रूबरू | Part 8 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
घर के लोग सारी तैयारियों का एक बार फिर जायज़ा लेते हैं। और लड़के वालों का इंतेज़ार करने लगते हैं।
अचानक बाहर से ज़ोर-ज़ोर से लोगों की आवाज़ें आने लगीं। घर में अफरा-तफरी मच गई। तभी एक आदमी हांफते हुए अंदर आया। उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था।
क्या हुआ? सबने एक साथ पूछा।
आकिल...आकिल की गाड़ी पर हमला हुआ है। उसने कांपती आवाज़ में कहा।
क्या? कोई जाकर पता करो।
यह क्या कह रहा है...
ऐसा नहीं हो सकता...
कह दो कि यह झूठ है...
हर तरफ से अलग-अलग आवाज़ें आने लगीं।
तभी...
एक और व्यक्ति बदहवास सा अंदर आया।
आकिल...वह बात पूरी न कर सका।
गोली...आकिल को गोली लगी है।
पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई।
अशमारा सहेलियों के साथ बैठी थी। देखते-ही-देखते यह खबर उसके पास भी पहुंच गई।
जब तक यह पता चलता कि हुआ क्या था? उसी वक्त खबर आती है कि आकिल की मौत हो गई।
आकिल की मौत की खबर ने पूरे घर को हिला कर रख दिया।
रुकय्या जहां थीं वहीं बेहोश हो गईं।
अशमारा खामोश आंखों से हैरान बैठी रह गई। ना उसकी आंखों से आंसू निकला, ना ही उसके होंठ हिले।
पल भर में खुशी का माहौल मातम में बदल गया।
रिश्तेदार जानने में लगा थे कि हुआ क्या था? लेकिन किसी को कुछ समझ नहीं आया।
रुकय्या को होश में लाया जा रहा था। लेकिन होश में आते ही वह दोबारा बेहोश हो जाती थी।
अरे, कोई अशमारा को रुलाओ। इस तरफ चुप बैठना सही नहीं है। वरना उसकी सेहत पर असर पड़ेगा। कोई बुज़ुर्ग खातून अशमारा को खामोश देखकर कहती हैं।
अशमारा आकिल मर गया... अब तुम्हारी शादी नहीं हो सकती। एक औरत अशमारा के पास बैठ कर उसे झिंझोड़ते हुए कहती हैं।
रो लो, बेटी... रो लो। मन का दर्द निकाल लो। वरना यह दर्द नासूर बन जायेगा। हर कोई उसे समझा रहा था।
लेकिन वह रोने के बजाए वीरान आंखों से उन्हें देखती है।
चलो आकिल के यहां इस को ले चलो। उसे देखकर शायद यह रो दे। पीछे से कोई बोलता है।
उठो अशमारा चलो मामू के घर। मारिया उस का हाथ पकड़ कर उठाती है।
लेकिन वह उठने के बजाए अपनी जगह खामोश बैठी रही।
रूकय्या होश में आओ...तुम इस तरह बेहोश होगी तो अशमारा को कौन सम्भालेगा? सबर करो और बेटी को सम्भालो।
हर तरफ से अलग-अलग आवाज़े आ रही थीं। हर कोई दुखी था। लेकिन जिस पर दुख का पहाड़ टूटा था। उसके दुख को कौन समझता।
अब्दुल हमीद सबर करो, और समझाओ रूकय्या को...होनी को कौन टाल सका है।
अब्दुल हमीद के आते ही उनकी बहन भाई को तसल्ली देकर रूकय्या की ओर इशारा करती हैं। जो अंदर आते ही अशमारा के पास जाकर बैठ गए थे।
अब्दुल हमीद खाली नज़रों से रूकय्या को देखते हैं। जो बेहोश थी। औरतें उनको होश में ला रहीं थीं। वह अशमारा की ओर देखते हैं। कहने के लिए इस वक्त उनके पास अल्फाज़ नहीं थे। वह उसे खामोशी से खुद से लगा लेते हैं।
उनका दुख देखकर हर आंख रो पड़ी।
सारी रात आंखों में कट गई।
सुबह आकिल के घर से जनाज़ा उठ रहा था। हर आंख नम थी, हर चेहरा उदास था।
