डोर धड़कन से बंधी | भाग 82 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 82 | Hindi Romantic Story
सीढ़ियों से उतरते हुए उसे श्लोका दिख जाती है।
मौम… श्लोका को देखते ही उसकी चींख निकल जाती है।
…
पूजा की वजह से तुम को जो परेशानी हुई उसके लिए मैं तुम से माफी मांगता हूं। पूजा के जाते ही शिवाय आरव के सामने हाथ जोड़ देते हैं।
नहीं डैड प्लीज़ नहीं…आप ऐसा ना करें। आरव उन के हाथ को थाम कर अपने माथे से लगा लेता है।
मेरी पूजा बहुत प्यारी बहुत मासूम, बहुत मुहब्बत करने वाली लड़की है। हमारी वजह से वह डिस्टर्ब हो गई होगी। मुझे उम्मीद है अब वह ठीक हो जायेगी। शिवाय आरव को पता नहीं क्या समझाना चाह रहे थे।
डैड आप फिक्र ना करें…सब ठीक है। प्यार और इज़्ज़त हर रिश्ते को मज़बूत बनाती है। और हमारे बीच वह रिश्ता बहुत अटूट है। आरव यकीन से कहता है।
तुम सही कह रहे हो…हर रिश्ते में प्यार और इज़्ज़त बहुत ज़रूरी होता है। एक औरत अपना सब कुछ छोड़ कर हमारे पास आती है। हमें हमेशा उसे प्यार और सम्मान देना चाहिए।
एक औरत को अगर प्यार और सम्मान मिलता रहे तो वह हर मुश्किल को बर्दाश्त कर लेती है। शिवाय के आंखों के सामने श्लोका का चेहरा था जो हर मुश्किल में उस के साथ खड़ी रही। और यह उन दोनों का प्यार ही था जो वह हर तकलीफ हर मुश्किल को बर्दाश्त कर गए।
डैड…आरव…तभी पूजा की आवाज़ उन्हें सुनाई देती है।
दोनों उठकर बाहर जाते हैं। आरव तेज़ी से सीढ़ियां उतर कर पूजा के पास पहुंच जाता है। जो श्लोका को आवाज़ दे रही थी।
शिवाय भी तेज़ी से सीढ़ियां उतर कर श्लोका के पास पहुंच जाते हैं। श्लोका बेहोश थी।
श्लोका…शिवाय की आवाज़ कांप उठी।
डाक्टर…शिवाय की आवाज़ गूंजी।
उसी वक्त डाक्टर आ गए।
आवाज़ सुन कर प्रेम और काजल भी आ गए।
लगता है कुछ टेंशन और परेशानी की वजह से बेहोश हो गई थीं। आराम करेंगी तो ठीक हो जायेंगी। कल कुछ चेकअप भी कराना होगा। अभी यह मेडिसिन दे दें।
श्लोका के होश में आते ही डाक्टर शिवाय को बताते हैं।
शिवाय को तो जैसे बोलने की हालत ही नहीं थी। श्लोका का सिर गोद में रखे वह सिर्फ उसे देख रहे थे।
वह प्यार और ममता की देवी… जो उसकी ज़िन्दगी थी। आज अचानक उसके इस तरह बेहोश होने पर शिवाय की जान ही निकल गई।
चेयर लेकर आओ, और श्लोका को लिफ्ट से ऊपर रूम में ले चलो। शिवाय प्रेम से कहते हैं।
स्टाफ तुरंत चेयर लाकर रख देता है।
प्रेम आरव और पूजा मिलकर श्लोका को थाम कर चेयर पर बैठा कर लिफ्ट की तरफ बढ़ जाते हैं। शिवाय भी साथ में उठ जाते हैं।
श्लोका को बेड पर लिटा कर पूजा वहीं बैठ जाती है। उसकी आंख में आंसू थे। अभी तो उसके मौम डैड उसे मिले थे। फिर यह अचानक से मौम का बीमार होना उसे परेशान कर गया।
अब सब लोग जाओ…श्लोका आराम करेगी। शिवाय श्लोका के करीब बैठ जाते हैं।
डैड मैं यहीं रूक जाऊं? पूजा रोते हुए कहती है।
आरव अभी पूजा को इस के रूम में ले जाओ। शिवाय पूजा से कुछ कहने के बजाए आरव को इशारा करते हैं।
अभी चलो, अभी मौम आराम करेंगी। थोड़ी देर बाद आ जाना।
आरव आगे बढ़ कर पूजा का हाथ पकड़ कर उठा देता है। और उसे समझाते हुए बाहर निकल जाता है।
प्रेम भी बाहर चला जाता है।
सब के जाते ही शिवाय श्लोका का हाथ थाम लेते हैं। श्लोका आंख खोल कर शिवाय को देखती है।
मुझे माफ कर दो…इस सब का ज़िम्मेदार मैं हूं। शिवाय रो पड़ते हैं।
