहीं…गलतियां इंसान से ही होती हैं। शिवाय उसकी पीठ थपथपाते हुए कहते हैं। और वहीं सोफे पर बैठ जाते हैं। मौम काजल ने मुझे अंदर जाने नहीं दिया। मैं उस से प्यार करता था। मैंने हमेशा उसका ख्याल रखा था। लेकिन वह मुझे धोखा दे गई। उसका प्यार झूठा था मौम… मां को देख कर प्रेम के दर्द जाग उठे। मुहब्बत एक बहुत ही प्यारी और खूबसूरत चीज़ है।  मुहब्बत… जो किसी को मिल जाए तो इंसान को खुशकिस्मत समझना चाहिए। काजल बदनसीब है जो तुम्हा...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 84 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 84 | Hindi Romantic Story

अब तुम सब इंज्वॉय करो, हम थोड़ा आराम करके गांव के लिए निकल जायेंगे। शिवाय अंदर की तरफ जाते हुए कहते हैं। साथ में श्लोका भी बढ़ जाती है। अंदर कहां जा रहे हैं मिस्टर शिवाय सिंह ओबेरॉय?… काजल की तेज़ आवाज़ उन के कदम रोक देती है। साथ ही साथ हर किसी की नज़र काजल पर उठ जाती है। ओबेरॉय मेंशन अब मेरा है। और मैं नहीं चाहती कि कोई बाहर का आदमी मेरे घर में रहे। काजल मुस्कुरा कर शिवाय से कहती है। काजल यह क्या कह रही हो? प्रेम जल्दी से उसके पास जाकर कहता है।  शायद तुम ने ठीक से सुना नहीं मिस्टर प्रेम सिंह ओबेरॉय यह घर अब मेरा है। काजल एक बार फिर कहती है। काजल यह घर हमने तुम्हारे नाम कर दिया है लेकिन हम सब यहां साथ में रहेंगे। प्रेम को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि वह काजल को कैसे समझाए। चलो श्लोका…शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर बाहर की तरफ मुड़ते हैं। नहीं डैड आप कहीं नहीं जायेंगे। हम सब यहीं पर साथ में रहेंगे। प्रेम श्लोका का हाथ पकड़ कर अंदर की तरफ बढ़ता है। नहीं प्रेम तुम और काजल यहां पर रहो। हम को गांव के लिए निकलना है। श्लोका प्रेम का हाथ छुड़ा कर वापस मुड़ जाती है। हर कोई खामोश रहता है क्योंकि श...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 83 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 83 | Hindi Romantic Story

ज़िन्दगी हर मुश्किल हर परेशानी से गुज़र जाती है अगर साथ एक सच्चा दोस्त हो। शिवाय और आदर्श की दोस्ती भी ऐसी ही थी। यह दोनों जब तक साथ हों। इन को किसी और की ज़रूरत नहीं पड़ती।  दोनों घर पहुंचते ही सीधे ऊपर उन के रूम में चले गए। उनका कमरा पूरा सजा हुआ था। आदर्श केक पूजा को देते हैं। प्रेम और काजल भी वहीं पर थे। पूजा टेबल पर केक रख कर शिवाय और श्लोका को आगे करती है। अमोल अराध्या की भी फैमिली आ गई थी। सुधीर जी और ममता जी पहले ही आ गए थे।  केक कटने के बाद सब ने एक दूसरे को केक खिलाई।  संडे शाम को प्रेम की सगाई है सब लोग तैयारी कर लें। शिवाय प्रेम को केक खिलाते हुए कहते हैं। क्या सच में? प्रेम खुशी से कहता है। हां, सच में…सगाई का फंक्शन घर के बाहर लॉन में होगा। जिस में सिर्फ घर के ही लोग रहेंगे। शिवाय ने पूरी बात बताई। संडे बतलब परसों? पूजा हैरानी से पूछती है। हां, क्योंकि उसी रात पार्टी खत्म होते ही हम गांव के लिए निकल जायेंगे। अगले दिन वहां पर स्कूल का उद्घाटन करना है। ताकि स्कूल में एडमिशन स्टार्ट हो जाए। मैं चाहता हूं वहां पर सारे काम अच्छे से हो जाएं। क्योंकि अगले हफ्ते मुझ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 81 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 81 | Hindi Romantic Story

