रूबरू | Part 6 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
अगले महीने की पांच तारीख फाइनल हो गई है। दरअसल ज़ोया और सना का भी रिश्ता तय हो गया है और उन के ससुराल वालों को जल्दी है।
इसलिए भाई साथ में आकिल की भी शादी करके इस ज़िम्मेदारी से आज़ाद होना चाहते हैं।
रूकय्या सारी बातें उसे बताती हैं।
और मेरी जॉब? उसकी आवाज़ में बेचैनी थी।
आकिल ने कहा है अब तुम शादी के बाद जॉब शुरू करोगी। अभी इंटर्नशिप करके शादी होगी।
रूकय्या सुकून से कहती हैं।
ठीक है मैं फ्रेश हो जाऊं। फिर बात करते हैं। अशमारा उठ गई। पहले उसे आकिल से बात करना था। उसके बाद ही कुछ सोचना था।
फ्रेश होकर वह अपना खाना लेकर रुम में चली गई। इतना जल्दी शादी वाली बात सुनकर वह परेशान हो गई थी।
उसे लगा अभी रिश्ता तय हो जायेगा, फिर आराम से बाद में शादी होगी। लेकिन यह तो एक साथ सब तय हो गया।
उसी वक्त आकिल आकर उसके सामने बैठ जाता है।
तुम? अशमारा धीरे से कहती है।
हां, मैं… मुझे पता था तुम्हारी यही शक्ल होगी, इस लिए मैं आया हूं। वह उसकी प्लेट से खीरा उठा कर खाते हुए कहता है।
इतनी जल्दी शादी? अशमारा उदासी से कहती है।
जो हो रहा है होने दो…सब ठीक हो जायेगा। यह वादा है मेरा।
शादी के अगले दिन से तुम आफिस ज्वाइन कर सकती हो… कुछ और? आकिल उसे देखते हुए पूछता है। परेशानी उसके चेहरे पर साफ नज़र आ रही थी।
क्या यह मुमकिन है…वह मासूम सी शक्ल बना कर पूछती है।
हां, मुमकिन है अगर तुम चाहो। वरना फिर कोई बात नहीं… हम हनीमून के बाद आफिस ज्वाइन करेंगे।
आकिल एक प्यार भरी स्माइल पास करता है।
बदतमीज़…जाओ यहां से…अशमारा के चेहरे पर अचानक से शर्म की लकीरें आ जाती हैं। वह आकिल को ढकेलती है।
लेकिन वह वैसे ही बैठा उसे देखता रहा।
मैं सोच कर ही खुश हो रहा हूं कि तुम मेरी दुल्हन बनोगी। आकिल खोए लहजे में कहता है।
तुम जा रहे हो या मैं अम्मी को बुलाऊं? अशमारा उसके सामने कमर पर हाथ रख कर खड़ी होती है।
यह बीवीयों वाली हरकतें तुम ने अभी से शुरू कर दी। कम से कम शादी का तो इंतेज़ार कर लेती।
आकिल एक बार फिर शरारत से कहता है और कहते ही उठ खड़ा होता है। वह जानता था अब वह बचने वाला नहीं है।
शादी की तैयारियां शुरू करो। मिलते हैं फिर…कहते ही वह हंसते हुए कमरे से बाहर निकल गया।
अशमारा वापस बैठ कर आकिल की बातों पर गौर करने लगती है।
आकिल की बातें याद आते ही उसके होठों पर बेसाख्ता मुस्कान आ जाती है।
और बाहर खड़ा आकिल उसे मुस्कुराता देख सुकून की सांस लेता है। वरना उसे परेशान देखकर एक पल के लिए वह भी परेशान हो गया था।
वह मुस्कुरा कर बाहर चला गया। उसकी आंखों के सामने अशमारा का मुस्कुराता हुआ चेहरा था।
...
मैं तुम से कह रही थी कि अशमारा से शादी कर लो। और अब देखो आकिल का रिश्ता उससे हो गया। अगले महीने शादी भी है। आकिल ने समझदारी दिखाई। अशमारा से रिश्ता करके कितनी चालाकी से उसने सब कुछ अपना लिया।
सफया नाराज़गी से बेटे जुनैद से कहती हैं।
अब हो रही है ना तो होने दें। अब बात करने का क्या फायदा… जुनैद लापरवाही से कहता है।
तुम्हारी इसी लापरवाही की वजह से अशमारा हमारे हाथ से निकल गई। वरना तुम्हारी फूफी का सब कुछ हमारा होता।
सफया को एक बार फिर अफसोस हुआ।
आप बैठ कर अशमारा की जायदाद ना मिलने का अफसोस करें। मैं बाहर जा रहा हूं। कहते ही जुनैद बाहर निकल गया।
...
