डोर धड़कन से बंधी | भाग 83 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 83 | Hindi Romantic Story
ज़िन्दगी हर मुश्किल हर परेशानी से गुज़र जाती है अगर साथ एक सच्चा दोस्त हो। शिवाय और आदर्श की दोस्ती भी ऐसी ही थी। यह दोनों जब तक साथ हों। इन को किसी और की ज़रूरत नहीं पड़ती।
दोनों घर पहुंचते ही सीधे ऊपर उन के रूम में चले गए। उनका कमरा पूरा सजा हुआ था। आदर्श केक पूजा को देते हैं। प्रेम और काजल भी वहीं पर थे।
पूजा टेबल पर केक रख कर शिवाय और श्लोका को आगे करती है। अमोल अराध्या की भी फैमिली आ गई थी। सुधीर जी और ममता जी पहले ही आ गए थे।
केक कटने के बाद सब ने एक दूसरे को केक खिलाई।
संडे शाम को प्रेम की सगाई है सब लोग तैयारी कर लें। शिवाय प्रेम को केक खिलाते हुए कहते हैं।
क्या सच में? प्रेम खुशी से कहता है।
हां, सच में…सगाई का फंक्शन घर के बाहर लॉन में होगा। जिस में सिर्फ घर के ही लोग रहेंगे। शिवाय ने पूरी बात बताई।
संडे बतलब परसों? पूजा हैरानी से पूछती है।
हां, क्योंकि उसी रात पार्टी खत्म होते ही हम गांव के लिए निकल जायेंगे। अगले दिन वहां पर स्कूल का उद्घाटन करना है। ताकि स्कूल में एडमिशन स्टार्ट हो जाए। मैं चाहता हूं वहां पर सारे काम अच्छे से हो जाएं। क्योंकि अगले हफ्ते मुझे लंदन एक कांफ्रेंस में भी जाना है। शिवाय ने सारी बात बताई।
ठीक है कोई दिक्कत नहीं है। हम सारी तैयारियां कर लेंगे। पूजा खुशी से कहती है और प्रेम को गले लगा लेती है।
श्लोका के पास जाकर पूजा और प्रेम उन के गले लग जाते हैं। श्लोका अपने बच्चों का प्यार देख कर मुस्कुरा देती है।
तुम्हारी खुशीयों के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। शिवाय उन्हें खुश देखकर सोचते हुए मन ही मन मुस्कुरा देते हैं।
♥️
क्या सोच रही हो? आरव पूजा को खामोश देखकर पूछता है।
मौम डैड काजल को पसंद नहीं करते उसके बावजूद वह प्रेम की सगाई उस से कर रहे हैं। वह भी उसकी शर्तों पर…पूजा अपनी उलझन उस से शेयर करती है।
मां बाप अपने बच्चों की खुशियों के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं। मौम डैड भी कर रहे। लेकिन प्रेम उनकी बात नहीं समझ पाया। उसे लगता है मौम डैड उसके साथ गलत कर रहे हैं।
मां बाप के लिए सबसे मुश्किल वक्त वह होता है जब उनके बच्चे उन्हें गलत समझते हैं।
मौम डैड भी इस वक्त उसी मुश्किल में हैं। इस लिए शायद उन्होंने यह फैसला लिया। तुम परेशान मत हो, तुम दुआ करो कि सब ठीक रहे। आरव उसे समझाता है।
लेकिन यह फैसला हमारे परिवार को मुश्किल में डाल सकता है। पूजा की टेंशन दूर ही नहीं हो रही थी।
अगर डैड ने फैसला लिया है तो कुछ सोच कर ही लिया होगा। इस लिए परेशान मत हो। जो होगा अच्छा होगा। अच्छा यह बताओ तुम को केक कैसा लगा? आरव उसे समझा कर बात बदल देता है। ताकि पूजा का मन थोड़ा शांत हो।
केक तो बहुत अच्छा था। मुझे बहुत पसंद आया। यह मौम का फेवरेट फ्लेवर था। शायद इस लिए डैड यह लाये। पूजा खुशी से कहती है।
डैड मौम का बहुत ख्याल रखते हैं। पूजा गर्व से कहती है।
और मैं?
