डोर धड़कन से बंधी | भाग 13 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 13 | Hindi Romantic Story

और शिवन्या बहुत ज़ोर से हंस पड़ती है। इतनी ज़ोर से की उसकी हंसी शिवाय को अपने बंद कमरे में साफ सुनाई दे रही थी। 

लेकिन शिवन्या के आंख के आंसू शिवाय नहीं देख पाये। जो हंसने के बाद उसकी आंखों में थे।

सुबह शिवाय नाश्ता करने बैठे तो शिवन्या नहीं आई। वह किचन में कुछ करती रही। 

रात वाली बात के बावजूद शिवाय चाहते थे कि वह उसके साथ ब्रेकफास्ट करे। 

मेरे लिए आमलेट बना दो।

जब बहुत देर हो गई और शिवन्या नहीं आई तो शिवाय ने इसी बहाने आवाज़ दी। जब की वहां टेबल पर सारी चीज़ें उस के पसंद की थी।

दो मिनट में आमलेट लेकर शिवन्या आ गई। और रख कर जाने लगी।

ब्रेकफास्ट नहीं करना है? आखिर शिवाय ने पूछ ही लिया। 

मैं बाद में कर लूंगी। आप कर लें।

यह मेरा घर है इस लिए जैसे कह रहा हूं करो। चुपचाप नाश्ता करो।

शिवाय सख्ती से कहते हैं। और नज़र नीची कर लेते हैं। वह कहना कुछ चाह रहे थे। मगर गुस्से से कुछ और कह गये। शिवाय चाहते थे वह उसके सामने नाश्ता कर ले। पता नहीं बाद में करेगी भी या नहीं।

शिवन्या खामोशी से बैठ गई। और खाने लगी। शिवाय खाते ही उठ गये। और चाय पिये बिना ही आफिस चले गये।

शिवन्या को भी बाहर जाना था। नाश्ता करते ही वह भी चली गई।

दोपहर में शिवाय घर आये तो बिल्कुल सन्नाटा। 

यह शिवन्या कहां चली गई। कहीं मेरी बात बुरी तो नहीं लग गई। शिवाय को उलझन होने लगती है। लेकिन फिर वह खुद को तसल्ली देते हैं कि कहीं गई होगी आ जायेगी। और बिना लंच किये ही वापस आफिस चले जाते हैं।

आदर्श की तबीयत ठीक नहीं थी। इस लिए शिवाय ने मना कर दिया था कि वह आफिस ना आये। शिवाय रोज़ आदर्श के साथ लंच करते थे। आज अकेले थे तो घर आ गए। लेकिन घर भी सन्नाटा।

शाम को शिवाय घर आये तो हैरान रह गये। शिवन्या के साथ लगभग चार-पांच साल का बच्चा खेल रहा था।

यह कौन है? शिवाय हैरानी से पूछते हैं।

मैं सनी इन का बेटा। 

शिवाय हैरानी से शिवन्या की तरफ देखते हैं। लेकिन वह खामोश रहती है।

शिवाय चुपचाप अंदर चले जाते हैं। और सर पकड़ कर बैठ जाते हैं। 

शिवाय को लगा अब सब खत्म हो गया। एक उम्मीद जो दिल में थी कि कहीं यह श्लोका तो नहीं। वह उम्मीद भी खत्म हो गई। शिवन्या का यह बच्चा ही चार साल का लग रहा है।

शिवाय की आंख में आंसू आ गये। वह खामोश रोते रहे। और श्लोका को याद करते रहे।

मिस्टर ओबरॉय...शिवन्या नॉक करते ही अंदर आ गई। 

शिवाय ने नज़र उठा कर उसे देखा। 

शिवाय की आंख देख कर शिवन्या डर गई। जो बहुत लाल थी। और आंसूओं से तर थी।

मिस्टर ओबरॉय शिवन्या तड़प कर शिवाय के करीब बैठ गई। और शिवाय को कंधे से थाम कर अपने करीब कर लेती है। क्या हुआ आप को? 

कुछ नहीं तुम जाओ।

मैं नहीं जाऊंगी। आप पहले बताएं। क्या बात है।

सनी के स्कूल की छुट्टी है दो दिन रहेगा। फिर हॉस्टल चला जायेगा। वह आपको परेशान नहीं करेगा। 

शिवन्या जल्दी-जल्दी बताती है। ताकि शिवाय नाराज़ ना हों उसके आने से।

तुम अपना नम्बर सेव कर दो। शिवाय अपना फोन शिवन्या की तरफ करते हैं।

शिवन्या नम्बर सेव करके फोन दे देती है।

ठीक है तुम जाओ।

आप परेशान क्यों हैं?

कुछ नहीं तुम जाओ। अपने बेटे पर ध्यान दो। शिवाय नार्मल होने की कोशिश करते हैं। 

शिवन्या उठ खड़ी होती है। और शिवाय के चेहरे के सामने खड़ी होकर बहुत गौर से शिवाय को देखती है। और शिवाय के माथे पर प्यार करके तुरंत बाहर चली जाती है।

शिवाय जब तक कुछ समझते वह जा चुकी थी। शिवाय वैसे ही आंख बन्द करके लेट जाते हैं। और सब कुछ भूल कर उस एहसास में खो जाते हैं। जो अभी शिवन्या देकर गई थी।

जारी है....

डोर धड़कन से बंधी भाग 12

डोर धड़कन से बंधी भाग 14



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