डोर धड़कन से बंधी | भाग 98 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 98 | Hindi Romantic Story
पेपर देखकर तो यही लग रहा है कि शिवाय सर ने ओबेरॉय मेनशन, फार्म हाउस, बिज़नेस और शेयर बहुत कुछ इनके नाम कर दिया है। वकील साहेब काजल की ओर इशारा करते हुए आफिसर से कहते हैं। लेकिन…
देखा अब आप को यकीन आ गया ना कि मैं सही हूं। आप इन सब को बाहर निकालें। काजल खुशी में वकील साहेब की बात पूरी भी नहीं होने देती और बीच में ही बोल देती है।
एक मिनट… मेरी बात तो पूरी सुन लें। वकील साहेब की नज़र अभी भी पेपर पर थी।
पेपर सही हैं…लेकिन यह साइन शिवाय सर की नहीं है।
क्या? ऐसा नहीं हो सकता। आप झूठ बोल रहे हैं। मैं अभी अपने वकील को बुलाती हूं। काजल के तो होश ही उड़ गए थे वकील साहेब की बात सुनकर।
और शिवाय… वह खामोश बैठे सब देख सुन रहे थे।
मेहमानों में कानाफूसी शुरू हो चुकी थी।
उसी वक्त काजल के वकील आते हैं।
आप ने पेपर देखकर कहा था कि सब सही है। काजल गुस्से से अपने वकील से कहती है।
हां, पेपर तो सही था।
तो फिर यह क्यों कह रहे हैं कि साइन नकली है? काजल की घबराहट बढ़ती जा रही थी।
आप ने मुझे पेपर देखने के लिए कहा था। साइन तो इन्होंने आप के सामने किए होंगे तो साइन कैसे नकली हो सकती है। वकील सफाई देता है।
इन्होंने मुझे साइन करके पेपर दिए थे। काजल की आवाज़ धीमी हो गई। वह समझ गई कि वह फंस चुकी है।
इंस्पेक्टर साहेब आप सब देख ही रहे हैं कि इन्होंने किस तरह नकली पेपर तैयार करके सब कुछ अपने नाम कर लिया। क्या अब कुछ और कहने की ज़रूरत है?…
वकील साहेब पेपर काजल के वकील के हाथ से लेकर पुलिस आफिसर को देते हुए कहते हैं।
इन्होंने मुझे धोखा दिया है। काजल गुस्से से शिवाय के करीब जाकर उनका गिरेबान पकड़ कर कहती है।
काजल के ऐसा करते ही शिवाय के गार्ड तुरंत काजल को पकड़ कर पीछे करते हैं।
आपको जो कहना है अदालत में कहना। बहुत बड़ा गेम खेला है आपने।
आफिसर काजल को देख कर कहते हैं।
मैं केस लड़ूंगी इन के खिलाफ…मैं चुप नहीं बैठूंगी। काजल चींखी। उस का बस नहीं चल रहा था कि वह शिवाय का क्या से क्या कर दें।
मुझे तो लगता है आप अपनी ज़मानत भी नहीं करा पाएंगी। आप का केस इतना कमज़ोर है। पुलिस आफिसर दुख से कहते हैं। और लेडी पुलिस को इशारा करते हैं।
वह चींखती रही, मगर हथकड़ी उसके हाथ में लग चुकी थी।
इन को भी ले जाए, क्योंकि झूठ, गलत और बेइमानी का पाठ इन्होंने ही अपनी बेटी को पढ़ाया था।
श्लोका काजल के मां की तरफ इशारा करती है।
काश आपने अपनी बेटी को सही शिक्षा दी होती तो आज यह दिन ना देखने पड़ते। श्लोका दुख से कहती है।
लेडिस पुलिस उनको बाहर लेकर चली जाती हैं। काजल के सारे मेहमान भी बाहर निकल जाते हैं।
हमें इजाज़त दें सर… आफिसर शिवाय की तरफ हाथ बढ़ाते हैं।
शिवाय उठ कर उन से हाथ मिलाते है। सर को बाहर तक छोड़ कर आएं। शिवाय अपने मैनेजर को इशारा करते हैं।
डैड…प्रेम तेज़ी से शिवाय के गले लग जाता है। उसकी आंखें नम हो गईं।
यह क्या?…रो क्यों रहे हो? शिवाय हैरान हुए।
डैड आप ग्रेट हो… आप ने नई ज़िंदगी दे दी मुझे। वरना मैं रोज़ इस दुख में जीता था कि ओबेरॉय मेंशन मेरी वजह हमारे पास नहीं है। प्रेम रोते हुए कहता है।
तुम समझ नहीं पाए अपने डैड को, इस लिए तुम से गलती हुई। शिवाय को सही-गलत और अच्छे-बुरे की पहचान है। ऐसे ही वह तुम्हारे कहने पर अपना सब कुछ किसी को दे देते। आदर्श मुस्कुरा कर कहते हैं।
धीरे-धीरे इसी तरह यह बच्चे भी सब कुछ सीख जायेंगे। श्लोका प्यार से प्रेम को देख कर कहती है।
मौम मेरी गलती बहुत बड़ी थी, लेकिन आप लोगों ने मुझे सही-गलत की पहचान के लिए बहुत बड़ी कुर्बानी दी। पहले आप लोग मेरी वजह से घर से गए। और फिर ओबेरॉय मेंशन…एक गलती के बाद मैंने दूसरी गलती भी कर दी। कहते हुए उसका गला भर आया।
हम उम्मीद करते हैं कि तुम तीसरी गलती नहीं करोगे। अमोल माहौल को बदलने के लिए हंसते हुए कहता है।
जी चाचू, आप सही कह रहे हैं। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आगे से गलती ना हो। और अगर कभी हो गई तो आप लोग मुझे समझा देना। अब मैं आप लोगों की हर बात मानूंगा। प्रेम आंखें साफ करता है।
अमोल डिनर तैयार है? शिवाय बात बदल देते हैं। प्रेम के आंसू उन्हें तकलीफ दे रहे थे।
जी…मौम-डैड हम सब का इंतेज़ार कर रहे हैं।
सचिन…शिवाय ओबेरॉय मेंशन के स्टाफ मैनेजर को आवाज़ देते हैं।
सारे स्टाफ को बुलाएं।
कुछ ही देर में सारे स्टाफ आ गए।
आप सब पार्टी करें। हम सब अमोल की तरफ डिनर करके आते हैं।
शिवाय उनको टेबल पर सजे खानों की तरफ इशारा करते हैं।
ओबेरॉय मेनशन की सुरक्षा के लिए आप सब का दिल से धन्यवाद…
शिवाय हाथ जोड़कर कहते हुए बाहर की तरफ बढ़ जाते हैं। उन के साथ ही हर कोई बाहर की तरफ बढ़ जाता है।
सारे स्टाफ गर्व से अपने मालिक को देखते हैं।
शिवाय सिंह ओबेरॉय अखलाक, दरियादिली और रिश्तों को निभाते हुए यहां तक पहुंचे थे। तब आज उनको मान-सम्मान और प्यार मिला था। वरना लोग चार दिन अच्छे कर्म करके उम्मीद लगा लेते हैं कि मैंने अच्छा किया, और अच्छा नहीं मिला। शिवाय जैसे लोग उम्र गंवा देते हैं अच्छाई करते-करते लेकिन बदले की आस नहीं लगाते।
जारी है…
डोर धड़कन से बंधी भाग 99
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