डोर धड़कन से बंधी | भाग 3 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 3 | Hindi Romantic Story

शिवाय आफिस पहुंच कर आदर्श को अपने केबिन में बुलाते हैं। आदर्श बैठे सोच ही रहे थे कि उसकी आफत आने वाली है। और वही हुआ। 

आप ने बुलाया सर? आदर्श शिवाय के केबिन में पहुंच कर बहुत इज़्ज़त से शिवाय से पूछते हैं।

सर के बच्चे... शिवाय दांत पीस लेते हैं। और आदर्श मुस्कुरा देता है।

मेरी परेशानी देख कर मज़ा ले रहे हो। शिवाय ने उदासी से पूछा।

नहीं, आप की परेशानी दूर करने में लगा हूं। आदर्श भी सीरियस हो गये।

मेरे सर पर परेशानी रख कर कह रहे हो मेरी परेशानी दूर करने में लगे हो? शिवाय ने नाराज़गी से कहा।

अब तुम जो भी समझो। लेकिन यह परेशानी नहीं है। आदर्श एक बार फिर मुस्कुरा दिये।

ब्रेकफास्ट टेबल पर मुझ से कह रही थी जब तक आदर्श सर नहीं कहेंगे मैं नहीं जाऊंगी। 

घर मेरा और हुकूमत आदर्श सर की। शिवाय एक बार फिर नाराज़ हुए।

और शिवाय की बात पर आदर्श बहुत ज़ोर से हंस दिये।

मैडम ने मेरे साथ टेबल पर बैठ कर नाश्ता भी किया। आदर्श की हंसी देख कर शिवाय और गुस्सा हो गये।

यह तो अच्छी बात है। वैसे भी तुम अकेले ही नाश्ता करते थे। कहते ही आदर्श इंटरकॉम पर कॉफी का बोल देते हैं।

तुम जानते हो। यह तन्हाई मैंने खुद चुनी है उस के बावजूद भी। शिवाय ने उदासी से कहा।

हां, क्योंकि मैं चाहता हूं यह तन्हाई अब दूर हो जाए। आदर्श भी सीरियस हो गये।

लेकिन मैं नहीं चाहता कि वह मेरे यहां रहे। शिवाय भी ज़िद पर थे।

उसी वक्त कॉफी आ गई। कॉफी पीते ही आदर्श उठ गये।

तुम ने मेरी बात का जवाब नहीं दिया। शिवाय आदर्श को देखने लगे।

अभी शिवन्या कहीं नहीं जायेगी। आदर्श ने एक बार फिर फैसला सुना दिया।

अभी मैं जा रहा हूं। एक मीटिंग है मेरी। शाम को मिलते हैं। आदर्श शिवाय को एक नज़र देख कर बाहर निकल गये।

और शिवाय वहीं चेयर पर पीछे सिर टिका कर आंख बन्द कर लेते हैं। शिवन्या.... अचानक से शिवाय के होंठ हिले। 

शिवाय के दिमाग में शिवन्या की मुस्कुराहट घूम रही थी। श्लोका की यादें जो अब तक उनके दिल का सुकून थी, अचानक बिखरने लगी थी। 

शिवन्या तुम कौन हो? तुम ने मेरी शांत ज़िन्दगी में आकर मेरे दिल में यह हलचल क्यों मचाई? 

शिवाय ने गहरी सांस ली। उन की धड़कनें तेज़ हो रही थी । वह समझ नहीं पा रहे थे कि यह बेचैनी किस चीज़ की है। शिवन्या की नज़दीकियों का डर, या फिर श्लोका को भूलने का डर...

तुम क्यों आई हो मेरी ज़िन्दगी में। मैं सुकून से श्लोका की यादों के साथ था। तुम ने आते ही मेरे बेचैन दिल को और बेचैन कर दिया। 

मुझे इस वक्त सब से ज़्यादा डर अपनी धड़कन से लग रहा है। जो तुम को देख कर धड़क उठा। वरना मुझे कोई दिक्कत नहीं थी तुम्हें मेरे यहां रहने से।

शिवाय सोचे जा रहे थे। फोन की रिंग शिवाय को वापस हकीकत में ले आई।

शिवाय ने आफिस में ही लंच कर लिया। शाम को घर पहुंचे। उसी वक्त शिवन्या चाय और स्नैक्स ले कर आ गई।

आप लंच के लिए घर क्यों नहीं आये? शिवन्या ने हक से पूछा।

आप को यहां रहना है तो खामोशी से रहें। मेरी ज़िन्दगी में इंटरफेयर करने की ज़रूरत नहीं है। मैं क्या करता हूं क्या  नहीं? इस से आप को मतलब नहीं होना चाहिए। शिवाय ने सख्ती से कहा।

क्यों मतलब नहीं होना चाहिए? 

