धड़कन | भाग 1| Dhadkan Part 1 | Heart Touching Hindi Love Story
हॉर्न के साथ गाड़ी एक बड़े से गेट में दाखिल होती है। गाड़ी रूकते ही दोनों तरफ का गेट खुलता है।
एक तरफ से श्लोका सुमन सिंह और दूसरी तरफ से मिस्टर सुधीर सिंह ओबेरॉय निकलते हैं।
श्लोका सुमन एक नज़र घर पर डालती है। काफी बड़ा और खूबसूरत विला था। दोनों आगे बढ़ते हैं।
वादा याद रखना अंकल....
श्लोका सुमन मिस्टर सुधीर सिंह के साथ चलते हुई कहती है।
बहुत बड़ा वादा ले लिया है तुमने सुमन, एक बार सोच लो। और मेरी बात मान लो।
मिस्टर सुधीर ने श्लोका सुमन को एक बार फिर समझाया।
नहीं, हमारे बीच जो बात हो चुकी है वही फाइनल है। अब उसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
श्लोका सुमन ने फैसला सुनाया।
ठीक है बेटा, जैसी तुम्हारी इच्छा।
सुधीर जी ने हार मानते हुए कहा।
बातें करते-करते दोनों अन्दर पहुंच चुके थे।
बड़े से हॉल में पहुंच कर श्लोका सुमन ने एक नज़र चारों तरफ देखा। बीच हॉल में सोफे लगे हुए थे। दो तरफ से सीढ़ियां ऊपर की तरफ जा रही थी। बड़े-बड़े झाड़ फानूस लगे हुए थे। खूबसूरत पेंटिंग्स से वॉल सजी हुई थी।
आओ बेटा, सुधीर जी ने एक तरफ बढ़ते हुए श्लोका सुमन को इशारा करके बुलाया।
श्लोका सुमन उनके साथ बढ़ते हुए आगे जाती है। और अंकल के इशारे पर एक सोफे पर बैठ जाती है।
श्लोका निगाहें नीचे किये बैठ जाती है।
वहां पर बैठा हर शख्स उसे देख लेता है। मगर वह किसी को नहीं देख पाती। क्योंकि उसने नज़र उठा कर ठीक से किसी को नहीं देखा था।
सुमन बेटा, यह तुम्हारी ममता आंटी हैं।
श्लोका सुमन उनको देखते ही नमस्ते करती है।
ममता आंटी देखने में सुंदर, खूबसूरत साड़ी, मेकअप और ज्वेलरी के साथ बिल्कुल तैयार एक फैशनेबल लेडी लगी उसे। बाकी तो साथ रहने पर ही पता चलेगा कि उनका व्यवहार कैसा है।
और यह मेरी बेटी अराध्या सिंह ओबेरॉय और यह मेरा बेटा अमोल सिंह ओबेरॉय।
अराध्या भी उसे जींस-टॉप में एक माडर्न लड़की लगी। जिसके बाल बहुत छोटे कटे हुए थे। और अमोल भी उसे अराध्या जैसा ही लगा। जो अपने कपड़े और लाइफस्टाइल से खुद को माडर्न साबित करने में लगे रहते हैं।
और यह मेरा बड़ा बेटा शिवाय सिंह ओबेरॉय......
सुधीर जी ने सबका परिचय दिया।
श्लोका सुमन की निगाहें सबको देखते हुए शिवाय की ओर उठती हैं। दोनों की नज़र मिलती हैं। और फिर दोनों ही तुरंत निगाहें झुका लेते हैं।
शिवाय को देख कर श्लोका सुमन की धड़कन बढ़ जाती है।
शिवाय उसे बिल्कुल अंकल की तरह लगे। जिसके चेहरे पर एक खास रौब झलक रहा था। खूबसूरत तो सभी लोग थे। मगर शिवाय की शख्सियत एट्रेक्टिव थी।
श्लोका सुमन बैठी-बैठी मन ही मन सब के बारे में सोच रही थी।
वहां गांव में स्कूल है?
