डोर धड़कन से बंधी | भाग 77 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 77 | Hindi Romantic Story
शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं। अब वह सबा को क्या बताते कि वह साड़ी पांच लाख की है। जो श्लोका के रूप को निखार देती है।
हमेशा लाखों के ड्रेस पहनने वाली आज मामूली सा तीन सौ वाला सूट पहने हुए थी। और वह भी सिर्फ उसकी वजह से। अपने प्यार के लिए वह मुस्कुरा कर हर कुर्बानी देने को तैयार रहती है।
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प्रेम हम शादी कर लेते हैं…प्रेम का मूड अच्छा देख कर काजल जल्दी से कहती है।
तुम्हारा दिमाग तो ठीक है? मौम डैड नहीं है। और मैं शादी कर लूं? वह हैरान हुआ।
तो क्या हुआ हम सादगी से शादी कर लेते हैं। जब मौम डैड आयेंगे तो रिसेप्शन कर लेंगे। काजल रास्ता निकालती है।
नहीं, ऐसा कुछ नहीं करना है जिससे मौम डैड दुखी हों। हम पहले ही उनका दिल दुखा चुके हैं। प्रेम बात खत्म कर देता है।
मम्मी कह रही हैं कि अगर अभी शादी नहीं होगी तो तुम वापस आ जाओ। उन को इस तरह मुझे तुम्हारे साथ रहना पसंद नहीं है। काजल एक और पांसा फेंकती है।
तो फिर ठीक है, तुम वापस चली जाओ मम्मी के पास… जैसे ही मौम डैड आते हैं मैं उन्हें लेकर सिंगापुर आ जाऊंगा।
प्रेम रास्ता निकालता है।
मैं आप को अकेला छोड़ कर नहीं जाऊंगी। काजल पेंतरा बदलती है।
तो फिर ठीक है सुकून से रहो और मुझे भी अपने बिज़नेस पर ध्यान देने दो।
और तुम्हारा काम कैसा चल रहा है? प्रेम उसे देखते हुए पूछता है।
ठीक है, आज कल वह मैनेजर दुनिया भर की फाइल मेरे सामने रख दे रहा है। कहता है इसे देख लें तो काम आगे बढ़े। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।
मैंने उस मैनेजर को बोल दिया कि तुम को पैसे किस बात के मिलते हैं तुम देखो सब कुछ। वह फख्र से कहती है।
बिज़नेस करना इतना आसान थोड़ी होता है। जैसा तुम समझती हूं। प्रेम हंसता है।
मुझे काम करने का कोई शौक नहीं है। मैं मालकिन बन कर रहूंगी। सारा काम मेरे वर्कर करेंगे।
वह बेवकूफों की तरह बात करती है। जिसे सुनकर प्रेम सिर्फ मुस्कुरा कर रह जाता है।
अच्छा यह बताओ पैसे मेरे एकाउंट में ट्रांसफर हुए? वह मुद्दे पर आई।
मैंने कहा ना मैं कुछ नहीं कर सकता।
मैंने मैनेजर साहेब से बात की थी। मैं कुछ नहीं कर सकता।
करोड़पति शिवाय सिंह ओबेरॉय के बेटे को अपनी
होने वाली बीवी को देने के लिए दस लाख नहीं हैं।
क्या बात है… वह हंसती है।
अब छोड़ो यह सब…चलो बाहर चलते हैं मूवी देखते हैं। प्रेम उठ खड़ा होता है।
मुझे कहीं नहीं जाना…जब तक तुम बीस लाख रुपए मेरे एकाउंट में ट्रांसफर नहीं करते मैं तुम से बात नहीं करुंगी। काजल उठकर गुस्से से उसे देखते हुए कहती है, और पैर पटकते हुए अपने कमरे की ओर बढ़ जाती है।
और प्रेम चुपचाप खड़ा उसे देखता रह जाता है। इस वक्त उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे।
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पूजा की नींद खुलती तो देखती है कि आरव बेखर सो रहे थे। उसे हैरत होती है। क्योंकि आरव सुबह जल्दी उठकर जिम जाता था फिर वापस आकर आफिस जाने की तैयारी करता था।
आरव…वह धीरे से आरव को आवाज़ देती है। लेकिन आरव बेखबर सोता रहा। पूजा उसे वैसे ही सोता छोड़ कर रेडी होने चली जाती है।
जैसे ही वह तैयार होकर बाहर आती है आरव उसे हैरानी से देखता है। ब्लू कलर की शीफौन की साड़ी पहने, कानों में गोल्डन टॉप्स और हाथ में घड़ी पहने वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।
