डोर धड़कन से बंधी | भाग 64 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 64 | Hindi Romantic Story

श्लोका की आगोश में आते ही शिवाय बेतहाशा रो दिए, वह बांध जो कब से आंसुओं को रोके हुए था। एक ज़रा सी कुरबत पर बिखर गया। 

वह भी तो इंसान ही थे, कब तक सब्र करते।

दोनों बहुत देर तक रोते रहे, मन हल्का हो चुका था। कल का सूरज उन के लिए क्या मुश्किलें लाता है, यह उन्हें नहीं पता था लेकिन वह इतना जानते थे कि अगर वह दोनों साथ हैं तो फिर उन्हें और कुछ नहीं चाहिए।

सुकून की नींद सोकर सुबह वह दोनों देर से उठे, नाश्ता करते ही दोनों बाहर निकल गए, अपने नए सफर पर…एक ऐसा सफर जिसके ना रास्ते का पता था और ना मंज़िल का।

होटल से निकल कर कुछ देर तक वह पैदल चलते रहे।

तभी एक आटो दिखता है। शिवाय हाथ दिखाकर आटो रोकते हैं। और वह दोनों आटो में बैठ जाते हैं।

कहां चलना है साहेब…आटो वाला पीछे मुड़कर पूछता है।

कहीं सस्ता किराए का एक कमरा मिल जायेगा, जहां खाना भी मिल जाए। शिवाय कुछ सोच कर कहते हैं।

परदेसी लगते हो साहेब…आटो वाले ने जानना चाहा।

यही समझ लो…शिवाय धीरे से बोले।

ठीक है साहेब, शक्ल सूरत से अच्छे इंसान लगते हो। अब मैं आप को एक ऐसा कमरा दिखाता हूं जो देखते ही पसंद आ जायेगा। कहते हुए वह एफ एम पर सांग लगा देता है। और खुद भी खुशी से गाने लगता है।

काफी देर चलने के बाद आटो संकरी गलियों से होता हुआ एक घर के पास जाकर रूकता है।

किराया कितना हुआ? उतरते ही शिवाय पूछते हैं।

पहले घर तो देखें, नहीं पसंद आयेगा तो दूसरा दिखाऊंगा। अब आप को घर दिलाना मेरी ज़िम्मेदारी है। परदेस क्या होता है यह मैं अच्छे से जानता हूं। कहते ही वह अंदर की तरफ बढ़ जाता है। और शिवाय और श्लोका को भी अंदर आने का इशारा करता है।

लेकिन उन को अच्छा नहीं लग रहा था इस तरह किसी के घर में जाना।

आ जाएं भाई, अपना ही घर समझे। छोटे से दरवाज़े के अन्दर जाकर वह रूक जाते हैं।

हाजी साहेब…ड्राइवर आवाज़ देता है।

एक ही आवाज़ में अंदर से एक लड़का आ जाता है।

क्या हुआ? वह हैरानी से पूछता है।

इन को कमरा चाहिए, इस लिए आया हूं। ड्राइवर शिवाय की तरफ इशारा करता है।

कौन आया है? तभी एक बुजुर्ग आदमी अंदर से आते हैं।

नानू यह रूम देखने आए हैं। पास खड़ा लड़का उन की तरफ इशारा करता है।

पिछली बार की तरह लफड़े वाला तो नहीं है ना? हाजी साहेब ने शिवाय को ऊपर से नीचे तक देखा।

अरे हाजी साहेब... अच्छा बुरा किसी के चेहरे पर थोड़ी लिखा रहता है, वह तो साथ रहने पर पता चलता है।

ड्राइवर जल्दी से कहता है।

आप कमरा दिखा दें, पसंद आ गया तो आप समझ लें कि रखना है या नहीं, वरना मैं किसी और का घर दिखा दूंगा। 

ड्राइवर बड़ा मास्टर लगता था। शिवाय ने यह तो समझ लिया।

ठीक है आओ देख ले। हाजी साहेब ने रास्ता दिया।

शिवाय ने ड्राइवर की तरफ देखा।

जाओ देख लो, और अगर कमरा पसंद आ जाए तो किराया भी तय कर लेना। मैं यही इंतेज़ार कर रहा हूं। और अगर कमरा पसंद ना आए तो कोई फिक्र वाली बात नहीं। मैं दूसरा दिखा दूंगा।

शिवाय श्लोका दोनों अंदर गए। अंदर जाते ही एक छोटा सा ड्राइंग रूम था। जहां पर बहुत ही पुराने सोफे लगे हुए थे। उसी से लगे एक कमरे में हाजी साहेब लेकर गए।

अच्छे से देख लो पहले, फिर बात करते हैं। कहते ही हाजी साहेब बाहर निकल गए।

शिवाय और श्लोका की नज़र एक दूसरे पर उठती है। और दोनों ही मुस्कुरा देते हैं।

एक छोटा सा कमरा था जिस में सिर्फ एक बेड और एक कुर्सी रखी थी। दीवार पर एक छोटा शीशा लगा था। साथ में बाथरूम था।

एक ही नज़र में उन दोनों को कमरा पसंद आ गया। क्योंकि घर छोटा था। मगर बहुत ही साफ-सुथरा था।

दोनों बाहर निकल गए।

हमें रूम पसंद है, साथ में खाना भी चाहिए। शिवाय ने जल्दी से कहा।

मिल जायेगा, लेकिन जो घर में बनेगा वही मिलेगा। कुछ स्पेशल तुम्हारे लिए नहीं बनेगा। तुम को खाना नाश्ता तुम्हारे कमरे में मिल जायेगा। हाजी साहेब शिवाय को देख कर कहते हैं।