ममता जी ने सरसरी उसको देखते हुए पूछा।
जी, श्लोका सुमन ने सरसरी जवाब दिया।
कितने क्लास तक?
आठवीं तक,
श्लोका सुमन ने सादगी से जवाब दिया।
इसका मतलब आठवीं तक पढ़ी है। वहां पर बैठे हर शख्स के मन में यही ख्याल आया।
आप लोग फ्रेश हो जाएं तो डिनर कर लिया जाए।
ममता जी ने पति को देखते हुए कहा।
हूं, जाओ बेटा तुम भी फ्रेश हो जाओ।
सुधीर जी ने उठते हुए कहा।
कमला सुमन को वॉशरूम दिखा दो। और ऊपर
209 में सुमन का सामान रख दो।
सुधीर जी ने कमला से कहा। जो वहां पर सर्वेंट थी।
सब ने सुधीर जी की बात पर हैरत से उन्हें देखा। खास कर शिवाय ने लेकिन वह खामोश रह गया। क्योंकि वह अपने डैड की बात कभी नहीं काटता था।
कमरा नं 209 हर किसी को हैरान कर गया।
श्लोका सुमन कमला के साथ अंदर चली गई।
उसके जाते ही शिवाय ने सोफे के बैक हेड पर सिर टिका कर आंख बंद कर ली। वह अपने दिल की बदली हुई धड़कन को महसूस कर रहा था। जो श्लोका सुमन को देख कर उसके दिल में हुई थी। वह आंख बन्द करके अपनी धड़कन को बार-बार महसूस कर रहा था। जो सच में बदली हुई थी।
वाह रे दिल.... जो आज तक किसी लड़की को देख कर नहीं धड़का। वह आज धड़का भी तो गांव की एक लड़की को देख कर।
इतना सोच कर उसके होठों पर मुस्कान आ गई। यह मुस्कान क्यों थी। वह समझ नहीं पाया।
श्लोका सुमन फ्रेश हो कर आ गई।
उसको आता देख शिवाय ने एक बार फिर उसे देखा। खूबसूरत चेहरा बड़ी-बड़ी ब्लू आंख जिस का कलर बहुत ही प्यारा लगा उसे। सिम्पल लौन्ग सूट पैंट में सिम्पल हेयर स्टाइल पीछे से बालों को समेट कर क्लैचर में फंसा रखा था। कानों में छोटी सी ईयररिंग्स और एक हाथ में घड़ी थी। दूसरे हाथ में कुछ नहीं था। बायें हाथ के अंगूठे में उसने एक रिंग पहन रखी थी।
यह देखने में गांव की बिल्कुल भी नहीं लगती। शिवाय ने मन-ही-मन सोचा।
श्लोका की नज़र भी सामने बैठे शिवाय पर उठ गई।
उसकी उठती पलकों के साथ ही शिवाय उस में खो गया। उसकी धड़कन एक बार फिर बेतरतीब हो गई थी। शिवाय ने बहुत धीरे से अपने दिल पर हाथ रख लिया।
श्लोका वहीं सोफे पर बैठ चुकी थी।
सुधीर जी के आते ही सब लोग खाने के लिए उठ जाते हैं। श्लोका सुमन भी साथ में उठ जाती है। हर कोई अपनी चेयर पर बैठ जाता है। श्लोका भी अराध्या के बगल वाली चेयर पर बैठ जाती है।
खाना लगा हुआ था। हर कोई अपनी प्लेट में निकाल कर खाना शुरू कर देता है। हर किसी के हाथ में छुरी कांटा और चम्मच था।
श्लोका भी खाना निकाल कर बहुत खामोशी से हाथ से खाना शुरू कर देती है। हर किसी की नज़र उस पर उठती है। मगर वह बहुत ही आराम से खा रही थी। उसे इस बात की कोई शर्मिंदगी नहीं थी कि वह हाथ से खा रही है। शिवाय की नज़र खाते हुए बार-बार उस पर उठ रही थी। क्योंकि वह उस के ठीक सामने थी।
