डोर धड़कन से बंधी | भाग 34 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 34 | Hindi Romantic Story
कभी-कभी दूसरों की खुशी में अपनी भी खुशी शामिल होती है। शिवाय शिवन्या का हाथ पकड़ कर कहते हैं। अब वह शिवन्या को क्या बताते कि उस के साथ के लिए वह यहां तक आ गये।
गेम शुरू हो गया था। जिस में पहले शिवन्या और फिर शिवाय आउट हो गये।
आदर्श और मुग्धा दूर से गेम देख रहे थे।
दूसरे गेम का एनाउंस हो चुका था। जिसे शिवन्या नहीं खेलना चाहती थी। लेकिन शिवाय उसे मनाने में लगे थे।
देखो तुम्हारे कहने पर मैं यह गेम खेलने आया था। लेकिन अब तुम ही भाग रही हो। यह नहीं हो सकता तुम को यह गेम भी खेलना पड़ेगा।
शिवाय शिवन्या को राज़ी करने की एक और कोशिश करते हैं।
मिस्टर ओबेरॉय यह गेम उनके लिए है जो एक दूसरे के बारे में जानते हों। लेकिन हम एक दूसरे को ज़्यादा दिनों से नहीं जानते। हम यह गेम खेलते ही आउट हो जाएंगे।
कोई बात नहीं। आउट भले हो जाएं। लेकिन यह खेलना है बस फाइनल हुआ।
शिवाय ने फैसला सुनाया। और दूर खड़े आदर्श की तरफ देखा। जो उसको अंगूठा दिखा कर खेलने के लिए कह रहे थे।
शिवाय ने अपना और शिवन्या का नाम लिख कर होस्ट को दे दिया। और रिश्ते में दोस्ती लिख दिया था।
वहां पर बहुत सारे पार्टनर थे। कोई बेटा मां के साथ थी। तो कोई पिता बेटी के साथ।
हर किसी को अपने पार्टनर का रिश्ता लिखना था। ताकि उन्हें उसी हिसाब से सवाल पूछा जाए।
गेम स्टार्ट होने का एनाउंस हो गया था। पहले टीम को अपने पार्टनर के साथ स्टेज पर आना था। उन से एक दूसरे के बारे में सवाल करना था। जो जितना ज़्यादा सही जवाब देगा। वही विनर होगा।
सवाल जवाब का सिलसिला जारी था। पहली बाप बेटी की टीम बहुत जल्दी आउट हो गई।
दूसरे पति-पत्नी आये वह भी जल्दी आउट हो गये।
देख रहे हैं मिस्टर ओबेरॉय.... बाप-बेटी जो बीस साल से साथ रह रहे हैं। वह दोनों एक दूसरे के बारे में नहीं जानते। और यह पति पत्नी दस साल हो गये इन की शादी को यह लोग एक-दूसरे को नहीं जान पाए। हमें मिले तो कुछ महीने ही हुए हैं। हम नहीं खेल पायेंगे। हम पहले ही गेम से निकल जाते हैं।
शिवन्या गेम देखते हुए एक बार फिर शिवाय को मनाने की कोशिश करती है। लेकिन शिवाय को तो गेम में मज़ा आने लगा था। वह खुश होकर देख रहे थे।
हम यह गेम खेल रहे हैं। और हम जीतेंगे भी। शिवाय उसके कंधे पर हाथ रख कर बहुत प्यार से कहते हैं।
लेकिन मिस्टर ओबेरॉय.....
और अब हम स्टेज पर बुलाते हैं मिस्टर ओबेरॉय और उनकी दोस्त मिस शिवन्या....
