वह अजनबी | Short Inspirational Stories About Kindness and Life Lessons



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जहाज़ से उतरते ही कशफ हर तरफ परेशानी से देखती है। जहाज़ का सफर तो वह हमेशा करती रही है। लेकिन उस के साथ यह पहली बार हो रहा था। 

अपने दोनों छोटे बच्चों का हाथ थामे वह आगे बढ़ती है। वह सोचती है ऐसे ही घर पहुंच जायेगी। लेकिन फिर वह रूक जाती है।

सुनिए.... आप दो मिनट मेरे बच्चों को देख लेंगे? मैं वॉशरूम से आती हूं।

कशफ सवालिया नज़रों से उस शख्स की तरफ देखती है। जो शक्ल सूरत से सरीफ लग रहा था।

ठीक है। आप जाएं। वह उन दोनों बच्चों का हाथ थाम लेता है।

कशफ तेज़ी से वॉशरूम की तरफ जाती है।

आप का बहुत-बहुत शुक्रिया।

कशफ वापस आकर उस शख्स का शुक्रिया अदा करती है। और दोनों बच्चों का हाथ थाम कर आगे बढ़ जाती है।

सुनिए....

जी....कशफ रूक कर वापस मुड़ती है। और उस शख्स की तरफ देखती है।

आज के बाद कभी किसी अंजान व्यक्ति के पास इस तरह बच्चों को मत छोड़ना। 

क्योंकि हर व्यक्ति खालिद समीर नहीं होता। 

कहते ही वह शख्स आगे बढ़ गया। और कशफ को लगा उसके जिस्म से जान निकल गई है। उसके पैर पत्थर के हो गए हो। उसके मुंह में अल्फाज़ नहीं है।

उसने पलक झपकाई। शुक्र के साथ आसमान की तरफ देख कर आंखों के कोनों में आई नमी को साफ करती मन में उस शख्स के अल्फाज़ दोहराती दोनों बच्चों के साथ आगे बढ़ गई।

क्योंकि हर व्यक्ति खालिद समीर नहीं होता।

वह अंजान व्यक्ति उसे नई ज़िंदगी दे गया।

-Little_Star


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बस से उतर कर आलिया चारों तरफ देखती है। अंजान शहर, अंजान चेहरे, मज़बूत कदमों से वह आगे बढ़ती है।और फिर गूगल मैप देखने लगती है। 

मोबाईल हाथ में लेकर वह पैदल ही आगे बढ़ती है। क्योंकि मैप के हिसाब से जहां उसे पहुंचना था। वह जगह ज़्यादा दूर नहीं थी।

वह आगे बढ़ने लगी। वह काफी दूर पहुंच गई थी। लेकिन अपनी मंज़िल से वह अभी भी दूर थी।

सुनिए यहां से क्लिप कार्ट का आफिस कितनी दूर है?

वह रूक कर वहां से जाते हुए एक शख्स से पूछती है। जो देखने में बहुत ही आम सा था।

आप गलत तरफ आगे बढ़ गई है। चलिए मैं आप को बता देता हूं। वह उस शख्स के साथ आगे बढ़ गई।

संकरी गलियों से होते हुए वह आफिस पहुंच गई। जहां आज उसका पहला दिन था।

आपका बहुत शुक्रिया। यह शहर मेरे लिए नया है। इस लिए रास्तों को नहीं समझ सकी। यहां मेरी जॉब लगी है। आज मेरा पहला दिन है। आते-जाते समझ जाऊंगी।

आलिया शुक्रिया अदा करते हुए हाथ जोड़ देती है।

मैं ज़्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं। आते-जाते यह आफिस देखा था। आप गलत रास्ते पर जा रही थी। मैंने तो सिर्फ सही राह दिखाई है। लेकिन आगे से ध्यान रखना। हर शख्स सही राह दिखाने वाला नहीं होता।

क्योंकि हर व्यक्ति राहुल खन्ना नहीं होता।

कहते ही वह शख्स वापस मुड़ कर गलियों में गायब हो गया।

और आलिया की नज़रें उन संकरी गलियों में उलझ गई। 

वह बरसों से पढ़े सारे अल्फाज़ भूल गई। उसके कानों में सिर्फ एक जुमला गूंज रहा था।

क्योंकि हर व्यक्ति राहुल खन्ना नहीं होता।

उस सख्श के तजुर्बे के दो बोल उसकी डिग्रियों को बेमोल कर गए।

(Little_Star)


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सुजाता का मन उलझा हुआ था। वह बार-बार ऐ-टी-एम मशीन में कार्ड डाल कर पासवर्ड डाल रही थी। लेकिन उसका पैसा नहीं निकल रहा था। उसका पूरा ध्यान अपने पापा की तरफ अटका हुआ था। 

उसे पापा की बातें याद आ रही थी। जो अक्सर उससे यह सब काम करने को कहते। ताकि उसे भी जानकारी रहे।लेकिन वह टाल जाती थी।

लेकिन आज अचानक से पापा की तबीयत खराब होने पर उसे पैसा निकालने आना पड़ा।

ऐ-टी-एम मशीन के बाहर लम्बी लाइन लग चुकी थी। हर कोई उसके बाहर आने का इंतेज़ार कर रहा था।

उसे रोना आ रहा था। वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे जिससे कि पैसा निकल जाए।

तभी एक लड़का दरवाज़ा खोल कर अंदर आता है। 

कुछ परेशानी है क्या? इतना टाइम क्यों लग रहा है? वह उसकी शक्ल देख कर कहता है। जो टेंशन में लग रही थी।

पता नहीं क्यों पैसा नहीं निकल रहा है। सुजाता धीरे से कहती है।

लाओ कार्ड मुझे दो। कितना पैसा निकालना है? और पासवर्ड बताओ।

वह लड़का कार्ड मसीन में लगा कर जल्दी-जल्दी सब पूछता है।

एक लाख निकालना है। और फिर वह जल्दी से पासवर्ड भी बता देती है।

उसी वक्त पैसा निकल जाता है। सारे पैसे वह सुजाता को दे देता है। जिसे वह जल्दी से अपने बैग में रख लेती है।

थैंक्स...सुजाता के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। लेकिन उसकी आंख अभी भी नम थी।

कोई बात नहीं। हो जाता है कभी-कभी ऐसा। लेकिन आज जिस तरह तुम ने अपना कार्ड और पासवर्ड बताया है। वह कभी भी किसी अंजान को मत बताना। 

क्योंकि हर व्यक्ति रवि रॉय नहीं होता। 

वह उसको कार्ड देते हुए कहता है। और अपनी जेब से अपना कार्ड निकाल कर मशीन में लगा देता है।

सुजाता को अपनी गलती का ऐहसास हो गया था।

केबिन से निकल कर एक नज़र वह लम्बी लाइन पर डालती है। और आगे बढ़ जाती है।

वह सोच रही थी। अब वह कुछ भी भूल जाये। मगर यह अल्फाज़ नहीं भूलेगी।

क्योंकि हर व्यक्ति रवि रॉय नहीं होता।

आज उस के पास बहुत बड़ी दौलत थी। 

-Little-Star 






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