आप सब को पता ही है कि सुमन मेरे दोस्त की बेटी है। और अब मेरे दोस्त के ना रहने पर मैं सुमन को अपने साथ लाया हूं। अब सुमन हमारे साथ रहेगा। अब यह मेरी ज़िम्मेदारी है।
सुधीर जी ने खाना खाकर सब के चेहरे को देखते हुए कहा। और डाइनिंग टेबल से उठ गये। उनके साथ ही हर कोई उठ गया। किसी ने भी कोई बात नहीं की, ना ही किसी ने कुछ पूछा।
अब मैं रूम में जा रही हूं। श्लोका सुमन ने उठते हुए कहा।
हां ठीक है तुम आराम करो। और अपने हिसाब से रहो। बिल्कुल अपने घर की तरह।
सुधीर जी ने प्यार से कहा। और कमला के साथ सुमन अपने रूम में चली गई।
कमरा काफी बड़ा और खूबसूरत था। रूम में सामने ही सोफा लगा हुआ था। एक साईड बेड थी। और एक तरफ टेबल चेयर लगा हुआ था। वहां पर एक फ्रीज़ भी था। उसका सामान वहीं पर रखा हुआ था।
वह सोफे पर बैठ गई। और सोफा हेड पर सिर टिका कर आंख बन्द कर लेती है। हर किसी का चेहरा उस के सामने आता है। और फिर उसका ध्यान शिवाय के चेहरे पर आकर रूक जाता है।
शिवाय.... उसके होंठों ने कई बार यह नाम दोहराया। इस नाम के साथ ही उसने अपने दिल में कुछ बेचैनी महसूस की।
बीबी जी, तभी कमला ने दरवाज़ा खोला।
आ जाओ कमला।
कमला अंदर आई उसके हाथ में एक बास्बकेट था। जिस में बहुत सारे नमकीन चिप्स और पता नहीं किस-किस चीज़ का पैकेट था।
आप यह रख लें। और अपनी पसंद बता दें तो फिर आपकी पसंद का आ जायेगा।
कमला ने बास्केट वहीं टेबल पर रखते हुए कहा।
इस की कोई ज़रूरत नहीं थी। तुम क्यों लाई यह सब?
श्लोका सुमन ने हैरानी से पूछा।
सर जी ने कहा था। आप रख लें। कह कर वह जाने लगी।
सुनो कमला।
श्लोका सुमन ने कुछ सोचते हुए उसे आवाज़ दी।
हां, बीबी जी। कमला रूक गई।
सुबह सब लोग नाश्ता कितने बजे करते है?
श्लोका सुमन ने जानना चाहा।
दस बजे सर जी और शिवाय बाबा करते हैं। बाकी लोगों का कोई टाइम नहीं है जब वह लोग उठ जाएं तब करते हैं।
कमला ने उसे पूरी डिटेल दे दी।
ठीक है तुम जाओ।
कमला के जाते ही श्लोका सुमन अपने सूटकेस से नाईट ड्रेस निकाल कर चेंज करने चली गई। चेंज करके आते ही वह सोने के लिए लेट गई। ना जाने क्यों वह चाहती थी कि उसे जल्द से जल्द नींद आ जाए।
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क्या हुआ सब ठीक?
रवि ने शिवाय को देखते हुए पूछा।
क्यों क्या हुआ?
शिवाय ने हैरानी से पूछा।
आज तुम्हारे चेहरे पर एक चमक दिख रही है जो आज से पहले कभी नहीं दिखी।
रवि ने उसे देखते हुए कहा।
रवि की बात सुनकर अशोक और हेमंत भी उसे देखने लगते हैं।
अब यह तुम लोग भी सिर्फ मुझे ही क्यों देख रहे हो?
शिवाय ने मुस्कुराते हुए पूछा।
रवि की बात पर गौर कर रहा हूं।
हेमंत ने सीरियस होकर कहा।
कुछ बात तो है।
शिवाय ने सब को देखते हुए कहा।
अच्छा ऐसा किया। क्या किसी लड़की को देखकर तुम्हारी धड़कन बढ़ गई?