शिवाय और श्लोका तैयार होकर जैसे ही सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं पूजा दौड़ कर सीढ़ियां चढ़ते हुए उन दोनों के गले लग जाती है। बेतहाशा आंसू उसकी आंखों से बह निकले। दोनों खामोशी से उसे थामे नीचे उतरते हैं। हर कोई नीचे हॉल में बैठा उन्हें देख रहा था। नीचे उतरते ही शिवाय पहले सुधीर जी के पास जाते हैं और झुक कर उन के गले लग जाते हैं। मौम, अराध्या, अमोल हेमंत,अशोक,रवि सबसे मिलते हुए आदर्श के पास पहुंचते हैं। दोनों दोस्त कितनी ही देर गले लगे रहे। प्रेम भी उनके गले लग जाता है। आखिर मौम डैड थे उसके। काजल भी आकर गले लग जाती है। वहां पर बिल्कुल खामोशी थी। हर किसी के मन में हज़ारों सवाल थे। मगर बात शुरू कहां से करें यह समझ नहीं आ रहा था। शिवाय दामाद को तो तुम भूल ही गए। आरव को अंदर आता देख आदर्श हंसते हुए कहते हैं। डैड…आरव तेज़ी से शिवाय के पास जाकर उन के गले लग जाता है। पूजा वहीं पास में श्लोका और शिवाय के बीच में बैठी थी। कैसा है मेरा दामाद? शिवाय आरव को भी पास बैठाकर धीरे से पूजा से पूछते हैं। डैड…पूजा शर्मा जाती है। और उसकी शर्म और चेहरे की खुशी देखकर शिवाय और श्लोका के मन में सुकून उतर आता है। इध...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 51 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 51 | Hindi Romantic Story

शिवाय के अंदर तक सुकून उतर आया था। बरसों से उसका तरसा हुआ दिल आज हर खुशी पा गया था।  मैं भी निकलूं फिर? मुग्धा को कुछ शापिंग करनी थी। उस के साथ जाना है। आदर्श शिवाय के करीब आए। हां ठीक है जाओ। शिवाय उठ खड़े हुए। तुम भी आराम करो। कल तुम्हारी शादी है। आदर्श श्लोका को देखकर शिवाय से कहते हैं। हूं, शिवाय मुस्कुराए। शादी के बाद हम इंडिया चले जायेंगे। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं। ठीक है फिर मैं भी वहीं शिफ्ट हो जाता हूं। आदर्श ने नार्मली कहा। तुम क्यों चलोगे? तुम यहां रहो। शिवाय हैरान हुए। क्योंकि मैं चाहता हू कि मेरा बच्चा अपने देश में जन्म ले। आदर्श अपनी मुस्कान छुपा कर कहते हैं। क्या सच में……शिवाय उसकी बात सुन कर खुश हुए, लेकिन इंडिया जाने की बात हैरान किए हुए थे। हां, मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकता शिवाय, मुझे तुम्हारी आदत हो गई है।  मुग्धा भी यही चाहती है। आदर्श खुशी से कहते हैं। शिवाय हैरानी से आदर्श को देखते हैं। और फिर उसे गले लगा लेते हैं। कितनी ही देर दोनों गले लगे रहे। श्लोका अपनी बेड पर बैठी दोनों दोस्तों की मुहब्बत को देख रही थी। आता हूं फिर……आदर्श शिवाय से अलग ह...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 50 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 50 | Hindi Romantic Story

