गुड़ की पिड़या बनाने का आसान तरीका | Gud Ki Pidiya Recipe | पारंपरिक देसी रेसिपी | Step-by-Step Recipe

गुड़ की पिड़या... 
परंपरा, स्वाद और सेहत से भरपूर 



जब सर्दियों की दस्तक होती है, तो भारतीय रसोई में गुड़, घी और मेवों की खुशबू पूरे घर को महका देती है। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है गुड़ की पिड़या। यह सिर्फ़ एक मिठाई नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और घर के बने शुद्ध स्वाद की पहचान है।

गुड़, भुना हुआ आटा, लावा, गोंद, देसी घी और भरपूर मेवों से तैयार की जाने वाली गुड़ की पिड़या स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर होती है। सर्दियों में इसे खाने से शरीर को ऊर्जा और गर्माहट मिलती है। पहले के समय में यह मिठाई घर-घर बनती थी और परिवार के सभी सदस्य मिलकर इसे तैयार करते थे। आज भी इसका वही देसी स्वाद और अपनापन लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

गुड़ की पिड़या वैसे से सर्दियों में बनने वाले खास पकवानों में से एक है। इसी के साथ गुड़ की पिड़या बनारस के मदनपुरा में इसकी एक अलग ही पहचान है। 

मदनपुरा में जब किसी घर में बच्चे का जन्म होता है तो मां को यही गुड़ की पिड़या खाने के लिए दिया जाता है। वहां के लोगों का मानना है कि गुड़ की पिड़या खाने से पेट साफ होता है। साथ ही साथ मेवों और गोंद से तैयार गुड़ की पिड़या फायेदमंद और सेहत से भरपूर भी है।

इसी परंपरा के चलते गुड़ की पिड़या का मदनपुरा में एक खास स्थान है। पहले ज़माने में बच्चा जनने वाली मांओं को छिल्ला में चालीस से पचास पिड़या खाने के लिए दिया जाता था। जिसे वह समय-समय पर खातीं थीं। लेकिन अब ज़माना बदल गया है। अब न ही पिड़या बनाने वाले वैसे पुराने लोग हैं। और न ही पिड़या खाने वाली औरतें हैं। लेकिन आज भी बहुत सारे घरों में छिल्ला वाली औरतों को बीस से पचीस पिड़या खाना के लिए दिया जाता है।

आज वक्त भले ही बदल गया है। लेकिन पुरानी परंपराओं और खान-पान को बहुत सारे लोगों ने अभी भी ज़िन्दा रखा हुआ है।

पुराने ज़माने में खान-पान का ताल्लुक सेहत और पौष्टिक आहार को माना जाता था। लेकिन आज हर चीज़ बदल गई है। आज स्वादिष्ट और मज़ेदार खाने लोगों को ज़्यादा पसंद आते हैं। लेकिन इस सब के बावजूद आज भी पुरानी परंपराएं जीवित हैं। इस बात की खुशी भी है।

नए ज़माने के लोगों को पुरानी चीज़ों से जोड़े रखने और उसे बनाने के सही तरीके को जानने के मकसद से यह सामग्री तैयार की गई है। ताकि आने वाली नस्लें इससे दूर न हों। और इसे आसानी से बना सकें।

इस रेसिपी में हमने 5 किलो गुड़ के अनुसार सभी सामग्री की सही मात्रा, बनाने की पूरी विधि और ज़रूरी सुझाव दिए हैं, ताकि आपकी पिड़या स्वादिष्ट, पौष्टिक और लंबे समय तक सुरक्षित रहे।


सामग्री:-

गुड़      5 किलो

आटा     3 किलो 

तेल       3 किलो

गोंद      400 ग्राम

लावा    आधा किलो  (500 ग्राम)

गरी     आधा किलो  (500 ग्राम) 

काजू    आधा किलो  (500 ग्राम) 

बादाम   आधा किलो  (500 ग्राम) 

चिरौंजी (प्योर मेवा)      250 ग्राम     

खरबूज़ा की चिरौंज़ी     आधा किलो   (500 ग्राम)

पोस्ता दाना      1 पाव  (250 ग्राम)

ज़ीरा   100 ग्राम

सोंठ     ₹10

देसी घी   आधा किलो  (500 ग्राम) 


नोट:- यह सामान पांच किलो गुड़ की पिड़या के लिए है। 



ध्यान में रखने योग्य बातें...
सभी सामग्री पहले से नापकर और तैयार रखें।
आटा हमेशा भारी तले की कड़ाही में धीमी आँच पर ही भूनें।
आटे को लगातार चलाते रहें ताकि वह नीचे से जले नहीं।
लावा को अच्छी तरह कुरकुरा होने तक भूनें, तभी उसका स्वाद निखरकर आएगा।
तेल को पहले अच्छी तरह गर्म करके उसकी कच्ची महक निकाल लें, फिर ज़ीरा डालें।
ज़ीरा केवल हल्का गुलाबी होने तक ही भूनें।
सभी मेवों को साफ़ और सूखा रखें। चाहें तो हल्का भूनकर भी मिला सकते हैं।
मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएँ ताकि हर पिड़या में सभी सामग्री समान रूप से पहुँचे।
पिड़या मिश्रण हल्का गर्म रहते हुए ही बाँधें।
हर पिड़या में पर्याप्त मात्रा में लावा रखें, इससे स्वाद और बनावट दोनों बेहतर होती हैं।



तैयारी....

