डोर धड़कन से बंधी | Part 69 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 69 | Hindi Romantic Story
सारी हरकत आशिकों वाली आ गई हैं। पूजा सेब काट कर उस के मुंह में डालती हुई कहती है।
सामने जब ऐसी महबूबा हो तो आशिकी अपने आप आ जाती है। आरव उसके हाथ को अपने होंठों से लगा कर कहता है।
मुहब्बत एक खूबसूरत नशा है जिसको यह लत लग जाए, उसकी ज़िन्दगी संवर जाती है।
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मैं बाहर जा रहा हूं, देर हो सकती है तुम खाना खा लेना। नाश्ता करते ही शिवाय उठ जाते हैं। और श्लोका को प्यार करते हुए कहते हैं।
ठीक है, आप बेफिक्र हो कर जाएं। श्लोका शिवाय के गले लगते हुए कहती है।
बाय कहते हुए शिवाय मुस्कुरा कर बाहर निकल जाते हैं।
श्लोका भी साथ में बाहर निकल जाती है, उसकी हमेशा से आदत थी शिवाय को दरवाज़े तक छोड़ने की।
जैसे ही वह बाहर से अंदर आने लगी, उसे राहिल दिख गया।
राहिल…
कुछ सोच कर वह आवाज़ देती है।
सुबह तुम दुकान चले जाते हो, तो क्या कुछ देर के लिए तुम अपना लैपटॉप मुझे दे सकते हो? आखिर वह पूछ ही लेती है। जब से उस ने राहिल का लैपटॉप देखा था तब से वह सोच रही थी।
हां…हां क्यों नहीं…सुबह तो लैपटॉप खाली ही रहता है। यह तो रात को काम करता है। असमा जल्दी से कहती हैं। राहिल नाराज़गी से असमा को देखता है।
लेकिन वह उसको नज़र अंदाज़ करके लैपटॉप उठाकर श्लोका को दे देती हैं।
थैंक्स…श्लोका लैपटॉप ले लेती है, यह देखते हुए भी कि राहिल को उसका लैपटॉप लेना पसंद नहीं आया।
राहिल नाराज़गी से असमा को देखता है और खामोशी से बाहर निकल जाता है।
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मैम आप? जैसे ही काजल आफिस आती है,
और अंदर की केबिन कीतरफ जाने लगती है वहां रिसेप्शन पर बैठी लड़की जानना चाहती है।
मैं तुम्हारे सर शिवाय सिंह ओबेरॉय की होने वाली बहू…आज से मैं वह सारे काम करूंगी जो शिवाय सर करते थे। मुझे शिवाय सर के केबिन में ले चलें।
कहते ही वह आगे बढ़ती है।
शिवाय के मैनेजर एक लोग को उसको साथ जाने का इशारा करते हैं। और खुद अपने केबिन में चले जाते हैं।
मैनेजर शिवाय को फोन करता है।
फोन प्रेम उठाता है। मैनेजर उसे काजल के आने के बारे में बताता है।
हां,वह इस घर की होने वाली बहू ही है। वह जो कहती है करने दें। प्रेम कुछ सोच कर कहता है।
ओके सर…मैनेजर फोन रखकर कुछ सोचता है। और फिर आदर्श को फोन करता है।
…
बॉस होने का अपना एक अलग ही मज़ा है। सुबह से शाम हो गई आफिस में बैठे हुए, हर घंटे चाय, काफी नाश्ते के सिवा कोई काम ही नहीं। सारे काम करने के लिए बंदे तैयार है।
शिवाय सिंह ओबेरॉय जिस काम को आप अपना कहते थे, उस काम को मैं अपना बना कर रहूंगी। सोचते हुए काजल के होंठों पर एक शातिराना मुस्कान छा गई।
वह कुछ सोच कर फोन उठाती है और बात करने लगती है।
…
कैसा रहा आफिस? डिनर करते हुए प्रेम उत्सुकता से काजल को देखते हुए पूछता है।
बहुत अच्छा…वह खुशी से कहती है।
गुड…प्रेम भी खुश हो गया।
चलो इसी बहाने हो सकता है तुम मौम डैड का दिल जीत लो। जब वह वापस आएंगे और तुम को इतनी ज़िम्मेदारी से काम करते देख वह ज़रूर खुश होंगे।
