डोर धड़कन से बंधी | भाग 28 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 28 | Hindi Romantic Story
आदर्श की कोई मीटिंग नहीं थी। वह बैठे आगे की बातों पर गौर करने लगे। क्योंकि उसे पता था कि शिवाय एक बार फिर उसी के सामने अपनी उलझन ले कर आयेंगे। और वह चाहता था कि वह उसे सही राय दे सकें। जो शिवाय के लिए बेहतर हो।
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शिवाय एक नज़र घड़ी पर डालते हैं। और उठ खड़े होते हैं।
बहुत देर हो गई अब घर जाना चाहिए। इतनी देर हो गई। आदर्श ने भी घर जाना याद नहीं कराया। लगता है वह भी काम में बिज़ी है।
यही सब सोचते हुए शिवाय आदर्श के केबिन में जाते हैं। लेकिन वहां जाकर उन्हें और हैरानी होती है। क्योंकि आदर्श वहां नहीं थे।
आदर्श तुम मुझे अकेला नहीं छोड़ सकते। इतना तो मैं जानता हूं। लेकिन आज तुम मुझ से बिना मिले चले गये।यह बात समझ नहीं आ रही है।
शिवाय बाहर जाकर लिफ्ट की तरफ जाते हुए सोचते हैं।
घर जाकर शिवाय को घर का माहौल कुछ बदला हुआ लगा। कोई आया था क्या?
यही सोचते हुए शिवाय अपने रूम में चले जाते हैं। चेंज करके तुरंत बाहर जाते हैं। इधर-उधर देखते हैं।
शिवन्या चिकन में कुछ कर रही थी।
शिवाय उसी के पास जाकर खड़े हो गए।
कोई आया था क्या?
एक नज़र शिवन्या पर डाल कर पूछते हैं।
सनी आया है। शिवन्या तेज़ी से अंडे को फेंटते हुए जवाब देती है।
वह तो अभी नहीं ना आने वाला था? शिवाय उसके आने का सुन कर हैरान हुए। क्योंकि कल ही उस ने शिवन्या से पूछा था। और उसने कहा था कि अभी छुट्टी नहीं है। इस लिए वह नहीं आयेगा। और आज अचानक आ गया।
हां, नहीं आने वाला था। लेकिन आ गया। आप परेशान मत हों। हम बहुत जल्द आप के घर से चले जायेंगे।
शिवन्या गुस्से से जवाब देती है। और पूरा ध्यान अंडा बनाने में लगाये रहती है। यूं जैसे उसे शिवाय से कोई मतलब ही नहीं है।
मैंने जाने का कब कहा? तुम ही ने तो कहा था कि अभी वह नहीं आयेगा। इस लिए पूछ लिया। शिवाय ने सफाई दी।
वैसे भी वह चाहते थे कि शिवन्या की नाराज़गी दूर हो जाए। और अब सनी आ गया है। अब और मुश्किल हो जायेगा।
क्योंकि वह सनी के सामने कोई बात नहीं करना चाहते थे।
आप को जो कहना था। आप वह कह चुके हैं। अब आप को कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है।
अब तुम पर्सनल और प्रोफेशनल बात एक जगह कर रही हो।
मुझे यह बात बहुत पहले समझ लेना चाहिए था। वह मेरी गलती थी जो मैं समझ नहीं पाई। शिवन्या का अंदाज़ अभी भी रूठा हुआ था।
ज़्यादा कुछ समझने की ज़रूरत नहीं है। चुपचाप से यहीं रहो। शिवाय उस को मनाना चाहते थे। लेकिन बात ऐसी हो गई कि वह आर्डर दे गये।
मिस्टर ओबेरॉय मैं आपकी.....
आप आ गये। इतना लेट आये। मैं कब से आप का वेट कर रहा था।
शिवन्या कुछ कहने जा रही थी उसी वक्त सनी आ कर शिवाय का हाथ थाम लेता है। और शिवन्या की बात अधूरी रह जाती है।
हां बेटा मैं आ गया। मुझे पता ही नहीं था कि आप आयें हैं। वरना मैं जल्दी आ जाता। कहते हुए शिवाय एक नज़र शिवन्या को देखते हैं। और सनी के साथ बाहर चले जाते हैं।
मुझे मम्मा की याद आ रही थी। इस लिए मैं आ गया।
अच्छा मेरी याद नहीं आई? शिवाय उस के करीब बैठते हुए पूछते हैं।
आप की भी याद आती है। लेकिन मम्मा की याद ज़्यादा आती है। सनी भोलेपन से जवाब देता है। जिसे सुनकर शिवाय मुस्कुरा देते हैं।
इतनी सच्चाई से शायद बच्चे ही जवाब देते हों। वरना बड़े तो मौका देखकर मतलब का जवाब देते हैं।
आओ सनी खाना खाओ।
शिवन्या चिकन से आकर कहती है।
चलिए मिस्टर ओबेरॉय डिनर करते हैं। सनी शिवाय का हाथ पकड़ कर उठ जाता है। शिवाय भी साथ में उठ कर डाइनिंग टेबल पर बैठ जाते हैं।
एक नज़र शिवन्या को देखते हैं। जो अंजान बनी अपना खाना निकाल रही थी।
शिवाय भी खामोशी से अपने प्लेट में निकाल कर खाने लगते हैं। इस वक्त सनी के सामने कुछ भी बोलना सही नहीं होगा।
खाना खा कर शिवन्या सब समेटने लगी। और शिवाय सनी के साथ लिविंग रूम में आ कर सनी से बातें करने लगे। जो अपने स्कूल की बातों को बहुत खुशी-खुशी बता रहा था। और शिवाय भी बहुत ध्यान से सुन रहे थे।
चलो सनी रूम में चलो।
शिवन्या सब काम खत्म करके आ कर सनी से कहती है।
थोड़ी देर और?
नहीं...
चुपचाप चलो।
मम्मा प्लीज़ आप भी बैठें ना।
ठीक है तुम बैठो मैं जा रही हूं।
शिवन्या जाने के लिए मुड़ी।
जाओ सनी आप भी जाओ। मुझे भी कुछ काम है अभी। कहते हुए शिवाय उठ गये। और सीधे अपने रुम में चले गए।
रात ढलती जा रही थी। लेकिन शिवाय की आंखों से नींद कोसो दूर थी। टेरिस पर टहलते हुए वह सिगरेट पीते जा रहे थे। ख्यालों में सिर्फ शिवन्या की नाराज़गी थी।
आप की कॉफी.... पीएं और जाकर सो जाएं। खबरदार जो इसके बाद दूसरी सिगरेट जली।
शिवन्या कॉफी का मग वहीं टेबल पर रखती है। और कहते ही जाने के मुड़ जाती है।
शिवाय हाथ बढ़ाकर उसके बालों से क्लैचर निकाल देते हैं।बिना कुछ बोले।
शिवन्या के कदम ठहर जाते हैं।
जारी है...
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