जैसे ही शिवन्या शिवाय को दोबारा समझाने की कोशिश करती है। उसी वक्त उनका नाम एनाउंस हो जाता है।
हर तरफ से तालियों की आवाज़ आती है। बहुत सारे लोग जो दूर भी बैठे थे वह भी पास आ गये थे। हर किसी को इस गेम में मज़ा आ रहा था।
शिवाय और शिवन्या दोनों को अगल-बगल चेयर पर बैठा दिया गया।
दोनों एक नज़र एक दूसरे को देखते हैं और फिर सामने देखने लगते हैं।
मिस्टर ओबेरॉय पहला सवाल आप के लिए।
तैयार हैं आप? एंकर पूरे ज़ोश में थे।
हर तरफ से हूटिंग होती है। जनता भी पूरे ज़ोश में थी।
जी, शिवाय भी मुस्कुरा दिए।
दोस्ती के इस सफर में कभी आप को अपनी दोस्त की वजह से शर्मिन्दा होना पड़ा? या आप को लगा कि मैं ने इन से दोस्ती क्यों की?
नहीं, वह दोस्ती ही क्या जो दोस्त को शर्मिन्दा करे।
शिवाय ने आत्मविश्वास से जवाब दिया, लेकिन उन की आंखों में कहीं एक अधूरी याद तैर रही थी। श्लोका की दोस्ती और वो बेपनाह मोहब्बत जो अधूरी रह गई थी।
तालियों की तेज़ आवाज़ से पूरा माहौल गूंज उठता है।
शिवाय जवाब देकर शिवन्या की तरफ देखते हैं। लेकिन वह सामने देख रही थी।
और अब हमारा अगला सवाल मिस शिवन्या से....
होस्ट का ज़ोश बरकरार था। महफिल जम चुकी थी। दर्शक का पूरा ध्यान अब स्टेज पर था।
मिस शिवन्या अगर आपके दोस्त किसी वजह से आपकी ज़िन्दगी से चले जाएं, तो आप इन्हें रोकेंगी या इनकी खुशी के लिए इन्हें जाने देंगी?
शिवन्या एक पल चुप रही। सवाल आसान नहीं था। उस ने नज़र झुका ली, फिर गहरी सांस ली।
अगर यह किसी और की खुशी के लिए जायेंगे तो मैं रोकूंगी। लेकिन अगर यह अपनी खुशी के लिए जा रहे होंगें....तो मैं मुस्कुरा कर इन को अलविदा कह दूंगी।
लेकिन....वह थोड़ा रूक कर बोली, शायद मैं इन्हें हर रोज़ याद करूंगी। हर रोज़ इनके बिना जीना सीखूंगी।
शिवन्या की आंख नम हो गई। वह कुछ और कहना चाह रही थी, लेकिन शब्द गले में अटक गए।
भीड़ एक बार फिर तालियों से गूंज उठी।
वाह! क्या जवाब दिया है आप दोनों ने! लग रहा है जैसे आप दोनों को महीनों नहीं, बरसों से जानते हों एक दूसरे को!
होस्ट ने मज़ाक़िया अंदाज़ में कहा।
चलिए हम अगले सवाल की तरफ बढ़ते हैं। और अब हमारा सवाल मिस्टर ओबेरॉय से है।
क्या हर रिश्ता वक्त के साथ बदल जाता है....या कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो हर हाल में वैसे ही रहते हैं?
शिवाय थोड़ी देर चुप रहते हैं, फिर धीरे से कहते हैं....
वक्त रिश्तों को बदलता नहीं....वह सिर्फ दिखा देता है कि कौन सा रिश्ता कितना सच्चा था। कुछ रिश्ते मौसम जैसे होते हैं....बदल जाते हैं।
लेकिन कुछ..... कुछ सांस की तरह होते हैं, हर हाल में साथ रहते हैं, चाहे दर्द में हो या सुकून में।
उसकी आवाज़ में सच्चाई थी, पर उन की आंखों में छुपा कोई दर्द था।
शिवाय का जवाब सुनकर शिवन्या नज़र उठा कर शिवाय को ना देख सकी। उसने सिर झुका लिया। उसके पलकों के कोरों पर ठहरी नमी सब बयां कर रही थी।
एक पल के लिए वहां मुकम्मल खामोशी छा गई। लेकिन वह खामोशी भी कुछ कह रही थी।
एंकर ने मुस्कुराते हुए माहौल को संभालने की कोशिश की।
वाह मिस्टर ओबेरॉय, आपके जवाब ने तो सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। रिश्तों की परिभाषा इतनी खुबसूरती से शायद ही किसी ने समझाई हो।
जारी है...
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