डोर धड़कन से बंधी | भाग 80 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 80 | Hindi Romantic Story
आप के लिए फोन था। कह रहे थे पुरानी बीमारी दोबारा लौट आई है। आप एक बार बात कर लें कि कौन बीमार है। असमा फिक्रमंदी से कहती है।
आप फोन करके बोल दें कि आपरेशन की तैयारी करें, हम आते हैं। शिवाय तुरंत फैसला लेते हैं।
ठीक है। लेकिन आप बात कर लेते। असमा धीरे से कहती है।
आप बोल दें एक बार फिर हम बात करते हैं। शिवाय का दिमाग बहुत तेज़ी से चल रहा था।
आप लोग चले जायेंगे?
हां…
कब वापस आयेंगे?
नहीं आयेंगे।
क्यों? यहां कोई परेशानी थी?
नहीं, लेकिन हमारा यह साथ इतने ही दिनों का था। श्लोका उनको कोई आस नहीं देना चाहते थी।
असमा खामोशी से बाहर बाहर निकल जाती है। उसकी आंखों की नमी उन से छिपी नहीं रह सकी।
कौन है यह बीमारी? आप का कोई पुराना दुश्मन? श्लोका सोचते हुए कहती है।
वही तो मैं भी सोच रहा हूं। बिज़नेस में तो ऊंचा-नीचा लगा रहता है। लेकिन ऐसा तो कोई दुश्मन नहीं जिससे हमें नुकसान पहुंचे। शिवाय सोचते हुए कहते हैं।
अब क्या करना है?
संडे को चलते हैं, फिर देखते हैं।
परेशानी वाली कोई बात नहीं है जब तक मैं हूं। शिवाय श्लोका को टेंशन में देख कर कहते हैं।
मैं आप के लिए परेशान हो रही हूं। श्लोका मुस्कुरा देती है। और कॉफी का मग शिवाय की तरफ बढ़ा देती है।
जब तक तुम मेरे साथ हो। मुझे कोई टेंशन नहीं होती है। शिवाय बहुत प्यार से श्लोका को देख कर कहते हैं।
अब सो जाओ, सुबह हाजी साहेब को बता दूंगा। और दूसरी दुकान पर भी बोलना होगा। बड़ा मुश्किल होगा उन लोगों को मना करना। वैसे ही इन लोगों को लगता है कि मेरी वजह से उन का काम बहुत अच्छा हो गया है।
शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं।
उन को क्या पता कि आप का कितना बड़ा बिज़नेस है। श्लोका मुस्कुरा कर कहती है।
कपड़े वाली शॉप पर तो इतनी इज़्ज़त मिलती है कि क्या बताऊं। हर आने वाले कस्टमर को मैं अपने हिसाब से डील करता हूं। अभी कल ही मैंने उन से कहा कि आप किसी और को देख लें। मैं अब काम नहीं करूंगा तो कहने लगे पैसा चाहे जितना ले लो मगर काम नहीं छोड़ना है।
अब कैसे मनाऊंगा? शिवाय को फिक्र हुई।
और हाजी साहेब? श्लोका को फिक्र हुई।
देखते हैं…मुश्किल है सब को मनाना। लेकिन जाना तो है।
…
अगली सुबह…
आप लोग जा रहे हैं।
जैसे ही वह दोनों रूम से निकले। राहिल उठ कर उनके सामने आ जाता है।
हां…
लेकिन क्यों आप लोगों को कोई दिक्कत है तो बताएं, लेकिन मत जाएं प्लीज़… अभी तो मैंने काम शुरू किया है। मैं कैसे करूंगा? राहिल परेशानी से पूछता है।
हम से कोई गलती हो गई तो माफ कर दें। हाजी साहेब उदासी से कहते हैं।
अरे नहीं चाचा जी आप बड़े हैं आप ऐसा ना कहें। आप प्लीज़ मुझे शर्मिंदा ना करें। कहते हुए शिवाय उनके कदमों में बैठ जाते हैं।
असमा बता रही थी कि वापस नहीं आयेंगे। दूसरा घर देख लिया है? यहां रहने में दिक्कत है।
हाजी साहेब को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे रोक लें।
नहीं, ऐसी कोई बात नहीं। आप सब ने जो प्यार और अपनापन दिया है। उसे हम कभी नहीं भूल सकते।
हम मिलने आयेंगे। श्लोका मुस्कुरा कर कहती हैं।
सारे बच्चे उदास बैठे थे। यूं जैसे उन का कोई बहुत अपना उन को छोड़ कर जा रहा हो।
तुम सब को कोई भी परेशानी हो नानू से और मां से कहना। और इन को कभी दुख मत देना। श्लोका सब को देख कर कहती है।
अभी मैं जा रहा हूं, आता हूं थोड़ी देर में। कहते हुए शिवाय बाहर निकल जाते हैं। उन सब की मुहब्बत उन के कदम रोक रहे थे। लेकिन उन्हें तो लौटना ही था।
…
कोई भी काम हो बिला झिझक उसी नंबर पर बोल देना।
रात में जब असमा कॉफी लेकर आईं तो श्लोका उन का उदास चेहरा देख कर कहती हैं।
कल सुबह हम लोग जल्दी निकल जायेंगे।
जाते वक्त मिलेंगे नहीं? असमा हैरानी से पूछती है।
नहीं, यह बात आप किसी को मत बताना। शिवाय जल्दी से कहते हैं।
रास्ते का कुछ खाना?
