धड़कन | भाग 36 | Dhadkan Part 36 | Heart Touching Hindi Love Story

शिवाय बाहर आकर साईड वाली सीट पर बैठ गये। श्लोका ने शिवाय को देखा और खामोशी से ड्राइविंग सीट पर बैठ गई। शिवाय सर में दर्द भी बता रहे थे।

गाड़ी जैसे ही आगे बढ़ती है शिवाय पीछे सिर रख कर आंख बन्द कर लेते हैं। श्लोका शिवाय को देखती है। और फिर सामने देखने लगती है।

शिवाय तो इस बात से ही खुश थे कि श्लोका उसके साथ है।

आप ठीक हैं ना शिवाय? जब बहुत देर हो जाती है और शिवाय वैसे ही रहते हैं तो श्लोका को उलझन होने लगती है।

हां ठीक हूं। शिवाय ने वैसे आंख बन्द किये हुए ही कहा। शिवाय चाहते थे कि उनका सर दर्द ठीक हो जाए। ताकि वह आसानी से ड्राइव कर सकें।

गाड़ी साइड में कर लेना अब मैं करूंगा ड्राइव। शिवाय सीधे होकर कहते हैं।

श्लोका शिवाय को देखती है लेकिन गाड़ी चलाती रहती है। बहुत देर बाद जब वह गाड़ी साइड करती है तब शिवाय ड्राइविंग सीट पर आ जाते हैं। और श्लोका साइड हो जाती है।

थक गई?

नहीं।

शिवाय एक नज़र श्लोका को देखते हैं। और उसके बाल से क्लौचर निकाल कर सामने डैशबोर्ड पर रख देते हैं। और जैसे ही सिग्नल पर गाड़ी रूकती है। उसके बालों को छूने लगते हैं।

इससे अच्छा आप सोये हुए ही ठीक थे। श्लोका ने नाराज़गी से कहा।

अच्छा... मैं तो खुद को चार्ज कर रहा था। शिवाय ने मस्ती की। श्लोका भी मुस्कुरा दी। अब सामने देखें। और वह खुद बाहर देखने लगी। सारे शीशे बन्द थे।

वैसे एक बात कहूं गांव में बहुत अच्छा लगा। सारे ही पल बहुत ही खूबसूरत और यादगार रहे। क्यों क्या ख्याल है? शिवाय को एक बार फिर शरारत सूझी।

जी, वैसे मैं हमेशा गांव ही रही हूं। मुझे यहां हमेशा अच्छा लगता है। 

लेकिन इस बार की बात कुछ अलग थी। 

ऐसा कुछ नहीं।

अगली बार और ज़्यादा दिन रहेंगे। अगर फैशन शो ना होता तो मैं इस बार भी रुक जाता।

एक बार आ गये ना, अब कोई ज़रूरत नहीं है आने की। श्लोका ने सख्ती से कहा।

मैं तो आऊंगा। और अगली बार तो बात ही कुछ और होगी। शिवाय ने सोचते हुए कहा।

ऐसा क्या होगा अगली बार? श्लोका को हैरत हुई।

जब होगा तब देखना। वरना मेरा सरप्राइज़ खराब हो जायेगा। शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा। और हल्के से उसके गाल को पिंच कर दिया।

पता नहीं क्या-क्या सोचते रहते हैं। इसी लिए तो सर में दर्द हो गया। श्लोका ने मासूमियत से कहा। और उसकी बात पर शिवाय हंस पड़े।

श्लोका पीछे सिर टिका कर आंख बन्द कर लेती है। शिवाय की बातें उसकी नज़रों की शोखी सब बदले हुए थे। मगर ज़बान सीधे इज़हार पर नहीं आ रही थी। शिवाय मैं बहकना नहीं चाहती जिसे मैं प्यार समझ रही हूं अगर वह प्यार ना हुआ तो? इस लिए मुझे आप की बातों से डर लगता है। वह हड़बड़ा जाती है। शिवाय उसके हाथ पर अपना हाथ रख देते हैं।

श्लोका हाथ खींचती है मगर शिवाय अंजान बन गये। श्लोका ने दोबारा आंख बन्द कर ली। शिवाय उसे देख कर रह गये। शिवाय तुम ऐसे मुहब्बत में दीवाने हो जाओगे। जो किसी लड़की की तरफ आंख उठा कर नहीं देखते थे। आज वह जब तक इस लड़की को देख ना ले। उसे सुकून नहीं मिलता। उसने खुद से कहा और खुद ही मुस्कुरा दिये

