रूबरू | Part 3 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

ताबिश हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ।

सभी गार्ड अलर्ट हो जाते हैं।

तभी एक तेज़ चीख सुनाई देती हैं…

दानिश…

हर कोई दानिश के रूम की तरफ दौड़ता है। और सीधे उसके रूम में अंदर चले जाते हैं।

दानिश बाथरूम में था। 

दानिश तुम ठीक हो? ताबिश उसे आवाज़ देता है।

वह जल्दी से बाहर आता है।

दानिश मेरा बच्चा... दादी उसका हाथ पकड़ लेती हैं। डर उनके चेहरे पर साफ नज़र आ रहा था।

हां दादी मैं ठीक हूं।

तो फिर वह चीख किसकी थी? दादी परेशान हुईं।

मैं गार्ड से पता करता हूं।

दानिश तुरंत गार्ड को फोन करता है।

माली काका के रिश्तेदार थे वही चींखे थे। फायरिंग की आवाज़ से वह डर गए थे शायद।

माली काका के रिश्तेदार बिना परमीशन के आए कैसे? यह पता करना है। गार्ड की बात सुनकर दानिश गुस्से से कहता है।

मुझसे इजाज़त ली थी। दादी धीरे से कहती हैं।

आप जानती हैं दादी कि दुश्मन हमारी जान के दुश्मन हैं उसके बावजूद… दानिश की आवाज़ सख्त होने लगी, इस लिए वह बोलते-बोलते खामोश हो गए।

चलिए डिनर करते हैं।

दानिश बाहर निकल गया। साथ ही साथ दादी और ताबिश भी निकल गए।

डिनर के बाद वह तीनों हॉल में बैठे थे…

कौन है वह जो हमारी जान के पीछे पड़ गया है? दादी फिक्र करते हुए कहती है।

आप फिक्र ना करें दादी, बहुत जल्द पता लग जाएगा कि वह कौन है? फिर वह जेल की सलाखों के पीछे होगा।

कैसे फिक्र ना करूं? मेरे बेटे और बहू की जान तो ले ही चुके हैं। अब मेरे पोतों की जान के पीछे पड़े हैं।

मां-बाप की बात पर दानिश और ताबिश भी दुखी हो गये।

दो साल पहले ही की तो बात है जब एक फंक्शन में जाते हुए उनकी गाड़ी पर हमला हुआ था। गोली उन दोनों को लगी थे। दोनों की ही मौके पर मौत हो गई। दादी की आवाज़ आंसुओं में भीग गई।

मैं तो कहता हूं कहीं विदेश चलते हैं रहने के लिए। ताबिश अपनी वही पुरानी बात दोहराता है जो वह पहले भी कई बार कह चुका था।

इतना बड़ा हीरों का और होटल का कारोबार है हमारा… नहीं जा सकते छोड़ कर ताबिश। दानिश उसे समझाता है।

डैड के बाद तुम अकेले संभाल रहे हो इस बिज़नेस को मैं कोई हेल्प भी नहीं करता। 

हेल्प नहीं करते तो क्या हुआ…तुम काम कर रहे हो ना, हमारा होटल वाला बिज़नेस ब्लैक जर्नी तुम देख रहे हो। और हीरों वाला बिज़नेस ब्लैक स्टोन मैं देख रहा हूं। दानिश बात क्लियर कर देते हैं।

लेकिन फिर भी…ताबिश शायद कुछ कहना चाहता था। लेकिन फिर रुक गया।

बहुत रात हो गई है उठो अब। दादी ने बात खत्म कर दी।

...

तुम रात में ही में तो आये थे… फिर आ गए। 

अशमारा दरवाज़ा खोलती है और सामने आकिल को देख कर हैरानी से पूछती है।

क्यों आ नहीं सकता? यह मेरी फूफी का घर है, मैं जब चाहूं आ सकता है। आकिल अंदर आकर आराम से बैठते हुए कहता है।

क्या कर रही थी? आकिल उसकी हैरानी नज़रंदाज़ कर गया।

घर की सफाई करने जा रही थी, अच्छा हुआ तुम आ गये। अब पंखे वगैरह तो तुम ही साफ करो। अशमारा उसे ब्रश देते हुए कहती है।

यह क्यों साफ करेगा। वह नहा धोकर आया है। उस के कपड़े गंदे हो जायेंगे। रूकय्या किचन से आकर अशमारा पर नाराज़ होती हैं।

बच गए तुम…वरना इरादा तो अपने इन तीन कमरों की हवेली को तुम से साफ करवाने का था।

अशमारा मुस्कुराई।

तुम्हारी यही अदा तो मुझे तुम्हारा दीवाना बनाए हुए हैं। आकिल भी मुस्कुरा दिया। दिल की बात दिल में ही रह गई।

