धड़कन | भाग 2 | Dhadkan Part 2 | Heart Touching Hindi Love Story
दिल के किस्से भी अजीब होते हैं। जब यह किसी के लिए धड़कता है तो एक साज़ बन जाता है। जिस की धुन हमें मसरूर कर देती है। दिल चाहता है हर वक्त उसी धुन को गुनगुनाते रहें।
श्लोका सुमन भी ब्रेड लेकर उस पर बटर और जैम लगाने लगी। लगाने के बाद उसने प्लेट अंकल की तरफ की।
नहीं बेटा तुम खाओ, मैंने पराठा खा लिया है अब कुछ और नहीं खाऊंगा। वरना ज़्यादा हो जायेगा।
अंकल ने मना कर दिया।
उसने प्लेट शिवाय की तरफ बढ़ा दी। शिवाय ने एक पीस उठा लिया। और थैंक्स बोल कर मुस्कुरा दिया।
श्लोका सुमन के होंठों पर भी मुस्कान थी।
आज शिवाय को नाश्ता करते हुए अच्छा लग रहा था।
अंकल आप दोपहर का खाना कितने बजे खाते हैं?
श्लोका सुमन ने खाते हुए पूछा।
घर आ गया तो तीन बजे, नहीं तो लंच आफिस में ही करूंगा फिर। तुम को जब खाना हो तो खा लेना।
सुधीर जी ने चाय पीते हुए कहा।
नहीं मैं आप के साथ ही करूंगी। जब आप नहीं आयेंगे तो मैं खा लूंगी।
और कोई काम?
सुधीर जी ने मुस्कुराते हुए पूछा।
नहीं अंकल, आज कमरा सेट कर लूं फिर देखती हूं आगे क्या करना है।
ठीक है, कहीं भी जाना हुआ तो बाहर गाड़ी और ड्राइवर रहेगा। तुम चली जाना।
नहीं अंकल इस की ज़रूरत नहीं। मैं चली जाऊंगी।
श्लोका सुमन ने जल्दी से कहा।
क्यों इस की ज़रूरत नहीं है। तुम कैसे जाओगी?
सुधीर जी ने हैरानी से पूछा।
मैं किसी भी तरह चली जाऊंगी। आप मत परेशान हों अंकल।
श्लोका सुमन ने जल्दी से कहा।
सुधीर जी और शिवाय ने हैरत से उसे देखा।
नहीं तुम को गाड़ी से ही जाना होगा।
सुधीर जी ने फैसला सुनाया।
नहीं अंकल मैं पहले भी आप की बहुत बात मान चुकी हूं। अब यह नहीं।
श्लोका सुमन ने मुस्कुराते हुए कहा।
अच्छा, सुधीर जी बहुत ज़ोर से हंसते हुए कहते हैं।
श्लोका सुमन भी हंस देती है।
उनकी हंसी देख कर शिवाय भी मुस्कुरा देता है।
आपको जहां भी जाना होगा आप गाड़ी से जायेंगी।
शिवाय ने सेब खाते हुए श्लोका सुमन को देखते हुए कहा।
आप कौन होते हैं मुझ पर हुक्म चलाने वाले।
श्लोका सुमन ने शिवाय को देखते हुए पूछा।
इनका बेटा..... एक पल के लिए तो श्लोका सुमन की बात सुनकर शिवाय गड़बड़ा गया। लेकिन फिर उसने तुरंत बात संभाल ली। उसे उम्मीद नहीं थी कि वह इस तरह उलटा उसी से सवाल कर देगी।
यह मेरी और अंकल की बात है। आप बीच में ना आयें।
श्लोका सुमन ने मुस्कुराते हुए कहा।
जब आप डैड की बात नहीं मानेंगी तो मुझे बीच में आना ही पड़ेगा। कोई मेरे डैड की बात ना माने यह मुझे मंज़ूर नहीं है।
शिवाय ने डैड की तरफ देखा और कहा।
रहने दो शिवाय। मत ज़िद करो।
सुधीर जी शिवाय की बात पर हंस पड़ते हैं और कहते हैं।
श्लोका सुमन मुस्कुरा कर शिवाय को देखती है।
शिवाय भी मुस्कुरा देता है। और वहां से उठ कर बाहर चला जाता है।
क्यों मना कर दिया गाड़ी के लिए?
