डोर धड़कन से बंधी | भाग 9 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 9 | Hindi Romantic Story

तुम ऐसा कैसे कह सकते हो जब की तुम सब जानते हो। शिवाय नाराज़गी से कहते हैं।

मैं सब जानता हूं इसी लिए तो कह रहा हूं। आगे बढ़ जाओ। हो सकता है यही तुम्हारी श्लोका हो? आदर्श खुशी से कहते हैं।

आदर्श के कहते ही शिवाय के अंदर एक नई जान आ जाती है।

मैं पता लगाने की कोशिश करता हूं। यह बात तो मेरे दिमाग में आई ही नहीं।

शिवाय के चेहरे पर खुशी चमक रही थी।

अब मैं जाऊं? आदर्श भी मुस्कुरा दिए।

हां ठीक है जाओ। मैं घर जा रहा हूं। तुम देख लेना यहां सब काम। दो मीटिंग थी मेरी वह भी तुम अटेंड कर लेना। शिवाय उठ खड़े हुए। साथ में आदर्श भी उठ गये।

मैं सब देख लूंगा तुम जाओ। आदर्श ने बाहें फैला दी। और शिवाय तुरंत उसके गले लग गये।

और फिर दोनों बाहर निकल गये।

शिवाय घर गये तो देखा शिवन्या वहीं बाहर ड्राइंग रूम में सोफे पर सो रही थी। 

शिवाय उस के पास जाकर खड़े हो गए। और उसे देखने लगे। या यूं कहें कि शिवन्या में श्लोका को तलाश करने लगे। 

जींस-टॉप पहने, सादगी भरा मासूम चेहरा। शिवाय देखते रहे। 

तुम हो मेरी श्लोका? शिवाय मन ही मन सोच रहे थे। और शिवन्या को देखे भी जा रहे थे। 

तभी शिवाय की नज़र उसके हाथ पर पड़ती है। वह वहीं ज़मीन पर बैठ जाता है। और बेसाख्ता उसके हाथ को पकड़ कर देखने लगता है।

शिवाय के हाथ पकड़ते ही शिवन्या आंख खोल देती है। और हड़बड़ा के उठ कर बैठ जाती है।

यह क्या है? शिवाय खोये हुए से उससे सवाल करते हैं।

यह मेरा हाथ है। शिवन्या हैरान होकर शिवाय को देखते हुए जवाब देती है।

यह? शिवाय हथेली की तरफ इशारा करते हैं।

यह मेरा दिल है और उसमें मेरे नाम का S है।

शिवाय चुपचाप उस की हथेली पर हाथ फेरते हुए देखता जाता है।

शिवन्या अपना हाथ पीछे करने की कोशिश करती है। मगर शिवाय वैसे ही उसे थामे रहता है। यूं जैसे उसे अपनी  कोई खोई हुई चीज़ मिल गई हो।

आप इस वक्त घर पे? सब ठीक है ना? शिवन्या परेशान हो जाती है।

हां सब ठीक है। रोज़ी आई थी? 

हां अभी आई थी। सब काम करके गई तो मैं यहीं लेट गई। 

मैं शॉपिंग के लिए जा रहा हूं चलोगी? 

क्या बात है आज आप का अंदाज़ बदला हुआ है। आप को भी मुझ से प्यार हो गया क्या? 

क्यों बिना प्यार हुए हम बाहर नहीं जा सकते?

जा सकते हैं। लेकिन आप का अंदाज़ आज कुछ और ही ही। वैसे कोई बात नहीं। चलती हूं मैं। मुझे भी कुछ सामान लेना था। 

ठीक है रेडी हो कर आओ। मैं वेट कर रहा हूं।

और सुने....

हूं....

यह जो हर वक्त जींस टॉप पहने रहती हो। यह मत पहनना कुछ और पहनना।

ऐसा क्यों? मैं तो यही पहनूंगी।

कुछ साड़ी या शॉट्स  पहनना।

नहीं, मैं यह सब नहीं पहनती। कहते ही वह अंदर चली गई। 

और जब बाहर आई तो वही जींस-टॉप में तैयार थी। उसी तरह उसके छोटे बालों में क्लैचर लगा हुआ था।

चलें?

चलो...

दोनों साथ चलते हुए बाहर गये। लिफ्ट से नीचे जाकर वह लोग पार्किंग एरिया में पहुंच गये।

तुम को कहीं जाना हुआ तो गाड़ी से ही जाना। गाड़ी में बैठते हुए शिवन्या से शिवाय कहते हैं।

नहीं इस की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मैं कैब से चली जाऊंगी।

जब गाड़ी है तो फिर कैब से जाने की क्या ज़रूरत है। शिवाय नाराज़गी से कहते हैं।

मैं आप के घर में रह रही हूं। यही बहुत है। उससे ज़्यादा ऐहसान नहीं लेना चाहती। शिवन्या कहते ही बाहर देखने लगती है।

इतने छोटे बालों में क्लैचर क्यों लगाती हो? बेसाख्ता शिवाय के हाथ उस के क्लैचर पर चले जाते हैं। और वह उसे छुड़ा कर सामने डैशबोर्ड पर रख देते हैं। 

सिग्नल पर गाड़ी रूकते ही शिवाय उसके बालों को छूने लगते हैं।

तुम को छोटे बाल पसंद हैं?

नहीं...

फिर तुम्हारे बाल छोटे?

सब कुछ चाहने से नहीं मिल जाता मिस्टर ओबरॉय। 

ऐसा नहीं है। तुम कोशिश तो करो।

आपको पाने की कोशिश तो कर रही हूं। शिवन्या खोए अंदाज़ में कहती है।

शिवाय कोई जवाब देने के बजाए एक नज़र उसे देख कर सामने देखने लगते हैं।

दोनों ही अपनी सोचों में उलझे हुए थे। यूं लग रहा था दोनों ही रास्ते से भटके हुए हैं। रास्ता नज़र तो आ रहा है। मगर बहुत उलझा हुआ है। यूं जैसे सामने दो रास्ते हैं। लेकिन यह समझ नहीं आ रहा की कौन सा रास्ता मंज़िल की तरफ जायेगा।

जारी है.....


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