जब तक मैं यहां हूं, हर बात से मुझे मतलब होगा। फिर चाहे आप को बुरा लगे या अच्छा। शिवन्या भी हक से कहती है। और प्लेट से चिप्स उठा कर खाने लगती है।

शिवाय एक नज़र उसे देखते हैं और खामोशी से चाय पीने लगते हैं।

कल से आप लंच घर पर करेंगे। और अगर आफिस में करना हुआ तो यहां से जायेगा। आप को कैंटीन का नहीं खाना है। शिवन्या ने एक और हुक्म दिया।

शिवाय ने उसे देखा और उठ कर अपने रूम में जाने लगे।

आप ने मेरी बात का जवाब नहीं दिया? शिवन्या भी उठ गई।

शिवाय ने पलट कर उसे देखा। उसे ऐसा लगा यह श्लोका है। वह कुछ देर यूं ही शिवन्या में श्लोका को तलाशते रहे।

क्या हुआ अच्छी लग रही हूं? शिवन्या ने शर्माने की ऐक्टिंग की। 

शिवाय जैसे होश में आ गये। और सीधे रूम में जाकर दरवाज़ा बंद कर लेते हैं।

डिनर टाइम शिवाय बाहर आते हैं। टेबल पर खाना लग चुका था। शिवाय के बैठते ही शिवन्या भी आकर बैठ जाती है। शिवाय उसे देखते हैं। लेकिन खामोश ही रहते हैं। 

उसी वक्त डोर बेल बजती है। शिवन्या जाकर दरवाज़ा खोलती है।

वहां पर एक लड़की थी जो सीधे अंदर आ जाती है। शिवन्या भी डोर बन्द करके अन्दर आ जाती है। और अपनी चेयर पर बैठ कर दोबारा खाना खाने लगती है।

यह कौन है? वह लड़की हैरत से पूछती है।

मैं शिवन्या..... शिवाय के बोलने से पहले ही वह बोल पड़ती है।

तुम हो कौन? यहां पर डिनर वह भी शिवाय के साथ? वह लड़की हैरान और परेशान दोनों थी।

सुमन यह शिवन्या है। यह यहां कुछ दिन रहेगी। और बदले में मेरे लिए खाना बनायेगी। आदर्श लाया है। शिवाय ने पूरी बात बता दी।

तो फिर यह तुम्हारे साथ क्यों डिनर कर रही है। यह तो मेड है ना? सुमन गुस्से से कहते हुए वहीं चेयर पर बैठ जाती है।

गलत बात सुमन यह मेड नहीं है। शिवाय ने उसे टोका।

जो भी हो यह यहां नहीं रह सकती? सुमन नाराज़गी से कहती है।

क्यों नहीं रहूंगी? आप कौन होती है हमारे मामले में बोलने वाली?

शिवन्या भी गुस्से से कहती है।

शिवाय आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे। यह लड़की बोले जा रही है। सुमन गुस्से में उठ खड़ी होती है।

मैं जा रही हूं। यह मुझे यहां दिखनी नहीं चाहिए। सुमन शिवाय को वार्निंग देकर पैर पटकती हुई चली जाती है।

तुम को क्या ज़रूरत थी हमारे बीच में बोलने की? शिवाय गुस्से से कहते हैं।

क्यों ना बोलती। वैसे भी वह बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। जब तक मैं नहीं थी तो ठीक था। लेकिन अब मैं हूं तो कोई नहीं। शिवन्या बहुत प्यार से शिवाय को देख कर कहती है। और अपना खाना कम्पीट करने लगती है। 

शिवाय की नज़र शिवन्या पर टिकी थी क्योंकि शिवाय समझ गये थे कि उन्हें क्या करना है.....

जारी है.....

डोर धड़कन से बंधी भाग 4

डोर धड़कन से बंधी भाग 2



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