डोर धड़कन से बंधी | भाग 16 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 16 | Hindi Romantic Story
शिवन्या शिवाय को उठा कर थोड़ा सा नाश्ता करा के दवा दे देती है। दवा खाते ही शिवाय लेट जाते हैं।
शिवन्या चुपचाप बैठ कर शिवाय को देखती जाती है। इन दिनों में पहली बार वह शिवाय को इतना ध्यान से देख रही थी।
वह एक टिक शिवाय को देखती रही। उसकी नज़रें शिवाय पर थी। और दिमाग कहीं और था। लेकिन दिल शिवाय से मुहब्बत की गवाही दे रहा था। ना जाने क्यों शिवन्या की आंख नम हो गई।
बेसाख्ता वह शिवाय के माथे पर अपना हाथ रख देती है।
शिवाय आंख खोल देते हैं। एक नज़र शिवन्या को देखते हैं और फिर आंख बन्द कर लेते हैं। शिवन्या उठ कर बाहर चली जाती है।
उसके जाते ही शिवाय आंख खोल कर देखते हैं। और फिर आंख बन्द कर लेते हैं।
शिवाय बहुत कुछ महसूस कर रहे थे। लेकिन वह समझ नहीं पा रहे थे कि वह करें तो क्या करें। अपने ही एहसासों में शिवाय उलझे हुए थे।
दोपहर में शिवन्या शिवाय को उठा कर खाना खिलाती है। और फिर दवा दे देती है।
दवा खाते ही शिवाय बेड से उतर कर आगे बढ़ते हैं। शिवन्या जल्दी से शिवाय को कमर में हाथ देकर थाम लेती है।
शिवाय खामोशी से आगे बढ़ जाते हैं। अपने रूम में जाते ही शिवाय तुरंत लेट जाते हैं।
शिवन्या वहीं चेयर खींच कर बैठ जाती है।
तुम जाओ आराम करो। कोई काम हुआ तो मैं आवाज़ दे दूंगा।
शिवाय उसे देख कर बोले। जब की शिवाय का दिल चाहता था कि वह वहीं रहें।
कल आप ने क्या खाया था? शिवन्या खोजती नज़रों से शिवाय के चेहरे पर देखकर पूछती है।
क्यों ऐसा क्यों? शिवाय हैरान हुए।
मिस्टर ओबरॉय आप ने कल सनी के साथ बाहर आइसक्रीम खाई थी। इसी वजह से आप बीमार हुए। शिवन्या गुस्से से कहती है।
आइसक्रीम खाने से कहीं तबियत खराब होती है भला? शिवाय हैरानी से उसे देखते हैं। क्योंकि इस वक्त शिवाय के मन में कुछ और ही चल रहा था।
अपना यह ड्रामा ना किसी और को दिखाना मुझे नहीं। और आगे से आइसक्रीम ना खाया जाए।
शिवन्या उठकर शिवाय को वार्निंग देकर बाहर निकल जाती है। और शिवाय आंख बन्द करके दूर बहुत दूर निकल जाते हैं। जब आइसक्रीम खाने से वह बीमार हुए थे। और श्लोका हर पल उसके साथ रही।
शिवाय बीते दिनों की याद में खो गये। एक-एक पल शिवाय की आंखों के सामने था। जिसको सोचते हुए शिवाय के होंठों पर मुस्कान आ गई।
लेकिन शिवाय अपने आंखों से बहते आंसूओं को नहीं रोक पाए। कितनी ही देर वह यूं ही अतीत में जीते रहे। और फिर कब उन्हें नींद आ गई। उन्हें पता ही नहीं चला।
मिस्टर ओबरॉय उठें चाय पी लें। शिवन्या चाय लेकर आती है। और शिवाय को आवाज़ देती है।
तुम को मेरे लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। शिवाय उठ कर शिवन्या के हाथ से चाय लेकर कहते हैं।
शिवन्या चुपचाप कूकीज की प्लेट शिवाय के आगे करती है। जिस में से शिवाय एक पीस उठा कर उसके चेहरे की तरफ देखते हैं। जहां पर नाराज़गी साफ नज़र आ रही थी।
शिवन्या एक नज़र शिवाय को देख कर बाहर निकल जाती है।
चाय पीकर शिवाय दोबारा लेट जाते हैं। शिवाय को बैठने का बिल्कुल भी मन नहीं हो रहा था। सुस्ती की वजह से शिवाय ने आंख बन्द कर ली।
आदर्श आफिस से सीधे शिवाय के पास आ गये। शिवन्या भी साथ में आ गई।
