धड़कन | भाग 35 | Dhadkan Part 35 | Heart Touching Hindi Love Story

किताब तो थी शिवाय के हाथ में, लेकिन उसका दिमाग कहीं और था। यह दो कमरे बंद थे। इन में से एक कमरा श्लोका का है और एक राजवीर का। कौन सा कमरा किसका है यही सवाल शिवाय को परेशान कर रहा था।

उस दिन श्लोका मुझे अपने भाई के बारे में बताना नहीं चाहती थी। शायद इस लिए उसने यह दोनों रूम उसने नहीं दिखाये। अब उस ने मुझे राजवीर के बारे में बता दिया है। इस लिए उसने यह रूम खोल दिया। हो ना हो यह रूम राजवीर का है। तभी तो यहां पर इतनी सारी किताबें हैं।

राजवीर जब शहर जाकर बदल गया तो फिर श्लोका को शहर भेज कर पढ़ाने की कोई वजह नहीं बचती। राजवीर तुम्हारी गलती तुम्हारी बहन को भुगतनी पड़ी। शिवाय ने मन-ही-मन राजवीर से शिकवा किया। अगर तुम पढ़ लिख कर कामयाब हो जाते तो शायद श्लोका के लिए भी यह राह आसान हो जाती।

शिवाय सोचे जा रहे थे। उसके सोचों का सिलसिला खत्म ही नहीं हो रहा था। वह उठ कर खड़े होते हैं। और बुक रख कर वापस अपने रूम में चले जाते हैं। मोबाइल देखते हैं श्लोका का मैसेज था कि वह बाहर है थोड़ी देर में आ रही है। शिवाय लेट जाते हैं।

क्या हुआ श्लोका अगर तुम्हें इंग्लिश नहीं आती तो। तुम हिंदी में मैसेज तो लिख लेती है। तुम्हारे सारे काम परफेक्ट हैं। और सब से बड़ी बात मैं तुम से मुहब्बत करता हूं। अभी मैं तुम से तुम्हारी पढ़ाई के बारे में कुछ नहीं पूछूंगा। वरना अगर तुम नाराज़ हो गई या मेरी बात का बुरा मान गई। तो मैं तुम्हें अपनी बात समझा नहीं पाऊंगा। और मैं तुम को खोना नहीं चाहता।

एक बार शादी हो जाए फिर मैं तुम को पढ़ाई के लिए मना लूंगा। लेकिन अभी नहीं। अभी मैं कोई भी रिस्क नहीं ले सकता श्लोका। वरना मैं तुम को खो दूंगा। 

शिवाय सोचे जा रहे थे। और हर सोच के बाद शिवाय का सिर्फ एक ही फैसला था। श्लोका से शादी....

शिवाय आप ने खाना नहीं खाया। मैं बाहर बोल कर गई थी कि आप का खाना लगा दें। मुझे देर हो जायेगी। आप बाहर नहीं गये और वह लोग बाहर आप का इंतेज़ार करते रहे। श्लोका परेशान होकर कहती है।

तुम बैठो पहले इतना परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। मुझे वैसे भी भूख नहीं थी। कितना लेट मैंने नाश्ता किया था। तुम को तो पता है। शिवाय उसको परेशान देख कर कहते हैं।

फिर भी शिवाय शाम हो रही है। श्लोका ने घड़ी दिखाई।

यह बताओ तुम कहां थी तुम्हारा सारा काम तो खत्म हो गया था। और मैंने कहा था कि तुम मेरे पास रहोगी। और तुम भाग गई मुझे छोड़ कर। यह तुम ने अच्छा नहीं किया। शिवाय ने नाराज़गी से कहा।

कुछ ज़रूरी काम आ गया था इस लिए गई थी। अब वह शिवाय को क्या बताती कि वह सच में उस से दूर भागने के लिए गई थी। क्योंकि शिवाय की मुहब्बत उस को परेशान कर रही थी।

