धड़कन | भाग 3 | Dhadkan Part 3 | Heart Touching Hindi Love Story
बाहर जाते ही जैसे ही उसकी नज़र शिवाय पर गई वह हैरान रह गई। क्योंकि उसी बालकनी पर दूसरी तरफ शिवाय खड़े सिगरेट पी रहे थे। शिवाय ने भी श्लोका को देख लिया था।
शिवाय को इस तरह बालकनी में वह भी सिगरेट पीता देख उसे हैरत हुई। क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि शिवाय सिगरेट पीते होंगे।
शिवाय भी उसका हैरान चेहरा देख कर समझ गये कि वह उसे सिगरेट पीता देख हैरत में है।
सुनो....
श्लोका सुमन जैसे ही वापस रूम में जाने लगी। शिवाय ने आवाज़ दी। और श्लोका की तरफ बढ़ गये।
श्लोका वापस मुड़ गई। और सवालिया नज़रों से उसे देखने लगी।
मगर शिवाय कुछ बोलने के बजाय उसे देखते रहे। कैसी उसके दिल में हलचल मचा कर वह अंजान है।
आप इस वक्त यहां?
जब शिवाय ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया। तो उसी ने सवाल कर दिया।
जैसे तुम अपने रूम की बालकनी में हो। वैसे ही मैं अपने रूम की बालकनी में था। तुम्हारे रूम के सामने वाला रूम मेरा है। और दोनों रूम की बालकनी मिली हुई है।
शिवाय ने सब क्लीयर कर दिया ताकि उसे कोई टेंशन ना हो।
और शिवाय की बात सुनकर श्लोका सुमन सोचने लगी कि अंकल ने उसे शिवाय के सामने वाला रूम क्यों दिया।
आपको तो पता ही होगा कि सिगरेट सेहत के लिए अच्छी नहीं है। उस के बाद भी आप सिगरेट पी रहे हैं।
श्लोका ने शिवाय को सिगरेट पीता देख कर पूछा।
शिवाय को जो कुछ देर पहले टेंशन थी। वह पता नहीं कहां चली गई थी। इस वक्त उसके अंदर और बाहर एक ताज़गी आ गई थी।
कभी-कभी दिल कुछ गलत करने को कह देता है तो मैं कर लेता हूं। जैसे इस वक्त मेरा दिल सिगरेट पीने को कह रहा था। इस लिए मैं पी रहा था।
शिवाय के होंठों पर मुस्कान थी।
दिल के साथ दिमाग का भी इस्तेमाल किया करें।
श्लोका उसकी बात से नाराज़ होकर कहती है।
शिवाय खामोशी से रेलिंग पर दोनों हाथ टिकाकर खड़े हो जाते हैं। शिवाय श्लोका के रुम की बालकनी की तरफ आ चुके थे।
शिवाय को इस तरह खामोश देख कर श्लोका को उलझन होने लगती है। उसे ऐसा लगता है जैसे शिवाय बहुत दुखी हों।
क्या हुआ मेरी बात बुरी लग गई?
श्लोका भी उसी के बगल में रेलिंग पर हाथ रख कर खड़ी हो जाती है।
शिवाय एक बार फिर उसे देखता रह जाता है। मगर फिर जल्द ही सम्भल जाता है।
नहीं, तुम्हारी बात बिल्कुल भी बुरी नहीं लगी।
शिवाय की नज़र अभी भी उसके चेहरे पर थी।
आप को कोई दुख है जो आपको परेशान कर रहा है।
श्लोका ने शिवाय को देखते हुए कहा।
और उसकी बात सुनकर शिवाय के चेहरे का रंग बदल गया। उसको सारे दर्द उधड़ गये। उसकी आंखों में ना जाने कितने लम्हें बीत गए। मगर फिर वह तुरंत नार्मल हो गये। लेकिन श्लोका के नज़रों ने बहुत कुछ महसूस कर लिया था।
ऐसा क्यों लगा तुम्हें?
