रूबरू | Part 14 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
मिस्टर बॉस घूम लें जितना दुनिया घूमना है। लौटकर तो घर ही आयेंगे। तब तक मैं यहीं हूं। मन ही मन सोचते हुए वह वापस अंदर जाने के लिए मुड़ती है। लेकिन मुड़ते ही उसकी सांस रूक गई। उसके ठीक पीछे ताबिश खड़ा था। घबराहट से उसकी धड़कन तेज़ हो जाती है। लेकिन वह जल्द ही संभलती है। और ताबिश के बगल से आगे बढ़ जाती है। रूको...इतनी सुबह-सुबह तुम यहां पर क्या कर रही हो? ताबिश अपने कमरे की खिड़की से उसे लॉन में देखता है तो वह भी चला आता है। लेकिन यहां आकर वह सोच रहा था मैं आया ही क्यों?... और जब कुछ समझ नहीं आया तो उससे पूछ बैठा। क्यों यहां आने पर पाबंदी है?... वह भी कहां कम थी। पाबंदी नहीं, लेकिन जानने का हक तो रखता हूं। उसकी नज़र उसके खूबसूरत चेहरे पर ठहर गई, जो सुबह की पहली किरण की तरह उजली और खूबसूरत थी। सूरज की हल्की रौशनी हिजाब में बंधे उसके चेहरे को और रौशन कर रही थी। ऐसे ही टहलने के लिए आ गई थी। उसके नज़रों की तपिश से घबरा कर वह जल्दी से कहती है और अंदर की तरफ बढ़ जाती है। ताबिश अपनी जगह खड़ा उसे जाता देखता रह गया। इतनी सुबह यह फोन पर किससे बात...