चारों ओर उसकी मौत के चर्चे थे कि बॉस को बचाने लिए आकिल ने अपनी जान गंवा दी।
हर कोई आकिल की तारीफ कर रहा था कि बहुत ही नेक, फरमांबरदार,और मेहनती लड़का था। हर तरफ उसकी वफादारी के चर्चे थे। मगर वहां पर तारीफ सुनने वाला आकिल नहीं था।
इन्हीं बातों के साथ यह भी चल रहा था कि बॉस के घर से कोई क्यों नहीं आया? जिसके लिए आकिल ने अपनी जान गंवा दी। उसके परिवार वालों को तसल्ली के दो बोल बोलने कोई नहीं आया।
सबके बहुत कहने पर भी रूकय्या और अशमारा आकिल के घर नहीं गईं। उनका हौसला नहीं था आकिल का जनाज़ा देखने का।
शादी का सामान हर तरफ फैला हुआ था। लेकिन उसे समेटने का किसी को होश नहीं था। अशमारा अपने कमरे में खामोश बैठी हुई थी। रुकय्या अलग कमरे में उदास बैठी हुई थीं।
बेटी से बात करने की कोई वजह नहीं थी उनके पास।
दुख चाहे कितने ही बड़े क्यों ना हों, वक्त कभी किसी के साथ नहीं ठहरता। वक्त आगे बढ़ता रहता है, और वक्त के साथ इंसान संभल जाता है।
वह सब भी संभल रहे थे। एक-दूसरे की तसल्ली के लिए हर कोई जी रहा था। वह घर जहां अशमारा के रहते हमेशा शोर रहता था कि रूकय्या को कहना पड़ता था कि थोड़ा धीरे बोलो। उसी घर में आज वह अशमारा की आवाज़ सुनने को तरस रहे थे।
अशमारा छत पर बैठी यूं ही सामने देख रही थी, लेकिन उसका मन कहीं और था। आकिल उसके मामू का बेटा था। वह साथ खेलते हुए बड़े हुए थे। आकिल हमेशा उसका ख्याल रखता था। उसकी ज़रा सी परेशानी पर वह परेशान हो जाता था।
उसका आकिल के साथ ऐसा कोई रिश्ता नहीं था जिसे प्यार कहते हैं। लेकिन जब आकिल ने उसके सामने शादी की बात रखी तो उसे वह अपने लिए परफेक्ट लगा। क्योंकि वह उसे समझता था। अशमारा यह सोच कर उससे शादी के लिए राज़ी हुई थी कि वह उसके मां बाप को भी समझेगा।
उसे आकिल के साथ गुज़रा हर वह वक्त याद आ गया जब वह उसके लिए सबसे लड़ पड़ता था। उसके लिए लड़ने वाला इंसान अपनी मौत से ना लड़ सका।
आकिल तुम क्यों मुझे बीच रास्ते पर छोड़ कर चले गए। वह आसमान की ओर देख कर सवाल करती है। लेकिन उसके सवाल का वहां पर कोई जवाब नहीं था।
...
उस दिन भी नाश्ते के बाद वह सब साथ बैठे हुए थे।
अशमारा तुम आफिस कब से जाओगी? अब्दुल हमीद उसे खामोश देखकर बात शुरू करते हैं।
हां अब्बू देखती हूं। वह उदासी से कहती है। उसका मन किसी काम में नहीं लग रहा था। वह खुद को बहला रही थी। लेकिन उसके मन की उदासी उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी।
तभी दरवाज़े पर बेल होती है। अब्दुल हमीद जाकर दरवाज़ा खोलते हैं। वापस आते हैं तो दो शख्स उनके साथ थे।
यह आकिल के आफिस से आए हैं। तुम से कुछ बात करना चाहते हैं। अब्दुल हमीद उनकी तरफ इशारा करके अशमारा से कहते हैं।
अशमारा उनकी ओर देखती है।
आकिल की मौत के बाद बॉस ने उसके बहनों को पांच-पांच करोड़ और उसके माता-पिता को ज़िन्दगी भर वैसे ही आकिल की सैलरी मिलती रहेगी, जैसे अभी तक मिल रही थी।
और बॉस की तरफ से यह दस करोड़ का चेक आपके लिए है। उन्होंने कहा है कि आप आगे बढ़ें और अपनी ज़िन्दगी को कामयाब बनाएं। आकिल की मौत का उन्हें भी दुख है। इस लिए...
