रूबरू | Part 5 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

आज उसे आकिल का रवैया कुछ अलग लग रहा था। वैसे तो वह और आकिल घर पर साथ रहते खाते-पीते हंसी मज़ाक सब होता था। 

अपने हर काम के वक्त आकिल को ही याद करती थी। और वह भी खुशी-खुशी कर देता था। लेकिन आज आकिल की आंखों में कुछ और ही था। 

शायद मैंने आज से पहले आकिल को इतने ध्यान से नहीं देखा था। वह खुद को समझाती है।

मुझ से शादी करोगी?… आकिल शांत था।

क्या? अशमारा की आंखें हैरत से बड़ी हो गई।

मुझ से शादी करोगी? वह अपनी बात दोहराता है।

अचानक से यह शादी?… अशमारा भी सीरियस हो गई।

यह अचानक नहीं, मैं तुम को पसंद करता हूं। बहुत पहले से...


अच्छा ऐसा…लेकिन मुझे कभी लगा नहीं कि तुम…अशमारा कहते-कहते बात अधूरी छोड़ देती है।

तुम्हें नहीं लगा क्योंकि मैंने कभी ज़ाहिर नहीं किया।

एक पल की खामोशी...

ठीक है करुंगी… अशमारा की नज़र उसके चेहरे पर थी।

क्या?… आकिल को यकीन नहीं हुआ कि वह इतना जल्दी मान जायेगी। उसका दिल झूम उठा।

हां, लेकिन मेरी एक शर्त है…मैं अपने अम्मी अब्बू का हमेशा ख्याल रखूंगी, मेरी कमाई पर मेरे मां बाप का भी हक होगा, बोलो मंज़ूर है?…

अशमारा बहुत सुकून से कहती है।

नहीं, आकिल भी बहुत सुकून से कहता है।

अशमारा हैरानी से उसे देखती है। वह उसके मामू का बेटा था। उसे लगा वह अपनी फूफी का साथ देगा। लेकिन आकिल के जवाब से वह निराश हो गई।

उनका ख्याल सिर्फ तुम नहीं रखोगी, बल्कि हम दोनों रखेंगे। 
उनका हक सिर्फ तुम्हारी कमाई पर नहीं बल्कि हम दोनों की कमाई पर होगा। बोलो मंज़ूर है तो निकाह की तैयारी करो।

आकिल अपनी मुस्कुराहट छुपा कर कहता है।

नालायक, अशमारा उस पर हाथ तानती है। आकिल हंसते हुए उसका हाथ थाम लेता है।

एक बात कहूं? 
हूं...
मुझे यकीन नहीं था कि तुम इतना आसानी से हां कर दोगी। आकिल की नज़र अब भी अशमारा पर ही थी। उसके जवाब से उसे बहुत सुकून मिला था।

शादी तो कभी न कभी करना ही है...तो फिर तुम ही क्यों नहीं। अशमारा सुकून बरकरार था।

शुक्रिया मुझे कुबूल करने के लिए…आकिल उसकी तरफ झुकते हुए कहता है।

अशमारा मुस्कुरा देती है।

दादी आप मिस ताहिरा से मिल सकती हैं। डिनर करते हुए दानिश मुस्कुरा कर कहता है।

ओ…हो… ताबिश हूटिंग करता है।

क्या वह भी…दादी ने बात अधूरी छोड़ दी।

जी, आप पहले मिस ताहिरा से मिल लें। उसके मौम डैड स्वीटजरलैंड गये हैं। अगले महीने वह वापस आयेंगे। तब आप उनसे मिल लेना।

सारी बातें हो चुकी है दादी…आप तो बस निकाह की तैयारी करें। ताबिश मुस्कुराते हुए कहता है।

अच्छा है…वरना मैं बूढ़ी जान क्या-क्या करती। तुम भी कोई लड़की पसंद कर लो। मुझे आसानी हो जायेगी। दादी ताबिश को देख कर कहती हैं।

ठीक है दादी, मैं भी कल ब्लैक स्टोन की मीटिंग ज्वाइन करता हूं। 
हो सकता है मिस ताहिरा जैसी मुझे भी मिल जाए। ताबिश एक बार फिर शरारत से कहता है।

बहुत शरारत सूझ रही है। कल मिस आलिया के साथ तुम्हारी मीटिंग फिक्स करता हूं।
दानिश हंसते हुए कहता है।

माफ करो भाई…ऐसी बीवी के साथ से कंवारा ही अच्छा…
ताबिश कान को हाथ लगाते हुए कहता है।

तुम इतना भागते क्यों हो उससे? दानिश ने जानना चाहा।

पता नहीं, हम जब तक दोस्त थे तब तक ठीक था। लेकिन जब से उस के मन का पता लगा है कि वह मुझ से शादी करने के इरादे से दोस्त बनी है, तब से मेरा मन उससे हट गया।

ताबिश खीर का बाउल उठाते हुए कहता है।

ठीक है फिर कल चलो ब्लैक स्टोन की मीटिंग में…दानिश हंसते हुए बोला।

और फिर सभी हंस पड़ते हैं।

...

मुझे अब कुछ बड़ा सोचना होगा। छोटे-छोटे दांव से वह बच जा रहे हैं।
जैसे अफज़ल सरफराज़ और जमीला सरफराज़ को इस दुनिया से रुखसत किया है, वैसे ही दानिश सरफराज़ और ताबिश सरफराज़ को भी रूखसत करना पड़ेगा। तभी यह ब्लैक स्टोन का नामोनिशान मिटेगा।
सत्तार खान गुस्से से फोन पर बात करते हुए कह रहा था। उस का बस नहीं चल रहा था कि वह ब्लैक स्टोन का नामोनिशान मिटा कर रख दे।

...

क्या हुआ बहुत देर कर दी आने में? रूकय्या दरवाज़े खोलते ही अशमारा से पूछती है।
हां मम्मी आज काम ज़्यादा था इस लिए देर हो गई। अशमारा अंदर आते हुए कहती है।
भाई-भाभी आए थे।
क्या मामू-मामी? खैरियत?…
वह हैरानी से पूछती है।
आकिल से तुम्हारा रिश्ता और शादी की बात करने आए थे। हम इंतेज़ार में थे कि तुम भी आ जाओ तो तुम्हारे सामने बात हो जाए। लेकिन जब तुम को आने में देर हुई तो आकिल ने कहा कि हम फाइनल कर लें। वह तुम को बता देगा।
उस को सुकून से बैठते तो देती …कि आते ही शुरू हो गई।
हमीद नाराज़गी से कहते हैं।
नहीं मम्मी आप बताएं…अशमारा जल्दी से कहती है।
देख रही हो कितना जल्दी है अपनी शादी की बात सुनने की।
हमीद मुस्कुराए।
अगले महीने की पांच तारीख फाइनल हो गई है। दरअसल ज़ोया और सना का भी रिश्ता तय हो गया है और उन के ससुराल वालों को जल्दी है।
इस लिए भाई साथ में आकिल की भी शादी करके इस ज़िम्मेदारी से आज़ाद होना चाहते हैं।
रूकय्या सारी बातें उसे बताती हैं।
और मेरी जॉब? उसकी आवाज़ में बेचैनी थी।

जारी है…


रुबरु भाग 6

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