शिवाय के जाते ही सुधीर जी धीमी आवाज़ में श्लोका सुमन से पूछते हैं।
आपको तो पता है मुझे कहां-कहां जाना पड़ सकता है। आप क्या चाहते हैं आपके बेटे को सब पता चल जाये। और फिर दोनों बहुत ज़ोर से हंस पड़ते हैं।
शिवाय जो बाहर चला गया था। वह डैड से कुछ कहने अंदर आया था। और अंदर आकर उनकी हंसी देख कर वह डैड से अपनी बात कहे बिना ही दोबारा मुस्कुराते हुए बाहर चला जाता है।
श्लोका सुमन और सुधीर जी भी नाश्ता करके बाहर चले जाते हैं। वहां पर शिवाय न्यूज़ पेपर देख रहा था।
श्लोका सुमन भी वहीं पर बैठ जाती है। सुधीर जी भी पेपर देखने लगते हैं। न्यूज़ पेपर तो वह भी देखना चाहती थी। मगर इस वक्त वह मजबूर थी। और यह मजबूरी उसने खुद चुनी थी।
शिवाय ने पेपर देखते हुए उसे देखा। वह खामोश बैठी हुई थी। उसी वक्त शिवाय की चाय आ जाती है। काफी बड़ा खूबसूरत सा मग था।
आप भी चाय पी लें। शिवाय ने श्लोका सुमन को देखते हुए कहा।
हां ले रही हूं। और मुझे आप ना कहें।
श्लोका सुमन ने सादगी से कहा।
श्लोका के लिए भी चाय लायें।
ओ-के शिवाय ने मुस्कुराते हुए श्लोका सुमन से कहा। और फिर वहां पर काम कर रही रोज़ी से कहते हैं।
उसी वक्त उस की भी चाय आ जाती है। शिवाय का मन कर रहा था कि श्लोका से बातें करे। मगर उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बात करे। इस लिए वह खामोश ही रहे। और चाय पीते ही वह दोनों आफिस जाने के लिए उठ खड़े हुए।
श्लोका सुमन भी उनके साथ ही उठ गई। और बाहर तक छोड़ने चली गई। उनको बाय बोल कर वह कुछ देर वहीं खड़ी रही।
आज शिवाय के लब बार-बार मुस्कुरा रहे थे। वरना इस घर में ऐसा बहुत कम ही होता था जिससे वह मुस्कुरा सके।
और श्लोका सुमन वहीं खड़ी सोच रही थी कि कैसे आंटी अभी तक सो रही हैं जब की उनका पति और बेटा नाश्ता करके आफिस चले गए। यही सब सोचते हुए वह अंदर आ गई। जहां पर अब बिल्कुल सन्नाटा था। वह बैठ कर न्यूज़ पेपर देखने लगी। और फिर वह रूम में चली गई।
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अपने केबिन में बैठ कर शिवाय पीछे चेयर पर सिर टिका देते हैं। आज की सुबह कितनी शानदार थी। कितने दिनों बाद आज वह इतना खुश हुआ था। उसका दिल खुश था। उसकी नज़रो के सामने श्लोका सुमन का चेहरा था।
श्लोका.... तनहाई में उसकी ज़बान पर यही नाम तो था। कल से वह उस के दिल व दिमाग पर छाई हुई है। उसको सोचते हुए ही उसे नींद भी आई थी। और इस वक्त भी उसका चेहरा उसके नज़रों में था। वह चुपचाप बैठा उसको सोचे जा रहा था। काश श्लोका तुम पढ़ी-लिखी होती। शिवाय के दिल से एक आवाज़ आई। और उस का मन भटक गया। उसी वक्त शिवाय की सेक्रेटरी आ गई। और वह अपने काम में लग गया।
दोपहर में काम करते हुए शिवाय बार-बार घड़ी देख रहे थे। शिवाय की कोशिश थी कि वह आज लंच घर पर श्लोका के साथ करे। क्योंकि उसने कहा था कि वह डैड के साथ लंच करेगी। वह इस घड़ी को मिस नहीं करना चाहता था। तभी उसे कोई काम आ गया। और वह लंच के लिए घर नहीं जा पाया। काम खत्म करके शिवाय ने आफिस में ही लंच कर लिया जो कि घर से आया था। लंच करते हुए वह पूरे टाइम श्लोका को सोचता रहा।
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श्लोका सुमन ने अपना सारा सामान सेट कर लिया था। अंकल के साथ लंच करने के बाद वह वापस रूम में आ गई। और लैपटॉप लेकर बैठ गई। उस के बहुत सारे काम पेंडिंग थे जो उसे करने थे। बाबा की बीमारी की वजह से वह कुछ पढ़ नहीं पाई थी।
रात को डिनर के टाइम वह नीचे गई। वहां पर आंटी, अंकल, अराध्या और अमोल सभी थे। सिर्फ शिवाय नहीं था। वह भी वहीं बैठ गई।
लगता है शिवाय को देर हो जायेगी। हम लोग डिनर कर लेते हैं।
आंटी ने उठते हुए कहा। उनके साथ ही हर कोई उठ गया। श्लोका सुमन को बहुत अजीब लगा कि शिवाय सुबह का गया अभी तक नहीं आया। जो सारा दिन काम करता रहा उसके लिए वह लोग थोड़ा देर रूक ना सके। और खाना खाने लगे। लेकिन वह क्या कर सकती थी। इस लिए खामोशी से वह भी खाने के लिए बैठ गई।
थोड़ी देर में शिवाय भी आ गये। आते ही वह ऊपर रूम में चेंज करने चले गए। और फ्रेश होकर तुरंत वापस आ गये। क्योंकि शिवाय को श्लोका सुमन की एक झलक देखना था। वरना खाना खाते ही वह रूम में चली जायेगी तो वह उसको नहीं देख पायेगा।
चेयर पर बैठते ही शिवाय की नज़र सीधे श्लोका सुमन पर ही गई। जो खामोशी से खाना खा रही थी। और खाते ही तुरंत वह उठ गई। और ऊपर रूम में चली गई।
कल मेरी कुछ फ्रेंड्स डिनर पर आयेंगी?