इस लिए यह दौलत हमारे मुंह पर मार रहे हैं। जाकर कह देना अपने बॉस से हम दौलत के भूखे नहीं हैं। अगर देने का इतना ही शौक है तो आकिल को हमें लौटा दो।
वह गुस्से से बोली। और उठ खड़ी हुई।
आप इसे रख लें। यह बॉस का हुक्म है। वह रिक्वेस्ट करता है।
हम नहीं मानते ऐसा कोई हुक्म... जाकर कह देना अपने बॉस से- यहां पर अब कोई आकिल नहीं जो बॉस का हर हुक्म मान ले। यहां पर अशमारा है जो खामोश नहीं बैठेगी। और अपने बॉस से कह देना कि फुर्सत मिले तो मुझ से आकर मिलें। यहां आकिल उनके लिए मौत को गले लगा गया। और वह विदेश दौरे पर चले गए। यह नहीं कि यहां आकर उसके बूढ़े मां-बाप से दिलासे के दो बोल ही बोल जाते।
वह गुस्से से चींखी। उसे इतना गुस्से में देखकर हमीद और रूकय्या भी हैरान थे। क्योंकि उसे गुस्सा बहुत कम ही आता था। और इस तरह तो कभी नहीं।
आप इसे रख लें। मैं आप की बात बॉस तक पहुंचा दूंगा। वह एक बार फिर चेक उसकी तरफ बढ़ाते हैं।
आप लोग जा सकते हैं। वह उठकर कदम अंदर की तरफ बढ़ाती है। लेकिन फिर रूक कर वापस मुड़ती है।
मैं बॉस का इंतेज़ार करूंगी। कहते ही वह अंदर चली गई।
आप समझाएं अपनी बेटी को...वह उम्मीद से उनकी तरफ देखते हैं।
लगता है मेरी बेटी की बात आप लोगों को समझ नहीं आई?
हम समझ रहे हैं आप की बात, लेकिन आप लोग हमारी बात नहीं समझ रहे।
अब्दुल हमीद दरवाज़े की तरफ इशारा करते हैं।
वह दोनों उठकर खामोशी से बाहर निकल जाते हैं।
...
हां हेलो अशमारा... कैसे फोन किया? कोई काम? अभी कल ही तो हमारी बात हुई थी।
हिना फोन उठाकर जल्दी से पूछती है।
अशमारा की शादी के बाद उसे आफिस के काम से दुबई जाना था। अशमारा के साथ हुए हादसे का उसे दुख था। लेकिन वह रूक नहीं सकती थी। इसलिए वह रोज़ ही अशमारा से बात करती थी। लेकिन आज अशमारा का फोन आने पर वह परेशान हो गई।
मुझे ब्लैक हाउस में जॉब करना है।
क्या ब्लैक हाउस?...हिना हैरान हुई।
हां ब्लैक हाउस... झाड़ू, पोंछा, बर्तन कुछ भी काम हो। पता करो। मुझे जल्द से जल्द उस घर में जाना है।
अशमारा तुम होश में तो हो? तुम यह सब काम क्यों करोगी?
मुझे उस घर में जाना है, मैं देखना चाहती हूं उन पत्थर दिल लोगों को। अशमारा सपाट लहजे में कहती है।
ठीक है मैं पता करती हूं। हिना सोचते हुए कहा।
हां ठीक है लेकिन जल्दी...कहते ही अशमारा ने फोन रख दिया।
मिस्टर बॉस मरने के लिए तैयार हो जाएं... क्योंकि आप की मौत अशमारा हमीद के हाथों लिखी है। अशमारा मन ही मन सोचती है और आगे का प्लान बनाने लगती है।
जारी है...
रूबरू भाग 9
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