प्रेम…किन सोचों में गुम हो? मैं कुछ कह रही हूं। काजल दोबारा प्रेम को आवाज़ देती है।
हां बोलो, क्या कह रही थी? प्रेम जल्दी से कहता है।
कुछ नहीं यह बाताओ तुम्हारा दिन कैसा गया? काजल बात बदल देती है।
अच्छा था… अभी तो काम की शुरुआत है, धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा। प्रेम खाते हुए कहता है।
तुम को ज़रूरत क्या थी इंटीरियर डिजाइनर बनने की…अच्छा खासा घर का बिज़नेस था उसे करते। काजल नाराज़गी से कहती है।
बिज़नेस सम्हालने के लिए तुम हो ना? प्रेम उसे प्यार से देखते हुए कहता है।
वैसे मौम डैड कहां हैं? कुछ पता चला? काजल ने जानना चाहा।
नहीं, कुछ पता नहीं। प्रेम उदासी से कहता है।
मुझ से गलती हो गई, मुझे डैड को जाने नहीं देना चाहिए था…मुझे लगा डैड कहीं अपने ही फार्म हाउस या किसी दूसरे बंगले पर जायेंगे। लेकिन मैं गलत था। मैं डैड को समझ नहीं पाया।
पता नहीं वह कहां होंगे?वह दोनों तो बिल्कुल खाली हाथ निकले थे।
प्रेम अब पछता रहा था।
अब सोचो मत…उनको जाने से पहले सोचना चाहिए था। एक छोटी से बात पर नाराज़ हो कर चले गए। काजल गुस्से से कहती है।
अब तुम अपना मूड खराब मत करो। चलो बाहर ड्राइव पर चलते हैं। प्रेम जल्दी से उसे मनाता है। वह काजल की नाराज़गी से डरता था। फिर उसे मनाना और भी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि वह आसानी से मानती नहीं थी।
मुझे कहीं नहीं जाना। मैं रूम में जा रही हूं। काजल नाराज़गी से कहते हुए उठ जाती है। प्रेम भी उसके पीछे-पीछे उसे मनाने के लिए चला जाता है।
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सॉरी यार बहुत देर हो गई…शिवाय कमरे में आते ही कहते हैं।
कोई बात नहीं आप फ्रेश हो जाएं, फिर हम खाना खाते हैं। श्लोका मुस्कुरा कर कहती है।
थोड़ी ही देर में असमा खाना लेकर आ जाती हैं।
बहुत देर हो गई है भूख लगी होगी अच्छे से खाइयेगा। असमा खाना वहीं बेड पर रखते हुए कहती हैं।
हां कोई दिक्कत नहीं है, हमारी आदत है। श्लोका जल्दी से कहती है।
असमा बाहर चली जाती है। दोनों आराम से बैठ कर खाना खाते हैं।
खाने के बाद श्लोका बर्तन बाहर ले जाकर रख देती है। और वापस रूम में आ जाती है।
शिवाय हाथ धोकर खिड़की के पास जाकर खड़े हो जाते हैं। और बाहर देखने लगते हैं। श्लोका भी चुपचाप आकर शिवाय के बगल में खड़ी हो जाती है।
दोनों ही खामोश थे…मगर इस खामोशी में भी एक अपनापन और सुकून था। श्लोका की यही आदत शिवाय को पसंद थी। आते ही कभी तुरंत सवाल शुरू नहीं करती। आज भी वह सुबह के गए रात को वापस आए।
लेकिन श्लोका ने कोई सवाल नहीं किया। बल्कि आने के बाद क्या ज़रूरी है, उस बात पर ध्यान देती।
शिवाय श्लोका को देख कर मुस्कुरा दिए।
ऐसे क्या देख रहे हैं? श्लोका भी मुस्कुरा कर पूछती है।
अपनी जीवनसंगिनी को…शिवाय की आंखों में प्यार ही प्यार था।
तुम जब उस रात मेरा हाथ छुड़ा गई थी, मुझे लगा मैं अपनी ज़िन्दगी से दूर हो गया। मुझे ऐसा लगा कि सफर शुरू होते ही मैं थक गया। तुम्हारा साथ, तुम्हारे प्यार की आदत ऐसी हो गई है कि तुम्हारे बिना जीने का सोच कर ही डर लगने लगता है।
जारी है…
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