शिवाय ने उलटा उसी से सवाल कर दिया। क्योंकि वह जवाब देने की पोज़ीशन में नहीं था।
लगा तभी तो पूछा। वरना फिर कोई बात ही नहीं थी।
श्लोका भी कहां कम थी।
शिवाय मुस्कुरा दिये।
उसे ममता जी की आज की बात याद आ गई। कि वह कल उन सब के साथ डिनर ना करे। और वह बात याद आते ही ना जाने क्यों उसका दिल एक बार फिर दुखी हो गया।
अगर तुम्हें कोई बुरा कहेगा तो तुम को बुरा लगेगा?
शिवाय ने श्लोका को देखते हुए पूछा।
अगर मैं गलत नहीं हूं तो मुझे बुरा लगेगा। लेकिन मैं उसके लिए कोई बहस नहीं करती। मैं खामोश रहना ज़्यादा सही समझती हूं। इससे क्या होता है कि मुझे टेंशन नहीं होती है। और जब टेंशन नहीं होती है तो फिर सिगरेट नहीं पीना पड़ता है।
श्लोका सुमन ने बहुत ही सादगी से अपनी बात कही। जिसे सुनकर शिवाय को बहुत ज़ोर से हंसी आ जाती है। कितनी आसानी से वह अपनी बात कह कर वापस उसी बात पर आ गई थी।
और श्लोका उसे हंसता देखती रह गई। उसके दिल में शिवाय की हंसी गूंज रही थी।
बहुत देर हो गई। अब मैं सोने जा रही हूं। और वह रेलिंग के पास से मुड़ जाती है।
अचानक से श्लोका कहती है क्योंकि उसका दिल बेचैन हो रहा था शिवाय को देख कर।
सुनो....
शिवाय के दिल से आवाज़ निकली जो श्लोका सुमन तक पहुंच गई।
वह वापस मुड़ी। मगर खामोश रही।
थैंक्स.....
शिवाय ने बहुत प्यार से कहा।
किस लिए ?
श्लोका सुमन को हैरत हुई।
बस ऐसे ही।
शिवाय ने कहा। और उसका जवाब सुने बिना अपने रूम की तरफ बढ़ गया।
श्लोका सुमन हैरानी से शिवाय को देखती रह जाती है। जो अपने रूम की तरफ जा रहा था। श्लोका सुमन भी रुम में चली जाती है। और शिवाय की बात पर गौर करती है। और उसी के बारे में सोचते हुए उसे नींद आ जाती है।
शिवाय बिस्तर पर लेट कर श्लोका के बारे में सोचता है। उसको श्लोका से मुहब्बत हो गई है यह उसके दिल ने कबूल कर लिया था। उस के अंदर क्या कमी है वह शहरी ज़िंदगी जी भी पायेगी या नहीं? ऐसे ना जाने कितने ही सवाल थे जो श्लोका को चाहने के बाद उस के दिल में आ रहे थे। लेकिन हर सवाल के बाद आखिर में उसका दिल जीत जाता है। और उसका दिमाग हार जाता है। और फिर वह सुकून से सो जाता है।
सुबह श्लोका जल्दी तैयार हो कर नीचे चली जाती है। और किचन में जाकर वह सैंडविच बनाती है। कमला उसे मना करती है। वह कहती है कि सर जी को पता लगेगा तो गुस्सा होंगे। मगर श्लोका कहती है कि अंकल कुछ नहीं कहेंगे। और वह सैंडविच बना कर बाहर आ जाती है। सारा नाश्ता टेबल पर लग जाता है। उसी वक्त शिवाय भी आ जाते हैं।
गुड मॉर्निंग....
शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं। और श्लोका को नज़र भर कर देखता है। रोज़ की तरह वही लैंग सूट और साथ में पैंट बाल उसी तरह क्लैचर में फंसे हुए थे। चेहरा बिल्कुल फ्रेश।
परफेक्ट...... शिवाय के दिल से आवाज़ आती है।
श्लोका भी सिर हिला कर जवाब देती है। दोनों डायनिंग टेबल पर बैठ जाते हैं।
शिवाय एक नज़र सारी चीज़ें पर डालता है। और फिर सैंडविच उठा कर अपनी प्लेट में रख लेता है। और साथ में जूस निकाल लेते हैं।
श्लोका भी सैंडविच ही लेती है। और खाने लगती है। वह मन ही मन सोचती है कि अच्छी तो बनी है। अब देखें शिवाय को पसंद आती है या नहीं।
एक पीस खाने के बाद शिवाय ने दूसरी पीस उठा ली। तब उसे तसल्ली हुई कि लगता है पसंद आई।
उसी वक्त सुधीर जी भी आ जाते हैं। वह भी सारी चीजें को देख कर सैंडविच ही लेते हैं।
वाह यह सैंडविच तो बहुत टेस्टी है कमला। कहां से सीख लिया तुमने?