दादी आज अभी तक दानिश नहीं आया? आप से बात हुई थी या मैं फोन करूं? ताबिश परेशानी से पूछता है।
वह दोनों लॉन में बैठे हुए थे। शाम की चाय अक्सर वह लॉन में ही पीते थे।
वह तीनों शाम की चाय साथ में पीते थे। जब दानिश को देर होती तो वह फोन करके बोल देता था। लेकिन ज़्यादातर वह टाइम से आ जाता था।
भले फिर बाद में घर पर काम कर ले।
उसी वक्त दानिश की गाड़ी गेट से अंदर आती है।
सॉरी देर हो गई आने में… गाड़ी से निकलते ही वह ज़ोर से कहता है।
देर लगी आने में तुमको, शुक्र है लेकिन आए तो…
ताबिश भी ऊंची आवाज़ में कहता है।
दादी उन दोनों को खुश देख कर दिल ही दिल में हज़ारों दुआएं दे डालती हैं।
उसी वक्त दो-तीन स्टाफ उनके सामने चाय और नाश्ता लगाने लगते हैं। पूरा टेबल सज चुका था।
आप लोग गोल गप्पे खाना शुरू करें… मैं फ्रेश होकर आता हूं।
दानिश आगे आकर झुक कर दादी और और ताबिश को हग करता है। और फिर अंदर चला जाता है।
फ्रेश होकर आते ही वह भी उनको ज्वाइन कर लेता है।
उसी वक्त आकिल भी आ जाता है।
तुम फिर आ गए? मैंने मना किया था ना… आकिल को देखते ही दादी नाराज़गी से कहती हैं।
काम था दादी इस लिए बुलाया। यह घर भी नहीं गया, आफिस से सीधे इधर ही आ गया है। दानिश जल्दी से आकिल की तरफ से बोलता है।
हां, अब इस की सफाई तो तुम ही दोगे ना क्योंकि काम भी तुम्हारा ही है। एक बार इसकी शादी हो जाए फिर देखती हूं कि आफिस से कहां जाता है। दादी हंसते हुए कहती हैं।
बात पक्की हो गई है इसकी…अगले महीने शादी है। दानिश आकिल को देख कर कहता है।
आकिल सिर्फ मुस्कुरा दिया।
अरे वाह…यह तो बहुत अच्छी बात है…लव मैरिज है? दादी ने जानना चाहा।
लव वन साइड…आकिल मुस्कुराया।
मतलब? ताबिश ने जानना चाहा।
मैं उसे पसन्द करता हूं। फूफी की बेटी है।
और वह?
उसके साथ ऐसा कुछ नहीं। लेकिन उसने रिश्ते के लिए हां कर दिया मेरे लिए यही बहुत है। अशमारा एक अच्छी लड़की है। पढ़ी-लिखी समझदार है। आकिल ने तारीफ की।
लेकिन ऐसा कैसे? ताबिश और जानना चाहता था।
जैसे मैं तुम्हारे लिए लड़की देख रही हूं और जिस लड़की से तुम्हारी शादी होगी ज़रूरी नहीं कि पहले तुम को उससे मुहब्बत हो।
हमारे ज़माने में ऐसे ही तो होता था। पहले शादी होती थी और फिर प्यार होता है। लेकिन आज पहले प्यार होता है फिर शादी होती है।
आज प्यार करके शादी करने के बावजूद वह वाला प्यार नहीं रहता, जैसा प्यार हमारी शादी के बाद वाले प्यार में होता था।
आप ने बिल्कुल सही कहा दादी। लेकिन मुझे खुशी है कि मेरी ज़िन्दगी में अशमारा आ रही है। जो अभी भले ही मुझ से प्यार नहीं करती लेकिन शादी के बाद वह मेरे लिए एक बेहतरीन बीवी साबित होगी।
हां सही कह रहे हो निकाह जैसे पाकीज़ा रिश्ते में जुड़ने के बाद मुहब्बत हो ही जाती है।
जी दादी… आप सब को शादी में आना है। आकिल सब को देख कर कहता है।
ज़रूर आयेंगे। ताबिश जल्दी से कहता है।
हां तुम्हारी शादी में हम ना आएं, यह कैसे हो सकता है।
तुम भी खा लो, चाय पी लो। फिर काम करते हैं। दानिश आकिल से कहता है।
तुम लोग इटली भी तो जा रहे हो? ताबिश को याद आया।
हां, इस की शादी के एक हफ्ता पहले ही वापस आयेंगे।
इस को मत ले जाओ। इसको शादी की तैयारी भी करनी होगी। दादी को फिक्र हुई।
नहीं दादी कोई दिक्कत नहीं… वैसे भी शादी का पूरा इंतेज़ाम बॉस करा रहे हैं। मुझे कुछ देखना ही नहीं है। आकिल खुशी से कहता है।
तुम जब हमारा इतना ख्याल रखते हो तो हमारा भी फर्ज़ बनता है कि तुम्हारा ख्याल रखें। रिश्ते दोनों तरफ से निभते हैं। दादी बात क्लियर कर देती हैं।
चाय पीते ही आकिल और दानिश अंदर चले जाते हैं।
दादी एक बात कहूं?
हूं , बोलो…
शादी बहुत बड़ा रिस्क है मुझे तो डर लगने लगा है। काश! मुझे भी किसी से प्यार हो जाता। क्योंकि इस तरह किसी से शादी करना…किसी को बिना समझे बिना जाने रिश्ता जोड़ना मुझे समझ नहीं आ रहा। ताबिश फिक्र करते हुए कहता है।
तुम इतनी टेंशन मत लो…जो लड़की तुम्हारे लिए पसंद करूंगी। पहले तुम उसको अच्छे से जान समझ लेना। फिर शादी करना। दादी ने तसल्ली दी।
ठंड बढ़ रही है मैं अंदर जा रही हूं। तुम भी चलोगे? दादी उठते हुए कहती हैं।
आप चलें मैं आता हूं। ताबिश किसी सोच में गुम था।
ताबिश को एक नज़र देख कर दादी अंदर की तरफ बढ़ जाती हैं। वह जानती थी ताबिश इस वक्त किन सोचों में गुम है।
कौन है वह लड़की जो मेरी ज़िन्दगी में शामिल होगी। क्या मुझे प्यार होगा? या फिर ऐसे ही शादी करके मेरी ज़िन्दगी गुज़र आयेगी।
क्यों आज मेरा दिल इतना बेचैन हो गया है। क्यों मेरा दिल कह रहा कि मैं भी किसी से प्यार करूं।
जारी है…
रूबरू भाग 7
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