उसी दोस्ती के नाते शिवाय हमें छोड़ दें। पुलिस के हवाले ना करें। वरना हम कभी जेल से वापस नहीं आ पायेंगे। सुमन एक बार फिर गिड़गिड़ाती है। लेकिन शिवाय जवाब देने के बजाए आगे बढ़ते हैं। और अनु का हाथ पकड़ कर बाहर निकल जाते हैं। …… शिवाय अब तुम घर जाकर आराम करो। मैं श्लोका के पास रहूंगा।  शिवाय के हास्पिटल पहुंचते ही सुधीर जी कहते हैं। नहीं डैड आप घर जाएं। मैं यहीं रहूंगा। शिवाय वहीं चेयर पर बैठते हुए कहते हैं।  शिवाय तुम थक चुके हो। कई रातों के जगे हो तुम। प्लीज़ यार तुम चले जाओ। आदर्श शिवाय से रिक्वेस्ट करते हैं। तुम भी जाओ आराम करो। तुम भी थक गए हो। शिवाय आदर्श की बात को अनसुनी करते हुए अपनी बात कहते हैं। और तुम जो थके हुए हो? बीमार हो गए तो? आदर्श उस के करीब जाकर कंधे पर हाथ रख कर नाराज़गी से पूछते हैं। मेरा ध्यान रखने वाली आ गई है। शिवाय मुस्कुराए। आदर्श उसे देखते रह गए। मुहब्बत भी क्या चीज़ है। इंसान में नई जान डाल देता है। श्लोका को कल सुबह रुम में शिफ्ट करेंगे। आदर्श बताते हैं। श्लोका के पास रुम में नहीं जाओगे? आदर्श शिवाय से पूछते हैं। जाऊंगा। पहले तुम लोगों को यहां से भेज ...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 49

तो फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ। शिवाय एक झटके से खड़े होकर कोट से पिस्तौल निकाल कर उस पर तान देते हैं। शिवाय आप यह क्या कर रहे हैं? वह डर कर कहती है। वही जो तुमने कहा था...  नहीं शिवाय पहले बैठें। हम इतनें दिनों बाद मिले हैं। मौत के मुंह से मैं वापस आई हूं और आप.... वह इमोशनल होती है। अगर मुझ से सच्चा प्यार करती हो तो... तुम को मरना होगा। शिवाय बहुत आराम से कहते हैं। हठें, मैं जा रही हूं...जब आपका दिमाग ठिकाने आ जाए तो बता देना। श्लोका गुस्से से कहकर बाहर की ओर जाने लगती है। कहां चलीं मैडम.... शिवाय से इतना प्रेम करती हैं। लेकिन उसके लिए मर नहीं सकती यह कैसा प्रेम है। प्रेम तो कुर्बानी मांगता है। आदर्श उसे अंदर की तरफ ढकेलते हुए कहते हैं। आप लोग क्या बातें कर रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा। अब वह सचमुच डर गई थी। यह श्लोका वाला खेल खेलने की वजह? आदर्श सीधे मुद्दे पर आ जाते हैं। यह कोई खेल नहीं हकीकत है। मैं श्लोका ही हूं। और अगर शिवाय को अब मैं पसंद नहीं तो मुझे भी कोई शौक नहीं है इससे शादी करने का। मैं जा रही हूं। कहते ही एक बार फिर वह बाहर की तरफ बढ़ी। अपनी आंटी का एड्रेस बताओ। ज़र...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 48 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 48 | Hindi Romantic Story