रवि ने मुस्कुराते हुए कहा।
अगर तुम लोग मेरी ज़िन्दगी में ना होते तो मेरा क्या होता?
शिवाय ने उदासी से कहा।
ऊं हूं, तुम ने गलत बोल दिया शिवाय। अगर हम सब इस तरह एक साथ ना होते तो हमारा क्या होता.....
हेमंत ने शिवाय को देखते हुए कहा।
हां, बिल्कुल.... हमारी दोस्ती हमारे लिए बहुत खास है। हमारी दोस्ती आज तक बिल्कुल वैसी ही है जैसी हमारी दोस्ती बचपन में थी। हमारी दोस्ती हमारे मुश्किल वक्त में हमारा सहारा बनी। और आज भी जब तक मिल ना लें। लगता है कुछ बाकी है।
रवि ने बहुत कुछ याद करते हुए कहा। अच्छा मेरी बात का जवाब दो। रवि दोबारा अपनी बात पर आ गया।
हां, शिवाय लेट कर आंख बंद करके कहता है।
ओह माई गॉड.... कौन है वह?
तीनों ने हैरानी से पूछा।
डैड के दोस्त की बेटी, जो डैड के साथ गांव से आई है। और फिलहाल हमारे साथ ही रहेगी। क्योंकि उसके बाबा की डेथ हो गई है। और वह अकेली गांव नहीं रह सकती है।
शिवाय ने वैसे ही लेटे हुए सब को बताया।
दिल धड़का भी तो किस पर, गांव वाली पर।
हेमंत ने सोचते हुए कहा।
वही तो मैं भी सोच रहा हूं। शिवाय ने उठते हुए कहा।
देखने में कैसी है?
रवि ने जांचती नज़रों से शिवाय को देखते हुए पूछा।
सुन्दर है, देखने में बिल्कुल भी गांव वाली नहीं लगती।
शिवाय के सामने उसका पूरा वजूद आ गया।
तो फिर ठीक है। जब सुन्दर है, उसे देख कर तुम्हारे दिल की धड़कन भी बढ़ गई। तो फिर देर किस बात की।
अशोक ने उसे आगे की राह दिखाई।
पढ़ी-लिखी है या अनपढ़ है?
अशोक को अचानक पढ़ाई का ख्याल आया।
पता नहीं, गांव में सिर्फ आठवीं तक ही स्कूल है। यह बात उसी तो बताई। अब वह आठवीं तक भी पढ़ी है या नहीं मुझे नहीं पता।
शिवाय ने सोचते हुए कहा।
नाम क्या है?
रवि ने मुस्कुराते हुए पूछा।
श्लोका सुमन सिंह.... शिवाय ने भी मुस्कुराकर ही जवाब दिया।
वाह क्या नाम है। सब ने नाम की तारीफ की।
अब तुम लोग ही बताओ मैं क्या करूं?
शिवाय ने सोचने वाले अंदाज़ में पूछा।
कुछ मत करो, बस अपने दिल की सुनो।
हेमंत ने कहा।
ठीक है, देखता हूं यह गांव वाली मेरे दिल में रहती भी है। या सिर्फ यह मेरा वहम है। लेकिन एक बात है उसे देख कर धड़कन ज़रूर बदल गई थी।
शिवाय ने हंसते हुए कहा।
आल द बेस्ट.....
