डोर धड़कन से बंधी | भाग 40 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 40 | Hindi Romantic Story
और फिर आगे बढ़ कर शिवाय के माथे पर प्यार करके उसे साइड हग करती है।
शिवाय इन लम्हों में खो गये। ऐसा लगा जैसे यह पल दोबारा मिले ना मिले।
आप श्लोका की तरफ लौट जाएं। आप को सुकून मिल जायेगा।
शिवन्या वैसे ही गले लगे उसके कान में धीरे से कहती है।
और अगर सुकून नहीं मिला तो.... शिवाय ने भी सरगोशी की।
श्लोका आप की मुहब्बत है। आप ने उस के बिना बहुत कुछ बर्दाश्त किया है। आप ने रातों की नींद और दिन का सुकून खोया है।
आप ने श्लोका को मुझ में तलाश किया। और आज जब खुद श्लोका आप के पास वापस आई है। तो आप अजनबी ना बने।
यह सच है उसने आप की तरह जुदाई नहीं सही है। लेकिन याददाश्त वापस आने पर वह आप को ढूंढ़ रही थी।
आप लौट जाएं शिवाय उस कल में जहां आप थे श्लोका थी और आप दोनों का प्यार था। उसे अपना आज बना कर आगे बढ़ जाएं।
शिवन्या बहुत प्यार से धीरे-धीरे उस के कान में एक-एक बात डाल रही थी। जिसे शिवाय खामोशी से सुन रहे थे। बल्कि शिवाय चाह रहे थे कि वह ऐसे ही बोलती रहे। और वह सुनते रहें।
लेकिन हर ख्वाहिश पूरी हो जाए ऐसी उन की किस्मत कहां।
आप आफिस जाएं। और सुकून से काम करें। शिवन्या एक बार फिर शिवाय को प्यार करती है और पीछे हट जाती है।
उसके हटते ही शिवाय को लगा जैसे वह तपते रेगिस्तान में आ गये हों।
इतना सुकून... शिवाय हैरान रह गये। वह सुकून! जो श्लोका के बाद शिवन्या से मिला।
शिवाय उठ गये। और बाय बोल कर सीधे बाहर की तरफ बढ़ गये। क्योंकि अगर वह कुछ देर और रुकते तो शायद वह पल उन के लिए मुश्किल हो जाते।
.....
आदर्श सर की मीटिंग चल रही है?
शिवाय को जब आफिस आये बहुत देर हो गई और आदर्श नहीं आये तो उनको हैरानी हुई।
क्योंकि उन के आते वह पहले आकर मिलते। उसके बाद काम करते थे।
लेकिन आज अभी तक नहीं आए। जब कि उन्हें तो लगा था कि वह तुरंत आयेंगे। श्लोका के बारे में बात भी करेंगें।
वह आज अभी आये नहीं हैं सर।
ठीक है आप जाएं।
शिवाय हैरान रह गए। आदर्श और छुट्टी? ऐसा बहुत कम ही होता है।
आदर्श को फोन करूं पता चले क्या बात है? लेकिन फिर उन्होंने इरादा बदल दिया। शायद वह आज खुद ही आदर्श की नज़रों से बचना चाहते थे।
शाम हो चुकी थी। शिवाय थक चुके थे। वह सिर पीछे टिका कर आंख बन्द कर लेते हैं।
आंख बन्द करते ही शिवन्या का चेहरा उन के सामने आ गया।
शिवाय ने झट से आंखें खोल दी।
तुम कह रही हो मैं श्लोका की तरफ लौट जाऊं। लेकिन ख्यालों में तुम ही छाई हुई हो।
शिवाय एक बार फिर शिवन्या और श्लोका में उलझ गए।
उसी वक्त दरवाज़ा खुलता है। और श्लोका अंदर आती है।
गुड ईवनिंग... वह मुस्कुराई।
शिवाय ने भी सर हिला दिया।
मैं सही टाइम पर आई हूं ना? वह खुशदिली से पूछती है। और चेयर पर बैठ जाती है।
हूं, शिवाय मुस्कुरा दिए। लेकिन इतना मुस्कुराने में उनको कितनी मेहनत करनी पड़ी। यह वही जानते थे।
पता है आप को? कल सारी रात मुझे खुशी की वजह से नींद नहीं आई। मैं खुद को यकीन दिलाती रही कि आप सच में मिल गये हैं।
वह बोलती जा रही थी।
और शिवाय मंद-मंद मुस्कान के साथ उसकी बातें सुनते रहे।
कॉफी पियोगी?
जब वह चुप हुई तो शिवाय ने पूछ लिया।
हां पिला दें।
कुछ खाओगी?
खिला दें।
शिवाय तुरंत इंटरकॉम पर बोलते हैं। और फिर उसकी बातें सुनने लगते हैं।
कुछ आप भी बताएं कि कैसे आप ने मेरे बिना यह दिन गुज़ारे?
