डोर धड़कन से बंधी | भाग 19 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 19 | Hindi Romantic Story
शिवन्या तुम जितना मुझ से दूर रहोगी। उतना हम दोनों के लिए बेहतर रहेगा। शिवाय मन ही मन सोचते हैं।
डोरबेल की आवाज़ दोनों के कानों में गई। दोनों ही अपने रूम में थे।
शिवन्या ने दरवाज़ा खोला। सामने सुमन खड़ी थी। सुमन सीधे शिवाय के रूम में चली गई। दरवाज़ा बन्द करके शिवन्या भी अपने रूम में चली गई। वह उन दोनों के बीच नहीं आना चाहती थी।
शिवाय आप अभी तक तैयार नहीं हुए? सुमन हैरत से शिवाय से पूछती है।
क्यों? शिवाय उससे ज़्यादा हैरान हुए।
आज हम को साथ में डिनर करना था। मैंने एक हफ्ते पहले ही तुम को बता दिया था। आज का दिन बहुत खास है मेरे लिए। मैं कितना खुश थी। मैंने मैसेज भी कर दिया था। सुमन नाराज़गी से कहती है।
सॉरी मैं भूल गया था। वैसे भी मेरी तबियत ठीक नहीं है। सुबह से मैंने फोन ही नहीं देखा है। शिवाय उदासी से कहते हैं।
तुम भी ना शिवाय... सारा प्रोग्राम चौपट कर दिया। तुम को मेरी फिक्र ही नहीं है। सुमन गुस्से से कहती है।
मैं कह तो रहा हूं। मेरी तबियत ठीक नहीं है। शिवाय दुख से कहते हैं।
शिवाय को अफसोस होता है कि उसकी बिमारी से ज़्यादा उसको अपना प्रोग्राम खराब होने का अफसोस है।
तुम कभी भी मेरी बात नहीं मानते हो। अपनी ही करते हो। मेरी मुहब्बत का तुम को एहसास ही नहीं है। मैंने इतने प्यार से प्रोग्राम बनाया। लेकिन तुम को कोई फर्क ही नहीं पड़ा।
अगले संडे का प्रोग्राम फाइनल करती हूं। कोई बहाना नहीं चलेगा। सुमन गुस्से से कहती है।
और तुम ने क्या किया? एक बार तो मेरी तबियत का पूछ लेती। लेकिन नहीं तुम को तो अपने डिनर की पड़ी है। शिवाय भी नाराज़गी से कहते हैं।
ठीक तो लग रहे हो। ज़्यादा बीमार होने की ज़रूरत नहीं है। मैं जा रही हूं। उस बुकिंग पर मैं अपने दोस्तों के साथ चली जाती हूं। ऐसा करो मुझे अपना कार्ड दे दो। मैं बिल पे कर दूंगी। सुमन जल्दी से कहती है।
शिवाय एक नज़र उसे देखते हैं। और वालेट से कार्ड निकाल कर दे देते हैं।
मैं चलती हूं। संडे को तैयार रहना। सुमन झुक कर शिवाय के गले लगती है। और बाय बोल कर बाहर निकल जाती है।
शिवाय के दिल में क्या चल रहा था। यह वही जानते थे। वह आंख बन्द कर लेते हैं। और सोचते हुए दूर बहुत दूर निकल जाते हैं।
डिनर टाइम जब शिवाय बाहर नहीं गये तो शिवन्या प्लेट में खाना निकाल कर शिवाय के रुम में ही चली गई।
मिस्टर ओबेरॉय खाना खा लें। शिवाय बैठ कर कोई बुक पढ़ रहे थे।
मुझे नहीं खाना है।
क्यों नहीं खाना है। खाना खाकर आपको मेडिसिन भी लेनी है। जल्दी से खाना खा लें। वैसे ही बहुत देर हो गई है।कहते हुए शिवन्या वहीं चेयर पर बैठ जाती है। जैसे ही शिवन्या पहला कौर बना कर उसके मुंह के ले जाती है।
मैंने कहा ना कि मुझे नहीं खाना है तो क्यों ज़िद कर रही हो। शिवाय गुस्से से उसके हाथ की प्लेट में हाथ मार देते हैं प्लेट दूर छटक कर टूट जाती है सारा खाना फैल जाता है।
शिवन्या हैरत से शिवाय को देखती है। शिवाय का यह रुप उसने पहली बार देखा था।
कह रहा था नहीं खाऊंगा। तो समझ नहीं आ रहा था तुमको। शिवाय गुस्से से कहते हुए उठते हैं और रूम से बाहर जाने लगते हैं।
आहहहह....जैसे ही शिवाय बाहर निकलते हैं। प्लेट का एक टूटा हुआ कांच उसके पांव में चुभ जाता है।
शिवन्या हड़बड़ा कर उठती है। और शिवाय को थाम कर बाहर ले जाती है।
दूर हटो। जाओ अपना काम करो। शिवाय उसका हाथ हटा देते हैं।
शिवन्या खामोशी से जाती है। और फर्स्ट एड बॉक्स लेकर आती है।
और शिवाय के पैर के पास बैठ जाती है।
मैंने कहा ना जाओ। मैं देख लूंगी। शिवाय एक बार फिर ज़ोर से कहते हैं।
चुपचाप बैठे रहें। अब एक लफ्ज़ नहीं बोलना। शिवन्या भी ज़ोर से शिवाय की तरफ उंगली उठा कर कहती है। और शिवाय के पैर को देखने लगती है। जहां पर बहुत तेज़ी से खून बह रहा था। पहले शिवन्या कांच बाहर निकालती है। फिर खून साफ करके पट्टी बांधती है।
मुहब्बत के यह किस्से भी अजीब होते हैं। कभी यह ज़िंदगी बना देती है। तो कभी ऐसे रास्ते पर ले आती है। जहां से आगे जाना मुश्किल हो जाता है। शिवाय भी आज उसी दौर से गुज़र रहे हैं। जहां पाने की चाह और खोने का डर दोनों साफ दिखाई दे रहा था।
जारी है.....
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