डोर धड़कन से बंधी | भाग 37 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 37 | Hindi Romantic Story

 शिवाय की हालत ऐसी थी कि जैसे वह अपना सब कुछ लुटा चुके हों। उनकी आंखें,उनका चेहरा किसी लुटे हुए जुआरी जैसा था। जो अपना सब कुछ गंवा चुका हो।

शिवन्या बेड के पास जाकर खड़ी होकर शिवाय को बहुत ध्यान से देखते हुए सोचती है।

शिवाय उसका हाथ पकड़ कर बेड पर बैठा देते हैं। और आंख बन्द कर लेते हैं।

शिवन्या एक नज़र शिवाय को देखती है। और शिवाय के सिर पर अपनी उंगलियों को चलाने लगती है।

श्लोका.....शिवाय के होंठ हिलते हैं। 

जिस सुकून की तलाश शिवाय को थी। वह सुकून उन को मिल गया था। वह आंख बन्द किए वैसे ही लेटे रहे।

शिवन्या कब से शिवाय और श्लोका में उलझी हुई थी। वह सोच रही थी कि अब शिवाय की ज़िंदगी में उसका कोई किरदार नहीं है।

लेकिन इस वक्त शिवाय के आने पर वह कुछ ना कह सकी।

यह उसके लिए शिवाय की मुहब्बत ही थी। जो इस वक्त वह शिवाय के पास थी। 

कितनी ही देर वह वैसे ही बैठी रही। शिवाय सो चुके थे।अब तो उसे भी नींद आने लगी थी। वह भी तकिए पर सिर रख देती है। नींद की देवी उस पर भी मेहरबान हो गई।

सुबह शिवन्या की देर से नींद खुली। उस की नज़र सोए शिवाय पर गई। उसे रात की सारी बातें याद आ गई।

वह धीरे से उठती है। और अपना फोन देखने लगती है। 

शिवाय उठे तो पहले मुझे खबर करना। आदर्श का मैसेज देख कर शिवन्या हैरान रह जाती है।

इस का मतलब आदर्श सर को पता है कि शिवाय यहां सो रहे हैं।

शिवन्या फ्रेश होकर तैयार हो जाती है। उस का मन एक बार फिर शिवाय में उलझा हुआ था। बहुत सारी बातें थी जो उस के मन में आ रही थी। 

शिवाय की नींद खुलती है। करवट लेते ही उन की नज़र सोफे पर बैठी शिवन्या पर जाती है।

आप ठीक हैं? शिवाय को उठा देख शिवन्या करीब जाकर सिर पर हाथ फेरते हुए पूछती है।

लेकिन शिवाय कोई जवाब देने के बजाए उसे देखते हैं कि कैसे वह उस की ज़िंदगी का हिस्सा बन गई है।

आदर्श सर का मैसेज था कि आप उठें तो उन को खबर करूं।

ठीक है बोल दो। वह लेटे-लेटे ही बोले।

मैसेज डिलीवर होते ही आदर्श आ गये। यूं जैसे वह मैसेज के इंतेज़ार में थे।

चलो तुम्हारे रूम में चलते हैं। आदर्श वैसे ही खड़े-खड़े कहते हैं। और शिवाय की तरफ हाथ बढ़ा देते हैं। और दोनों बाहर निकल कर सीधे शिवाय के रुम में पहुंच जाते हैं।

जाओ फ्रेश होकर आओ। मैं इंतेज़ार कर रहा हूं। आदर्श नार्मल बने रहे।

शिवाय भी खामोशी से चले गए।

जैसे ही तैयार हुए। उन का नश्ता आ गया। दोनों ने खामोशी से खाया। ऐसा लगता था कि उन के पास कोई बात नहीं है। जब कि उन के मन में बेतहाशा बातें थी।

उसी वक्त कमरे में श्लोका आती है। शिवाय उसको देखते रह जाते हैं। वही लैंग कुर्ता साथ में पैंट, कानों में छोटा टाप्स, बायें हाथ में घड़ी। दाये हाथ में कुछ नहीं। बायें हाथ के अंगूठे में रिंग थी। चेहरे पर कोई  मेकअप नहीं। वही लम्बे बाल जिसे उस ने क्लैचर से फंसा रखा था। सब कुछ बिल्कुल वैसा ही था। सिर्फ चेहरा वह नहीं था।

आप उठ गये शिवाय....मैं सुबह से कितनी बार आप के रूम का चक्कर लगा चुकी हूं। आप का रुम बन्द था।आदर्श ने बताया कि आप सो रहे हैं।

