डोर धड़कन से बंधी भाग 41 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 41 | Hindi Romantic Story

शिवाय कुछ नहीं बोले। उनके अंदर शोर था... सवालों का, यादों का, एहसासों का।

एक बात पूछूं? आदर्श ने फैसला ले लिया। कहीं ऐसा ना हो देर हो जाए‌।

हूं,

क्या यही तुम्हारी श्लोका है?

क्या? शिवाय हैरान रह गए।

हां, यह सवाल मेरे मन में आया है। और इसका जवाब तुम्हारे पास है।

अगर यह श्लोका नहीं होती तो फिर इसे हमारे बीच हुई बातों का कैसे पता होता? शिवाय उलझ गए।

लेकिन फिर भी उन बातों के इलावा और भी बहुत सारी बातें हुई होंगी तुम दोनों के बीच। तुम उसे जानने की कोशिश करो।

आदर्श ने बात बिल्कुल साफ कर दी।

मतलब तुम्हें इस पर शक है?

नहीं, लेकिन मैं यह यकीन करना चाहता हूं कि यही तुम्हारी श्लोका है?

ऐसा ख्याल तुम्हारे मन में क्यों आया? शिवाय भी गुथ्थी सुलझाने में लग गए।

तुम्हारे रवैए को देख कर।

या तो वह श्लोका नहीं, या तुम शिवन्या से प्यार करने लगे हो। आदर्श ने अपनी बात रखी।

तुम को मेरी बातों में से एक बात मानना होगी। आदर्श दो-टूक बात करते हैं।

मैं शिवन्या के करीब गया। क्योंकि उसमें मुझे श्लोका दिखती थी। हर अंदाज़ में वह श्लोका थी। 

और अब यह श्लोका मेरी श्लोका नहीं है। मैं यह तो नहीं कह सकता। लेकिन उसे देख कर मेरी धड़कन नहीं बदली।उसकी खुशबू मेरे दिल में महसूस नहीं हुई।

शिवाय ने सच्चाई बताई।

अब जब श्लोका से मिलना तो कुछ बातें ऐसी करना। जो बहुत खास हों।

समझ रहे हो ना मेरी बात?

आदर्श ने समझाया।

अभी तक तो कुछ भी ऐसा नहीं लगा। शिवाय याद करने लगे।

अब ध्यान देना।

और शिवन्या? शिवाय ने सवाल किया।

एक फैसला हो जाए, तब दूसरा करते हैं। आदर्श ने बात टाल दी।

वह कह रही है मैं श्लोका की तरफ लौट जाऊं। शिवाय ने उदासी से कहा।

खुद को इतना मत उलझाओ मेरे दोस्त.... कि जीना मुश्किल हो जाए।

आदर्श ने शिवाय की पीठ थपथपाई।

चलो घर चलते हैं। आज डिनर मेरे यहां करना।

आदर्श शिवाय का हाथ पकड़ कर बाहर निकल गये। वह शिवाय को और तकलीफ में नहीं देख सकते थे।

शिवन्या को बता देते हैं। वरना वह इंतेज़ार करेगी।

शिवाय को शिवन्या का ख्याल आया।

अंदर तो चलो। आदर्श बेल बजाते हैं।

दरवाज़ा शिवन्या खोलती है।

तुम यहां?

शिवाय हैरान हुए।

मैं तो दोपहर से यहीं हूं। शिवन्या मुस्कुराई।

क्यों इसे देख कर मन को इतना सुकून मिलता है? शिवाय एक बार फिर उलझे।

और आदर्श की नज़र शिवाय पर टिक गई।

चाय, कॉफी? मुग्धा अंदर से आई।

नहीं, पहले खाना। शिवाय ने जल्दी से कहा।

देख रहे हैं....आप आज आफिस नहीं थे तो इन्होंने लंच नहीं किया।

मुग्धा शिवाय की तरफ इशारा कर के आदर्श से कहती है।

हूं, बहुत हो गया। अब इस का कुछ करना पड़ेगा। आदर्श सोचते हुए कहते हैं।

और शिवाय आदर्श को देख कर रह जाते हैं।

डिनर करते हुए आदर्श की मस्ती जारी थी। अच्छे माहौल से शिवाय भी कुछ पल के लिए सब भूल गये।

कॉफी पीते हुए वह सब फिल्म देखते हैं।

....

