डोर धड़कन से बंधी | भाग 18 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 18 | Hindi Romantic Story
रात में शिवाय की नींद खुलती है तो नज़र सीधे शिवन्या पर जाती है। शिवाय को श्लोका याद आ जाती है। और वह बेखुद हो जाते हैं। और उसके सिर पर हाथ रख देते हैं।
तुम जो कोई भी हो, लेकिन तुम में श्लोका की झलक है। इस लिए मैं तुम्हारी तरफ खींचा चला जा रहा हूं।
मैं क्या करूं श्लोका? तुम्हारे ऐहसास मुझे शिवन्या में मिलते हैं। प्लीज़ मुझे माफ कर देना। शिवाय की आंख में आंसू थे। मन श्लोका में अटका था। और नज़र शिवन्या पर थी।
शिवाय आंख बंद कर लेते हैं।
सुबह शिवन्या उठकर शिवाय को देखती है। उन के माथे पर हाथ रख कर फीवर चेक करती है। और बाहर चली जाती है।
नाश्ता रेडी करके शिवाय के पास आकर शिवाय को उठा कर उन्हें बाथरूम भेजती है। शिवाय को सोफे पर बैठा कर नाश्ता लाकर नाश्ता अपने हाथ से खिलाती है।
शिवाय बिल्कुल खामोश थे।
शिवाय ने पूरी तरह से खुद को शिवन्या को सौंप दिया था।अपने अतीत को शिवाय कुछ देर के लिए पीछे छोड़ देते हैं। या यूं कहें कि वह शिवन्या में श्लोका को महसूस करते हुए खो गये थे।
मेडिसिन ले लें। शिवन्या शिवाय की तरफ दवा करती है। जिसे खाकर शिवाय पानी का गिलास ले लेते हैं। शिवाय के पानी पीते ही शिवन्या चाय दे देती है। चाय लेकर शिवाय खामोशी से पीने लगते हैं।
शिवन्या बाहर जाने लगती है। लेकिन शिवाय उसका हाथ पकड़ कर बैठा देते हैं। शिवन्या खामोशी से बैठ जाती है।
चाय का मग टेबल पर रखकर शिवाय उस के पैर पर सर रख कर लेट जाते हैं।
शिवन्या हैरानी से शिवाय को देखती है। खुशी शिवन्या के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। जिसे देख कर शिवाय आंख बन्द कर लेते हैं।
शिवन्या झुक कर शिवाय के माथे पर अपने प्यार की मुहर लगा देती है।
शिवन्या के ऐसा करते ही शिवाय का दिल बहुत तेज़ी से धड़कने लगता है। और शिवाय के लब हिलते हैं। जहां से हल्की आवाज़ आती है श्लोका.... और वह बंद आंखों में ही शिवन्या का हाथ थाम लेता है।
शिवाय चाहते थे यह वक्त यूं ही थम जाये। और वह इन लम्हों को जी ले। कब से वह श्लोका के लिए तरस रहा था। उसे लगा आज श्लोका मिली है। पता नहीं फिर मिलेगी या नहीं।
ना जाने कितने ही पल गुज़र गये। डोर बेल की आवाज़ के साथ दोनों चौंके। शिवन्या शिवाय का सर अपने पैर पर से हटा कर बाहर जाती है। शिवाय वैसे ही खामोश लेटे रहे।
गुड मॉर्निंग.... आदर्श अंदर आते हैं।
गुड मॉर्निंग....शिवाय आदर्श की तरफ हाथ बढ़ाते हैं। आदर्श का हाथ थामते हुए शिवाय उठ कर बैठ जाते हैं। आदर्श भी शिवाय के साथ बैठ जाते हैं।
कैसे हो?
अच्छा...
गुड... आराम करो, मैं आफिस निकलता हूं फिर। आज शाम को नहीं आ पाऊंगा एक पार्टी में जाना है। कोई काम हुआ तो कॉल करना।
शिवाय खामोशी से आदर्श को देखते हैं।
क्या हुआ? कुछ कहना है? आदर्श शिवाय के कंधे पर अपना हाथ रखते हुए पूछते हैं।
मेरे साथ जितना भी गलत हुआ। लेकिन एक बात में मैं बहुत खुशनसीब हूं मुझे दोस्त बहुत अच्छे मिले।
इंडिया में मेरी जान मेरे दोस्त हेमंत रवि और अशोक। और अब यहां पर तुम....शिवाय फख्र से आदर्श को देखते हैं।
आदर्श शिवाय के कंधे पर रखे अपने हाथ को पुश करते हुए मुस्कुरा देते हैं।
एक बात कहूं? तुम अपने देश लौट जाओ।
अब वहां क्या है?
सब कुछ तो वहीं है। तुम्हारी फैमिली तुम्हारे मौम डैड भाई बहन तुम्हारे दोस्त, तुम्हारा घर सब कुछ तो है वहां।
लेकिन वहां मेरी मुहब्बत मेरी श्लोका तो नहीं।
अब मत रूको शिवाय आगे बढ़ जाओ। वरना तुम्हारा जीना मुश्किल हो जायेगा।
अब कौन सा आसान है जो तुम मुश्किल हो जाने की बात करते हो। शिवाय उदासी से कहते हैं।
प्लीज़ आगे बढ़ जाओ यार सब आसान हो जायेगा। एक अच्छी लड़की से शादी कर लो। ज़िंदगी में सुकून खुद-ब-खुद आ जायेगा।
अच्छी लड़की.... शिवाय हंसे। उसकी हंसी में एक दर्द एक शिकवा था जो आदर्श को तकलीफ दे गया।
जाओ तुम आफिस देर हो रही है। कल मिलते हैं। शिवाय ने बात बदल दी।
आदर्श उठ खड़े हुए एक नज़र शिवाय को देखते हैं। और जाने के लिए मुड़ जाते हैं।
और फिर आदर्श की नज़र शिवाय के तकिए के पास रखे शिवन्या के क्लैचर पर पड़ती है। आदर्श सीधे बाहर निकल जाते हैं। और बिना रूके चले जाते हैं।
शिवन्या किचन से आवाज़ देती रह जाती है कि वह चाय ला रही है। लेकिन आदर्श उसका कोई जवाब नहीं देते हैं।
शिवन्या शिवाय के रुम में जाती है। शिवाय को सोता देख वह वापस आ जाती है।
उसके आने की आहट पर शिवाय ने आंख बन्द कर ली थी। वह इस वक्त कोई बात नहीं करना चाहते थे।
शिवन्या भी चुपचाप अपने काम में लग गई। दोपहर लंच टाइम शिवाय बाहर आ कर बैठ गए। वह शिवन्या को और परेशान नहीं करना चाहते थे।
शिवन्या भी खामोशी से खाना टेबल पर लगा देती है। खाते वक्त दोनों खामोश ही रहे। और खाना खाते ही दोनों अपने कमरे में चले गए।
क्या हुआ इतना खामोश क्यों हैं? तबियत ठीक है ना? शाम को शिवाय को चाय देते हुए शिवन्या पूछती है।
हां ठीक हूं। तुम परेशान मत हो। मैं आराम करना चाहता हूं। शिवाय ने सारी बात ही खत्म कर दी।
शिवन्या चुपचाप उठ कर बाहर चली गई।
शिवन्या तुम जितना मुझ से दूर रहोगी। उतना हम दोनों के लिए बेहतर रहेगा। शिवाय मन ही मन सोचते हैं।
जारी है.....
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