सारे रास्ते वह दोनों बातें करते रहे। श्लोका क्लैचर उठा कर बाल ठीक करती है।

रहने देती वैसे ही अच्छे तो लग रहे थे।

नहीं यह ज़्यादा ठीक है।

लेकिन मेरे पास खुला रखा करो।

श्लोका ने सिर्फ शिवाय की बात सुनी। कोई जवाब नहीं दिया।

घर पहुंचते ही शिवाय अंदर चले गए। श्लोका सारा सामान अंदर भेज कर खुद भी अंदर चली जाती है।

सब से मिल कर वह वहीं बैठ जाती है। शिवाय वहां नहीं थे। शायद वह रूम में चले गये थे।

थोड़ा रेस्ट कर लो। फिर डिनर करके आराम करना। सुधीर जी ने उससे कहा।

अगली बार मैं भी चलूंगी। अराध्या ने खुशी से कहा। 

हां ठीक है। अगली बार हम तीनों चलेंगे। श्लोका ने खुशी से कहा।

कौन-कौन हम तुम और शिवाय भैय्या? अराध्या ने खुशी से कहा। सुधीर जी भी श्लोका की तरफ देखने लगे।

नहीं मैं तुम और अंकल शिवाय को नहीं लेकर जाऊंगी। वह बहुत परेशा...... श्लोका रूक गई। जल्दी में वह क्या बोलने जा रही थी।

मैं आती हूं तो बात कहती हूं। श्लोका उठ खड़ी हुई। अराध्या भले उसकी बात नहीं समझी लेकिन सुधीर जी बहुत अच्छे से समझ गये। 

अमोल पता है नेक्स्ट टाइम हम लोग सुमन के साथ गांव जा रहे हैं। डिनर करते हुए अराध्या अमोल से कहती है।

कौन हम लोग? अमोल ने जानना चाहा।

मैं डैड और सुमन।

अच्छा। शिवाय नहीं। अमोल ने यूं ही पूछ लिया।

नहीं सुमन ने कहा है कि वह शिवाय को लेकर नहीं जायेगी। अराध्या ने मासूमियत से कहा। अराध्या की बात पर सब एक दूसरे को देखने लगे। शिवाय अंदर ही अंदर मुस्कुरा दिये। मगर सामने से नार्मल बने रहे। और श्लोका सोच रही थी कि बोल कर गलत किया।

सुमन ने इस लिए कहा कि शिवाय अभी जा चुके हैं। सुधीर जी ने बात संभाली।

डिनर करके सब लोग बैठ कर बातें करने लगे। श्लोका भी बैठ गई। थोड़ी ही देर में एक एक कर सब लोग चले गए। सिर्फ सुधीर जी और श्लोका बची।

क्या हुआ शिवाय ने क्या परेशान किया? सुधीर जी ने जानना चाहा।

कुछ नहीं अंकल वह गलती से मुंह से निकल गई बात। ऐसा कुछ नहीं।

शिवाय ने कुछ जानना चाहा तुम्हारे बारे में?

नहीं अंकल।

कब बताओगी उसे अपने बारे में? 

देखती हूं अंकल। अब मैं जाऊं अंकल? श्लोका उठ खड़ी हुई। वह सवालों से बचना चाह रही थी।

ठीक है जाओ आराम करो। 

सुधीर जी ने प्यार से कहा।

कब तक तुम दोनों खामोश रहोगे? तुम्हारी मुहब्बत मुझे समझ नहीं आ रही है। सुधीर जी उसके जाते ही सोच कर रह गये।

श्लोका भी रुम में जाकर सोने की तैयारी करने लगती है।

शिवाय भी बहुत थक गये थे। वह तुरंत सो गये।

सुबह श्लोका को कालेज जाने का इरादा नहीं था। इस लिए आराम से सोती रही।

नाश्ते की टेबल पर श्लोका नहीं थी। शिवाय को उसकी कमी महसूस हुई। लेकिन वह नाश्ता करते ही आफिस चले गए। और वहां जाकर काम में उलझ गये।

सर ड्रेस तैयार हो रही है एक बार आप और श्लोका मैम देख लें तो अच्छा रहता। 

स्नेहा ने शिवाय को अपडेट देकर कहा।

ठीक है मैं श्लोका से बात कर लूं। फिर बताता हूं। और फिर वह स्नेहा को और बातें भी समझाने लगते हैं जो कि बहुत ज़रूरी था। और फिर श्लोका को फोन करते हैं।

कहां हो?

