इश्क जान | भाग 11 | Ishq Jaan Part 11 | Heartfelt Romance & Wedding Story
इश्क की दास्तां भी क्या दास्तां है...
एक बार जो शुरू हो जाए तो फिर उसको रोक पाना आसान नहीं होता।
चाहे इंसान लाख कोशिश कर ले,अपने दिल को समझा ले, रिश्तों की बंदिशों में खुद को बांध ले...
लेकिन मुहब्बत खुद ही अपना रस्ता बना लेती है।
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं और कुछ अधूरे रिश्ते उम्र भर दिल में ज़िंदा रहते हैं।
रिहान मुझसे नफरत करता है...उसकी आवाज़ में दर्द साफ नज़र आ रहा था।
रीत हैरान होकर उसे देखने लगी।
क्यों?
शजल ने एक पल के लिए अपनी नज़रें झुका लीं।
फिर धीमी आवाज़ में बोली।
वह किसी और से प्यार करता है। लेकिन उसकी मां ने उसकी शादी मुझसे कर दी। शजल का दर्द उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था।
तो इसमें तुम्हारी क्या गलती है? रीत को गुस्सा आ गया।
यहां हम सब बिना गलती के सज़ा काट रहे हैं।
शजल की आंखों में नमी उतर आई।
यहां पर हर इंसान दो ज़िन्दगियां जी रहा है। एक वो, जो हम सबको दिखाई देती है... और दूसरी वो, जो उस इंसान के दिल के अंदर चल रही होती है। जहां वह अपनी मुहब्बत के साथ जीता है।
रीत कुछ पल उसे देखती रही।
रिहान तुम्हारी दिल की दुनिया से अंजान है न?
रीत ने जानना चाहा।
शजल ने कोई जवाब नहीं दिया।
शायद कुछ जवाब शब्दों के मोहताज नहीं होते।
वह खामोश रही।
चलो चलते हैं...तभी रिहान आ गया।
हां... ठीक है।
शजल उठ खड़ी हुई।
और इस तरह एक और बात...
एक और सच...
अधूरा रह गया।
....
दो साल बाद...
ढोल की आवाज़े पूरे घर में गूंज रही थी।
मेहेंदी का फंक्शन शुरू हो चुका था।
घर की सजावट, रिश्तेदारों की आवाजाही और हंसी-मज़ाक से पूरा माहौल खुशियों से भरा हुआ था।
हर तरफ मिलने मिलाने का दौर चल रहा था।
कोई पुराने रिश्तेदारों से मिल रहा था, तो कोई बरसों बाद मिले अपनों को गले लगा रहा था।
हर चेहरे पर खुशी थी।
और इसी भीड़ में शजल भी अपने बेटे का हाथ थामे रिश्तेदारों से मिल रही थी।
उसका खूबसूरत मुस्कुराता चेहरा आज भी अपनी मुस्कुराहटों को बिखेरे बातों में बिज़ी थी। तभी पीछे से आवाज़ आई।
हेलो शजल... कैसी हो?
शजल ने हल्का सा गर्दन घुमाकर आवाज़ की तरफ देखा।
सामने अमृत खड़ी थी।
और उसके साथ...
परमजीत।
शजल की मुस्कान एक पल के लिए थम गई।
परमजीत की गोद में एक प्यारी सी बच्ची थी।
उसके नैन-नक्श बिल्कुल परमजीत जैसे थे।
वही आंखें...
वही नाक...
वही मासूमियत।
बस चेहरे का गहरा रंग अपनी मां से मिला था।
बच्ची से नज़र हटते ही उसकी नज़र बेसाख्ता परमजीत पर चली गई।
परमजीत खामोश था।
लेकिन उसकी आंखें...
सिर्फ शजल को देख रही थी।
शजल ने खुद को संभाला।
हेलो...
उसके मुंह से मुश्किल से निकला।
अमृत की गहरी नज़र शजल के चेहरे पर ठहरी हुई थी।
कैसी हो शजल?
ठीक हूं। आप लोग बताइए?
शजल ने मुस्कुराने की कोशिश की। फिर बच्ची की तरफ देखकर बोली,
बड़ी प्यारी बच्ची है।
उसने आगे बढ़कर बच्ची के गाल को छुआ।
परमजीत अब भी खामोश था।
लेकिन उसकी नज़र शजल के चेहरे से हटने का नाम नहीं ले रही थी।
हम भी ठीक हैं। अमृत मुस्कुराई।
तुमसे मिलने का बहुत अरमान था। आज वह भी पूरा हो गया। अमृत मुस्कुराई।
अच्छा...शजल भी मुस्कुरा दी। वह जानना चाहती थी कि अमृत क्यों उससे मिलना चाह रही थी। लेकिन वह चाह कर भी नहीं पूछ पाई।
क्योंकि परमजीत के नज़रों की तपिश उसे अपने चेहरे पर साफ महसूस हो रही थी।
वह नज़रें...
जिन्हें भूलने में उसने दो साल लगा दिए थे।
तभी परमजीत की गोद में मौजूद बच्ची रोने लगी।
अमृत ने तुरंत बच्ची को परमजीत से ले लिया और उसे चुप कराने लगी।
इसका नाम क्या है?
शजल को उत्सुकता हुई नाम जानने की।
अमृत मुस्कुराई।
शानवी...
बहुत प्यारा नाम है। शजल के चेहरे पर खूबसूरत मुस्कान बिखर गई।
वह बच्ची को देखते हुए बोली।
यह नाम परमजीत ने चुना है। इनको "श" से नाम रखना था। अमृत परमजीत की ओर देखती है।
शजल की नज़र भी परमजीत की ओर उठ जाती है। लेकिन उसकी मुस्कान गायब हो चुकी थी।
जारी है...
इश्क जान भाग 10
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