सुधीर जी ने हंसते हुए कहा।
मैंने नहीं बनाया है। सुमन बीबी ने बनाया है।
कमला ने डरते हुए कहा।
तुम किचन में क्यों गई। अगर सैंडविच खाना था तो कमला से बोल देती वह बना देती। लेकिन कमला इतनी टेस्टी ना बनाती।
सुधीर जी ने हंसते हुए कहा।
कमला भी मुस्कुरा दी। वरना उसे डर था कि कहीं डांट ना पड़ जाए।
वाकई यह बहुत टेस्टी है। शिवाय ने भी तारीफ की।
श्लोका ने शिवाय को देखा। और दोनों मुस्करा दिये। सुधीर जी आराम से खाने में लगे थे। उनका ध्यान शिवाय और श्लोका पर नहीं गया।
नाश्ता करते ही शिवाय अपनी रूटीन के मुताबिक बाहर चले गए। और श्लोका वहीं अंकल से बात करने लगी। और फिर उन्हीं के साथ बाहर भी आ गई। आज उसके हाथ में चाय का मग था। उसने देखा शिवाय भी चाय पी रहे थे। चाय पीते ही वह लोग आफिस के लिए निकल गये। और श्लोका रूम में आ गई।
रूम में आते ही वह लिस्ट बनाने लगी कि उसे क्या सामान लेना है। लिस्ट बनाते ही वह अपना पर्स चेक करती है। मोबाइल और कार्ड रखती है। साथ ही पैसे भी रख लेती है।
वह नीचे जाती है। नौकरों के सिवा कोई दिखाई नहीं देता है। वह कमला से बोल कर चली जाती है। और बाहर जाकर आटो करके एड्रेस बता कर चली जाती है। सारा सामान लेकर जब वह आटो में बैठ कर घड़ी देखती है तो तीन बज रहे थे। पता नहीं अंकल खाने के लिए आये थे भी या नहीं। सुबह उसने अंकल को बता दिया था कि आज वह कुछ सामान लेने जायेगी। जो कि बहुत ज़रूरी है।
घर वापस आई तो अंकल और शिवाय दोनों खाना खा रहे थे। और उनका खाना लगभग हो भी गया था।
श्लोका वहीं सोफे पर बैठ गई। शिवाय ने एक नज़र उसे देखा। वह थकी-थकी सी लग रही थी।
मैं घर आया। और तब तक तुम नहीं आई तो मुझे टेंशन होने लगी। मैं तुम्हारा फोन ला दूंगी। जिससे तुम जहां भी रहो। मुझे पता लगता रहेगा।
सुधीर जी ने श्लोका को देखते हुए कहा।
नहीं अंकल मोबाइल की कोई ज़रूरत नहीं है।
श्लोका ने मना किया।
क्यों ज़रूरत नहीं है। मैं ला दूंगा। सुधीर जी ने श्लोका सुमन से कहा।
आप रहने दें डैड, मैं ले लूंगा। शिवाय ने श्लोका सुमन को देखते हुए कहा।
ठीक है। सुधीर जी कहकर उठ गये।
मुझे मोबाइल का कोई काम नहीं है अभी, जब ज़रूरत होगी तो बोल दूंगी।
श्लोका ने सादगी से कहा। वैसे भी शिवाय को देख कर उसके अल्फाज़ बेतरतीब हो जा रहे थे।
और शिवाय का जवाब सुने बिना उठ जाती है। और ऊपर चली जाती है।
शिवाय भी ऊपर अपने रूम में चला जाता है। लेकिन उसका दिल करता है कि कुछ देर श्लोका से बात करे। फिर आफिस जाये।
श्लोका सुमन अपने रूम का दरवाज़ा बंद नहीं करती है। और रूम में जाकर सारा सामान रख कर सोफे पर ही लेटने के अंदाज़ में फैल जाती है। उसी वक्त शिवाय भी रूम में आता है। चूंकि उसका कमरा श्लोका के सामने ही था। उसकी नज़र श्लोका पर पड़ जाती है। शिवाय के कदम वहीं रूक जाते हैं वह श्लोका को देखता रह जाता है।
शिवाय के नज़रों की तपिश थी कि श्लोका आंख खोल देती है। उसकी नज़र सीधे शिवाय पर पड़ती है।
श्लोका को जागता देख शिवाय उसके रूम में चला जाता है।
आटो से गई थी बाहर?