कुछ रिश्ते वक्त के इंतेज़ार में होते हैं... और जब वह लौटते हैं, तो मुकम्मल हो जाते हैं। उसने मन ही मन कहा। .... आदर्श तैयारी हो गई? शिवाय फोन पर मैसेज टाइप करते-करते पूछते हैं। हां, हो गई। आदर्श ने अंगूठा दिखाया। गुड, अभी रवि, हेमंत और अशोक भी आ रहे हैं। फिर हम निकलते हैं। शिवाय के मन में बहुत कुछ चल रहा था। उसी वक्त उस के दोस्त आ जाते हैं। और आते ही तीनों एक साथ शिवाय के गले लग जाते हैं। आदर्श दूर खड़े यह मंज़र देख कर मुस्कुरा देते हैं। सच में सच्चे दोस्त बहुत बड़ी दौलत हैं। अचानक शिवाय की नज़र आदर्श पर पड़ती है। जो दूर खड़ा उन को देख रहा था। आदर्श.... आदर्श भी मुस्कुरा कर उन सब के साथ गले लग गए। तभी.... कुछ प्यार मेरे लिए भी बचा है? पीछे से आवाज़ आती है। सब पलट कर देखते हैं। सुधीर जी बाहें फैलाए खड़े थे। डैड.... शिवाय तेज़ी से उनके पास जाकर उन की बाहों में लिपट जाते हैं। दोनों की आंखें नम थीं, लेकिन  दोनों ही मुस्कुरा भी रहे  थे। डैड आप यहीं रूकें। हम आते हैं। शिवाय घड़ी देख कर कहते हैं। हां ठीक है, तुम लोग जाओ। मैं यहीं हूं। श्लोका के पास।तुम्हारी मौम, अराध्या और अमोल घर पर...

डोर धड़कन से बंधी भाग | 47 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 47 | Hindi Romantic Story

उसके कानों में आग की सिसकारियां और किसी पुराने, दर्दनाक लम्हे की टूटी हुई तस्वीरें गूंज रही थीं। शेफ अपना काम कर रहे थे। आग एक बार फिर तेज़ हुई।  शिवाय..... शिवन्या की चींख पूरे हॉल में गुंज गई। शिवाय और आदर्श उठ कर उसकी तरफ जाते हैं। वह बेहोश हो चुकी थी। शिवन्या, शिवन्या... आंखें खोलो.... शिवाय उसे आवाज़ देता जा रहा था। आदर्श गाड़ी निकालो। शिवाय को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि यह अचानक से बेहोश क्यों हो गई। होटल के मैनेजर भी आ गये।  शिवाय शिवन्या को गोद में उठा कर बाहर की ओर निकले। गाड़ी में उस को लिटाकर वह सब जल्दी-जल्दी बैठ जाते हैं। आदर्श तेज़ चलाओ। शिवाय पीछे बैठ कर शिवन्या का सिर अपनी गोद में रखे उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहते हैं। लेकिन आदर्श जवाब देने के बजाए पूरा ध्यान ड्राइव पर देते हैं। वैसे भी शिवन्या के बेहोश होने पर उसे टेंशन हो गई थी। आज डॉक्टर खन्ना भी आ रहे हैं। और आज ही शिवन्या की यह हालत... आदर्श को कुछ समझ नहीं आ रहा था। हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टर ने देखा। और देखते ही उसे आई सी यू में लेकर चले गए। आदर्श यह ठीक हो जायेगी ना?  शिवाय रोते हुए कहते हैं। कब...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 46 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 46 | Hindi Romantic Story

दोनों की आंखें भीग चुकी थीं, लेकिन उस भीगने में दर्द से ज़्यादा सुकून था। जैसे दोनों ने अपने हिस्से की सारी तकलीफें एक दूसरे के हाथों में रख दिया हों। और उस रात.... बारिश देर तक होती रही,  मानो आसमान भी उनके इश्क का गवाह बन कर उन्हें आशिर्वाद दे रहा हो। ❤️ शिवाय के आफिस आते ही आदर्श उनके केबिन में आ जाते हैं। आज शाम हम सब बाहर चलेंगे। घूमने के बाद डिनर भी बाहर ही करेंगे। आदर्श शिवाय को बताते हैं। ठीक है बॉस, कुछ और? शिवाय मुस्कुराए। नहीं, डॉक्टर खन्ना की रात की फ्लाइट है। डिनर के बाद मैं और शिवन्या एयरपोर्ट चले जायेंगे। वहां से शिवन्या अपने घर चली जायेगी। और मैं वापस अपने घर.... वैसे आज चेहरे पर चमक पिछले दिनों के मुकाबले ज़्यादा है। कोई खास वजह? आदर्श ने जानना चाहा। उदास रहूं तो बुरा, खुश रहूं तो बुरा। शिवाय ने नाराज़गी जताई। मेरी नज़र तुम्हारे खुफिया कैमरे से भी तेज़ है। आदर्श भी हंसे। कल मैंने वह लम्हें पा लिए जिस की बदौलत मैं सारी ज़िन्दगी गुज़ार दूंगा। शिवाय खो गए उन लम्हों में जब वह शिवन्या के साथ थे। अब ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं। वह खोए हुए ही बोले। ज़रा सोचो अगर वही लम्हे स...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 44 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 44 | Hindi Romantic Story