नहीं कुछ नहीं। अब आप जाएं आराम करें। ज़्यादा कुछ सोचें नहीं। सभी बच्चों के साथ सब अच्छा होगा। बच्चों का कोई भी फैसला लेने से पहले मुझ से एक बार बात कर लेना।
शिवाय ने हिम्मत दी।
ठीक है, असमा के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
आपके भाई भाभी आप के साथ हमेशा रहेंगे।
श्लोका भी मुस्कुरा दी।
असमा बाहर चली गई।
अब सो जाओ। सुबह जल्दी उठकर हम चले जायेंगे, वरना उन सब को सम्हालना मुश्किल हो जायेगा। राहिल को देख ही मुझे फिक्र हो रही है। शिवाय को राहिल का चेहरा याद आ गया।
हां मैंने भी देखा था आप के जाने का सुनकर वह सबसे ज़्यादा परेशान था। श्लोका को भी हर किसी का चेहरा याद आ जाता है।
♥️
सर आप?
शिवाय और श्लोका जैसे ही ओबेरॉय मेंशन के गेट पर पहुंचते हैं। गार्ड उन को देखते ही हाथ जोड़कर हैरानी और खुशी से बोल पड़ता है।
शिवाय और श्लोका मुस्कुरा कर हाथ जोड़ते हुए अंदर की तरफ बढ़ जाते हैं। सारे स्टाफ हाथ जोड़कर कर खड़े हो गए।
सर ब्रेकफास्ट की तैयारी करें? शिवाय का रूम मैनेजर तुरंत आगे आकर पूछता है।
हां, लेकिन सिर्फ हमारे नहीं…बल्कि पूरे परिवार के लिए। सबको बोल दें, आज हम सब ब्रेकफास्ट साथ करेंगे। शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं और श्लोका का हाथ थाम कर ऊपर अपने रूम की तरफ बढ़ जाते हैं।
हमारे इस आशयाने में आप का स्वागत है। शिवाय रूम का दरवाज़ा खोल कर श्लोका का वेलकम करते हैं।
और श्लोका…वह किसी महारानी की तरह एक शान से अंदर जाती है। लेकिन अंदर जाते हुए शिवाय का हाथ थामना वह नहीं भूलती।
कमरे में जाकर श्लोका चारों तरफ देखती है। सब कुछ बिल्कुल वैसे ही था जैसा छोड़ कर गई थी। खूबसूरत पर्दे, सोफे पर करीने से रखा कुशन, बेड पर बिना शिकन के बिछी बेडशीट…
कुछ नहीं बदला शिवाय…श्लोका उदासी से कहती है।
लेकिन वक्त बदल गया है…शिवाय के लहजे में दुख था।
सब ठीक हो जायेगा…इसी उम्मीद के साथ हम यह सफर शुरू करें शिवाय? श्लोका कहकर उम्मीद से शिवाय को देखती है।
हूं…शिवाय पता नहीं किन सोचों में गुम थे।
फ्रेश हो जाएं, फिर नीचे चलते हैं। कहते हुए श्लोका अलमारी से कपड़े निकालने लगती है।
शिवाय के आने की खबर सुनकर हर कोई ओबेरॉय मेंशन पहुंच चुका था।
शिवाय और श्लोका तैयार होकर जैसे ही सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं पूजा दौड़ कर सीढ़ियां चढ़ते हुए उन दोनों के गले लग जाती है। बेतहाशा आंसू उसकी आंखों से बह निकले।
जारी है…
Comments
Post a Comment