श्लोका को अचानक ऐहसास हुआ कि सिर्फ वह ही बोल रही है।
तुम कहो मैं सुन रहा हूं। इस वक्त मुझे सुनना ज़्यादा अच्छा लग रहा है।
शिवाय उस को महसूस करना चाहते थे कि श्लोका ही उसके सामने है।
कॉफी और पिज़्ज़ा आ गया।
बातें करने के साथ-साथ दोनों खाते भी रहे।
अरे वाह... यहां तो पार्टी चल रही है। मुझे पता होता तो मैं पहले आ जाता।
आदर्श अंदर आते ही खुशी से कहते हैं। उन दोनों को साथ देख कर उनको इत्मीनान हो गया। वरना कल के शिवाय के रवैए को देख कर तो आदर्श को टेंशन हो गई थी।
ऐसा कुछ नहीं है, आ जाओ तुम भी।
आदर्श को देख कर शिवाय खुश हो गए।
ठीक है फिर मैं चलती हूं। कल मिलते हैं। कॉफी पीते ही श्लोका उठ गई।
रोज़ आने की ज़रूरत नहीं है। हम फोन से बात कर लेंगे।
शिवाय जल्दी से कहते हैं।
ठीक है, लेकिन अगर आप अपने घर में रहने की इजाज़त दे दें तो हम पूरे वक्त साथ रह सकते हैं।
श्लोका वहां रहने की एक और कोशिश करती है।
नहीं अभी नहीं, शिवाय ने तुरंत मना कर दिया।
ओके बाय कहते ही श्लोका बाहर चली गई।
आदर्श चुपचाप अपनी कॉफी पीते रहे। शिवाय आदर्श के बदले हुए रवैए को देख रहे थे।
आज सुबह आये नहीं सब ठीक? शिवाय ने ही बात शुरू कर दी।
हूं, आज काम करने का मूड नहीं था। बॉस अपना यार है। इस लिए छुट्टी कर ली।
आदर्श मुस्कुराए।
यह हुई ना बात.... आदर्श की बात पर शिवाय हंस पड़े। आदर्श की यही खुशमिजाज़ी तो उस की शान थी।
अब मुद्दे पर आये? आदर्श सीरियस हो गये।
मुद्दा? शिवाय हैरान हुए।
सब ठीक है ना?
आदर्श ने पूछा।
पता नहीं...सब कुछ होते हुए भी कुछ अधूरा सा लग रहा है।
शिवाय ने उसकी तरफ देखा, फिर धीरे से कहा।
श्लोका वापस आई है, वही श्लोका जिस के लिए तू बिखर गया था....
आदर्श ने धीरे से कहा।
श्लोका वापस आई है... पर वह लम्हा नहीं जो हम-दोनों के बीच था....
शिवाय की आवाज़ भीगी हुई थी।
प्यार वही रहता है, चेहरे से नहीं बदलता....
आदर्श ने कहा।
तो शायद मैं बदल गया, या मेरा प्यार और गहराई चाहता है....
शिवाय की आवाज़ थकी हुई थी।
आदर्श ने उसकी आंखों में देखा... वहां सवाल थे, दर्द था और तलाश भी।
तो क्या अब तुम श्लोका से प्यार नहीं करते?
आदर्श ने धीरे से पूछा।
प्यार करता हूं....
पर वह पहले वाला ऐहसास नहीं रहा शायद....
शिवाय ने कुर्सी से उठते हुए कहा।
वो लम्हे, वो बातों की मासूमियत, वह मिलने की बेचैनी...सब छूट गया है कहीं।
कल तक मैं उस से मिलने के लिए तड़प रहा था। और जब वह सामने आई तो मुझे महसूस ही नहीं हुआ कि यही मेरी श्लोका है। उसे देख कर मुझे खुशी नहीं हुई।
जब कि उसे देख कर तो मुझे खुशी से पागल हो जाना चाहिए था।
वह श्लोका जिस के हर अंदाज़ से मैं वाकिफ हो चुका था। जिसे देखते ही मेरी धड़कन बदल जाती है। जिसे देख कर मेरी आंखें चमक जाती थी।
वही श्लोका मेरे सामने आई तो खुश होना तो दूर की बात, मैं मुस्कुरा भी ना सका।
और शिवन्या?
आदर्श ने सीधे पूछा।
शिवाय थम गए।
शिवन्या....
शिवन्या ने मेरे टूटन को जिया है, मेरे दर्द को महसूस किया है.... बिना कुछ कहे। वह मेरे साथ रही जब मैं खुद से दूर था।
वह एक लम्बा सन्नाटा लेकर बोले।
तब तुम्हें खुद से एक सवाल करना होगा शिवाय, आदर्श उठ कर उसके पास आए।
तुम्हारा प्यार कौन है? वह जो तुम्हारा अतीत था या वह जो तुम्हारा आज है?
शिवाय कुछ नहीं बोले। उनके अंदर शोर था... सवालों का, यादों का, एहसासों का।
जारी है...
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