जी ठीक है।

पैसा? शिवाय ने धीरे से पूछा।

बीस हज़ार रूपया महीना, एक लाख एडवांस… हाजी साहेब जल्दी से कहते हैं।

अभी आप यह पांच हज़ार रख लें, बाकी पैसे मैं बहुत जल्द दे दूंगा। शिवाय अपनी जेब से पैसे निकालते हैं। और पांच हज़ार गिन कर हाजी साहेब के आगे करते हैं।

यह बाकी पैसे? हाजी साहेब उन के हाथ में बचे पैसे की तरफ देखते हैं।

घर से दस हज़ार लेकर निकला हूं। कुछ पैसे हाथ में होने चाहिए। काम देखना है किराया भाड़े के लिए बचा रहा हूं। शिवाय सच्चाई बताते हैं।

एक कमरे से एक औरत खड़ी सब देख रही थी।

और एडवांस? हाजी साहेब को याद आया।

एडवांस?…शिवाय को समझ नहीं आया कि क्या करें।

आप यह चूड़ियां रख लें। एडवांस के तौर पर… श्लोका तुरंत अपने हाथ की चूड़ियों को उतार कर उन के आगे करती है।

शिवाय खामोश रह गए, लेकिन उन के दिल में कुछ बहुत ज़ोर से टूटा था। जिसकी चुभन उन के चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी।

मैं इन चूड़ियों का क्या करूंगा। क्या पता असली हैं भी या नहीं। मैं इन झमेलों में नहीं पड़ना चाहता। आप कहीं और घर देख लें।

हाजी साहेब नाराज़ हुए।

ठीक है हमें मंज़ूर है, आप यहां रह सकते हैं। वह औरत जो दरवाज़े से सब देख रही थी, आगे आकर श्लोका के हाथ से चूड़ियां ले लेती है। और अंदर चली जाती है।

हाजी साहेब खामोशी से उस औरत की तरफ देखते हैं। और फिर शिवाय की तरफ देखते हैं।

ठीक है आप सामान लेकर आ जाए। हाजी साहेब कहते ही बाहर निकल गए। पीछे-पीछे शिवाय भी बाहर निकल गए।

क्या हुआ कमरा पसंद आया?

शिवाय को देखते ही ड्राइवर पूछता है।

हां,

सब फाइनल हो गया?

हां, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद… आप ने हमारी बहुत मदद की।

शिवाय आटो वाले से हाथ मिलाते हुए कहते हैं।

मैंने ऐसा कुछ नहीं किया साहेब…इंसान ही इंसान के काम आता है। आज मैंने आप की मदद की है। हो सकता है कल मुझे आप के मदद की ज़रूरत पड़ जाए। ड्राइवर की आंख नम हो गई।

एक बात कहूं साहेब? लोग तो बहुत मिले लेकिन आप जैसा आज तक कोई नहीं मिला। जो एक मामूली आटो वालो से हाथ मिलाकर शुक्रिया अदा करता है।

चलता हूं साहेब, फिर मिलेंगे…कहते ही वह आटो में बैठ कर स्टार्ट करते ही निकल जाता है। लेकिन उसकी आंखों का आंसू हर कोई देख लेता है।

शिवाय अंदर जाकर रुम में चले जाते हैं।

शिवाय खाली नज़रों से श्लोका को देखते हैं। ऐसा नहीं सोचा था श्लोका की तुम्हारे हाथों की चूड़ियां गिरवी रखनी पड़ेगी। शिवाय के दिल का दर्द उनके लहजे और आंखों दोनों में था।

कोई बात नहीं शिवाय, मुझे यकीन है आप इस से अच्छी चूड़ियां मुझे देंगे। श्लोका शिवाय का हाथ पकड़ कर कहती है।

बाहर से कुछ आवाज़ें आ रही थीं, शायद हाजी साहेब उस औरत से कुछ कह रहे थे जिस ने चूड़ियां ली थी। क्योंकि बात चूड़ियों के लेने की हो रही थी।

हाजी साहेब गुस्से में बहुत कुछ बोलते रहे। लेकिन औरत की कोई आवाज़ नहीं सुनाई दी। और फिर बाहर सन्नाटा हो गया।

शिवाय और श्लोका भी आराम से बेड पर चढ़ कर बैठ गईं।

बहुत सारे काम हैं जिन को आज ही करना है। शिवाय कुछ सोचते हुए कहते हैं।

जैसे? श्लोका ने जानना चाहा।

जैसे…हमारे कपड़े…थोड़ी देर में मैं बाहर जाता हूं देखता हूं कोई कपड़े की दुकान दिख जाए तो एक-दो जोड़ी कपड़ा ले लूं। अपने और तुम्हारे लिए। और ज़रा देखूं यह कैसा मुहल्ला है कुछ काम-धंधा ढूंढ़ूं। क्यों क्या ख्याल है? शिवाय श्लोका की ओर देख कर मुस्कुरा कर पूछते हैं।

ख्याल तो अच्छा है…श्लोका भी मुस्कुरा दी।

मैं कुछ भी करने को तैयार हूं, बस यह चेहरा यूं ही मुस्कुराता रहा…

तुम्हें देखकर मेरे अंदर हौसला आ जाता है। मुझे अफसोस है कि मेरी वजह से तुम को बहुत सारी परेशानियां का सामना करना पड़ेगा। लेकिन मुझे उम्मीद है हमारी यह परेशानी बहुत जल्द दूर हो जायेगी। हम बहुत जल्द ओबेरॉय मेंशन चलेंगे।

जारी है…


डोर धड़कन से बंधी भाग 63

डोर धड़कन से बंधी भाग 65



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