डोर धड़कन से बंधी | भाग 76 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 76 | Hindi Romantic Story

दुनिया के हर सच के साथ एक सच यह भी है कि अच्छे लोगों की ज़िंदगी में मुश्किलें ज़्यादा आती है। 

मेरा दोस्त यह आज़माईश भी पार कर लेगा। कहते हुए आदर्श का गला भर आया।

मुग्धा आदर्श को गले लगा लेती है।

उसके साथ जीने की ऐसी आदत हो गई थी कि अब एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा है। आदर्श कहते हुए रो पड़ते हैं।

और मुग्धा… उसके पास तो अल्फाज़ ही नहीं थे जो वह तसल्ली दे सके। क्योंकि आदर्श और शिवाय की दोस्ती को सब से करीब से उसी ने देखा था। 

एक दूसरे को खुशियां देने वाले दोस्त आज अकेले दुख झेल रहे थे।

♥️

आपकी कॉफी…

दरवाज़े पर नॉक के साथ सबा अंदर आकर श्लोका को कॉफी देती है। एक नज़र शिवाय को देखती है जो कोई किताब पढ़ रहे थे।

वह सुकून की सांस लेती है और खामोशी से बाहर जाने लगती है।

सबा…

जी,

वह लड़का कौन था?

कौन लड़का?

वही जिसकी गाड़ी से उतर रही थी।

मेरे साथ कालेज में पढ़ता था।

और अब?

अब नहीं?

क्यों?

वह इंग्लैंड में पढ़ रहा है।

तुम उसके साथ कैसे?

मुझसे मिलने आया था।

मिलने की वजह?

ऐसे ही…

सच बताओ…

कैसा सच?

वही जो है।

और कोई बात नहीं…

ठीक है फिर, कल मुझे उसके पास लेकर चलो।

लेकिन क्यों?

मुझे उससे मिलना है।

क्यों?

जो सवाल मैं तुम से कर रहा हूं, वही सवाल मैं उस से करूंगा।

नहीं, आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे।

तो फिर जो सच है वह बताओ।

वह मुझे पसंद करता है।

और तुम?

हम जैसी लड़कियां ख्वाब ना ही देखें तो अच्छा है। 

वह क्या चाहता है।

मुझ से शादी…

उसके घर वाले राज़ी हैं? 

नहीं …

तो फिर?

वही तो मैं कब से उसे समझा रही हूं कि हमारी शादी नहीं हो सकती। 

वह आसमान का चमकता चांद और मैं ज़मीन का एक ज़र्रा…

लेकिन वह मानने को तैयार ही नहीं है।

वह कहता है वह अपने घर वालों को मना लेगा। लेकिन…

लेकिन क्या?

लेकिन मैं नहीं मान रही।

क्यों?

ऐसी रिश्तों में टेंशन ज़्यादा होती है, और प्यार हर दिन एक इम्तिहान देता है।

उम्र से ज़्यादा समझदार हो…

ज़िन्दगी ने सिखा दिया है।

हूं…

उसका नाम?

राघव सिंघानिया…

पिता का नाम?

अमित सिंघानिया, ऐ आर बिल्डर्स…

अगर उसके घर वाले आसानी से मान गए तो…तब कर लोगी शादी उससे?

हमारे और उस के बीच बहुत बड़ी दीवार है। जो कभी नहीं हट सकती। और वह दीवार है दौलत…

अगर तुम भी अमीर हो गई?

जागती आंखों से मैं सपने नहीं देखती, 

फिर भी…

हमारी जो माली हालत है उस हिसाब से तो अमीर होने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। और अगर हो भी गए तो सदिया लग जायेंगी।

मान लो अगर अमीर हो गई… तो फिर उससे शादी कर लोगी।

क्यों ऐसे सपने दिखा रहे हैं जिनके टूटने पर दुख के सिवा कुछ हाथ नहीं आयेगा।

मान लो…

हां कर लूंगी।

तो फिर उससे बोल दो सुकून से पढ़ाई पूरी करे। उसके बाद शादी की बात होगी।

मैं झूठी आस क्यों दिलाऊं?