जब तक आप मेरे साथ हैं मुझे कुछ नहीं होगा। श्लोका मुस्कुरा कर कहती है।
हमारा यह साथ ही हमारी ताकत है। शिवाय भी नम आंखों के साथ मुस्कुरा दिए।
अभी तुम आराम करो। शिवाय उसके सिर पर हाथ रखते हैं।
और आप? श्लोका को फिक्र हुई।
मैं भी आराम करूंगा। शिवाय भी लेट गए। लेकिन शिवाय का मन श्लोका में अटका हुआ था। उसका यह ज़रा सा बेहोश होना ही शिवाय को टेंशन दे गया था।
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अब मौम बीमार हो गईं। तुम्हारे साथ तो हर वक्त कुछ ना कुछ परेशानी लगी रहती है। काजल नाराज़गी से कहती है।
मौम जानबूझ कर बीमार थोड़ी हुई हैं। प्रेम नाराज़गी से कहता है।
क्या पता? हकीकत है या नाटक…वैसे भी वह मुझे पसंद नहीं करती। काजल सोचते हुए कहती है।
प्रेम खामोशी से एक नज़र उसे देखता है और बाहर निकल जाता है। कभी-कभी पूजा की बातें उसे अच्छी नहीं लगती। खासकर जब वह उसके मौम डैड के लिए कहती है।
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आरव मौम को क्या हुआ है? वह ठीक हो जायेंगी ना? अभी तो वह आई हैं। और अब…पूजा रोते हुए आरव से सवाल करती है।
मौम बिल्कुल ठीक हैं…तुम टेंशन मत लो, किसी वजह से वह बेहोश हो गईं थी। लेकिन अब वह बिल्कुल ठीक हैं। आरव उसे साथ लगाते हुए कहता है।
आरव मैं कुछ दिन यहां पर मौम डैड के साथ रहना चाहती हूं। पूजा सिर ऊंचा करके आरव को देखते हुए कहती है।
तुम को जब तक रहना है रहो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। बल्कि मैं खुद भी आफिस से तुम्हारे पास आ जाऊंगा। क्योंकि जब तक मैं तुम्हारा चेहरे ना देख लूं मेरा दिल बेचैन रहता है। आरव उसके माथे पर मुहब्बत भरा एहसास देते हैं और उसे दोबारा अपनी बाहों में भर लेते हैं।
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लंच शिवाय और श्लोका साथ में रूम में ही कर लेते हैं।
श्लोका ठीक थी लेकिन ना जाने क्यों वह बहुत खामोश थी। जिस को सब के साथ-साथ शिवाय ने भी महसूस किया।
शाम में आदर्श और मुग्धा भी आ जाते हैं। शिवाय उन को भी रूम में ही बुला लेते हैं।
अब ठीक हैं? आदर्श मुस्कुरा कर पूछता है।
जी, मैं ठीक हूं बेकार में सब परेशान हो रहे। श्लोका भी मुस्कुरा कर कहती है।
वही तो मैं भी देख रहा हूं…तुम तो बिल्कुल ठीक हो। सब को मिल बैठ कर पार्टी करना था, और कुछ नहीं... आदर्श सब को देख कर कहते हैं।
चलो शिवाय हम भी बाहर घूम कर आते हैं। इन को यहां पर इंज्वॉय करने देते हैं। आदर्श शिवाय को उठने का इशारा करके कहते हुए उठ खड़े होते हैं।
हां ठीक है चलो। शिवाय भी उठ गए।
और हां वापसी में केक हम लेकर आयेंगे, तुम बाकी तैयारी कर लेना। आदर्श पूजा को देख कर कहते हैं।
ओके पा…पूजा भी मुस्कुरा दी।
सुबह से वह मौम को लेकर परेशान थी। लेकिन अभी सब के आ जाने से उसे अच्छा लगा।
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ऐसे क्या देख रहे हो? शिवाय आदर्श को देख कर पूछते हैं जो कार को साइड करके कब से उसे देख रहा था।
अपने दोस्त को देख रहा हूं, मुझे गर्व है कि तुम मेरे दोस्त हो। बहुत मिस किया तुम को यार…कहते-कहते शिवाय की आवाज़ भर्रा गई। उसकी आंख नम हो गई।
शिवाय खामोशी से आदर्श को देख कर रह गए। क्योंकि इस वक्त उनको अपने दोस्त से कहने के लिए कुछ नहीं था।
उन दोनों के दिल में उन दोनों के लिए कितना प्यार और अपनापन था यह बात वह दोनों ही अच्छे से जानते थे।