घर पर।

मैं लंच के लिए आऊंगा तो रेडी रहना। फैक्टरी चलना है।

ठीक है।

बाय बोल कर फोन कट कर देते हैं।

अनु के पास भी जाना है अब आज तो जा नहीं सकती। पता नहीं कितनी देर लगेगी फैक्ट्री में। यही सब सोच कर वह बैठ जाती है।

श्लोका तैयार हो कर लंच के लिए नीचे जाती है ताकि उसकी वजह से शिवाय को इंतेज़ार ना करना पड़े।

श्लोका ऊपर अपना मोबाइल लेने गई। उसी वक्त शिवाय भी आ गये।

अनु का सामान भी ले लो। फैक्टरी से वापसी में तुम को छोड़ दूंगा। कमरे का दरवाज़ा खोल कर शिवाय श्लोका से कहते हैं। 

आज रहने दें मैं कल चली जाऊंगी।

नहीं आज ही चलो। वरना मुझे पता है कल तुम आटो से निकल जाओगी।

तो दिक्कत क्या है उसमें?

कोई दिक्कत नहीं है बस तुम चलो। कहते ही शिवाय बाहर निकल कर नीचे चले जाते हैं।

उसी वक्त कमला ऊपर आती है। गाड़ी में रखने का सामान दे दें।

श्लोका ने सारा सामान कमला को दे दिया। यह शिवाय भी कुछ ज़्यादा ही फिक्र करते हैं। श्लोका ने सोचा। और खुद भी नीचे चली जाती है।

उस के बैठते ही शिवाय गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं।

तुम ने अराध्या से क्या कहा कि मुझे अब गांव लेकर नहीं जाओगी। 

नहीं वह गलती से बोल दिया था।

गुड,इसका मतलब है लेकर चलोगी।

नहीं, मेरा मतलब है उसके सामने गलती से निकल गया।

समझ गया। अब तुम मत समझाओ।

क्या समझ गये।

वही जो तुम समझाना चाह रही हो।

और मैं क्या समझाना चाह रही हूं?

वही जो मैं समझ रहा हूं।

और फिर दोनों ही हंस पड़े।

शिवाय अब मैं आप के साथ कहीं नहीं जाऊंगी।

क्यों?

आप बहुत परेशान करते हैं मुझे।

अच्छा। लेकिन मैं तो हर जगह अब तुम्हारे साथ जाऊंगा।

कुछ और बात करें? यह बात तो फाइनल हो गई। और फिर शिवाय ने तुरंत फैशन शो का ज़िक्र कर दिया। और फिर उसी पर बातें करते रहे। 

फैक्टरी पहुंच कर उन दोनों ने सारी ड्रेस देखी। जो तैयार हो रही थी। स्नेहा भी वहीं पर थी। शिवाय का फोन आ गया तो वह अपने केबिन में चले गये।

आइये मैम आप का नाप ले लूं। स्नेहा ने श्लोका से कहा।

मेरे नाप की क्या ज़रूरत है। श्लोका को हैरानी हुई।

मैं एक ड्रेस बना कर आप को देना चाहती हूं इस लिए।

ठीक है मैं नाप तो दे दूंगी। और तुम ड्रेस भी बनाओ। लेकिन उस कपड़े के पैसे मैं दूंगी। श्लोका ने शर्त रखी।

ठीक है मुझे मंज़ूर है। स्नेहा तुरंत मान गई। और श्लोका का नाप लेने लगी।

हो गया चलें। थोड़ी देर बाद शिवाय आकर पूछते हैं। 

जी सर हो गया आप लोग जा सकते हैं। स्नेहा ने मुस्कुरा कर कहा। शिवाय तुरंत बाहर निकल गये। श्लोका भी निकल गई।

जारी है...

धड़कन भाग 35

धड़कन भाग 37








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