साथी | Saathi – A Heartfelt Story of Love, Choices, and Life



 साथी...

रौशनी स्टाफ रूम में बैठी कॉपी चेक कर रही थी। जब उसे लगा कि किसी की नज़र उस पर है। वह नज़र उठा कर देखती है। 

उसने जिसे सोचा वही था।

दानिश रहमान....

ऐसे क्या देख रहे हैं?

वही जो आज तक नहीं देख पाया।

दानिश खोए हुए अंदाज़ में कहते हैं।

ऐसा क्या? रौशनी एक नज़र उस पर डाल कर दोबारा कॉपी पर नज़र जमा देती है।

कोई अपने आप को कैसे इतना छुपा सकता है?

दानिश अपनी चेयर से उठ कर उस के पास वाली चेयर को थोड़ा दूर करके बैठते हुए पूछते हैं।

किस की बात कर रहे हैं सर? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। वैसे भी आप मैथ्स के टीचर है। आप मुझ से ज़्यादा समझ सकते हैं। आप के सब्जेक्ट में तो बहुत कुछ छुपा होता है।

रौशनी कहते हुए मुस्कुरा उठी।

वैसे किस की बात कर रहे हैं? 

दानिश को सीरियस देख कर रौशनी भी सीरियस हो गई।

तुम्हारी...

दानिश उसे ध्यान से देखते हैं। वह देखना चाहते थे कि इस एक लफ्ज़ का उस पर क्या असर पढ़ता है।

रौशनी के चेहरे का रंग एक पल के लिए बदल गया। लेकिन वह तुरंत संभल गई। और अपना चेहरा कॉपी पर झुका लेती है।

इधर देखें मेरी तरफ....

दानिश की सख्त आवाज़ उस को हिला गई।

मेरी क्लास का टाइम हो रहा है। वह तुरंत कॉपी बन्द करके खड़ी होते हुए यूं कहती है जैसे उसने दानिश की बात सुनी ही ना हो।

बैठ जायें... मुझे पता है इस वक्त आप की कोई क्लास नहीं है।

दानिश उसे कुर्सी की तरफ इशारा करते हैं।

वह दोबारा बैठते हुए दानिश की तरफ देखने लगती है यूं जैसे कह रही हो! कहो जो कहना है।

लें पानी पिएं....

दानिश वहीं पर रखे उस की बैग से बोतल निकाल कर कहते हैं। और उसे देखने लगते हैं।

जब इस स्कूल में उनका ट्रांसफर हुआ था तो सारी टीचर्स से मिलते हुए जब रौशनी मैम का इंट्रो हुआ था तो वह उन्हे देखता रह गया था। उनका गहरा सांवला रंग, थोड़ा भारी शरीर, चेहरे पर संजीदगी, आंखों पर चश्मा। शायद ऐसा कुछ नहीं था जिससे कहा जा सके कि इस वजह से मैं उन्हें देखता रह गया।

लेकिन कुछ तो था...जिस की वजह से मैं देखता रहा। वह क्या था? यह मैं आज तक नहीं जान पाया।

और फिर धीरे-धीरे हमारी दोस्ती हो गई।

लेकिन दोस्ती भी ऐसी कि सिर्फ काम की ही बात होती। उसके इलावा कुछ नहीं। 

एक बार घर परिवार की बात हो गई। उसके बाद ऐसी कोई बात नहीं होती। 

मैंने कई बार बात निकाली भी। लेकिन वह बात बदल गई। यूं जैसे वह इस टापिक पर बात नहीं करना चाहती।

इस लिए मैं भी फैमली की बात नहीं करता था। 

इतनी पढ़ी-लिखी होने के बावजूद आप ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? मुझे जानना है।

दानिश सीधे-सीधे मुद्दे पर आ गये।

कौन सा फैसला?

शादी का फैसला।

वह तो हर कोई लेता है।

लेकिन आप ने जो लिया वह गलत था। आप ने एक कम पढ़े-लिखे बेरोज़गार बल्कि यूं कहें कि कामचोर निकम्मे इंसान से शादी क्यों की?

दानिश एक ही सांस में वह सब कह गये। जो आज उनको मैडम रेहाना ने बताया था। और जिसे सुनकर उन्हें हैरानी के साथ गुस्सा भी आया था।

एक ऐसे परिवार जहां बाप का कोई कारोबार ना हो। भाइयों और भाभियों का घर पर राज हो। मां खामोश हो। और घर में जवान बदसूरत लड़की हो। जिस का रिश्ता तो आता हो। लेकिन उसकी सूरत देख कर कोई दोबारा नहीं आता। तो ऐसे में ऐसा फैसला ही होता है। रौशनी उदासी से कहती है।

और तुम्हारी पढ़ाई?