कैसे हो? वैसे शिवन्या तो अच्छे से ख्याल रख रही होगी? जिस तरह उस दिन मेरा ख्याल रखा था इसने। आदर्श हंसते हुए पूछते हैं। और शिवाय के करीब चेयर करके बैठ जाते हैं।
ठीक हूं। शिवाय ने उदासी से कहा। उस दिन यह कुछ ज़्यादा ही बोल गई। जब मुझे अच्छा नहीं लगा तो बताओ मुग्धा को कैसा लगा होगा? शिवाय नाराजगी से बोले।
सॉरी मुझे इतना नहीं बोलना चाहिए था। शिवन्या आदर्श के बोलने से पहले ही बोल देती है।
सॉरी कहने की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम ने तो उस दिन कमाल ही कर दिया। तुम्हारे जाने के बाद वह मुझे बहुत देर तक देखती रही। और फिर कहती है। तुम उतने बुरे तो नहीं जितना वह कह कर गई है।
मैं बता नहीं सकता मुग्धा की बात पर मैंने कैसे अपनी हंसी रोकी थी। और फिर मैंने भी कह दिया कि तुम मुझ से प्यार करती हो। इस लिए मैं तुम को अच्छा लगता है। बाकी लड़कियां तो मुझे ऐसे ही देख लेती हैं। आदर्श हंसते हुए कहते हैं। और उसकी बात पर शिवाय और शिवन्या दोनों हंस देते हैं।
इस की ट्रिक काम कर गई। इस की वजह से मेरी ज़िन्दगी कुछ आसान हो गई। आदर्श ने एक बार फिर शिवन्या की तारीफ की।
वह इतना शक कर रही थी कि मुझे गुस्सा आ गया। अगर वह आप से प्यार करती हैं तो उन्हें आप पर विश्वास भी होना चाहिए। क्योंकि प्यार की पहली सीढ़ी ही विश्वास है। अगर वही नहीं है। तो फिर कैसा प्यार?
शिवन्या आदर्श से सवाल करती है।
शक भी वहीं होता है शिवन्या जहां प्यार होता है। आदर्श शिवाय को देख कर शिवन्या से कहते हैं।
आप की बात सही है। लेकिन प्यार में विश्वास पहले नम्बर पर होना चाहिए। ऐसा मेरा मानना है।
मैं आती हूं। अपनी बात कहकर शिवन्या उठ खड़ी होती है। और एक नज़र शिवाय और आदर्श को देख कर बाहर चली जाती है।
उसके जाते ही दोनों एक दूसरे को देखते हैं।
कैसा रहा आफिस? शिवाय तुरंत टॉपिक चेंज कर देते हैं।
आफिस में तुम्हारे बिना मन ही नहीं लगा। आदत हो गई है तुम्हारी। आदर्श ने मुस्कुरा कर कहा।
शिवाय भी मुस्कुरा दिए।
और शिवन्या अच्छे से ख्याल रख रही है? आदर्श एक बार फिर मुस्कुराते हुए पूछते हैं।
पता करो यह यहां क्यों आई है? शिवाय सीरियस हो गये।
क्यों क्या हुआ? आदर्श भी सीरियस हो गये।
उसी वक्त शिवन्या आदर्श के लिए चाय और स्नैक्स लेकर आ गई। और रख कर जाने लगी।
क्या हुआ इतना खामोश क्यों हो गई? आदर्श को हैरत हुई। क्योंकि अभी तो वह बोल कर गई थी।
अब बोलने का मूड नहीं है। शिवन्या उदासी से कहती है।
वजह? आदर्श हैरान हुए।
कुछ नहीं, आप अपने दोस्त से बात करें। कहते ही शिवन्या बाहर चली जाती है।
आदर्श हैरानी से शिवाय की तरफ देखते हैं।
कुछ नहीं यार, ठीक हो जाऊं फिर बात करते हैं। शिवाय ने बात खत्म कर दी। और आंख बन्द कर ली।
फिर आदर्श ने भी कुछ नहीं पूछा। क्योंकि उसे पता था शिवाय उससे कुछ नहीं छिपाते हैं।
आदर्श शिवाय को देखने लगे। उनकी दो साल की दोस्ती है। लेकिन यूं लगता है बरसों पुरानी दोस्ती है। शिवाय के दिल की हर बात आदर्श को पता थी। और आदर्श किसी खज़ाने की तरह हर बात को अपने दिल में छुपाए हुए थे। क्योंकि उन पर शिवाय का विश्वास था। जो उन्हें बाकी रखना था।
जारी है...
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