सफाई नहीं करोगे तो चलो कुछ और काम करो। वह आकिल का हाथ पकड़ कर अपने रूम की ओर बढ़ गई।

मुझे इस हीरे के बारे में बताओ…अशमारा अपना लैपटॉप खोलकर एक स्टोन दिखाकर पूछती है।

स्टोन के इलावा भी कुछ दिखता है तुम्हें? उसकी नज़र एक बार फिर अशमारा पर थी।

खूबसूरत गोल चेहरा, बड़ी-बड़ी आंखें, कानों में छोटा सा टॉप्स, पिंक कलर की कुर्ती ब्लैक पैंट के साथ सुबह के सूरज की तरह उजली और चमकती हुई, हर बात से बेपरवाह लेकिन स्टोन के प्रति दीवानगी, यही तो थी उसकी ज़िन्दगी।

और मैं तुम्हारी हर अदा का दीवाना, और तुम अंजान मेरे जज़्बात से बेपरवाह अपने काम के लिए मुझे याद कर लेती, वरना फिर कहां मैं और कहां तुम।

ऐसे क्या देख रहे हो जल्दी से बताओ। सारी रात यह स्टोन मेरे दिमाग में छाया रहा। आकिल की नज़रें आज कुछ अलग ही लग रही थीं। उसकी ओर देखकर वह जल्दी से बोलती है।

तुम्हारी कुछ और ख्वाहिश… जैसे तुम्हारा बड़ा सा घर हो, गाड़ी हो, नौकर-चाकर हों। आकिल पता नहीं क्या जानना चाहता था। अशमारा के सवाल पर उसका ध्यान ही नहीं था।

नहीं मेरी ऐसी कोई ख्वाहिश नहीं है। रहने को घर हो, और घर में सुकून हो… मेरे लिए इतना ही काफी है। और रही गाड़ी की बात तो उसके लिए मेरी स्कूटी ही काफी है। 

हां वह अलग बात है कि पैसा रहा तो गाड़ी बंगला भी कर लूंगी। लेकिन उस के लिए अपना आज कुर्बान नहीं करूंगी।

मेरे पास जो आज है, मैं उसी में खुश हूं।

तुम्हारी सोच अच्छी है जानकर खुशी हुई। आकिल मुस्कुराया।

मुझे बॉस ने घर दिया है। आकिल खुशी से कहता है।

क्या सच में? अशमारा भी खुश हुई।

हां, सच में... और गाड़ी भी…

गाड़ी तो वह पहले भी दे चुके हैं।

हां दूसरी दी है। बोले वह वाली गाड़ी घर वालों के लिए, यह वाली गाड़ी मेरे लिए। आकिल ने तफसील से बताया।

वैसे तुम्हारे बॉस बहुत मेहरबान रहते हैं तुम पर… क्या जादू किया है? 

अशमारा हंसते हुए पूछती है।

जादू आता तो सबसे पहले तुम पर करता अशमारा…आकिल धीरे से बड़बड़या।

कुछ कहां? वह उसे हैरानी से देखती है।

नहीं…

तो फिर कब जा रहे हो नए घर में? अशमारा पास रखी चिप्स की पैकेट को खोलते हुए पूछती है।

अभी नहीं, अब्बा ने कहा कि शादी के बाद वहां जाना। आकिल कुछ सोचते हुए कहता है।

तो फिर कब कर रहे हो शादी?

उसी चक्कर में तो हूं, अच्छा एक बात बताओ…आकिल ने हिम्मत जुटा ही ली वह बात कहने के लिए जो वह कब से कहना चाह रहा था।

आकिल बेटा इधर आओ तो ज़रा… उसी वक्त बाहर से रूकय्या आवाज़ देती हैं।

आया फूफी, कहता हुआ आकिल बाहर चला गया।

अशमारा भी साथ में चली गई।

यह लो रख लो, जब खाली रहना तो इसे बनवा देना ज़रा। तुम्हारे पास कारीगर हैं आसानी से हो जायेगा।

रूकय्या अपना एक पुराना टूटा हुआ सोने का हार देती हैं जिस की कड़ी टूटी हुई थी।

फूफी यह बहुत पुराना है क्या करेंगे इसे बनवाकर? आकिल हार देखते हुए कहता है।

यह मैं मायरा की शादी पर दूंगी। रूकय्या खुशी से कहती हैं।

यह मायरा कौन है? आकिल हैरानी से पूछता है।

जारी है…


रूबरू भाग 2

रूबरू भाग 4 










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