फैसला हो चुका है। और शिवाय सिंह ओबेरॉय अपना फैसला नहीं बदलते। जब तक कि कोई ठोस वजह ना हो। कहते ही शिवाय लैपटॉप पर नज़र जमा लेते हैं। जिसे आदर्श देखते रह जाते हैं। क्या फायदा ऐसी शादी का जिसमें खुशी ही ना हो। उससे अच्छा तो तुम ऐसे ही ठीक हो। शिवाय को एक नज़र देख कर कहते हुए आदर्श केबिन से बाहर निकल जाते हैं। शिवाय का जवाब सुने बिना। .... कभी-कभी दिन कितना जल्दी बीत जाता है। एक वक्त ऐसा था कि मेरा वक्त नहीं कट रहा था। और अब देखो.... मैं सोच रहा हूं कि वक्त धीरे चले। मगर वह सरपट भाग रहा है। डिनर के बाद कॉफी पीते हुए शिवाय शिवन्या से कहते हैं। शिवन्या खामोशी से शिवाय को देखती है। शायद कहने के लिए उस के पास इस वक्त कुछ नहीं था। देखते ही देखते शादी का दिन भी आ गया।  कल तुम्हारे अंकल आ रहे हैं। कल तुम भी चली जाओगी।  परसों मेरी फैमिली और दोस्त आ रहे हैं।  हर कोई खुश है। तुम को अंकल से मिलने की खुशी है। मेरी फैमिली और दोस्तों को मेरी शादी की खुशी है। और एक मैं हूं....पता नहीं किन उलझनों में उलझा हुआ हूं। बोलते-बोलते शिवाय की आवाज़ भारी हो जाती है। वह जल्दी से अपने आंख की नमी को सा...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 43 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 43 | Hindi Romantic Story

मैं नेक्स्ट वीक श्लोका से शादी कर रहा हूं। आदर्श जैसे ही शिवाय के केबिन में आकर बैठते हैं। शिवाय धमाका करते हैं। क्या? आदर्श हैरानी से देखते हैं। सही सुना तुमने... शिवाय ने यकीन दिलाया। यह अचानक शादी का फैसला? आदर्श की हैरानी कम नहीं हो रही थी। फैसला तो लेना ही था، मैंने ले लिया। श्लोका को भी बोल दिया है।  क्या? आदर्श अपनी जगह से उठ गए। असली शॉक तो अब लगा था। तुम्हारा दिमाग तो ठीक है। उससे भी बोल दिया। आदर्श ने अपना सिर पकड़ लिया। यह चमत्कार किस खुशी में? जब से वह आई है तुम ने उससे ठीक से बात तो की नहीं। और अचानक यह शादी? आदर्श को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे। यही श्लोका है आदर्श....जब मैंने यह जान लिया तो मुझे अच्छा नहीं लगा कि मैं उसे ना अपनाऊं। मैं श्लोका से प्यार करता था। और वह भी करती थी। जो खुशी और सुकून मुझे श्लोका से मिला था। वह मुझे आज तक किसी से नहीं मिला।  और आज जब वह बहुत कुछ सह कर खुद को मिटा कर दोबारा ज़िंदगी पाकर मेरे पास आई तो मैं उसे छोड़ दूं। वह भी इस लिए कि मेरा दिल अब उसे देख कर नहीं धड़कता। उसका चेहरा बदल जाने से मैं उसे ना अपनाऊं। यह तो गलत है आदर्श.....