डोर धड़कन से बंधी | भाग 25 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 25 | Hindi Romantic Story

उसका सर पर हाथ रखना ही शिवाय को सुकून दे गया। और शिवाय के होंठ हिले। श्लोका....

शिवाय आंख बन्द कर लेते हैं। इसी सुकून के लिए वह कब से तरस रहे थे। और यह सुकून शिवन्या के करीब आते ही क्यों मिल जाता है।

वह चुपचाप सर दबाती रही। और नज़र शिवाय के चेहरे पर जमाए हुए थी।

शिवाय आंख बन्द करके कहीं खो गए थे। वह यह तक भूल गए थे कि उनके पास श्लोका नहीं बल्कि शिवन्या है।

अब मैं ठीक हूं। शिवाय उसका हाथ सर से हटाकर अपने होंठ पर रख कर हटा देते हैं। 

शिवन्या खामोशी से शिवाय की एक-एक हरकत को नोट कर रही थी। वह चुपचाप उठ कर बाहर चली जाती है। और नाश्ते की तैयारी करने लगती है। लेकिन काम करते हुए भी उसका मन शिवाय में ही अटका हुआ था।

शिवाय फ्रेश होकर बाहर आते हैं। नाश्ता करते टाइम आदर्श का फोन आ जाता है। जो आज की शादी में जाने की बात याद करा रहे थे। और साथ में शिवन्या को भी लेकर चलना था। जो वह समझा रहा था। 

हमारे मैनेजर के बेटी की शादी है। तुम को भी चलना है। फोन रखते ही शिवाय शिवन्या से कहता है।

आप लोग जाएं। मैं नहीं जाऊंगी। शिवन्या जल्दी से कहती है। वैसे भी वह इस तरह के फंक्शन में नहीं जाती थी।

तुम को चलना है। आदर्श ने कहा है। और तुम आदर्श की बात को मना नहीं करती। 

शिवाय आदर्श का नाम लेकर उसे ब्लेक मेल करते हैं।

मेरे पास शादी वाले कपड़े नहीं हैं। उसने दूसरा बहाना किया।

ठीक है मैं आदर्श को बोल देता हूं। कहते ही शिवाय आदर्श को फोन करके बताते हैं।

कपड़ों का इंतेज़ाम आदर्श कर देगा। तुम को चलना है। फोन रख कर शिवाय उसको खबर देते हैं।

मैं वहां जाकर क्या करूंगी? मैं तो किसी को जानती भी नहीं हूं। शिवन्या परेशानी से कहती है। किसी भी हाल में वह जाना नहीं चाह रही थी।

मुग्धा भी रहेगा। वैसे भी तुम्हारी उससे अच्छी दोस्ती हो गई है। शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं।

अपनी दाल न गलते देख शिवन्या खामोशी से नाश्ता करने लगती है।

उसकी शक्ल देखकर एक बार फिर शिवाय के होंठों पर मुस्कान आ गई।

नाश्ता करते ही शिवाय रूम में चले गए। और तैयार हो कर आफिस चले गये।

शिवन्या भी रुम में चली गई। शिवाय के रवैए से उस का मन उलझा हुआ था। कभी शिवाय इतना अपने से लगते। और कभी बिल्कुल गैर हो जाते। 

मैं शिवन्या को साथ लेकर जा रहा हूं। तुम शादी में चले जाना। शिवन्या हमारे साथ आ जिएगी। 

शाम को आफिस से शिवाय के साथ आदर्श आते हैं। और आते ही शिवाय से कहते हैं।

मुझे रहने दें प्लीज़... शिवन्या एक बार फिर मासूम सी शक्ल बना कर मन्नत करती है।

तुम जितनी भी मन्नत कर लो। तुम को चलना है। आदर्श हंसते हुए कहते हैं। 

उसकी मासूमियत देखकर शिवाय भी हंस पड़ते हैं। 

हंसते हुए शिवाय को आदर्श बहुत ध्यान से देखते हैं। और शिवाय आदर्श को अपनी तरफ देखता पाकर झेंप जाते हैं।

और दोनों मुस्करा देते हैं।

ठीक है फिर हम निकलते हैं। आदर्श शिवन्या को साथ लेकर चले जाते हैं।

शिवाय भी रुम में जाकर आराम करने लगते हैं।

शाम को तैयार होकर शिवाय शादी में चले जाते हैं। वहां पहुंच कर देखते हैं। आदर्श नहीं थे। वह तुरंत आदर्श को फोन करते हैं। जो पहुंचनें ही वाले थे।

शिवाय सबसे मिलने लगते हैं।

थोड़ी देर में आदर्श मुग्धा और शिवन्या आते हैं। 

आदर्श मुग्धा और शिवन्या को दूसरी तरफ भेज देते हैं। और खुद शिवाय के पास चले जाते हैं।

शिवन्या कहां है? आदर्श जैसे ही शिवाय के पास पहुंचते हैं। शिवाय हैरानी से पूछते हैं।

क्यों बड़ी फिक्र हो रही? आदर्श धीमी मुस्कान के साथ कहते हैं।

अपना दिमाग बाद में चलाना। तुम्हारे साथ आने वाली थी। इस लिए पूछा। शिवाय ने सफाई दी। वरना शिवाय का दिल उसको देखने के लिए बेचैन था कि वह तैयार होकर कैसी लगती है।

सफाई देने की ज़रूरत नहीं है। मैं सब जानता हूं। शिवाय की बाहों में हाथ देकर आदर्श आगे बढ़ते हुए कहते हैं।

और शिवाय आदर्श की बात पर सिर्फ उसे देख कर रह जाते हैं। और आदर्श मुस्कुरा देते हैं।

