Shad Abbasi's Shayari | part 10 | Shaad Abbasi Shayari: Soulful Verses and Deep Emotions
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राज़े हयात भी मेरे दस्त हुनर में हैं
बीते दिनों के सारे मनाज़िर नज़र में हैं
बचपन से दश्त शौक में गुज़री है ज़िंदगी
कितनी कहानियां मेरे रख्ते सफर में हैं
راز حیات بھی مرے دست ہنر میں ہیں
بیتے دنو کے سارے مناظر نظر میں ہیں
بچپن سے دشت شوق میں گزری ہے زندگی
کتنی کہانیاں مرے رخت سفر میں ہیں
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मैं खार व गुल के खानों में तकसीम हो गया
लुत्फ़े चमन उठाने में तकसीम हो गया
उमरे रवां की राहे नवरदी को क्या कहूं
मैं मुख्तलिफ खानों में तकसीम हो गया
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جنہوں نے روزوں کا کچھ احترام رکھا ہے
انھیں کے واسطے جنت میں جام رکھا ہے




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