शक्ल-सूरत ना हो तो पढ़ाई की कोई अहमियत नहीं रह जाती सर।

लेकिन फिर भी... कोई तो होता, कोई तो आता। थोड़ा इंतेज़ार कर लेती।

ना जाने क्यों दानिश उसकी बातों से संतुष्ट नहीं थे।

तीस पार कर चुकी था। जब एक दिन मेरे लिए सरफराज़ का रिश्ता आया। सब ने सरफराज़ और उनके घर वालों के बारे में छानबीन की तो पता चला कि उनके घर पर उनके बड़े भाई और भाभी का राज है। क्योंकि बड़े भाई का अच्छा कारोबार है। हर कोई उन के गुन गाता है।

सरफराज़ का काम धंधे में मन नहीं लगता। चार दिन कोई काम करते तो चालीस दिन आराम करते।

घर में किसी का मन नहीं हुआ। भाईयों ने मना किया कि ऐसे कामचोर इंसान से शादी करने का क्या फायदा।

लेकिन मैंने अपना फैसला सुना दिया कि मुझे सरफराज़ से शादी करने में कोई दिक्कत नहीं है।

हर कोई मेरे फैसले से हैरान था। लेकिन मैं अटल रही। और हमारी शादी हो गई।

आज मैं अपने दो बच्चों और सरफराज़ के साथ अलग किराये के घर में रहती हूं। सरफराज़ आज भी कोई काम नहीं करते। मैं कमाती हूं और घर चलाती हूं।

कहते-कहते वह रूकी।

दानिश को यूं लगा जैसे बरसों की थकन से वह आज़ाद हो रही हो। एक ऐसी थकन जो बरसों से उस ने अपने ऊपर पर्दा कर चुकी थी। और आज वह पर्दा हट गया था।

तुम पढ़ी-लिखी समझदार थी। और कोई समझदारी वाला फैसला ले सकती थी।

मैं पढ़ी-लिखी थी। इसी लिए तो फैसला ले पाई। वरना सारी ज़िन्दगी भाईं भाभी के ऐहसान तले दबी रहती।

मैंने एहसान लेने के बजाए....

ज़िम्मेदारी उठाने का फैसला किया।

क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैंने उस वक्त ना कहा होता...तो सारी ज़िन्दगी कोई और हां कहने की हिम्मत नहीं करती।

दानिश उसे चुपचाप देख रहे थे। उनके पास कहने को बहुत कुछ था, लेकिन शब्द जैसे कहीं खो गए थे।

क्या आप खुश हैं?

दानिश ने आखिर पूछ ही लिया।

रौशनी मुस्कराई। एक हल्की, थकी हुई मुस्कान, जो बहुत कुछ कह रही थी।

खुश? शायद नहीं... लेकिन संतुष्ट हूं। 

मैंने जो चुना, उसे निभाया। अपने बच्चों के लिए, अपने लिए... और शायद उस रोशनी के लिए जो मेरे अंदर कहीं अब भी जलती है।

कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं, समझ से बनते हैं... और आज वह समझ उसकी आँखों में झलक रही थी।

अगर उस वक्त मैं तुम्हारे सामने होता तो क्या तुम मुझ से शादी कर लेती?

दानिश का सवाल सीधे दिल के बीचोंबीच उतर गया।

रौशनी ने आंखें उठाईं, फिर धीरे से कहा....

आप उस वक्त नहीं थे....उस वक्त जो मेरे सामने था। मुझे वही चुनना था। उस वक्त मुझे एक साथी की ज़रूरत थी। और सरफराज़ उस वक्त का सब से बड़ा सच था। और मैंने उसे चुन लिया अपने साथी के रुप में।

एक ऐसा साथी जो मेरे साथ हो। जहां दिल, प्यार मुहब्बत कुछ मायने नहीं रखता। 

कह कर वह उठी, अपने बैग की ज़िप बन्द की, और जाने लगी।

लेकिन फिर वह वापस मुड़ी....

आप जानना चाहते हैं ना उस वक्त आप मेरे सामने होते तो मैं क्या करती?

रौशनी की आंखें सीधे उसकी आंखों में झांक रही थी।

हां, दानिश ने धीरे से जवाब दिया।

अगर आप उस वक्त होते, तो शायद मैं खुद को कम अकेला समझती। शायद मुझे यह यकीन हो जाता कि मेरी कीमत सिर्फ मेरे रंग और चेहरे से नहीं है।

दानिश कुछ कह नहीं पाया था। उस की आंखें भीग गई थीं।

उसे याद आया, जब पहली बार रौशनी को देखा था। वो तेज़ बारिश की दोपहर थी। सब भीग रहे थे, लेकिन वह स्कूल की बालकनी में खड़ी थी। शांत, स्थिर, और थोड़ी उदास। उस दिन भी उसने वही सादगी ओढ़ रखी थी, जो आज थी। लेकिन तब उसके चेहरे पर उम्मीद थी, और आज....आज थकान थी।

ज़िंदगी में एक वक्त ऐसा आता है। जब औरत को एक साथी की ज़रूरत होती है। 

सिर्फ साथी....

वह बुदबुदाई। और कदम आगे बढ़ा दिया।

दानिश कुछ पल वैसे ही बैठे रहे फिर धीरे से बोले।

रौशनी....

वह रूक गई, लेकिन पीछे नहीं मुड़ी।

अब भी बहुत कुछ बाकी है जो कहा नहीं गया है....

दानिश शायद कुछ और सुनना चाहते थे।

और शायद कभी कहा भी नहीं जा सके। कुछ बातें अधूरी ही अच्छी लगती हैं।

वह वापस पलटी!

लेकिन इतना कहूंगी....

दानिश रहमान जैसा साथी कौन नहीं चाहता सर....

लेकिन वक्त पर सब को दानिश रहमान नहीं मिलता। 

कहते ही उसने लम्बी सांस ली, और मुस्कुराई.... एक सुलझी हुई मज़बूत मुस्कान।

और कहते ही वह स्टाफ रूम से बाहर निकल गई।

-Little_Star





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