सुबह-सुबह यह ज़ुल्म…वह आंख पिंच करता है।
उठो तो बताती हूं…आफिस नहीं जाना है? वह शर्मा कर नाराज़ अंदाज़ में कहती है।
आफिस की आज छुट्टी…मैं तैयार होकर आता हूं, बाहर चलते हैं। आरव जल्दी से उठ खड़ा होता है।
हम आफिस चल रहे हैं जल्दी से तैयार हो जाएं। वह उसे बाथरूम की तरफ धकेलती है।
इस रूप में तुम आफिस ना ही चलो तो अच्छा है, वरना मैं एक भी काम नहीं कर पाऊंगा। वह उदासी से कहता है।
बहुत शौक था ना मुझे आफिस ले जाने का…अब चलो मैं तैयार हूं।
नहीं…वह कहते ही बाथरूम में चला जाता है।
मुझे पता है तुम मुझे बिज़ी रखने के लिए आफिस ले जा रहे हो। अगर तुम मुझे खुश रखने के इतने जतन कर रहे हो तो मेरा भी फर्ज़ बनता है कि तुम्हारी इस कोशिश में मैं तुम्हारा साथ दूं। पूजा सोचते हुए एक नज़र खुद को आईने में देखती है। और मुस्कुराते हुए बाहर निकल जाती है।
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शाइस्ता और सबा के लिए रिश्ता आया है। रात में खाने के बाद असमा सब को देखते हुए कहती हैं।
अब खाना खाकर शिवाय और श्लोका भी बाहर ही आ जाते थे। और सब लोग बैठ कर बातें करते।
पता करो अगर घर-परिवार ठीक है, और लड़कियों की राय ले लो…अगर सब ठीक हो तो फिर रिश्ता कर लेते हैं। चाचा जी सुकून से कहते हैं।
शिवाय की नज़र दोनों लड़कियों पर उठती है।
इन दोनों की तरफ से इंकार है। असमा धीरे से कहती हैं।
वजह? चाचा जी हैरानी से पूछते हैं।
शिवाय की नज़र सबा पर उठती है वह भी उन्हें ही देख रही थी। वह शाइस्ता को देखते हैं। वह खामोश बैठी हुई थी।
सबा का तो समझ आता है लेकिन शाइस्ता के मना करने की वजह? शिवाय सोच में पड़ जाते हैं।
अगर लड़कियों का मन नहीं है तो फिर मना कर दो। और भी रिश्ते आयेंगे। वैसे भी पहले इन की पढ़ाई पूरी होने दें। शिवाय उठते हुए कहते हैं।
शिवाय बिल्कुल सही कह रहे हैं। अभी इन को पढ़ने दें। श्लोका असमा को समझाती है।
एक वक्त के बाद रिश्ते आना बन्द हो जाते हैं। फिर कौन करेगा इन से शादी? हाजी साहेब सोचते हुए कहते हैं।
यह बात भी सही है। गौर करते हैं फिर…शिवाय कुछ सोचते हुए कहते हैं।
और यह जो असमा के एकाउंट में दो लाख रुपए आए हैं उसका क्या करना है? हाजी साहेब शिवाय को देख कर कहते हैं।
श्लोका आनलाइन क्लास लेती है उसी की सेलरी आई है रख लें। किराए और एडवांस का जो बाकी था। मुझे कोई ज़रूरत होगी तो मैं आप से ले लूंगा। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं।
ऐसी ही कोई जॉब शाइस्ता और सबा को भी लगा दें। हाजी साहेब उम्मीद से कहते हैं। सैलरी सुनकर उन को एक आस हो जाती है।
एक बार इनको पढ़ लेने दें। सब ठीक हो जायेगा। शिवाय सब को देख कर कहते हैं।
राहिल थैंक्स…लैपटॉप देने के लिए। श्लोका मुस्कुरा कर राहिल को देखती है।
मैंने नहीं अम्मी ने दिए थे। मैं तो मना कर देता। राहिल सच कहता है।
तुम्हारी अम्मी की अच्छाई तुम लोगों को कामयाब बना रही। मां को कभी नाराज़ मत करना।
गलतियां किसी से भी हो सकती हैं। तुम्हारी मां से भी हो सकती है। लेकिन उन की गलतियों के लिए कभी उन को बुरा मत कहना, और ना ही उनसे नाराज़ होना।
मां बाप हमेशा बच्चों के लिए अच्छा ही सोचते हैं। और कभी-कभी इसी अच्छा के चक्कर में बच्चों के नज़र में बुरे हो जाते हैं।
जारी है…
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