आप?…आप तो मेरी ज़िन्दगी हैं। आप हर उस जगह मुझे थाम लेते हैं जहां मुझे किसी अपने की ज़रूरत होती है। मेरे कहे बिना आप मेरी बात समझ जाते हैं। मेरी वजह से आपको परेशानी होती है। लेकिन आप खामोशी से सब ठीक कर देते हैं। और…
बस…बस…वरना मैं मगरूर हो जाऊंगा। आरव मुस्कुरा कर उसे रोक देता है।
मगरूर तो मैं हो गई हूं…आप का प्यार पाकर। और यह कोई झूठी तारीफ नहीं बल्कि हकीकत है। आप बहुत अच्छे हैं। पूजा खुशी से कहती है।
मेरी इतनी तारीफ करने के लिए थैंक्स…अब सो जाओ बहुत रात हो गई है। आरव उसे लिटा कर लाइट बंद कर देता है।
ससुराल में पहले दिन सो रहा हूं। आरव उसकी ओर करवट लेकर कहता है।
तो…
तो…यह कि आज मेरे ससुराल में पहली रात है। और पहली रात…आरव बात अधूरी छोड़ देता है। और मुस्कुराते हुए उसे देखता है। कमरे की मद्धिम नाइट लैम्प की रौशनी में पूजा का खूबसूरत चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था।
तो…पूजा मुस्कुराई।
तो यह कि मेरा ख्याल रखना और… आरव हंसा।
अच्छा और…
और…मुझे सुबह जल्दी जगा देना। घर जाकर रेडी होकर आफिस भी जाना है। आरव जल्दी से कहता है।
क्या हुआ घबरा गए मुझ से?… पूजा खिलखिलाई।
और आरव… वह तो उसकी खिलखिलाती हंसी देख कर ही मदहोश हो गया। तुम्हारी यह खिलखिलाहट मेरी ज़िन्दगी है तुम हमेशा ऐसे ही खुश रहो। क्योंकि तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी है। आरव मन ही मन कह उठा।
और फिर…उसके होंठों की खिलखिलाहट को आरव अपने होंठों से चुन लेता है। खामोश लम्हों में दो धड़कते दिल मुहब्बत की डोर थामे एक नई कहानी लिख रहे थे। एक ऐसी कहानी जिस में सिर्फ प्यार ही प्यार था।
♥️
सगाई की तैयारियां हो चुकी थी। काजल की मां ओबेरॉय मेंशन पहुंच चुकी थी। और वह बहुत खुश थी।
ओबेरॉय मेंशन का खूबसूरत लॉन खूबसूरत लाइटों से जगमगा रहा था। घर का हर मेमर वहां पर मौजूद था। सगाई की अंगूठी आ चुकी थी।
प्रेम और काजल दोनों पास-पास बैठे हुए थे। दोनों एक दूसरे को रिंग पहनाते हैं। और फिर तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा लॉन गूंज उठता है।
प्रेम की तो खुशी का ठिकाना ही नहीं था। आज काजल उससे एक खास रिश्ते में बंध गई थी। जिस का उसको कब से इन्तेज़ार था।
थैंक्स डैड… वह शिवाय के गले लग जाता है।
हमेशा खुश रहो मेरे बेटी… शिवाय भी खुशी से गले लग जाते हैं।
खाने का दौर शुरू हुआ बड़ा फैमली टेबल लगा था। जिस पर सब ने साथा में खाना खाया।
खाने के बाद हर कोई उन दोनों को गिफ्ट देता है।
शिवाय वहीं टेबल पर रखी फाइल उठा कर प्रेम की तरफ करते हैं।
प्रेम फाइल लेकर काजल की तरफ करता है।
मैंने साइन कर दिया है। तुम काजल से साइन करा लो। उसके बाद तुम्हारा सब कुछ काजल का हो जायेगा। शिवाय वकील साहेब को इशारा करते हैं।
वकील साहेब आगे आकर काजल को बताता जाता है वह साइन करती जाती है।
काजल और उसकी मां का तो खुशी का ठिकाना ही नहीं था कि वह क्या से क्या कर दें।
खुशी उन के हर अंदाज़ से ज़ाहिर हो रही थी।
एक बार हम अपने वकील को भी दिखा लें कि सब सही है ना…काजल की मां काजल के हाथ से फाइल लेकर कहती हैं।
आप को जिसे दिखाना है आप दिखा सकती हैं। शिवाय बहुत ही गम्भीरता पूर्वक कहते हैं। और हर किसी की तरफ देखते हैं। हर कोई खामोश था। किसी के चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी।
अब तुम सब इंज्वॉय करो, हम थोड़ा आराम करके गांव के लिए निकल जायेंगे। शिवाय अंदर की तरफ जाते हुए कहते हैं। साथ में श्लोका भी बढ़ जाती है।
अंदर कहां जा रहे हैं मिस्टर शिवाय सिंह ओबेरॉय?…
काजल की तेज़ आवाज़ उन के कदम रोक देती है। साथ ही साथ हर किसी की नज़र काजल पर उठ जाती है।
जारी है…
Comments
Post a Comment