इश्क जान | भाग 7 | Ishq Jaan Part 7 | Heartfelt Romance & Wedding Story

यह दिल भी बड़ा नादान है। सामने प्यार और प्यार करने वाला था। मगर ना वहां इकरार था ना इज़हार......

एक बार फिर शजल की नज़र उठती है। रज़ील अब भी उसे ही देख रहा था। 

शज़ल दूसरी ओर देखने लगती है। और फिर वह स्टेज से उतर जाती है। और यूं ही इधर-उधर टहलने लगती है। और सबसे बातें भी करती जाती है। 

मगर जब भी उसकी निगाह उठती रज़ील को अपनी तरफ देखता पाती थी। उसे उलझन होने लगी। वह बाहर चली गई। लेकिन जैसे ही उसकी निगाह उठी। वह हैरान रह गई। क्योंकि सामने रज़ील किसी से बातें करते हुए उसे देख रहा था।

जैसे ही दोनों की निगाहें मिलती हैं। रज़ील मुस्कुरा देता।

शजल तो मुस्कुरा भी ना पाती। वह तो सिर्फ यह सोच रही थी कि जब रज़ील को पता चलेगा कि उसकी बात कहीं और तय हो रही है। तब उस पर क्या बीतेगी।

उसका जी चाहा वह जाकर रज़ील से कह दे कि वह ख्वाब मत देखो जो पूरे ना हो सकें।

पूरी शादी में वह उसे निहारता रहा। और शजल बेचैन दिल को संभालती हुई हंस बोल रही थी। मगर आज उसके कहकहे नहीं सुनाई दिये।

♥️

शादी का फंक्शन खत्म हो चुका था। विदाई हो चुकी थी। हर कोई घर के लिए निकल रहा था। घर जाकर भी बहुत सारी रस्मों को होना था। 

घर चल रही हो ना?

नारवाल से उसे जाता देखकर पूछा।

नहीं, मैं अपने घर जा रही हूं। वहां नहीं जा रही।

शजल ने सादगी से कहा।

क्योंकि वहीं पर रज़ील भी था। जो बात तो किसी और से कर रहा था। मगर उसकी नज़र और ध्यान सब शजल पर था।

उसके ना कहते ही रज़ील ने उसे बहुत मुहब्बत से देखा। और मुस्कुरा दिया।

ना चाहते हुए भी शजल के होंठों पर मुस्कान आ गई। 

वह रज़ील को कोई उम्मीद कोई आस नहीं देना चाहती थी। क्योंकि वह समझ चुकी थी कि उसकी शादी रज़ील से नहीं हो सकती। और फिर वह तुरंत गाड़ी में जाकर बैठ गई।

रज़ील अभी भी दूर से उसे ही देख रहा था।

रज़ील इस बात से बेखबर था कि शजल उसको नहीं मिल सकती। वह तो अपने मुहब्बत के दीदार किये जा रहा था।

शजल के जाते ही उसे लगा उसकी ज़िन्दगी चली गई हो। वह अपने दिल पर हाथ रख लेता है। और कुछ सोचकर वह मुस्कुरा देता है। 

जारी है...

इश्क जान भाग 6

इश्क जान भाग 8


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