ममता जी ने सुधीर जी को देखते हुए कहा।
तो????
सुधीर जी को हैरत हुई। क्योंकि आज से पहले उन्होंने कभी उनको नहीं बताया था।
कल सुमन भी हमारे साथ डिनर करेगी। मेरा मतलब जिस तरह वह हाथ से खाना खाती है। अच्छा नहीं लगेगा। हमारी इमेज खराब होगी कि कैसे हमारे मिलने वाले हैं।
ममता जी ने पूरी बात बताई।
मां की बात सुनकर शिवाय को बहुत तेज़ गुस्सा आया। मगर वह शांत रह गया।
वह मेरे दोस्त की बेटी है। अगर इमेज खराब होगी तो मेरी होगी तुम्हारी नहीं। इस लिए तुम खामोश ही रहो तो बेहतर होगा। और यह बात सुमन के कानों तक ना पहुंचे। कल वह हम सब के साथ डिनर करेगी। और तुम लोग उससे बात किया करो।
अराध्या तुम भी।
मैं क्या बात करूंगी उस से, मैं नहीं बात कर सकती डैड।
अराध्या ने खाते हुए कहा।
तुम लोगों को जो करना है करो। तुम लोगों से कुछ कहना ही बेकार है।
कहते ही सुधीर जी रूकते नहीं हैं। सीधे उठ कर बाहर हॉल में चले जाते हैं।
मेरी चाय रेडी रखो।
शिवाय ने कमला से कहा। और खाना खाने लगे।
शिवाय के खाना खाते ही उसकी चाय आ गई। और वह चाय लेकर रूम में चला गया। अक्सर वह खाना खा कर डैड के पास बैठ जाता था। थोड़ी देर बात करके तब वह रूम में जाता था। मगर आज उसका मूड आफ था। इस लिए वह सीधा रूम में चला गया।
चाय पीते हुए उसका पूरा ध्यान श्लोका और मां की बातों पर था। क्या श्लोका उसके लायक नहीं है। जिस सोसायटी में वह रहता है क्या श्लोका उस में एडजस्ट नहीं कर पायेगी। आज जब श्लोका को इस लायक नहीं मानती कि वह उस के मेहमान के साथ डिनर करे। तो क्या वह उस को इस घर की बहू के रूप में स्वीकार करेंगी?
लेकिन मेरे दिल का क्या? जो उसका दीवाना हो गया है। श्लोका की याद आते ही उसके दिल में एक धुन बज जाती है। और उसकी धड़कन बेतरतीब हो जाती है।
सारा दिन काम करके थके होने के बावजूद उस के आंख में नींद नहीं थी। और फिर इतनी टेंशन में उसे सिर्फ एक ही चीज़ दिखाई देती है।
शिवाय उठकर दराज़ खोल कर उसमें से सिगरेट निकाल कर पीते हुए बाहर बालकनी में चले जाते हैं।
श्लोका सुमन को भी नींद नहीं आ रही थी। उसके सामने सारे घर वालों का रवैया घूम रहा था। जो कि उसे समझ नहीं आ रहा था। वह उठ कर बाहर बालकनी में चली गई।
बाहर जाते ही उसकी नज़र शिवाय पर गई वह हैरान रह गई। क्योंकि उसी बालकनी पर दूसरी तरफ शिवाय खड़े सिगरेट पी रहे थे। शिवाय ने भी श्लोका को देख लिया था।
जारी है...
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