डोर धड़कन से बंधी | भाग 38 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 38 | Hindi Romantic Story
शिवाय चुपचाप सुन रहे थे। और वह बोलती जा रही थी। हर एक पल हर एक बात उसे याद थी।
हम बाहर चलें? उसी वक्त आदर्श आ गये।
हां, शिवाय उठ गये। शायद वह इन लम्हों से दूर जाना चाहते थे।
कहीं घूमनें चलें? श्लोका खुशी से पूछती है।
नहीं, हम लोग आधा घंटे में वापसी के लिए निकल रहे हैं।
आदर्श अपना मोबाइल देखते हुए जवाब देते हैं।
और शिवाय आदर्श के फैसले पर हैरान रह जाते हैं। कैसे तुम मेरे दिल की बात समझ लेते हो दोस्त।
शिवन्या और मुग्धा को सब सामान रखने का आदर्श पहले ही बोल चुके थे।
तुम कब तक हो यहां? आदर्श पूछ ही लेते हैं। जब वह देखते हैं कि शिवाय को किसी बात से कोई मतलब नहीं है तो।
मैं आज शाम तक हूं। श्लोका शिवाय को देख कर कहती है। वह महसूस कर रही थी कि शिवाय को उस के होने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
ठीक है, आप लोग बैठें। मैं आ रहा हूं। कहते ही आदर्श बाहर निकल गये।
शिवाय मैं आप के घर पर रहने के लिए आ जाऊं? फिर हम दोनों प्लान करते हैं कि हम कब शादी करें।
उस बार तो आप ने सब को सरप्राइज़ दिया था। इस बार भी कुछ अलग करते हैं।
श्लोका खुशी से बोलती जा रही थी। और शिवाय खामोशी से उसे देखते हुए सब सुन रहे थे।
आप अंकल को मेरे बारे में बता देना। वह बहुत खुश होंगें।
मैं तुम को डैड का नम्बर दे दूंगी। तुम बात कर लेना।
हां ठीक है। लेकिन अभी आप बता देना। वह जल्दी से कहती है।
आप ने बताया नहीं मैं आ जाऊं आप के घर पर रहने? अब मुझे आप के बिना रहा नहीं जाएगा।
श्लोका शिवाय के और करीब आकर कहती है।
नहीं अभी नहीं, मौम डैड आने वाले हैं उसके बाद। शिवाय उस से थोड़ा दूर हटते हुए कहते हैं।
ठीक है, फिर मैं रोज़ आप से मिलने आऊंगी। श्लोका खुशी से कहती है।
मैं सारा दिन आफिस रहता हूं।
तो फिर ठीक है मैं आफिस ही आ जाऊंगी। श्लोका के पास हर मुश्किल का हल था।
शिवाय उसे देखते रह गये।
क्या चेहरा बदल जाने से मुहब्बत कम हो जाती है? श्लोका को तो मेरी धड़कन ने कबूल किया था। तो फिर क्या मेरा दिल चेहरा देख कर धड़का था?
या फिर मेरा दिल बदल गया है। वह दिल जो श्लोका को देख कर बेतरतीब हो जाता था। जो हर वक्त श्लोका का साथ चाहता था।
जो दिल श्लोका के ना रहने पर उसके मिलन में हर रोज़ तड़पा था। वह आंख जो श्लोका को देखने के लिए तरस रही थी।
क्या एक बदले हुए चेहरे को देख कर सब बदल गया।
श्लोका के सामने आते ही मेरी तड़प खत्म क्यों हो गई?
मैं शिवन्या के करीब श्लोका की वजह से गया।
लेकिन आज जब श्लोका मेरे सामने है। तो मैं पत्थर बना उसे देख रहा हूं।
ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ?
क्यों मैं श्लोका से मिल कर खुश नहीं हुआ।
ना जाने कितने सवाल थे जो शिवाय को परेशान कर रहे थे। और वह उन सवालों के जवाब में उलझे हुए थे। लेकिन कोई सिरा हाथ नहीं आ रहा था।
चलें.... आदर्श एक बार फिर आये।
हूं, शिवाय उठ गये।
मिलते हैं फिर... आदर्श ही बोले। शिवाय ने तो खामोशी की चादर ओढ़ ली थी।
हां ठीक है। आप लोग जाएं। श्लोका शिवाय को देख कर कहती है।
वह महसूस कर रही थी शिवाय का वह अजनबी पन जो उसने आज तक शिवाय में नहीं देखा था।
....
गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रही थी। जाते वक्त गाड़ी में जितनी हंसी गूंज रही थी। इस वक्त उसका उलट वैसी ही खामोशी थी।
आदर्श एक नज़र शिवाय को देखते हैं। जिस की नज़र सामने रोड पर थी।
करने के लिए सब के पास बहुत सारी बातें थीं। लेकिन फिर भी हर कोई खामोश था।
....
मैं आराम करूंगा। डिस्टर्ब मत करना।
घर पहुंते ही शिवाय सीधे अपने रूम की तरफ बढ़ते हैं। और फिर कुछ सोच कर पीछे पलट कर शिवन्या से कहते हैं और कमरे में चले जाते हैं।
शिवन्या हैरान अपनी जगह खड़ी रह जाती है। कितने अंजान लगे थे इस वक्त शिवाय.... यूं जैसे उसे जानते ही नहीं हों।
और फिर वह भी अपने कमरे में चली जाती है।
रात हो गई थी। शिवाय अभी तक कमरे से नहीं निकले थे। शिवन्या खाना खाकर टेरिस पर चली गई। और नज़र उठा कर आसमान की ओर देखती है। यूं जैसे कुछ तलाश रही हो।
आसमान में क्या ढूंढ रही हो? कहते ही शिवाय उसके बालों में लगी क्लैचर निकाल देते हैं।
सॉरी.... अपनी इस बेसाख्ता की गई हरकत पर पहली बार शिवाय को पछतावा हुआ।
शिवन्या उसे देखती रह गई।
कितने उलझे लग रहे थे शिवाय।
तुम ने खाना खा लिया? उसकी नज़रों से बचते हुए शिवाय जल्दी से पूछ लेते हैं।
जी, आप खा लें। कहते ही अंदर की तरफ बढ़ गई।
शिवाय भी अन्दर की तरफ कदम बढ़ा देते हैं।
खाना टेबल पर रखा था। वह खामोशी से खाने लगे।
शिवन्या किचन में चली गई।
खाना खाते ही शिवन्या उस के लिए कॉफी लेकर आ गई।और टेबल पर रख कर जाने लगी।
शिवाय हॉल में बैठे टीवी देख रहे थे।
कहां जा रही हो? इधर बैठो। शिवाय उस का हाथ थाम कर उसको अपने पास बैठा लेते हैं। दोनों एक दूसरे को देखने लगते हैं।
जारी है....
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