वह देखो। आदर्श एक तरफ इशारा करते हैं।

शिवाय उस तरफ देख कर देखता रह जाता है। हल्के गुलाबी रंग की साड़ी में, बेहद सादगी से तैयार शिवन्या बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। 

शिवाय उसमें खो सा गया। एक बार फिर वह श्लोका के ख्यालों में खो गया था। ऐसी ही खूबसूरत तो वह भी लगती थी।

शिवाय.... कहां खो गये मेरे भाई? आदर्श उसका कंधा थपथपाते है।

कहीं नहीं। शिवाय हकीकत में वापस आ जाते हैं। और दूसरी तरफ देखने लगते हैं। क्योंकि अगर वह कुछ देर और उसे देखता तो वह कुछ गलत कर जाता।

उसी वक्त कुछ और लोग वहां आ गए। और वह बातों में लग गए।

शिवाय.... जैसे ही शिवाय की नज़र स्टेज पर पड़ती है। मुग्धा उसे इशारे से बुलाती है। 

वह और आदर्श स्टेज पर पहुंचते हैं।

कब से इशारा कर रही थी। तुम लोग देख ही नहीं रहे थे। मुग्धा नाराज़गी से कहती है। शिवन्या खामोश मुग्धा के पास खड़ी थी।

आओ फोटो शूट करवाते हैं। मुग्धा आगे बढ़ कर शिवाय को शिवन्या को पास खड़ा करते हैं। और खुद आदर्श के पास खड़ी हो जाती है।

शिवाय थोड़ा पास आओ। मुग्धा शिवाय को शिवन्या के करीब करती है।

शिवन्या के करीब आते ही शिवाय एक बार फिर खोने लगे। 

श्लोका.... शिवाय के होंठ हिले। और फिर खो गये शिवाय। 

वह भूल गये कि यह शिवन्या है श्लोका नहीं।

बहुत प्यार से शिवाय उसके हाथ में हाथ देकर मुस्कुराते हैं। फोटो शूट हो रहा था। और शिवाय श्लोका में खोये अलग-अलग पोज़ दे रहे थे।

शिवाय यहां से चलें? आदर्श धीरे से शिवाय से कहते हैं। जो शिवन्या में खोए हुए थे।

हां चलो। शिवाय तुरंत होश में आ जाते हैं। आदर्श शिवाय का हाथ पकड़ कर स्टेज से उतर जाते हैं। और एक तरफ जाकर बैठ जाते हैं। 

यह तुम्हारे हाथ में थरथराहट कैसी है? बैठते ही आदर्श पूछ्ते हैं।

शिवाय की आंख नम हो जाती है। आदर्श शिवाय का हाथ अपने दूसरे हाथ से थपथपा देते हैं।

अपने दोस्त की बेबसी आदर्श से देखी नहीं जाती।

ऐसी मुहब्बत मैंने आज तक नहीं देखी। श्लोका तुम खुशनसीब हो जो तुम को ऐसी मुहब्बत मिली। 

आदर्श सोचे जा रहे थे।

चलो घर चलते हैं। शिवाय को अब कुछ अच्छा नहीं लग रहा था।

तुम ठीक हो? आदर्श उसे देखते हैं।

हूं। शिवाय उठ गये।

चलो डिनर कल लें। फिर चलते हैं।

आदर्श भी उठ गये। और मुग्धा को भी इशारा कर के बुला लिया। और डिनर करने लगे।

आइसक्रीम... शिवाय शिवन्या की तरफ करते हैं। तुम को पसंद है ना? कहते हुए शिवाय वहीं उसके पास वाली चेयर पर बैठ गए।

हूं। और आप की कॉफी?

उसी वक्त वेटर शिवाय को कॉफी देता है। जो शायद शिवाय उसे बोल चुके थे।

तुम को कैसे पता कि मैं कॉफी पियूंगा? 

उसी तरह जैसा आप को पता है कि मुझे आइसक्रीम पसंद है।

शिवाय के दिल को कुछ हुआ। लेकिन वह सम्भल गये।

सनी नहीं आया बहुत दिनों से? शिवाय ने बात बदल ली।

हां, अभी उस की छुट्टी नहीं है ना। शिवन्या आइसक्रीम खाते हुए कहती है।

वापस कब चलना है? शिवन्या अब जाना चाह रही थी।

यह खत्म हो जाए फिर चलते हैं। शिवाय उसकी आइसक्रीम की तरफ इशारा करते हैं।

चला जाए? उसी वक्त आदर्श आकर पूछते हैं। और बहुत गौर से शिवाय को देखते हैं।

हूं, शिवाय उठ गये। साथ ही शिवन्या भी उठ गई।

शिवन्या तुम शिवाय के साथ चली जाओ। जैसे ही शिवन्या आदर्श की गाड़ी की तरफ बढ़ी। आदर्श ने उससे कहा।

शिवन्या ने एक नज़र शिवाय को देखा।

शिवाय ने गाड़ी का गेट खोल दिया। वह खामोशी से बैठ गई। 

शिवाय ने बैठते ही सॉग लगा दिया। 

सारा रास्ता खामोशी में कट गया।

दोनों ही बात करना चाह रहे थे। लेकिन शायद उनको अल्फाज़ नहीं मिल रहे थे। हालांकि धड़कन दोनों की ही तेज़ थी। 

घर पहुंचकर गेट बन्द करके जैसे ही शिवाय मुड़े। शिवन्या शिवाय के गले लग जाती है।

जारी है...

डोर धड़कन से बंधी भाग 24

डोर धड़कन से बंधी भाग 26







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