डोर धड़कन से बंधी | भाग 31 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 31 | Hindi Romantic Story
शिवाय के मन में कुछ तो चल रहा था।
लेकिन क्या.....
शायद वह भी यह जानने के लिए बैचैन था। शायद इसी लिए वह घर जा रहा था। घर जाकर उसे सुकून मिलेगा या फिर कोई और उलझन उसका इंतेज़ार कर रही है। वह नहीं जानता। लेकिन उस के कदम बहुत तेज़ी से बढ़ रहे थे।
घर पहुंचते ही शिवाय की नज़र शिवन्या को ढूंढने लगी। लेकिन वह नहीं थी।
कहां जा सकती है? सोचते हुए शिवाय रूम में चले गए। चेंज करते हुए भी शिवाय का मन शिवन्या में ही अटका हुआ था।
फ्रेश होकर शिवाय आराम करने के लिए लेट गए। आदर्श की बातें शिवाय के कानों में गूंज रही थी।
कुछ आहट पर शिवाय बाहर निकले। शिवन्या अपना बैग वहीं सोफे पर रख कर बैठी हुई थी। वह बाहर से आई थी। उसे पता नहीं था कि शिवाय आ चुके हैं।
शिवाय उसके बगल में जाकर बैठ गये।
शिवाय के बैठते ही शिवन्या उठने लगी। लेकिन शिवाय ने उसे कंधे से पकड़ कर दोबारा बैठा दिया।
सनी कहां है? कहीं गई थी क्या?
सनी गया। और मैं भी बहुत जल्द चली जाऊंगी। मैं घर देख रही हूं। शिवन्या नाराज़गी से कहती है।
तुम यहां से कहीं नहीं जाऐगी। यह मेरा हुक्म है। शिवाय सख्त हो गये।
आप होते कौन हैं मुझे हुक्म देने वाले? शिवन्या की आवाज़ और श्लोका की आवाज़ शिवाय के कानों में टकराने लगी।
आप होते कौन है...यह सवाल मेरी ज़िंदगी का हिस्सा है। और इस वक्त इस सवाल का मैं जवाब जानना भी नहीं चाहता।
शिवाय अपना बाया हाथ पीछे सोफा पर रख लेते हैं। और हाथ बढ़ा कर उसका क्लैचर छुड़ा कर उसके बाल बिखेर देते हैं। शिवाय संभल चुके थे।
शिवन्या हैरानी से शिवाय को देखती है। जो बिल्कुल अलग ही मूड में थे।
कॉफी पियोगी?
शिवाय बिल्कुल नार्मल थे।
कौन बनायेगा?
शिवन्या को हैरत हुई। क्योंकि उस ने आज से पहले कभी शिवाय को कॉफी बनाते नहीं देखा था।
तुम... शिवाय मुस्कुरा दिए।
शिवन्या चुपचाप उठ गई। इस वक्त वह शिवाय बिल्कुल नहीं थे। जिसे वह आज तक देखती आई थी।
शिवाय भी साथ में चले गए।
शिवन्या कॉफी बनाती रही। और वह वहीं पर बैठा उसे देखता रहा।
तुम ने कभी कोशिश नहीं कि तुम्हारे बाल बड़े होते। शिवाय उठ कर उस के करीब गया। और उस के बालों को छूते हुए पूछता है।
नहीं, लम्बे बाल सम्हालना बहुत मुश्किल होता है। वह कॉफी निकालते हुए कहती है।
यह बात भी सही है। शिवाय के कानों में श्लोका की आवाज़ गूंजी। मुझ से नहीं सम्हाले जाते यह लमबे बाल.... लेकिन फिर वह तुरंत हकीकत में वापस आ गये।
वह कॉफी निकाल चुकी थी। शिवाय दोनों मग उठा लेते हैं। और बाहर निकल जाते हैं।
शिवन्या भी साथ में बाहर जाती है। उसके बैठते ही शिवाय मग उसकी तरफ करते हैं। और खुद भी बैठ जाते हैं।
पीकर बताओ कैसी बनी है?
अच्छी है। वह एक सिप लेकर कहती है।
सिर्फ अच्छी....
नहीं बहुत अच्छी....
यह हुई ना बात।
और दोनों हंस पड़े।
तुम मुझ से नाराज़ थी। उसके बाद भी मेरे लिए कॉफी बनाई। शिवाय ना जाने किन ख्यालों में थे।
नाराज़ तो मैं अभी भी हूं। लेकिन इस वक्त आपको कॉफी की ज़रूरत थी। इस लिए बनाई। हो सकता है बाद में आप को कॉफी की उतनी ज़रूरत ना हो, जितनी इस वक्त थी।
शिवन्या शिवाय के हाथ से खाली मग लेकर उठते हुए कहती है।
लेकिन शिवाय उसे दोबारा बैठा कर उसे देखने लगते हैं।
यह अल्फाज़ तो मेरे हैं। जो मैंने श्लोका से कहे थे। क्या कोई दूसरा भी वही अल्फाज़ कह सकता है। शिवाय एक बार फिर सोचों में घिरे थे।
यह अल्फाज़.... शिवाय को समझ नहीं आया कि उससे क्या पूछे।
ऐसा मैंने सुना था। मुझे अच्छा लगा था। इस लिए आज मौका लगा तो बोल दिया।
शिवन्या ने बात क्लियर कर दी।
चलो बाहर चलते हैं। शिवाय उठ गये।
मैं आपसे नाराज़ हूं।
हां पता है। चलो जल्दी। शिवाय उसे उठा देते हैं। और हाथ पकड़ कर बाहर निकल जाते हैं। शिवन्या हैरानी से इस बदले हुए शिवाय को देख रही थी।
गाड़ी का गेट खोल कर शिवाय उसे बैठने का इशारा करते हैं। और खुद दूसरी तरफ जाकर बैठ जाते हैं।
कहां चलना है? शिवन्या हैरानी से शिवाय को देखती है जो स्टेरिंग उसे थमा कर खुद आराम से बैठे थे।
ऐसे ही चलो अभी। कहते हुए शिवाय आंख बंद कर लेते हैं। शिवाय का मन इस वक्त किसी लम्हें में कैद था। जिस में से शिवाय निकलना नहीं चाहते थे।
अगर हमसफर खूबसूरत हो तो सफर का मज़ा दुगना हो जाता है ना? शिवन्या गाड़ी को सिग्नल पर रोकते हुए कहती है।
शिवाय बेसाख्ता आंख खोल कर उसे देखते हैं। और कुछ बोले बिना दोबारा आंख बन्द कर लेते हैं।
तुम कौन हो शिवन्या? और क्यों मेरी ज़िन्दगी में आई हो? शिवाय एक बार फिर सवालों में उलझने लगे।
ऐसे ही बेमकसद गाड़ी दौड़ती रही।
घर चलें? शिवनया शिवाय को देखती है जो अभी भी आंख बन्द किये हुए थे।
नहीं, मॉल रोड चलो। शिवाय सीधे होकर बैठ गए। और उस के बालों में यूं ही हाथ चलाने लगे।
चलो कहीं लंच करते हैं। यूं ही घूमने के बाद शिवाय कहते हैं।
शिवन्या एक रेस्तरां के आगे गाड़ी रोक देती है। दोनों अंदर जाकर खाना आर्डर करते हैं।
मैं आप को समझ नहीं पा रही। शिवन्या कह ही देती है। जो वह बहुत देर से महसूस कर रही थी।
कुछ समझने की कोशिश मत करो। जो हो रहा है होने दो। शिवाय एक बार फिर खोने लगे।
जारी है...
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