दिला दो…उम्मीद पर तो दुनिया कायम है।

ठीक है…अब मैं जाऊं।

हां जाओ, और भूल जाना कि हमारे बीच कोई बात हुई थी।

वह हैरानी से उन्हें देखती है और बाहर निकल जाती है।

♥️

आरव रूम में जाता है तो हैरान रह जाता है पूजा सो चुकी थी।

वह चेंज करता है। और खामोशी से बेड पर जाकर लेट जाता है। और चुपचाप उसे देखने लगता है। 

सोना नहीं है? पूजा आंख खोल कर पूछती है।

तुम तो सो रही थी। वह हैरान हुआ।

इस तरह नज़र गड़ाए रहेंगे तो पत्थर में भी छेद हो जायेगा।

फिर तो यह मेरा चेहरा है। वह नाराज़गी से कहती है।

नाराज़ हो?

हां, बहुत ज़्यादा…वह आंख बन्द कर लेती है।

कैसे राज़ी होगी?

मैं नाराज़ ही रहूंगी।

अच्छा…लेकिन अगर मैं राज़ी कर लूं तो?…

मुझे आफिस नहीं जाना…मैं वहां जाकर क्या करूंगी?

कुछ मत करना, मेरे सामने बैठी रहना।

अच्छा…और आप?

मैं अपना काम करूंगा।

मेरे रहते आप काम कर पायेंगे?

क्यों नहीं कर सकता?

मैं कहती हूं नहीं कर सकते…

तो फिर ठीक है…कल चल कर देखते हैं।

नहीं, मुझे नहीं जाना।

अच्छा ठीक है अभी सो जाओ…कल सुबह देखते हैं। वह उसे अपनी बाहों में लेता है।

लेकिन मैं…

अब कोई बात नहीं… वह मुस्कुरा कर उसके होंठों को लॉक करता है।

♥️

आप लोग जाएं…मैं वहां जाकर क्या करूंगी? मैं तो किसी को जानती भी नहीं। श्लोका एक बार फिर मना करती है।

हम लोग रहेंगे ना…आप हमारे साथ रहना। शाइस्ता ज़िद करती है।

तुम्हारे रिश्तेदार के यहां शादी है। क्या कहेंगे अपने किरायेदार को भी लेकर आई हैं। 

श्लोका को जाना अच्छा नहीं लग रहा था।

मैंने उन्हें तुम्हारे बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि आप को भी लेकर आएं। असमा जल्दी से कहती है।

जाओ श्लोका चली जाओ। शिवाय फैसला सुना देते हैं।

और आप? असमा हैरानी से पूछती है।

मैं और चाचा जी यहीं रहेंगे। आप लोग जाएं।

ठीक है फिर आप चल रही हैं। सबा जल्दी से कहती है।

ठीक है फिर…देखती हूं मेरे पास ज़्यादा कपड़े भी नहीं है। श्लोका सोचते हुए कहती है। इसी लिए तो वह और मना कर रही थी।

आप वही साड़ी पहन लें। जो आप पहन कर आईं थी। सबा जल्दी से कहती है। आप उस साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थीं। सबा जल्दी से कहती है।

श्लोका हर ड्रेस में अच्छी लगती है। शिवाय जल्दी से कहते हैं।

लेकिन उस साड़ी में वह कुछ और ही लग रही थीं। सबा जल्दी से कहती है।

ठीक है फिर वही साड़ी पहन लेना… मैं भी तो देखूं उस साड़ी में ऐसा क्या है जो मेरी बीवी को और हसीन बना देती है। 

शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं। अब वह सबा को क्या बताते कि वह साड़ी पांच लाख की है। जो श्लोका के रूप को निखार देती है। हमेशा लाखों के ड्रेस पहनने वाली आज मामूली सा तीन सौ वाला सूट पहने हुए थी। और वह भी सिर्फ उसकी वजह से। अपने प्यार के लिए वह मुस्कुरा कर हर कुर्बानी देने को तैयार रहती है। 

जारी है…







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