गुड को मसल लें 





खरबूज़ा की चिरौंजी को थोड़ा सा देसी घी डाल हल्का सा भून लें।


पोस्ता दाना को भी भून लें।

आटे को छान ले।



लावा को धीमा आंच पर चलाते हुए भूनें। जब लगे कि लावा गर्म हो गया है तो उसमें देसी घी डाल कर चलाते हुए तब तक भूनें जब तक कि वह कुरकुरा ना हो जाओ। और अन्दर तक पक ना जाए।




आटे को धीमीं आंच पर चलाते हुए भूनें।



आटे का कलर धीरे-धीरे बदलता जायेगा।



आटा भूनते समय ध्यान दें कि नीचे तली में लगे नहीं।



आटा भूनते समय भारी तली वाली कड़ाई का इस्तेमाल करें। आटे का कलर बदल रहा है।



आटे का कलर बदल गया है। भुना गुलाबी आटा तैयार है।



आटे को एक बार फिर छान लें। ताकि भूनते समय अगर कुछ आटा तली में लग कर जल गया हो तो वह निकल जाये। और पिड़या में ना जाए। आटे को गुड़ में डाल कर अच्छे से मिला लें।



तेल को तेज़ आंच पर गर्म करें। ताकि उसकी झार निकल जाए। उसमें कच्चे तेल वाली महक ना हो। जब लगे कि तेल की झार निकल गई है तब उसमें ज़ीरा डालें। जब ज़ीरा हल्का गुलाबी हो जाए तो तेल को गुड़ आटे में डाल लें।







गोद डालें। पैस्ता दाना डालें। सोंठ डालें।


अच्छे से मिलाएं।


लावा डालें।




सारा मेवा डालें। गरी, काजू, बादाम, चिरौंजी, खरबूज़ा की चिरौंजी सब डाल दें।


अच्छे से मिला लें। पिड़या तैयार है।



इस को गर्मा-गर्म ही लड्डू की तरह बांथ लें। लड्डू और पिड़या में बस फर्क यह है कि लडडू छोटा रहता है और पिड़या बड़ी रहती है।


पिड़या बांधते समय ध्यान दें कि उसमें लावा भी अच्छे से रहे। तभी पिड़या खाना में स्वादिष्ट लगती है। कम लावा की पिड़या बांधते समय अच्छे से बंध तो जाती है मगर खाने में वह स्वाद नहीं आता जो ज़्यादा लावा के साथ खाने में आता है।



आप देख सकते हैं कि गुड़ की पिड़या में भरपूर मात्रा में लावा और सारी चीज़ें दिख रही हैं।





सावधानियाँ...

आटा, लावा और गोंद को तेज़ आँच पर न भूनें, वरना उनका स्वाद खराब हो सकता है।
गुड़ में नमी या गंदगी न हो। आवश्यकता हो तो पहले साफ़ कर लें।
भुने हुए आटे को एक बार अवश्य छान लें ताकि जले हुए कण अलग हो जाएँ।
बहुत अधिक गर्म तेल सीधे गुड़ में न डालें। थोड़ा ठंडा होने पर ही मिलाएँ।
सभी बर्तन और चम्मच पूरी तरह सूखे होने चाहिए।
पिड़या पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें।
नमी वाली जगह पर रखने से पिड़या जल्दी खराब हो सकती है।
यदि किसी मेवे में सीलन या खराब गंध हो, तो उसका उपयोग न करें।
बेहतर स्वाद और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता का गुड़, घी और मेवा ही इस्तेमाल करें।
घर पर बनी गुड़ की पिड़या का स्वाद बाज़ार की मिठाइयों से बिल्कुल अलग होता है। यदि आप पारंपरिक व्यंजनों के शौकीन हैं, तो यह रेसिपी ज़रूर आज़माएँ और अपने परिवार के साथ इस देसी स्वाद का आनंद लें।
टिप्स और ट्रिक्स
स्वादिष्ट पिड़या बनाने के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाला देसी गुड़ इस्तेमाल करें।
आटे को धीमी आँच पर धैर्यपूर्वक भूनें। जल्दबाज़ी में तेज़ आँच पर भूनने से स्वाद खराब हो सकता है।
आटा सुनहरा-गुलाबी होने तक ही भूनें। ज़्यादा भूनने से कड़वाहट आ सकती है।
लावा को कुरकुरा होने तक भूनें, इससे पिड़या की बनावट और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं।
यदि चाहें तो काजू और बादाम को हल्का दरदरा काटकर डालें, इससे हर कौर में मेवों का स्वाद आएगा।
गोंद को तलकर हल्का कूट लें, इससे वह मिश्रण में अच्छी तरह मिल जाता है।
तेल की कच्ची महक पूरी तरह निकल जाने के बाद ही उसे मिश्रण में डालें।
मिश्रण को हाथ से मिलाने से पहले इतना ठंडा होने दें कि हाथ सहन कर सकें, लेकिन पूरी तरह ठंडा न होने दें।
पिड़या बाँधते समय हाथों पर थोड़ा-सा देसी घी लगा लें, इससे मिश्रण चिपकेगा नहीं।
एक जैसी पिड़या बनाने के लिए हर बार लगभग समान मात्रा का मिश्रण लें।
पिड़या पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही एयरटाइट डिब्बे में रखें।
यदि सही तरीके से बनाकर सूखी जगह पर रखा जाए, तो पिड़या कई दिनों तक स्वादिष्ट बनी रहती है।





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