मैं यह तो नहीं पूछूंगा कि जो ज़िन्दगी तुम गुज़ार कर आये हो वह कैसी रही। लेकिन मैं इतना ज़रूर जानता हूं कि तुम हर हाल में जीने वाले इंसान हो। इस लिए तुम्हारी यह ज़िन्दगी भी अच्छी रही होगी। आदर्श शिवाय को देख कर गर्व से कहते हैं।
एक छोटा सा कमरा जिसमें एक बेड और एक कुर्सी के सिवा कोई सामान नहीं था। हमें लगता है ज़िन्दगी जीने के लिए बहुत सारी चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है। लेकिन वहां पर रहते हुए मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। अच्छे लोग थे। दिन सुकून से गुज़र गए। शिवाय उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं।
अच्छे लोगों को हमेशा अच्छे लोग ही मिलते हैं। आदर्श ने शिवाय का कंधा थपथपाया।
आगे का प्रोग्राम? क्या प्रेम की सगाई कर रहे हो? आदर्श सोचते हुए पूछते हैं।
हां,
फैसला बड़ा है…
हूं, और कोई रास्ता भी तो नहीं। प्रेम काजल से मुहब्बत करता है। अगर मुझे मेरी मुहब्बत मिल सकती है तो मुझे कोई हक नहीं कि मैं अपने बेटे से उसकी मुहब्बत छीनूं।
यह जानते हुए कि वह गलत है।
हां, क्योंकि यह हम जानते हैं कि काजल गलत लड़की है। वह यह बात नहीं समझ रहा। वह उसके प्रेम में पागल है। और मैं अपने बेटे से प्रेम करता हूं। मैं अपने बेटे की खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूं। उसने सिर्फ अपना हिस्सा काजल के नाम करने को कहा है। अगर वह सब कुछ भी मांगता तो भी मैं उसे दे देता।
मैं जानता हूं यह मेरे बेटे का गलत फैसला है…लेकिन मुझे यकीन है इस के बाद वह कोई गलत फैसला नहीं करेगा। यह फैसला उसकी ज़िन्दगी का आखरी गलत फैसला होगा। इस यकीन के साथ मैं यह फैसला ले रहा हूं।
शिवाय आदर्श को देख कर कहते हैं।
ठीक है फिर कल पेपर तैयार करा लेते हैं। आदर्श आगे का सोचते हैं। और दोनों देर तक इस पर बात करते रहे।
कल सुबह आफिस मिलते हैं फिर बाकी का काम देख लेते हैं। मैं जल्द से जल्द इस काम को निपटाना चाहता हूं। श्लोका प्रेम को लेकर परेशान है। और मैं कुछ नहीं कर पा रहा। शिवाय की आंख नम हो गई।
सब ठीक हो जायेगा मेरे दोस्त…आदर्श शिवाय के हाथ पर हाथ रख कर पुश करते हैं।
और तुम्हारी बहू…शिवाय मुस्कुराए।
मेरे बहू तो बहुत अच्छी है…आदर्श भी हंसे।
हमारे ना रहने पर वह परेशान रही होगी। और उसकी वजह से तुम सब परेशान रहे होगे। शिवाय शर्मिंदा हुए।
यह सच है कि पूजा तुम्हारे जाने से परेशान थे। लेकिन उसकी परेशानी से हमें कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन…आदर्श थोड़ा ठहरे…
लेकिन हो सकता है पूजा और आरव के रिश्ते में कुछ उतार चढ़ाव हुए हो। लेकिन मुझे यकीन है तुम्हारा दामाद बहुत समझदार है रिश्तों को निभाना उसे बहुत अच्छे से आता है। और मैंने देखा है उन को एक दूसरे को समझते हुए। एक दूसरे का साथ निभाते हुए। आदर्श मुस्कुरा कर कहते हैं।
थैंक्स दोस्त…शिवाय सुकून से मुस्कुराए।
आदर्श भी मुस्कुरा दिए।
घर चलें?
हूं,
केक भी लेना है।
हां…
ठीक है फिर चलो। सब इंतेज़ार कर रहे होंगे।
आदर्श गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं।
ज़िन्दगी हर मुश्किल हर परेशानी से गुज़र जाती है अगर साथ एक सच्चा दोस्त हो। शिवाय और आदर्श की दोस्ती भी ऐसी ही थी। यह दोनों जब तक साथ हों। इन को किसी और की ज़रूरत नहीं पड़ती।
जारी है…
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