डोर धड़कन से बंधी | भाग 24 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 24 | Hindi Romantic Story
पहले मुझे गलत तो साबित करो। उसके बाद ना तुम सही होगे। आदर्श भी अब खुल कर हंसे। और गाड़ी स्टार्ट कर दी।
घर पहुंच कर दोनों अपने फ्लैट पर चले गए।
शिवाय लॉक खोल कर अन्दर चले गए।
आज आप ने बहुत देर कर दी? जैसे ही शिवाय अंदर हॉल में आये। शिवन्या ने सवाल कर दिया। जो वहीं पर बैठी हुई थी।
तुम अभी तक जाग रही हो? शिवाय हैरान हुए।
हां, नींद नहीं आ रही थी। उसके हाथ में मोबाइल था।
शिवाय सीधे अपने रूम में गए। और चेंज करने लगे। चेंज करते हुए शिवाय के मन में आदर्श की बातें चल रही थी।
कॉफी....
शिवाय चेंज करके टेरिस पर चले गए थे।
आदर्श ने आज शिवाय को उलझा दिया था। उसी उलझन को सुलझाने में लगा शिवाय टेरिस पर आ गया था। सिगरेट पीते हुए शिवाय अपनी ही सोचों में गुम थे।
तभी शिवन्या कॉफी का मग उसकी तरफ करती है।
इस की ज़रूरत नहीं थी।
शिवाय कॉफी लेकर कहते हैं। उन्हें कॉफी की कितनी ज़रूरत थी। यह बात शिवाय अच्छे से जानते थे। इसी लिए तो रास्ते में भी आदर्श से कहा था। लेकिन उसने मना कर दिया था। और कहा था कि घर जाओ शिवन्या कॉफी पिलाएगी।
आज आदर्श की दोनों बातें सच हो गई। आदर्श इस वक्त मुझे अपनी हार से ज़्यादा तुम्हारी जीत पर दुख हो रहा था। अब तुम को मुझ से अपनी बात मनवाने का मौका मिल गया।
कॉफी पीते हुए शिवाय सोचे जा रहे थे। और शिवन्या भी चुपचाप वहीं चेयर पर बैठ कर कॉफी पीती रही। शिवाय की सिगरेट ऐशट्रे में सुलग रही थी।
कुछ परेशान लग रहे हैं? जब शिवन्या से रहा नहीं गया तो उसने पूछ ही लिया।
हां, शिवाय ने भी सच कह दिया। और वहीं उसके पास रखी चेयर पर बैठ गये। और उसे देखने लगे।
तुम मेरी श्लोका की तरह हो। तुम्हारी आदत, तुम्हारा अंदाज़ सब कुछ श्लोका की तरह है। लेकिन तुम श्लोका नहीं हो। तो क्या इस वजह से मैं तुम्हारी तरफ बढ़ूं कि तुम श्लोका जैसी हो।
शिवाय की सोचों में एक बार फिर शिवन्या थी। और कानों में आदर्श की आवाज़ गूंज रही थी।
क्या परेशानी है मुझे बता दें। शिवन्या परेशानी से कहती है।
लेकिन शिवाय जवाब देने के बजाए मग वहीं टेबल पर रख कर एक नज़र शिवन्या को देखते हैं। और उठ कर अंदर चले जाते हैं।
शिवन्या हैरानी से शिवाय को जाता देखती रही। और फिर खुद भी उठ कर अंदर चली जाती है।
सुबह बहुत देर हो गई। और शिवाय रूम से बाहर नहीं आये तो शिवन्या को टेंशन होने लगी। रात में भी कुछ परेशान लग रहे थे।
यही सोच कर शिवन्या शिवाय के रूम में नॉक करके दरवाज़ा खोलती है।
मिस्टर ओबेरॉय आप ठीक हैं? उठें नाश्ता कर लें। शिवन्या वहीं दरवाज़े से कहती है।
हूं ठीक हूं......बस सर में दर्द लग रहा है। शिवाय आंख खोल देते हैं। और जैसे ही शिवन्या बाहर जाने लगती है। ना जाने क्यों सर दर्द की बात बोल देते हैं। रात में नींद नहीं आ रही थी। लेकिन इस वक्त वह बिल्कुल ठीक थे।
शिवन्या जो बाहर निकल रही थी। वापस अंदर आकर जल्दी से शिवाय के पास बेड पर बैठ जाती है। और शिवाय के माथे पर हाथ रख कर परेशानी में फीवर चेक करने लगती है।
उसका सर पर हाथ रखना ही शिवाय को सुकून दे गया। और शिवाय के होंठ हिले। श्लोका....
जारी है...
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