तुम तो कह रही थी कि शिवाय उसका दीवाना है। लेकिन मुझे मिल कर तो ऐसा कुछ नहीं लगा।

तुम याद रखना अगर तुम ने कोई गलत बात बताई और मैं पकड़ी गई तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा।

वह अनु को एक बार फिर धमकी देती है। ऐसी धमकी वह हर रोज़ सुनती थी। 

मैं श्लोका की दोस्त हूं, श्लोका नहीं। बातों बातों में मुझे जो बातें श्लोका बताती थी वह मैं आप को बता चुकी हूं। उसके इलावा श्लोका और शिवाय में क्या बातें होती थीं। वह एक-दूसरे के कितने करीब थे। मुझे नहीं पता। 

अगर तुम ने कोई गलती की और शिवाय ने पकड़ ली। तो उसमें मेरा कोई कुसूर नहीं होगा।

अनु एक बार फिर उसे समझाती है।

देख रही हैं बबली यह क्या कह रही है? श्लोका गुस्से से कहती है।

तुम को शिवाय से बात करते हुए बहुत ध्यान देना होगा। क्योंकि तुम श्लोका नहीं हो। तुम जल्द से जल्द उस को शादी के लिए राज़ी करो। शादी करते ही उससे 100 करोड़ कैश लेकर हम ऐश करेंगे।

यह 100 करोड़ वह चाहे प्यार से दे, या बंदूक की नोक पर। हम को यह पैसा हर हाल में लेना है।

बबली गुस्से से कहती है।

तुम याद करो कोई ऐसी बात, जो उन दोनों के लिए बहुत खास हो?

श्लोका एक बार फिर पूछती है।

मुझे जो बताना था बता चुकी। अब चाहे तुम मुझे मार ही डालो। लेकिन मेरे पास अब और कोई बात नहीं जो मैं बताऊं।

अनु अपने गुस्से को दबाते हुए बहुत आराम से कहती है। वरना वह उन दोनों का क्या से क्या कर चुकी होती।

तुम भूलना मत तुम्हारी एक गलती से शिवाय और तुम्हारे भाई की जान जा सकती है।

श्लोका उसे एक बार फिर धमकी देती है।

मैंने सब कुछ तो आप को बता दिया है। तो मुझे छोड़ क्यों देती? मेरी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।

अनु एक बार फिर वही बात कहती है जो वह पहले भी कर चुकी थी।

जब तक हमारा काम नहीं हो जाता। तुम यहां से नहीं जा सकती।

अच्छा मेरा फोन दो। मुझे घर पर बात करनी है। अनु उन से रिक्वेस्ट करती है।

लो कर लो बात... और अपने घर वालों को बता दो कि बार-बार फोन ना करें। सुबह से पचासों कॉल आ चुकी है।

श्लोका गुस्से से कहती है।

इतनी कॉल आई और आप ने एक बार भी नहीं बताया। जब की आप ने कहा था कि आप मेरे घर वालों से बात करा देंगी।

अनु को गुस्सा आ जाता है।

ज़्यादा गुस्सा दिखाने की ज़रूरत नहीं है। बात करा रहे हैं यही बहुत है।

वह गुस्से से कहती है।

आप शांत हों बबली। इसे मैं हैंडल कर लूंगी।

मैं शिवाय से ज़्यादा मिलूंगी ही नहीं कि उसे मुझ पर शक हो। मैं कल ही अपना सबसे मज़बूत वार कर देती हूं। जिससे उसे मुझ पर शक करने की कोई गुंजाइश ही ना रहे।

जारी है...

डोर धड़कन से बंधी भाग 40

डोर धड़कन से बंधी भाग 42





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