शिवाय ने नाराज़गी से पूछा।
हां,
श्लोका भी नार्मल रही।
जब घर में गाड़ी है तो फिर आटो से जाने की क्या ज़रूरत थी।
शिवाय की नाराज़गी बढ़ रही थी।
इस बारे में कल बात हो चुकी है। अब फिर वही बात करने का कोई फायदा नहीं है।
श्लोका ने भी सीरियस होकर कहा।
क्यों ज़िद कर रही हो?
शिवाय का अंदाज़ बदल गया।
कौन ज़िद रहा है मैं? एक ज़माना हो गया ज़िद किये हुए।
श्लोका ने उदासी से कहा। उसे अम्मा और बाबा की याद आ गई।
उसे उदास देखकर शिवाय उसके पास ही सोफे पर बैठ गया।
सौरी, मेरा मकसद तुम्हारा दिल दुखाना नहीं था। मैं तो सिर्फ तुम्हारे आराम के लिए कह रहा था।
शिवाय भी दुखी हो गया। उसने श्लोका को बहुत ध्यान से देखा। जिसके आंखों के कोने नम थे। जिसे वह छुपाने की कोशिश कर रही थी।
शिवाय उस के करीब जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर उसे खुद से सटा कर साइड हग कर लेता है।
श्लोका हैरानी से शिवाय को देखती है। शिवाय भी उसे ही देख रहा होता है।
उठो, जाकर खाना खाओ। थक गई हो, आराम करो।
शिवाय उसके कंधे से हाथ हटा कर उठ खड़ा होता है। और अपने रूम में चला जाता है।
रूम में जाकर वह शूज़ पहने हुए ही यूं ही तिरछा लेट जाता है। उसकी आंखों में आंसू थे। उसने आंख बंद कर ली। ना जाने कितने ही लम्हे उसकी आंखों में घूम गये।
इतना दुख उसे सिर्फ एक बात पर हुआ। जब श्लोका ने कहा कि ज़िद तो वह कब का छोड़ चुकी है। और ज़िद की बात पर उसे भी क्या कुछ याद आ गया। उस ने भी ज़िद करना कब का छोड़ दिया था उसे याद ही नहीं था। वह यूं ही लेटा अपने दर्द समेटता रहा।
शिवाय के जाते ही श्लोका शिवाय के बारे में सोचती जा रही थी। कैसे उस के दुखी होने पर उसने उसे साइड हग कर लिया था। वह शिवाय को अभी भी अपने पास महसूस कर रही थी। ना जाने क्यों उसे शिवाय का इस तरह हग करना बुरा नहीं लगा। वरना उसे कोई गलती से भी टच कर जाता तो उसको बहुत तेज़ गुस्सा आ जाता था। और वह उस को डांट देती थी।
शायद इसी को मुहब्बत कहते हैं। दिल को दिल से राह होती है। महबूब की कोई भी हरकत बुरी नहीं लगती है। वह गुस्सा भी होते हैं तो
उस में प्यार अपनापन और फिक्र छुपी होती है।
जारी है...
क्या यह अनकही कहानी मुहब्बत में बदलेगी? क्या शिवाय और श्लोका अपनी भावनाओं को समझ पाएंगे? या उनके रास्ते में ऐसी बाधाएं आएंगी जो उनके दिलों को अलग कर देंगी?
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