हां देर से सोया था ना इस लिए.... शिवाय ने धीरे से कहा। इसी लिए आदर्श उसके उठते ही इस रूम में लेकर आ गये थे। 

शायद आदर्श नहीं चाहते थे कि कोई और दूसरी बात बढ़े।

आप अभी कहां और किस के साथ रह रही हैं। आदर्श ने सवाल किया। क्योंकि सारी बातें जानना भी ज़रूरी था।

और फिर श्लोका बताने लगी। कैसे उस का आपरेशन हुआ। और फिर वह उन के साथ ही रहने लगी। वह उन को आंटी कहती है। उन की फैमिली में और कोई नहीं था। शायद इस लिए उन्होंने उसे अपने साथ रख लिया। 

डाक्टर का सारा पैसा उन्होंने ही दिया। और फिर उसके ठीक होने के बाद एक दिन उसे यूं ही ड्रेस की डिज़ाइन बनाते देख उसे एक फैशन डिज़ाइनर के पास ले गई। और फिर वह उनके लिए काम करने लगी।

लेकिन एक माह पहले एक दिन उसे बहुत तेज़ चक्कर आया। और वह बेहोश हो गई। जब होश आया तो मेरी याददाश्त वापस आ चुकी थी।

वह दोनों बहुत ध्यान से उसकी कहानी सुन रहे थे।

मैंने आंटी को अपने बारे में बताया। और आंटी ने मेरे बारे में मुझे बताया।

आंटी ने कहा कि जब तक तुम नहीं मिल जाते। मैं उन्हीं के साथ रहूं।

मैंने इंडिया जाने का सोचा। लेकिन मेरा पासपोर्ट नहीं था। और न ही मेरे पास कोई और पेपर था।

आंटी ने कहा कि इंडिया जाने का भूल जाओ। और यहां पर शिवाय मिलने से रहा। उन का मानना था कि आप इंडिया जा चुके होंगे।

शिवाय की कोई तस्वीर नहीं थी मेरे पास। इस लिए मजबूरन मैं अकेली ही हर जगह शिवाय को ढूंढ रही थी। इस उम्मीद पर की शायद आप यहां पर आयें हो। और मुझे मिल जाएं।

श्लोका इतना कह कर रूकी। उसकी आंखों में आंसू थे।

तुम उस जगह क्यों नहीं गई। जहां पर वह होटल था? आदर्श ने जांचती नज़रों से पूछा। शिवाय के पास तो जैसे कोई बात ही नहीं थी।

मुझे इस बात का ख्याल ही नहीं आया कि मुझे उस जगह जाना चाहिए।

वहां जाती तो शिवाय तुम को पहले ही दिन मिल जाता। खैर कोई बात नहीं। तुम शिवाय से बात करो मैं आता हूं।

आदर्श उठते हुए कहते हैं। और बाहर निकल जाते हैं।

शिवाय आप इतना चुप क्यों हैं? हम जब से मिले हैं मैं देख रही हूं आप खामोश हैं।

आदर्श के जाते ही श्लोका उठ कर शिवाय के करीब बैठ जाती है और पूछती है।

श्लोका मिल गई है। पहले इस बात का यकीन तो कर लूं। दो साल तड़पा हूं। मेरी ज़िन्दगी का हर लम्हा मौत से गुज़रा है। इतनी आसानी से नहीं भूल सकता सब। शिवाय उदासी से कहते हैं।

अब तो मैं आ गई हूं। लेकिन मुझे लगता है कि आपको खुशी नहीं हुई मुझे देख कर.....श्लोका शिकवा करती है।

लेकिन शिवाय कोई जवाब नहीं देते हैं। पता नहीं उन के मन में क्या चल रहा था।

शिवाय हमारे साथ के हर वह पल मुझे याद हैं। जो हम ने साथ में बिताए। फिर चाहे वह बालकनी पर हमारा मिलना हो। या फिर हमारा साथ में नाश्ता करना।

आपका मेरे साथ गांव जाना। हमारा वह बारिश में भीगना। और फिर हमारा वह साथ। सब याद है मुझे। 

आप को ढूंढते हुए मैं हर पल को याद कर के रोती थी कि कैसे मैं आप को ढूंढ़ लूं।

शिवाय चुपचाप सुन रहे थे। और वह बोलती जा रही थी। हर एक पल हर एक बात उसे याद थी।


जारी है...

डोर धड़कन से बंधी भाग 36

डोर धड़कन से बंधी भाग 38





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