चलिए खाना खाते हैं। फिर निकलते हैं। श्लोका खड़ी हो गई।

तुम चलो मैं आ रहा हूं। 

श्लोका बाहर चली गई।

श्लोका एक बार यह फैशन शो हो जाये फिर तुम देखना। शिवाय ने मन ही मन सोचा। और कुछ फैसला करके उठ खड़े हुए। और बाहर चले गये। अब सोचने के लिए शिवाय के पास कुछ नहीं बचा था। अब उस ने फैसला ले लिया था।

चाय पिला दो। सिर दर्द कर रहा है। खाना खाते ही शिवाय कहते हैं।

क्या हुआ तबियत ठीक है ना? श्लोका परेशानी में जल्दी से शिवाय का माथा चेक करती है।

सब ठीक है तुम परेशान मत हो। सर मैं दर्द है चाय पीते ही ठीक हो जायेगा। तुम अगर मेरे पास रहती तो यह सिर दर्द भी नहीं होता। शिवाय ने शिकवा किया।

मतलब यह सिर दर्द मेरी वजह से है?

इतनी गहराई तक हर बात में क्यों नहीं जाती। शिवाय ने मुस्कुरा कर कहा। और उसकी बात पर श्लोका गुस्से से वहां से चली गई। और शिवाय हंस पड़े।

हर बात में अपनी बात निकालना ज़रूरी है। श्लोका नाराज़गी से सोचती है। और फिर मुस्कुरा भी देती है।

चाय आती है उसी के साथ श्लोका भी आ जाती है। दोनों खामोशी से चाय पी रहे थे। क्योंकि कोई ना कोई बार-बार वहां पर आ जा रहा था।

नमस्ते! उसी वक्त एक लड़का आता है।

नमस्ते आओ बलवंत बैठो। श्लोका खुशी से कहती है।

दीदी यह सामान लाया था। अनु को देने लिए। आप को परेशानी तो होगी। लेकिन क्या करें मजबूरी है। इतनी दूर बहन है कोई जाने लगता है तो दिल नहीं मानता। इस लिए उस के खाने की कुछ चीज़ें हैं। उसे दे देना। और आप के लिए भी है।

बलवंत ने प्यार से कहा।

हां ठीक है बलवंत कोई परेशानी नहीं होगी। इसी बहाने मैं भी खा लूंगी उसके साथ। 

शिवाय यह बलवंत हैं अनु के भाई। और बलवंत यह शिवाय हैं। सुधीर अंकल के बेटे। आप तो मिल ही चुके हैं अंकल से। श्लोका दोनों का परिचय देती हैं। उसी वक्त बलवंत की भी चाय आ जाती है। चाय पीते हुए वह तीनों बातें करते हैं। और फिर बलवंत चले जाते हैं।

बलवंत क्या करते हैं? शिवाय को जिज्ञासा हुई कि अनु तो शहर में है।

बलवंत यहीं गांव में खेती-बाड़ी का काम देखते हैं। बलवंत को पढ़ाई का शौक नहीं था और ना ही वह शहर जाना चाहता था। अनु को पढ़ाई का शौक था इस लिए चाचा ने उसे पढ़ने के लिए शहर भेज दिया। आप बैठें मैं आ रही हूं। कह कर श्लोका उठ गई।

राजवीर अगर तुम गलत ना होते तो तुम्हारी बहन भी शहर जाकर पढ़ लेती। आखिर अनु पढ़ रही है ना। शिवाय को एक बार फिर राजवीर याद आ गये।

उसी वक्त उनका सामान रूम से आ गया। काका आप यह सारा सामान गाड़ी में रखवा दें। और यह सब भी। श्लोका सब को बता रही थी। श्लोका सब को एक-एक बात बता रही थी। और सारे स्टाफ सुन रहे थे। और शिवाय खामोशी से सब देख रहे थे।

आप फ्रेश हो जाएं तो निकला जाए। श्लोका ने शिवाय से कहा। और बाहर निकल गई। 

शिवाय बाहर आकर साईड वाली सीट पर बैठ गये। श्लोका ने शिवाय को देखा और खामोशी से ड्राइव सीट पर बैठ गई। शिवाय सिर में दर्द भी बता रहे थे।

जारी है...

धड़कन भाग 34

धड़कन भाग 36





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