शिवाय की बात सुनकर सब खुश हो गये। क्योंकि वह सब जानते थे कि वह कितना तन्हा है। कोई लड़की उसे पसंद नहीं आती थी। लड़कियां उस पर मरती थी। और वह लापरवाह बना रहता है। क्योंकि उस की एक ही बात थी कि जिस लड़की को देख कर उसकी धड़कन बढ़ जाएगी। वह उसी लड़की से शादी करेगा। और आज तक उसके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ था। मगर आज श्लोका सुमन सिंह को देख कर उसकी धड़कन बढ़ गई। और वह हैरान रह गया।
रवि तुम अपनी शादी की तैयारी करो। उसके बाद शिवाय की भी करनी है।
हेमंत ने हंसते हुए कहा।
चलो शुक्र है कि दिल किसी को देख कर धड़का तो वरना अगर अब ना धड़कता तो मैं अपनी शादी के बाद डॉक्टर को दिखाने वाला था। कि इस के दिल में धड़कन है भी या नहीं। क्योंकि ऐसा कैसे हो सकता है कि आज तक किसी लड़की को देख कर दिल ही नहीं धड़का। तुम दोनों की शादी हो चुकी मेरी होने वाली है। फिर बच जाता हमारा शिवाय, मैं इसे कुवारा थोड़े छोड़ देता।
रवि ने शिवाय की पीठ थपथपाते हुए कहा। और सब हंस पड़े।
चलो अब चलते हैं। और चारो दोस्त उठ खड़े होते हैं। और अपने-अपने घर चले जाते हैं।
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क्या यह हमेशा हमारे साथ रहेगी?
ममता जी अपना मेकअप साफ करते हुए सुधीर जी से पूछती हैं।
सुधीर जी ने सिर्फ उन्हें देखा, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। क्योंकि वह इस वक्त कीई भी जवाब देने की पोज़ीशन में नहीं थी।
आप खामोश क्यों हैं?
ममता जी को हैरानी हुई।
अभी आज ही तो वह आई है। और तुम सोचने लगी। कुछ दिन रहने दो फिर सोचा जायेगा।
सुधीर जी ने सरलता से जवाब दिया।
इस की जल्द शादी कर देंगे।
ममता जी ने कुछ सोचते हुए कहा।
क्यों? सुधीर जी को हैरत हुई कि वह इतना फिक्रमंद क्यों हैं।
बस ऐसे ही।
तुम उस के लिए परेशान मत हो। मैं देख लूंगा।
सुधीर जी ने बात खत्म कर दी। और सोने के लिए लेट गए।
♥️
श्लोका सुमन को सुबह जल्दी उठने की आदत थी। वह उठ कर तैयार हो कर अपना पढ़ने का लेकर बैठ जाती है। जब दस बजते हैं तो वह पांच मिनट बाद नीचे चली जाती है। हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। वह सीधा डाइनिंग रूम में जाती है जहां पर अंकल और शिवाय बैठे नाश्ता कर रहे थे।
उठ गई बेटा,आओ नाश्ता कर लो।
सुधीर जी ने उसे देखते ही कहा।
वह खामोशी से बैठ जाती है।
शिवाय उसे देखता है। वाइट कलर के सूट पैंट में बालों को क्लैचर में समेटे चेहरे पर कोई मेकअप नहीं, सादगी में वह बहुत खिली-खिली सी लग रही थी।
शिवाय के दिल की धड़कन कुछ बदल गई थी। जिसे महसूस करते ही शिवाय के होंठों पर मुस्कान आ गई। जिसे जल्द ही उस ने छुपा ली।
श्लोका सुमन सिर झुकाए नाश्ता कर रही थी। और शिवाय की नज़र बार-बार उसके चेहरे पर उठ रही थी। क्योंकि वह उस के सामने बैठी थी।
कुछ और खाना है तो बोल दो बन जायेगा।
सुधीर जी आलू का पराठा खाते हुए कहते हैं।
नहीं अंकल मैं खा लूंगी। उसने सामने देखते हुए कहा। उस की नज़र सीधे शिवाय पर पड़ती है जो बटर ब्रेड खा रहे थे साथ में जूस का गिलास भी था।
दिल के किस्से भी अजीब होते हैं। जब यह किसी के लिए धड़कता है तो एक साज़ बन जाता है। जिस की धुन हमें मसरूर कर देती है। दिल चाहता है हर वक्त उसी धुन को गुनगुनाते रहें।
जारी है...

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