Shad Abbasi's Shayari Hindi Urdu Part 2
मिला कर कदम से कदम चल रहा था
ना जाने अचानक कहां खो गया वह
मुझे शक है थक कर गमे ज़िंदगी से
अकेले में जाकर कहीं सो गया वह
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सलमान रागिब की बीमारी के वक्त....
ना जाने ज़िंदगी की राह में क्या होने वाला है
सितम शम्मे फिरोज़ां पर हवा का होने वाला है
सहर से पहले ही क्यों शमआ की लव क्यों थरथराती है
इलाही! क्या मेरे घर में अंधेरा होने वाला है।
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समझ रहा था यह ज़ादे सफर हमारा है
खुशी से झूमता गाता शज़र हमारा है
बड़ा फरेब दिया उम्र की बहारों ने
बड़े ही फख्र से कहता था घर हमारा है
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मैं खार व गुल के खानों में तकसीम हो गया
लुत्फ़े चमन उठाने में तकसीम हो गया
उमरे रवां की राहे नवरदी को क्या कहूं
मैं मुख्तलिफ खानों में तकसीम हो गया
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राज़े हयात भी मेरे दस्त हुनर में हैं
बीते दिनों के सारे मनाज़िर नज़र में हैं
बचपन से दश्त शौक में गुज़री है ज़िंदगी
कितनी कहानियां मेरे रख्ते सफर में हैं
راز حیات بھی مرے دست ہنر میں ہیں
بیتے دنو کے سارے مناظر نظر میں ہیں
بچپن سے دشت شوق میں گزری ہے زندگی
کتنی کہانیاں مرے رخت سفر میں ہیں
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